Dedicated to Our Forces…


वतन पर मर मिटने वालो आप हैं तो ख्वाहिशें हैं जिन्दा./
हमारी ज़िन्दगी में बस है आपस में एक-दूजे की निन्दा.//

अपनी-अपनी मुसीबतें देखें और सवाल करें आप पर./
कितने खुदगर्ज़ हो गए हैं और कभी न हों हम शर्मिंदा.//

गाँधी के देश में आज हम हिंसा-जाति-धर्म अपनाएं हैं./
अपनी-अपनी डफली है ऊँची उड़ाने जैसे हों परिंदा.//

सपनों से सुन्दर हो देश हमारा शहीदों ने तो सोचा था./
यहाँ आज अपनी चिंता देश की सोचें कुछ वीर चुनिंदा.//

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About Dilkash Shayari

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Posted on June 4, 2018, in Shayari Khumar -e- Ishq, Shayari-e-Watan. Bookmark the permalink. Leave a comment.

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