Category Archives: Nagama-e-Dil Shayari

Love Bye Chance.!!


 

अव्वल तो होता नहीं,
होता लव बाइ चान्स.! 
कितना हाँ-ना कर लो
होता इज़हार बाइ विश.!!

मानो ना मानो यारो,
सच कहता बाइ गॉड..!
अपनी कुछ उनकी सुनते,
लव बढ़ता बाइ टॉक.!!

महबूब घर जाना हो,
तो गली पकडो बाइ पास.!
कार-स्कूटर की छोड़ो,
डोली ले आओ बाइ हॉर्स.!!

वही वफ़ा पाक “सागर“,
जो पटाए ना बाइ गेम.!
लुट जाए पिट जाए पर,
रुसवा ना करे बाइ नेम.!!

वही वफ़ा पाक.jpg

Avval To Hota Nahin,

Hota Love Bye Chance.! 

Kitna Haan-Na Karlo,

Hota Izhaar By Wish.!!

Mano Na Mano Yaaro,

Sach Kehta Bye God..!

Apni Kuch Unki Sunte,

Love Badhta Bye Talk.!!

Mehboob Ghar Jana Ho,

To Gali Pakado Bye Pas.!

Car-Scooter Ki Chodo,

Doli Le Aao Bye Horse.!!

Wahi Wafa Pak”Sagar“,

Jo Pataye Na Bye Game.!

Lut Jaaye Pit Jaaye Par,

Ruswa Na Kare Bye Name.!!

Dec 9, 2015 6:25 PM

Dedicated to Daughter of India…


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एक झटके में मिटा दी,
मेरी हस्ती.!
खुशियों से बस्ती थी,
मेरी बस्ती.!!
मां की थी लाडली पापा,
की दुलारी.!
मशहूर थी घर में,
मेरी मस्ती.!!
ख्वाहिशों की कमी ना थी,
ज़िन्दगी में.!
बाबुल के आँगन से डोली,
मेरी सजती.!!
हवस की पुजारियों ने,
करी मनकी.!
दरिंदों की नज़र ज़िन्दगी,
मेरी सस्ती.!!
इक अबला की आज़ादी क्या,
गुनाह है.!
हिम्मत दिखाई लड़ी खूब,
मेरी गलती.!!
ना रही मलाल नहीं मुझको,
मेरे प्यारो.!
इक दिन जरूर मिसाल बनेगी,
मेरी हस्ती.!!

 

Happy Labor Day…


कितनी बड़ी विडंबना है जो मजदूर हमें अच्छे-से-अच्छा जीवन यापन करने की सुख-सुविधाएं देता है,
हम मात्र एक दिन किताबों-दफ्तरों में या सड़कों पर एक रैली निकाल अपना फर्ज पूरा समझते हैं?
अर्ज़ किया है:-

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औरों का बनाता हूँ,
किन्तु खुद ही बेघर रह जाता हूँ.!
सर्दी-गर्मी-बरसात,
हर मौसम आसमाँ तले बीतता हूँ.!!
मैं मजदूर हूँ यारो,
बस एक दिन याद किया जाता हूँ…
इक आवाज़ देने पर,
जहाँ-जैसे रहूं दौड़ा चला आता हूँ.!
चंद रूपए ले कर,
नामुंमकिन को मुमकिन करता हूँ.!!
मैं मजदूर हूँ यारो,
बस एक दिन याद किया जाता हूँ…
ना रुकता ना थकता,
इंसानों में जैसे एक मशीन जैसा हूँ.!
गौर से देखो यारो,
मैं भी ज़िंदा इंसान आप जैसा हूँ.!!
मैं मजदूर हूँ यारो,
बस एक दिन याद किया जाता हूँ…
सदियों का फ़साना,
ठोकर खा फिर ठोकर खता हूँ.!
मुफ्लीज हूँ”सागर“,
तभी चंद-सिक्कों से तौला जाता हूँ.!!
मैं मजदूर हूँ यारो,
बस एक दिन याद किया जाता हूँ…

Dushman Se Kaho Dosti Na Kare


     दुश्मन से कहो दोस्ती ना करे,
     अब तो दोस्त ही ब्डा दुश्मन है,
     जो हाथ उठा करते थे दुआ को,
     उन  हाथो  मे अब तो खंज़र है,
     दुश्मन से कहो दोस्ती ना करे,,,,,,,

     वो  ज़माना  है  अब  गुज़र  गया,
     वफ़ा मे जान-ए-जिग्गर देने का,
     आज  दोस्त  बंन जो दगा दे सके,
     वही  है  दोस्ती  का हक़ अदा करे,
     दुश्मन से कहो दोस्ती ना करे,,,,,,,,

     गर  वफ़ा  करो  फिर  दिल से करो,
     दोस्ती  करो  तो  जान  देकर  करो,
     “सागर”तो वफ़ा को इबादत समझे,
     रब्ब  माने  और  सब से उलफत करे,
     दुश्मन से कहो दोस्ती ना करे,,,,,,,

tears.jpg

Dushman Se Kaho Dosti Na Kare,
Ab To Dost Hi Bda Dushman Hai,
Jo Haath Utha Karte The Dua Ko,
Un Haatho Me Abto Khanzar Hai, 

Dushman Se Kaho Dosti Na Kare,,,,,,,

Wo Zamana Hai Ab Guzar Gaya,
Wafa Me Jan-E-Jigger Dene Ka,
Aaj Dost Bann Jo Daga De Sake,
Wahi Hai Dosti Ka Haq Ada Kare, 

Dushman Se Kaho Dosti Na Kare,,,,,,,,

Gar Wafa Karo Phir Dil Se Karo,
Dosti Karo To Jaan De Kar Karo,
SagarTo Wafa Ko Ibadat Smjhe,
Rabb Mane Aur Sabse Ulfat Kare,
Dushman Se Kaho Dosti Na Kare,,,,,,,

03/10/2013 6:33 PM

From The Voice Of Heart…


कुछ लोग भावनाओं की कद्दर नहीं करते शायद खुद में जीना पसंद करते होंगे?
या उनकी कोई और वजह हो सकती है!
पर यहाँ ये मानना है जिस दिल में ज़ज़्बात नहीं वो दिल दिल नहीं!!
ठीक वैसे ही है जैसे की कोई कल-पुर्जों से सज़ा जिस्म??

ज़िंदा लाश बनने से बेहतर है ज़िंदा दिल बनिये्अर किसी को अपनी और से इज़्ज़त
मान-सम्मान और प्रेम दीजिए बाकी मालिक पर छोड़ दीजिए!
वही उचित-उनुचित का फ़ैसला करेगा,आख़िर उसी के बंदे जो हैं?
उसकी रज़ा के बिना पत्ता भी नहीं हिल सकता फिर हमारी क्या बिसात?

ज़िंदगी चार दिनों का मेला है,
हंस या रोकर गुज़ार दे.!

ना इल्ज़ाम दे किसी को यार,
ज़िंदगी जी कर गुज़ार दे.!!

Zindagi Char Dino Ka Mela Hai,

Hans Ya Rokar Guzaar De.!

Naa  Ilzaam  De  Kisi  Ko  Yaar,

Zindagi Jee Kar Guzaar De.!!

गुज़रे वक़्त में हम में से काइयों ने बहुत कुछ खोया होगा?
कुछ ऐसा जो वापिस आ सकता है और कुछ ऐसा जो कभी वापिस ना आएगा?
पर किया भी जा सकता है?

मालिक की रज़ा मालिक ही जाने!

क्यूँ सौच-सौच ज़िंदगी गुज़ारें,
क्या खोया क्या पाया.!
मालिक जो भी करता ठीक करता,
सौचो कम ही खोया.!!

Kyun Soch-Soch Zindagi Guzarein,

Kya Khoya Kya Paya.!

Maalik   Jo   Bhi   Karta   Theek   Karta,

Socho Kam Hi Khoya.!!

प्यार बाँटिए प्यार ही मिलेगा बबूल बोने से अमृत प्राप्ति की कल्पना करना बेमानी है?

जैसा हूँ वैसा कहता यारो,
दिल में कुछ काम और की आदत नहीं.!
माँ ने कहा था एक-सा रहना,
बात माँ की ना मानने की ताक़त नहीं.!!

दिल अपना निकाल रखा है,
मानों या ना मानो कोई शिक़ायत नहीं.!
बहुत जी चुके यूँही रह यारो,
अब खुद को बदलने की हरारत नहीं.!!

जो भी दिया रब्ब ने ठीक,
उसके यहाँ अलग-अलग रियायत नहीं.!
नेक काम खातिर बेशॅक मरूं,
पापा कहते थे इससे बड़ी शहादत नहीं.!!

माता पिता में रब्ब बस्ता है,
रब्ब में माता-पिता !!

Jaisa Hun Waisa Kehta Yaaro,

Dil Mein Kuch Kam Aur Ki Aadat Nahin.!

Maan Ne Kaha Tha Ek-Sa Rahna,

Baat Maan Ki Na Manne Ki Takat Nahin.!!

Dil Apna Nikaal Rakha Hai,

Mano Ya Na Mano Koyi Shiqayat Nahin.!

Bahut Ji Chuke Yunhi Rah Yaaro,

Ab Khud Ko Badalne Ki Harart Nahin.!!

Jo Bhi Diya Rabb Ne Theek,

Uske Yahan Alag-Alag Riyayat Nahin.!

Nek Kam Khatir Beshq Marun,

Papa Kahte The Isse Badi Shahadat Nahin.!! 

जब भी दिल-दिमाग़ की सुनेंगे कुछ खूबसूरत-लाजवाब ही सुनने-बोलने-लिखने
को मिलेगा!!यक़ीन मानिए

दिल-दिमाग़ बड़ी खूबसूरत चीज़ है

मुहब्बत भी करना सिखाता है और लड़ना-खून-ख़राबा करना भी
फ़ैसला आपको करना है

क्या अच्छा है और क्या बुरा?

What’s Your Opinion…

दुल्हन बन घर आ जाओ…


दुल्हन बन घर आ जाओ.!
तन्हा रातों में तड़पाते हो.!!
दुल्हन बन घर आ जाओ…

जब शाम को सूरत ढलता है,
आकाश पर सितारे निकलते हैं,
चंदा के दर्शन होते हैं,
तुम अक्सर मुझको याद आते हो…
दुल्हन बन घर आ जाओ…

छन्न-छन्न करते झरने जो बहते,
गीत वफ़ा के जैसे हों गाते,
पैरों की पायल छनकाते हुए,
लगता है दिल को तुम आए हो…
दुल्हन बन घर आ जाओ…

Dulhan   Ban   Ghar  Aa   Jaao.!

Tanha Raton Mein Tadpate Ho.!!

Dulhan Ban Ghar Aa Jaao…

Jab shaam ko Surat dhalta hai,

Aakash par  Sitare nikalte hain,

Chanda ke darshan hote hain,

Tum aksar Mujhko yaad aate ho...

Dulhan Ban Ghar Aa Jaao…

Chann-Chann karte Jharne jo bahte,

Geet Wafa ke jaise hon gaate,

Pairon ki Payal Chankate Huye,

Lagta Hai Dil ko Tum aaye ho…

Dulhan Ban Ghar Aa Jaao…

First Morning…Happy New Year 2017.


नये साल की पहली सुबहा,
कितनी सुहानी कितनी प्यारी.!

अखियों को सकूँ दे रही,
नयी  उमंगे  नयी  शुख्यारी.!!

हर सुबहा ऐसे ही गुज़रे,
ना हो झाड़ा ना .मनमुटयारी!

हंसते खेलते रहें सब,
यही मालिक से दुआ हानारी.!!

Wish You Happy New Year First Morning…

Naye Saal Ki Pahali Subaha,

Kitni  Suhaani  Kitni  Pyaari.!

Akhiyon Ko Sakun De Rahi,

Nyi Umange Nyi Sukhyari.!!

Har Subaha Aise Hi Guzare,

Na Ho Jhada Na Manmutyaari.!

Hanste Khelte Rahein Sab,

Yahi Maalik Se Dua Hanaari.!!

Incomplete Union …


इक  शर्मा  को  एक शरमानी पसंद आ गयी.!
अज़ी फिर क्या था मुहब्बत पर आन आ गयी.!!

शरमानी भी कमतर नहीं खूब छकाती,
शर्मा की सोशियल साइट पे मैसेज छोड़ जाती.!

तड़पे तरसें भाड़ में जायें उनकी बला से,
नैनों का जादू चला वो अपना काम कर गयी.!!

शर्मा जी कम ना थे जा पहुँचे इलाहबाद,
शहर की गलियों में चक्कर लगाने लगे.!

हर किसी से पूछते उसका पता और खोज-खबर,
कुड़ी जो आम थी शहर में मशहूर हो गयी.!!

दो जोड़ी जुतो की शर्मा जी लेकर आए,
एक जोड़ी टूटी शरमानी की खोज में.!

ग़लती से जा पहुँचे वर्मानी के घर को,
उनका कुत्ता पीछे लगा दूजी जोड़ी भी गयी.!!

शरमानी भी कम नहीं रोज़ प्रोफाइल पिक बदले,
जले पर नमक डाले सज-धज पोज़ बनाए.!

अब तक सुना’सागर‘इश्क़ निकम्मा करता,
शर्मा-शरमानी की मुहब्बत से हक़ीक़त हो गयी.!!

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Ik Sharma Ko Ek Sharmani Pasand Aa Gayi.!

Azi Phir Kya Tha Muhabbat Par Aan Aa Gayi.!!

Sharmani Bhi Kamtar Nahin Khub Chakati,

Sharma Ki Social Site Pe Massage Chod Jaati.!

Tadpein Tarsein Bhad Mein Jayein Unki Bala Se,

Nainon Ka Jadu Chala Wo Apna Kaam Kar Gayi.!!

Sharma Ji Kam Na The Ja Pahunche Allahabad,

Shahar Ki Galiyon Mein Chakkar Lagane Lage.!

Har Kisi Se Poochate Uska Pata Aur Khoj-Khabar,

Kudi Jo Aam Thi Shahar Mein Mashhoor Ho Gayi.!!

If U Wish,Apply For….Few Days Remain.!!


ज़िंदगी में गर हँसी-खुशी की बातें,रोमान्स,अड्वेंचर ना हो तो ज़िंदगी नीरस-सी लगने लगती है!
किसी ने खूब कहा है:
ज़िंदगी ज़िंदा दिली का नाम है,
मुर्दा दिल क्या खाक जिया करते हैं
अर्ज़ किया है:-

3barra

पचास से ऊपर कमाता हूँ,
रोज़ लड़ने जाता हूँ.!
कोई डॉन नहीं वक़ील हूँ,
मेहनत से कमाता हूँ.!!

ज़रूरत है इक श्रीमती की,
म्रदुभाषी नयन कटोरी भी.!
पंजाबी जाने ब्राहमिन हो,
मॉडर्न हो पर हिन्दुस्तानी भी.!!

जीन्स पहने कोई फ़र्क नहीं,
सर पर ओडनी ज़रूर हो.!
लंबी-पतली छेल-छबिली,
पर थोड़े स ज़्यादा मगरूर हो.!!

पंजाबी ब्राहमिन की चाह ज़रूर,
पर जाति-धर्म की बदिश नहीं.!
बंगाली-मद्रासी फ़िरोज़ाबादी-नेपाली,
पर लड़की बड़े दिलवाली हो.!!

बाइस से ऊपर हो चाहे,
पर तीस से कम हो.!
हुंतर वाली ना हो कोई,
स्कूल की टीचर हो.!!

अपना बनाने में क्या जाता,
आज़माने में क्या जाता.!
माथे पर थोड़े लिखा,
बिका माल वापिस नहीं होगा.!!

खवाबों से प्यारी हो,
दुनियाँ से भी नायरी हो.!
लाखों में एक रहे जो,
सागर‘की दुल्हनिया हो.!!

Pachaas Se Oopar Kamata Hun,

Roz Ladne Jaata Hun.!

Koyi Don Nahin Waqeel Hun,

Mehnat Se Kamata Hun.!!

Jarurat Hai Ik Shrimati Ki,

Mrdubhashi Nayan Katori Bhi.!

Punjabi Jaane Brahmin Ho,

Modern Ho Par Hindustani Bhi.!!

Jeans Pahane Koyi Fark Nahin,

Sar Par Odani Jarur Ho.!

Lambi-Patali Chel-Chabili,

Par Thode S Jyada Magrur Ho.!!

Punjabi Brahmin Ki Chah Jarur,

Par Jaati-Dharm Ki Badish Nahin.!

Bangali-Madrasi Firozabadi-Nepali,

Par Ladki Bade Dilwaali Ho.!!

Baais Se Oopar Ho Chahe,

Par Tees Se Kam Ho.!

Huntar Wali Na Ho Koyi,

School Ki Teacher Ho.!!

Apna Banane Mein Kya Jaata,

Aajmane Mein Kya Jaata.!

Mathe Par Thode Likha,

Bika Maal Wapis Nahin Hoga.!!

Khawabon Se Pyaari Ho,

Duniyan Se Bhi Nayari Ho.!

Lakhon Mein Ek Rahe Jo,

Sagar‘Ki Dulhaniya Ho.!!

Only For You…(Dedicated)


इक कमसिन नादान अठारहा की उमर में हसीन हुस्न क्या ग़ज़ब ढाता है या तो वो रब्ब जानता है या झेलने वाला ! और वो भी जब रात-रात भर किसी को जगा कर रखे??
बहुत खूब हो जान-ए-बहार नाचीज़ शायर’सागर‘का ख्वाब हो !
अर्ज़ है:

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किस-किस को सुनाऊं हाल-ए-दिल अपना.!
बयान  कर  रहा “सागर” नज़राना  उस  का.!!

ये उलझे हुए गेसू,
ये मदहभरी आँखें.!
दीवाना बनती हैं,
तुनहारी ये बातें.!!
किस-किस को…

इन गालों की लाली,
और नशीले होंठ.!
भाटी है दिल को,
तुनहारी ये आदतें.!!
किस-किस को…

सुरहीदार है गर्दन,
उस पर कटीला बदन.!
ख्वाब देखती हैं,
तुम्हार्रे ये रातें.!!
किस-किस को…

बाइस की है कमर,
अठरहान की जवान उमर.!
बेक़रार करती’सागर‘को,
तुम्हारी ये मुलाक़ातें.!!
किस-किस को…

Kis- Kis  Ko  Sunaun Haal – e – Dil Apna.!

Bayan Kar Raha “Sagar Nazarana  Us Ka.!!

Ye  Uljhe Huye Gesu,

Ye Madahbhari Aankhein.!

Deewana Banati Hain,

Tunhaari Ye Baatein.!!

Kis-Kis Ko…

In Gaalon Ki Laali,

Aur Nashile Honth.!

Bhaati Hai Dil Ko,

Tunhaari Ye Aadtein.!!

Kis-Kis Ko…

Surahidaar Hai Gardan,

Us Par Katila Badan.!

Khwaab Dekhati Hain,

Tumhaarre Ye Raatein.!!

Kis-Kis Ko…

Baais Ki Hai Kamar,

Atharaha Ki Jawan Umar.!

Beqrar Karti’Sagar‘Ko,

Tumhaari Ye Mulaqaatein.!!

Kis-Kis Ko…

 

Dec 7, 2016 9:30 AM

Your Love Is My Life…(Nazm)


तेरी चाहतें मेरी ज़िंदगी,
मेरी ज़िंदगी तेरी साँसें.!
तेरे बिना मैं हूँ अधूरा,
मेरे बिना नहीं तू पूरी.!!

दोनों जहाँ तेरे नाम कर,
वहाँ दुनियाँ बसा लून.!
तेरी राहों में पलकें बिछा,
तुझको तुझसे चुरा लून.!!

ज़ामने में कोई तुझसा नहीं,
तेरे सामने कोई नहीं है.!
मेरी आँखों से देख खुदको,
तेरे जैसा कोई नहीं है.!!

सागर’की यारा है तमन्ना,
हर जन्म तेरा साथ हो.!
तुझको मिलूं मैं मुझको तू,
ऐसा ही प्यारा साथ हो.!!

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Teri Chahatein Meri Zindagi,
Meri Zindagi Teri Sansein.!
Tere Bina Main Adhura Hun,
Mere Bina Nahin Tu Poori.!!

Dono Jahaan Tere Naam Kar,
Wahaan Duniyan Basa Loon.!
Teri Rahon Mein Palkein Bicha,
Tujhko Tujhse Chura Loon.!!

Zamane Mein Koyi Tujhsa Nahin,
Tere Samnae Koyi Nahin Hai.!
Meri Aankhon Se Dekh Khudko,
Tere  Jaisa  Koyi  Nahin  Hai.!!

Sagar‘Ki Yaara Hai Tamnna,
Har Janm Tera Saath Ho.!
Tujhko Milun Main Mujhko Tu,
Aisa Hi Pyaara Saath Ho.!!

On Some Once Request…


Wow😍. Pls write on a girl who wants her boy back. See ! She doesn’t wants him. All she want the time back when he was after him. When his eyes were on her. When he badly wanted her. But she said no. Now she wants him. But he said no.

Pls pls write on this😊its a humble request. I love reading shayri💗

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सौचा था अब किसी पर कभी कुछ ना लिखेंगे पर किसी के मासूम दिल को
तोड़ने की हिम्मत जुटा ना पाए!
पापा कहा करते थे कोई अगर आपसे कुछ कहता/माँगता है इसका मतलब
वो आप पर बहुत यक़ीन करता है उसको आप से बड़ी उम्मीद है उसे निराश
नहीं करना चाहिए
शायर का दिल बड़ा कोमल,जवान,हुस्न की तारीफ करने वाला,देश प्रेमी और
सामाजिक बुराईओं के खिलाफ आवाज़ बुलंद करने वाला होया है!
किसी की Request पर ये नज़्म लिखी है अच्छी है या बुरी इसका फ़ैसला आप
पर है!
अर्ज़ है:-

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जब वो हमारे पीछे आते थे,
हम ना – ना बहुत करते थे.!

अपने  हुस्न  पर  था  गुमान  हमें,
हर पल उनको तरसाया करते थे.!!

सुबहा होते ही घर के सामने होते,
हम मुँह फेर खिड़की बंद कर लेते.!

नादान थे पागल थे पता नहीं’सागर‘,
पर उनको ना-उम्मीद बहुत करते थे.!!

वक़्त गुज़रा सिलसिला यूँही चलता रहा,
उनकी हर शय पर मात उनको देते थे.!

अपनी  यही  कम  नसीबी  थी ‘सागर‘,
हम  मुहब्बत  को  रुसवा  करते  थे.!!

हर सच्ची दुआ क़बूल होती इक दिन,
सखियों से अक्सर हम सुना करते थे.!

उनकी शिद्दत पर प्यार आने लगा था,
ना मुँह पे होती पर इंतज़ार करते थे.!!

हर बात की एक हद होती अब जाना,
दिल्लगी  क्या  होती  दिल  लगा जाना.!

अब पछताए क्या होत चिड़िया चुग गयी खेत,
औरों के दीवाने हुए कल तक आगे-पीछे थे.!!

सच कहती यारा’सागर‘ऐसा कभी ना करना,
किसी  की  मुहब्बत पर शक कभी ना करना.!

किरदार बदल जाते फ़लसफ़ान वैसे ही रहते,
उनपर  प्यार  जब – तक  आया  वो  बेगाने थे.!!

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Jab Wo Hamare Piche Aate The,

Hum Na-Na Bahut Karte The.!

Apne Husn Par Tha Guma Hamein,

Har Pal Unko Tarsaya Karte The.!!

Subaha Hote Hi Ghar Samane Hote,

Hum Munh Pher Khidki Band Kar Lete.!

Nadan The Pagal The Pata Nahin’Sagar‘,

Par Unko Naummeed Bahut Karte The.!!

Waqt Guzara Aur Silsila Yunhi Chalta Raha,

Unki Har Shay Pa Maat Unko Dete The.!

Apni Yahi Kam Naseebi Thi’Sagar‘,

Hum Muhabbat Ko Ruswa Kate The.!!

Har Sachi Dua Qabool Hoti Ik Din,

Sakhiyon Se Aksar Hum Suna Karte The.!

Unki Shiddat Par Pyaar Aane Laga Tha,

Na Munh Pe Hoti Intzar Unka Karte The.!!

Har Baat Ki Ek Had Hoti Ab Jaana,

Dil Ki Lagi Kya Hoti Dil Laga Jaana.!

Ab Pachchtaye Kya Hot Chidiya Chug Gayi Khet,

Auron Ke Diwane Huye Kal Tak Aage-Piche The.!!

Sach Kehti Yaara’Sagar‘Aisa Kabhi Na Karna,

Kisi Ki Muhabbat Par Shak Kabhi Na Karna.!

Kirdar Badal Jaate Falsfan Waise Hi Rahte,

Unpar Pyaar Jab-Tak Aaya Wo Begane The.!!

Her Love.!!Beautiful Tragedy…Sweet Pain…


उन से प्यार क्या हुआ था ज़िंदगी में बस मज़ा ही मज़ा था,
ना खाने की चिंता ना सोने की फिक्कर थी!
ज़िंदगी जैसे पंछी समान आसमान पर उड़ रही थी!
अर्ज़ है:-

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उन संग मुहब्बत इक खूबसूरत हादसा था.!
घायल  हुए  दिल  का  दर्द  बड़ा  सुहाना था.!!

इठला उन का स्कूटर पर बैठना,
कमर में हाथ डाल के गुदगुदाना,
उसके बाद तो बस वाक़या ही वाक़या था.!!

खूब थे दिन खूब थी वो शामें,
ज़मीन पर थे आसमान की बातें,
आँखों  में  अपने  बस नशा ही नशा था.!!

खाते थे वो साथ जीने की कस्में,
हर जन्म साथ निभाने की रस्में,
वक़्त आया  जब ‘सागर‘ तन्हा – तन्हा था.!!

19

Un  Sang  Muhabbat  Ik  Khubsurat  Hadsa Tha.!

Ghayal  Hue  DIL  Ka  Dard  Bada  Suhaana Tha.!!

Ithalaa  Un Ka Sacootar Par Baithna,

Kamar Mein Hath Dal Ke Gudgudana,

Uske  Baad  To  Bas  Wakaya  Hi  Wakaya Tha.!!

Khub The Din Khub Thi Wo Shamein,

Zameen Par The Aasmaan Ki Baatein,

Aankhon Mein Apne Bas Nasha Hi Nasha Tha.!!

Khate The Wo Saath Jine Ki Kasmein,

Har Janm Sath Nibhaane Ki Rasmein,

Waqt  Aayaa  J ab ‘Sagar‘ Tanha – Tanha Tha.!!

 

Brother’s Sister-in-law. !!


एक ऐसा एहसास है जिसे हर कोई महसूस करना चाहता है,
भाभी का देवर हो या भाभी की बहना हो
हर किसी की यही दुआ होती!
कुछ रिश्ते ही ऐसे होते हैं जिनके बिना ज़िंदगी बेरंग लगती?
भाभी की बहना और जीजा के भाई…
दोनो की केमॅस्टेरी बहुत दिल फरेब और हसीन होती है!
जिसका आनद वही जानता जिसने महसूस किया हो…
अर्ज़ है:-

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जब  से  देखा  है  भाभी  की बहना को,
दिल बेक़रार हो गया.!

आदमी था यारो बड़े काम का ‘सागर‘,
अब बेक़ार हो गया.!!

जब  आती  घर  में  रहने  तंग  करती,
चलती ठुमक-ठुमक.!

करती  नखरे  सौ – सौ  पर  क्या करें,
दिल बेताब हो गया.!!

जब देखो शिक़ायत करती है भाभी से,
मास्टरनी हो जैसे कोई.!

क्या करूँ दिल दा मामला  प्यार उस से,
जो बेशुमार हो गया.!!

रब्ब   से   यही  दुआ  वही  बने  घरवाली,
नहीं ऐसी कोई दिलवली.!

उस  की  सुध  में  ऐसा  खोया  सारे शहर,
बंदा बदनाम हो गया.!!

खाने  की  बड़ी  चटोरी  माँगें  रखे  बहुत,
हर बात मनवाए अपनी.!

भाभी कहाँ पीछे रहती घर का सारा काम,
अपने नाम हो गया.!!

सच  कहता  हूँ  यारो  आँख  लड़ाना  पर,
भाभी बहाना ना संग.!

फिर ना कहना ना समझाया था’सागर‘ने,
मैं परेशन हो गया.!!

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Jab Se Dekha Hai Bhabhi Ki Behana Ko,

Dil Beqarar Ho Gaya.!

Aadmi Tha Yaaro Bade Kaam Ka‘Sagar‘,

Ab Beqaar Ho Gaya.!!

Jab Aati Ghar Mein Rahane Tang Karti,

Chalti Thumak-Thumak.!

Karti Nakhare Sau-Sau Par Kya Karein,

Dil Betaab Ho Gaya.!!

Jab  Dekho  Siqaayat  Karti  Bhabhi  Se,

Mastarni Ho Jaise Koyi.!

Kya Karun Dil Da Mamla Hai Pyaar Usse,

Jo Beshumar Ho Gaya.!!

Rabb Se Yahi Dua Wahi Bane Gharwaali,

Nahin Aisi Koyi Dilwali.!

Us Ki Sudh Mein Aisa Khoya Sare Shahar,

Banda Badnaam Ho Gaya.!!

Khane Ki Chatori Mangein Rakhe Bahut,

Har Baat Manwaye Apni.!

Bhabhi Kahan Piche Rahti Ghar Ka Sara Kaam,

Apne Naam Ho Gaya.!!

Sach Kehta Hun Yaaro Aankh Ladana Par,

Bhabhi Behana Na Sang.!

Phir Na Kehna Na Samjhaya Tha’Sagar‘Ne,

Main Pareshan Ho Gaya.!!

Everyone’s Master is One…


ना हिंदू हूँ ना मुस्लिम,
ना सिख ना ईसाई.!

तेरा ही खून हूँ मैं,
तेरा ही हूँ भाई.!!

हर वक़्त ने छला,
दिया इक मज़हब का नाम.!

इंसान हूँ यारो बस,
किस बात की है फिर लड़ाई.!!

भूखा हूँ प्यासा हूँ,
सोने को नहीं बिस्तर.!

थोड़ी-सी जगहा दे दो,
देखो मिलती कितनी बड़ाई.!!

जात-पात और क़ौम,
हमनें ही है बनाई.!

मलिक ने तो सब में,
एक-सी रूह है बसाई.!!

दुनियाँ की छोड़’सागर‘,
अपने दिल की सुन.!

एक मलिक है और,
एक तस्वीर आँखों में सजाई.!!

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Na Hindu Hun Na Muslim,

Na Sikh Na Isai.!

Tera Hi Khoon Hum Main,

Tera Hi Hun Bhai.!!

Har Waqt Ne Chala,

Diya Ik Majhab Ka Naam.!

Insaan Hun Yaaro Bas,

Kis Baat Ki Hai Phir Ladai.!!

Bhukha Hun Pyaasa Hun,

Sone Ko Nahin Bistar.!

Thodi-Si Jagaha De Do,

Dekho Milti Kitni Badai.!!

Jaat-Paat Aur Kaum,

Humnein Hi Hai Banai.!

Malik Ne To Sab Mein,

Ek-Si Ruh Hai Basai.!!

Duniyan ki Chod’Sagar‘,

Apne Dil Ki Sun.!

Ek Malik Hai Aur,

Ek Tasweer Aankhon Mein Sajai.!!

 

वो जो लड़का है…


वो जो लड़का है सुबहा-शाम छेड़ता है.!
जब जाती छत  पर घूर – घूर  तकता है.!!
वो जो लड़का है…
आते-जाते राहा में खड़ा रहता,
सखियों से हाल मेरा पूछता है,
बेशर्म-बेहया कम्बख़्त कहीं का,
सारे ज़हान में रुसवा करता है,
वो जो लड़का है…
ना धूप देखे और ना ही छाँव,
गर्मी हो या सर्दी चाहे बारिश,
रिझाने के कई नुस्खे अपनाता,
गली के चक्कर सौ लगाता है,
वो जो लड़का है…
जाने क्या दिल को होने लगा है,
उसका चक्कर लगाना भाने लगा,
इंतज़ार उसका रहता है दिल को,
मुझे भी अब पसंद आने लगा है,
वो जो लड़का है…

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तन्हा-अकेली जो घर से निकलती हूँ…


तन्हा-अकेली जो घर से निकलती हूँ,
रब्ब  की  कसम  तब  बड़ा  डरती हूँ,
कहीं कोई रोक लेगा तो क्या करुँगी,
बांह  थाम  लेगा  तो  किस से  कहूँगी,
फिर  सौचती  जो  होगा देखा जायेगा,
डर  कर  घर  कब  तक  बैठा जायेगा,,,

 

सुना है आज  कल  बराबरी का ज़माना,
लड़कियों को कंधे  से  कन्धा मिलाना है,
बढ़ – चढ़  हर  काम  में  नाम  कामना है,
अब नारी-शक्ति का एहसास कराना है,
कहने-सुनने  में कितना अच्छा लगता है,
पर  अभी  तो  सपनों  से  बहार  आना है,,,

 

उम्मीद  पर  दुनियां  टिकी  कहे ‘सागर‘,
बहारों  ने  कभी  तो   चमन  खिलाना  है,
छुप – छुप  चलेगी  न कभी कोई अबला,
देखना  एक  दिन  बनेगी और भी सबला,
न  होगा  अकेले  कहीं  निकलने  का डर,
सबके  दिल  होगा जब इज़्ज़त देने का घर,,,

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Look at That July is Going…


कुछ खट्टी-कुछ मीठी यादें लिए,
वो देखो जुलाई जा रहा है.!
नये फसानों को खुद में लिए,
लीजिए अब अगस्त आ रहा है.!!
वो देखो जुलाई जा रहा है…

 

गुज़रा वक़्त वापिस आता नहीं,
वक़्त की नज़ाक़त ज़रा समझजिये .!
हर पल को हँसी-खुशी जियें,
यूँ  ही  नौक-झोंक  में ना उलझीए.!!
वो देखो जुलाई जा रहा है…

 

कभी मिलना मिलाना कभी जुदाई,
जवानी में बस एक यही है बुराई.!
किस को सुनायें हाल-ए-दिल अपना,
यही सौच प्यार की हो ना रुसवाई.!!
वो देखो जुलाई जा रहा है…

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Kuch Khatti-Kuch Mithi Yadein Liye,

Wo Dekho July Ja Raha Hai.!

Naye Fasanon Ko Khud Mein Liye,

Lijiye Ab August Aa Raha Hai.!!

Wo Dekho July Ja Raha Hai…

 

Guzara Waqt Wapis Aata Nahin,

Waqt  Kee  Nazaqat  Zara Samjhjiye.!

Har Pal Ko Hansi-Khushi Jiyein,

Yunhi Nauk-Jhonk Mein Na Uljhiye.!! 

Wo Dekho July Ja Raha Hai…

 

Kabhi Milna Milaana Kabhi Judai,

Jawaani Mein Bas Ek Yahi Hai Buraai.!

Kis Ko Sunayein Haal-e-Dil Apna,

Yahi Sauch Pyaar Ki aHo Naa Ruswaai.!!

Wo Dekho July Ja Raha Hai…

ज़िंदगी को लुत्फ़ उठाने दो…


बारिश का मौसम हो और वो आ जायें तो बात ही कुछ और हो जाती है!
दिल कहता है वक़्त रुक जाए और वो ना जायें बस बतियाते रहें!
ऐसे में बातें भी कम्बख़त ख़त्म होने का नाम ही नहीं लेती!
इस ख़ास लम्हे के लिए एक गीत बन पड़ा है!
अर्ज़ है:-ssemras2

वक़्त   को   ठहर   जाने  दो,
ज़िंदगी को लुत्फ़ उठाने दो.!

आए हो तो रुक जाओ अभी,
जी  भर  ज़रा  देख  लेने दो.!!

अभी-अभी तो आए हो,
कहते हो हम  जायेंगे.!
दिल  अभी   भरा   नहीं,
बातें कई रह  जायेंगी.!!
अभी ना जाओ दो पल रुक जाओ जी…

आप के सिवा और नहीं,
दिल के करीब यहाँ कोई.!
आप   से    बेहतर   नहीं,
दूज़ा इस  ज़हान में कोई.!!
बात मानो बातें कई हैं रुक जाओ जी… 

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Waqt Ko Thehar Jane Do,

Zindagi Ko Lutf Uthaane Do.!

Aaye Ho To Ruk Jaao Abhi,

Jee Bhar Zara Dekh Lene Do.!!

Abhi-Abhi To Aaye Ho,

Kehte Ho Hum Jaayeinge.!

Dil Abhi Bhara Nahin,

Baatein Kai Reh Jaayeingi.!!

Abhi Na Jaao Do Pal Ruk Jaao Ji…

Aap Ke Siwa Aur Nahin,

Dil Ke Kareeb Yahan Koyi.!

Aap Se Behtar Nahin,

Duza Is Zahaan Mein Koyi.!!

Baat Mano Baatein Kai Hain Ruk Jaao Ji… 

 

हर औरत में माँ होती है.!!


आज कल अख़बार,टीवी देखने का दिल नही करता,बहुत कम ऐसा होता है जब कोई जानूनी खबर देखने-सुनने को ना मिले?
रिश्तों का खून,यक़ीन का टूटना आम बात हो गयी है!और दर्द तो तब और भी बढ़ जाता है जब किसी अबला से संबधित खबर होती है?हम तरकी तो कर रहे हैं पर अपने संस्कारों की बलि चढ़ा कर?
हम जिसके लिए सारी दुनियाँ में विख्यात थे आज अपनी उन्हीं आदर्शों और मूल्यों की बलि चढ़ा रहे हैं!
अर्ज़ है:-

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बिस्तर की सलवटें,
तकिये की चरमराई हालत,
सब कुछ बयान करती है.!
एक कली के,
फूल बनने की दास्तान,
सब  को  दिखाई  देती  है.!!

यक़ीन किया होगा उसने,
यक़ीन की हद तक.!
मुहब्बत में बेवफ़ाई की,
गुंजाइश कहाँ होती है.!!

खुदा का ख़ौफ़ खा,
परवाने इतरा ना इतना.!
शम्मा की चाह में,
जलने में ही भलाई होती है.!!

दो रास्ते जाते ज़िंदगी के,
एक रहा चलना होता.!
बुराई में तौहमत तो,
अच्छाई शौहरत देती है.!!

दो पल खुशी खातिर”सागर“,
वो मिटा देता एक अबलका को.!
गौर से देखता तो,
हर औरत में माँ होती है.!!

 

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Bistar Ki Salwatein,

Takiye Ki Charmarai Halat,

Sab Kuch Bayan Karti Hai.!

Ek Kali Ke,

Phool Banne Ki Dastan,

Sab Ko Dikhaai Deti Hai.!!

 

Yaqeen Kiya Hoga Usne,

Yaqeen Ki Had Tak.!

Muhabbat Mein Bewafai Ki,

Gunjaish Kahan Hoti Hai.!!

 

Khuda Ka Khauf Kha,

Parwane Itra Na Itna.!

Shamma Ki Chaah Mein,

Jalne Mein Hi Bhalai Hoti Hai.!!

 

Do Raste Jaate Zindagi Ke,

Ek Raha Chalana Hota.!

Burai Mein Tauhmat To,

Achchai Shauhrat Deti Hai.!!

 

Do Pal Khushi Khatir”Sagar“,

Wo Mita Deta Ek Ablka Ko.!

Gaur Se Dekhta To,

Har Aurat Mein MaaN Hoti Hai.!!

 

चाँदनी मेरे बिन कुछ भी नहीं.!!


  तुझ को देखा तुझ को सराहाया,
  ये तो मेरी नज़रों की इनायत है.!

  वरना इस क़ाबिल कहाँ कोई चाहे,
  ये तो मेरी बस थोड़ी शराफ़त है.!!

  इतलाती है इतना मानो हूर परी,
  ये मेरी दीवानगी तेरी नज़ाकत है.!

  बात-बेबात कौसना और लड़ना,
  ये बता किस बात की शिक़ायत है.!!

  तू  चंदा  मैं  सूरज  मेरे  दम  से,
  ये जो  चाँदनी तेरी बनी क़यामत है.!!

  ख़ौफ़  खा  खुदा  का डर रब्ब से,
  ये ना भूल कुछ दिन बाद अमावस है.!!

तुझ को देखा तुझ को सराहाया,

Tujh Ko Dekha Tujh Ko Sarahaya,

Ye To Meri Nazaron Ki Inayat Hai.!

Warna Is Qabil Kahan Koyi Chahe,

Ye To Meri Bas Thodi Sharafat Hai.!!

Ithalati Hai Itna Mano Hoor Pari,

Ye Meri Deewangi Teri Nazakat Hai.!

Baat-Bebaat Kausna Aur Ladana,

Ye Bata Kis Baat Ki Shiqaayat Hai.!! 

Tu Chanda Main Suraj Mere DumSe,

Ye Jo Chandni Teri Bani Qayamat Hai.!!

Khauf Kha Khuda Ka Dar Rabb Se,

Ye Na Bhul Kuch Din Bad Amavas Hai.!!

Kudi Sohni Lahore Di…


 

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Ganne di Glori Pinjor di,

Kudi wekhi Sohni Lahore di,

Lagdi qudart di hoor jyi,

Dil legi Kudi Sohni Lahore di,,,,,

 

Hans di tey Dil dol-da,

Kaleja dhak-dhak wolda,

Mathe tey Latan mastniyan,

Galan tey haya di laliyan,

Akhan tu lagdi O Dil Chorni,

Kudi wekhi Sohni Lahore di,,,,,

 

Fursat ich wnaya Rubb-ne,

Hr Nqsh laya kithun Lod ke,

Watt mathey tey Us de wi,

Pye honge Inu Ithe pehj ke,

Jungle di lagdi koyi Morni,

Dil legi Kudi Sohni Lahore di,,,,,

Mar 30, 2016 8:33 PM

तू ही मेरी आरज़ू.!!


  उन लोगों के लिए ये गीत लिखा है जो किसी से बहुत प्यार करते हैं और मौके पर इज़हार नहीं कर पाते?उनके दिल के अपनी मुहब्बत के लिए पाक-साफ ख़याल व्यक्त करने कोशिश है !
अर्ज़ है:-

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   तू ही है मेरी ज़िंदगी,
   तू ही मेरी जान.!
   तू है तो खवाब हैं,
   तू ही मेरी सांस.!!
   तू ही मेरी जान….

   तेरे सिवा कोई नहीं इस दिल का तलबगार,
   तुझ  संग   सब  रंग  हैं  तू  है  तो  है  बाहर,
   तू ही है मेरी दिल्लगी,
   तू ही मेरी आस…..

   खता बकश दे  मेरी  पहली बार किया प्यार,
   बेपनाहा मुहब्बत की किया किसी पे एतबार, 
   तू ही मेरी हर आरज़ू,
   तू ही मेरी खास…..

तू ही है मेरी ज़िंदगी,.jpg

Tu Hi Hai Meri Zindagi,

Tu Hi Meri Jaan.!

Tu Hai To Khawab Hain,

Tu Hi Meri Sans.!!

Tu Hi Meri Jaan…..

Tere  Siwa  Koyi Nahin Is Dil Ka Talbgaar,

Tujh Sng Sb Rng Hain Tu Ho To Hai Bahar,

Tu Hi Hai Meri Dillagi,

Tu Hi Meri Aas…..

Khta Baksh De Meri Pahali Baar Kiya Pyaar,

Bepanaha Muhabbat Ki Kiya Kisi Pe Eatabar, 

Tu Hi Meri Har Aarzu,

Tu Hi Meri Khas…..

अपनी कुर्सी की ही पड़ी है.!!


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प्रस्तुत रचना ऑनलाइन रह कर ही लिखी है,अगर कुछ गल्त लिखा गया हो तो इसका खेद है,वैसे भाई बुरा ना मानना होली है…
अर्ज़ है:-

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हम ना चाहते थे पर आपने बुलवा ही दिया, 
नेता जी आख़िर हमरा मुँह खुलवा ही दिया,
चारो और भुखमरी और बेरोज़गारी पड़ी है,
आप को तो बस अपनी कुर्सी की ही पड़ी है…

जहाँ देखो अराजकता ही अराजकता तोड़-फोड़,
कहीं नारों का शोर कहीं परिवार में मातम,
सरहद पे मरते सैनिक खेत में दम तोड़ते किसान,
आप को तो बस आगामी चुनाव की पड़ी है…..

जहाँ हो नफे का सौदा नेता जी आप हाजिर वहाँ,
जहाँ ना कोई लाब दिखे आप गैर हाजिर वहाँ, 
पड़ाई के मंदिर बने हैं आज राजनीति का मैदान,
आप को क्या लेना-देना लड़वाने की पड़ी है…..

किसने कहा एक-दूजे की आलोचना करना गुनाहा है,
देश से संबंधित मुद्दों पे बहस करना मना है,
बहस करिए खूब करिए पर संसद चला काम करिए,
आप को काम छोड़ संसद रुकवाने की पड़ी है….. 

माना आप सब एक जैसे नहीं कुछ बुरे सब नहीं,
काम की चिंता करते हैं और कामचोर भी नहीं,
अदना-सा इंसान हूँ कुछ गल्त कहा तो माफ़ करना,
आप पर ही तो मेरे जैसों की नज़रें गड़ी हैं…..

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 Hum Na Chahate The Par Aapne Bulwa Hi Diya, 

Neta Jee Aakhir Humaara Munh Khulwa Hi Diya,

Chaaro Aur Bhukhmari Aur Berozgaari Padi Hai,

Aap Ko To Bas Apni Kursi Ki Hi Padi Hai…

Jahan Dekho Araajakta Hi Araajakta Todh-Phod,

Kahin Naaron Ka Shor Kahin Pariwar Mein Matam,

Sarhad Pe Marte Sainik Khet Mein Dum Todte Kisan,

Aap Ko To Bas Aagami Chunaw Ki Padi Hai…..

Jahan Ho Nafe Ka Sauda Neta Ji Aap Hajir Wahan,

Jahan Na Koyi Laab Dikhe Aap Gair Hajir Wahan, 

Padai Ke Mandir Bane Hain Aaj Rajniti Ka Maidan,

Aap Ko Kya Lena-Dena Ladwane Ki Padi Hai…..

Kisne Kaha Ek-Duje Ki Aalochna Karna Gunaaha Hai,

Desh Se Smbandhit Muddo Pe Behas Karna Mana Hai,

Behas Kariye Khub Kriye Par Sansad Chala Kaam Kriye,

Aap Ko Kaam Chod Sansad Rukwane Ki Padi Hai….. 

Mana Aap Sab Ek Jaise Nahin Kuch Bure Sab Nahin,

Kaam Ki Chinta Karte Hain Aur Kamchor Bhi Nahin,

Adna-Sa Insaan Hun Kuch Galt Kaha To Maaf Karna,

Aap Par Hi To Mere Jaison Ki Nazarein Gadi Hain…..

 

                                         At:3:36A.M.

 

Today & Tomorrow.!!


       आज वो शांत है,
       चार कंधों पर चढ़ा,
       चला जा रहा है,
       कहाँ? बेशक़ यहाँ,
       कोई नहीं जनता,
       सारी चिंताओं से,
       मुकत बेफिकर,
       ना रिश्तों का,
       ना मोह-माया का,
       कोई बंधन,
       अंतिम सफ़र पर,
       इसके बाद सिर्फ़,
       और सिर्फ़ यादें,
       अच्छी-बुरी बातें,
       किस्से कहानी बन,
       तस्वीर हो जाएगा,,,,,

       कल तक कितना,
       जिंदा दिल था,
       निभाने में अव्वल,
       वही मोह-माया,
       वही मेरा-तेरा,
       कभी झगड़ना,
       कभी मान जाना,
       हँसना-हँसाना,
       फ़र्ज़ की बातें,
       दायित्व की चिंता,
       हर वक़्त बेपरवाहा,
       एक नयी उड़ान,
       कभी हवा उड़नेकी,
       कभी बदल छूनेकी,
       सबसे बेहतर बनने,
       निखरने की चाहत,,,,,

       बहुत फ़र्क है,
       कल आज में,
       सपने बुनने और,
       पूरे होने में,
       अधूरे अरमान की,
       मुकम्मिल चाहत की,
       ताक़त सहारा देने की,
       है आज सहारे की,
       यही नियती है,
       जीवन का है सार,
       आज इसकी बारी,
       कल किसकी होगी,
       बाद या पहले,
       होगी ज़रूर कभी,
       जान-ए-जिगर,
      ‘सागर‘की बारी,

antim yatra

कहाँ हैं वो पनघट की छोरियाँ.!!


आज भी याद है जब कभी अपने गाँव जाना होता था गाँव की प्यारी-सी बालओं को पानी भरने के लिए सर पर मटका-घागरी लेकर जाना देखा करते थे,वक़्त गुज़रा और अब वो मंज़र नसीब नहीं?पर खुशी इस बात की है आज पानी के लिए दूर-दूर नहीं जाना पड़ता!इसी पर अपना लिखा एक और कलाम पेश-खिदमत है:-

  ना  पनघट  रहे  और ना गाँव की वो छोरियाँ.!
  चलती लाज से ठुमक-ठुमक जैसे मोरनियाँ .!!

नये  ज़माने  की  भेंट  चढ़ि  सारी वो पहेलियाँ.!
पानी लेने जाती मिलकर पनघट सब सहेलियाँ.!!

  जो देखता हुस्न मेला दिल लेता उसका हिलोरियाँ.!
  मीठी-मीठी  बातें उनकी जैसे गन्ने दी गिलोरियाँ.!!

कितना था अपनापन और लगती सब हमजोलियाँ.!
क्या  लिखूं  क्या  ना  लिखूं  क्या थी वो किशोरियाँ.!!

  रूप रंग में अप्सराओं जैसी थी  मन-मोहनियाँ.!!
  कहाँ हैं यारो अब वो पनघट  की चित्त चोरनियाँ.!!

 

 

Na Panghat Rahe Aur Na Ganw Ki Wo Choriyan.!

Chalti Laaj Se Thumak-Thumak Jaise Morniyan.!!

Naye Zamane Ki Bhent Chadhi Sari Wo Pehliyan.!

Pani  Lene Jaati Mil kar  Panghat Sab Saheliyan.!!

Jo Dekhta Husn Ka Mela Dil Leta Uska Hiloriyan.!

Mithi-Mithi Batein Unki Jaise Ganne Di Giloriyan.!! 

Kitana Tha Apna-pan Aur Lagati Sab Humjoliyan.!

Kya Likhun Kya Na Likhun Kya Thi Wo Kishoriyan.!!

Roop Rng Mein Apsaraon Jaisi Thi Man Mohaniyan.!!

Kahan Hain Yaaro Ab Wo Panghat Ki Chit Chorniyan.!!

कम्बख़त ना आना था क्यूँ राह दिखाई.!!


 

 

  बहुत किया इंतज़ार,
  तूने ना आना था ना आई.!
  कम्बख़त ना आना था,
  कह तो जाती क्यूँ राह दिखाई.!!

  देख नहीं आना,
  सॉफ बता क्यूँ आँख लड़ाई.!
  खामोश हो बैठी,
  जैसे नयी-नवेली दुल्हन शरमाई.!!

  इतना क्यूँ इतराती है,
  और भी हैं हसीन क्यूँ आस जगाई.!
  दिल धड़का बेताब किया,
  नये अरमानों की क्यूँ आग लगाई.!!

  उस दिन का सौच,
  रूठा तो सौचेगी कहाँ जान फँसाई.!
  क़्त रहते आ जाती,
  साजन’सागर‘को हरदम होती साथ पाई.!!

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Bahut Kiya Intzaar,

Tune Na Aana Tha Na Aayi.!

Kambakhat Na Aana Tha,

Keh To Jaati Kyun Rah Dikhai.!!

 

Dekh Nahin Aana,

Saaf Bata Kyun Aankh Ladai.!

Khamosh Ho Baithi,

Jaise Nayi-Naweli Dulhan Sharmai.!!

 

Itna Kyun Itaraati Hai,

Aur Bhi Hain Haseen Kyun Aas Jagai.!

Dil Dhadka Betab Kiya,

Naye Armanon Ki Kyun Aag Lagai.!!

 

Us Din Ka Sauch,

Rootha To Sauchegi Kahan Jaan Fasai.!

Waqt Rehte Aa Jati,

Sajan’Sagar‘Ko Hardum Hoti Sath Payi.!!

अफ़सोस है’सागर’को भी.!!


 

Kuch Dukh Hai Kuch Sukh Hai,

Kyun Ek Batmeez Se Mulaqat Huyi.!

Shuru Mein To Sab Theek Tha,

Bad Mein Phir Badi Mukka-Lat Huyi.!!

Sahi Kehte Hain Bade-Bujurg,

Khub Sauch-Samjh Kisise Baat Karo.!

Warna Baad Mein Pachataoge,

Jab Gaali – Gauloch Ki Barsaat Huyi.!!

Bemail Ka Mail Hota Beqar,

Ghar Ban Jaata Hai Ladai Ka Maidan.!

Dulhan Lene Chle Hain Sab Par,

Bin Dulhe Saji-Dhajji Kaise Barat Huyi.!!

Har Baat Jo Khud Par Le,

Aise Murakh Insaan Se Doori Bhali.!

Afsos Hai ‘Sagar‘ Ko Bhee,

Kyun Aison Se Rishton Ki Shurawat ki.!!

 

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कुछ दुख है कुछ सुख है,
क्यूँ एक बत्तमीज़ से मुलाकात हुई.!
शुरू में तो सब ठीक था,
बाद में फिर बड़ी मुक्का-लात हुई.!!

सही कहते हैं बड़े-बुजुर्ग,
खूब सौच-समझ किसीसे बात करो.!
वरना बाद में पछताओगे,
जब गाली-गलौच की बरसात हुई.!!

बेमैल का मैल होता बेक़ार,
घर बन जाता है लड़ाई का मैदान.!
दुल्हन लेने चले हैं सब पर,
बिन दूल्हे सजी-धज्जी कैसी बारात हुई.!!

हर बात जो खुद पर ले,
ऐसे मूर्ख इन्सान से दूरी ही भली.!
अफ़सोस है’सागर‘ को भी,
क्यूँ ऐसों से रिश्तों की शुरूवात हुई.!!

आकाश में उड़ने की चाहत थी.!!


     आकाश में उड़ने की चाहत थी,
     परिंदों से मिलने की चाहत थी,,,,,

     पर्वतों से टकराने की,
     हवा से बातें करने की,
     बादलों से खेलने की,
     जवां दिल की जवां ख्वाहिश,
     कुछ नया करने की चाहत थी,,,,,

     वक़्त के थपेड़ों से लड़ट-लड़ते,
     ज़िंदगी आगे बढ़ती गयी,
     कुछ मनचाहा मिला,
     कुछ दिलचाहा छूटा,
     ज़िंदगी की ऐसी ख्वाहिश ना थी,,,,,

     जो दिया उस रब्ब ने दिल से,
     ‘सागर‘ ने क़बूल किया,
     उसके दरबार में सर झुका,
     प्रसाद को क़बूल किया,
     हर चाहत पाकर भी और चाहत थी,,,,,

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नये साल पर फुर हो गया.!!


जिसकी जिस दिन ज़्यादा ज़रूरत,

वो जाने कहाँ खो गया.!

दिल  चुरा  साजन  ‘सागर‘  का,

नये साल पर फुर हो गया.!!

नैन  बिछाए  बैठे  इंतज़ार  में,

वो  ईद  का  चाँद  हो  गया.!

कम्बख़त पहले संगदिल ना था,

जाने क्यूँ इतना बेदील हो गया.!!

चल कोई बात नहीं कर मन की,

जो होना होगा हो गया.!

क्या याद रखेगी था कोई अपना,

दर्द बेशक़ दुगना हो गया.!!

zarurat

Jis Kee Jis Din Jyada Zarurat,

Wo Jaane Kahan Kho Gaya.!

Dil Chura Sajan ‘Sagar‘ Ka,

Naye Saal Par Phur Ho Gaya.!!

Nain Bichaye Baithe Intzar Mein, 

Wo Eid Ka Chaand Ho Gaya.!

Kambakhat Pahale Sangdil Na Tha,

Jaane Kyun Itna Bedil Ho Gaya.!!

Chal Koyi Baat Nahin Kar Manki,

Jo Hona Hoga Ho Gaya.!

Kya Yaad Rakhegi Tha Koyi Apna,

Dard Beshq Dugna Ho Gaya.!!

वो बेबस लड़की.!!


 

तन्हा-अकेली,
वो बेबस लड़की,
बड़ी जा रही थी,
मंज़िल की और,,,,,

कुछ सौचते,
कुछ सहमें,
दायें देखती,
कभी बायें,
इरादे बुलंद,
पर ख़ौफज़दा,
तन्हा-अकेली,
वो बेबस लड़की,,,,,

सौम से शनि,
स्कूल-ट्यूशन,
ऊपर से पड़ी,
पढ़ाई की टेंशन,
तन्हा चले जो,
जल्द हो रिएक्शण,
तन्हा-अकेली,
वो बेबस लड़की,,,,,

नया ज़माना,
नयी है सौच,
बड़े-बुजुर्गों को,
कहते सुना है,
अच्छी लगती,
किताबों की भाषा,
तन्हा-अकेली,
वो बेबस लड़की,,,,,

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प्यार में रब्ब दिखता.!!


     प्यार मीरा ने किया,
     प्यार राधा ने किया,
     प्यार शीरी ने किया,
     प्यार  महिवाल  ने  किया,
     वक़्त बदला किरदार बदले,
     प्यार सबने एक  बार किया,,,,,

     प्यार गंगा की तरहा,
     प्यार पर्वत की तरहा,
     प्यार में पूजा किसी की,
     प्यार  में  रब्ब  दिखता,
     रब्ब  में सब दिखता,
     प्यार में बड़ा ना कोई,,,,,

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Pyaar Meera Ne Kiya,

Pyaar Radha Ne Kiya,

Pyaar Sheeri Ne Kiya,

Pyaar Mahiwal Ne Kiya,

Waqt Badala Kirdar Badale,

Pyaar Sabne Ek Baar Kiya,,,,,

Pyaar Ganga Ki Tarha,

Pyaar Parwat Ki Tarha,

Pyaar Mein Pooja Kisi Ki,

Pyaar Mein Rabb Dikhta,

Rabb Mein Sab Dikhta,

Pyaar Mein Bada Na Koyi,,,,,

वो पागल-सी लड़की.!!


 

 

वो पागल-सी लड़की,
इम्तहान से है डरती,
काश साल भर पढ़ती,
फिर कभी यूँना डरती,

 

कोई पूछे उससे भला,
क्यूँ  नेट करती भला,
कुछ दिन रुक जाएगी,
मर् थोड़े  फिर जाएगी,

 

काम कोई मुश्किल नहीं,
बस ज़ज़्बा होना चाहिए,
एवरेस्ट की  चोटी छोटी,
गर इच्छा  हो ज़रा मोटी,

 

पढ़ाई से ज़्यादा प्यारी,
हर किसी  से करे यारी,
बातें ज़्यादा पढ़ाई कम,
क्या  ऐसे  होती तैयारी,

 

दोस्त दुशमन ना होता,
हर कोई दोस्त ना होता,
खुद ही तय करना होगा,
दोस्त  कब  दोस्त होगा,

 

छोड़ ‘सागर‘ क्यूँ है खपे,
उसका कुछ ना अब लगे,
छोड़ उस को उसके हाल,
उसे एक  ही  दुश्मन लगे,

 

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नाम से नहीं कर्मों से होती पहचान.!!


नाम में दम होता है माना पर नाम रखने से ही कोई उस नाम जैसा नहीं हो जाता?चरितार्थ करना होता है!
जियसे हर चमकने वाली चीज़ सोना नहीं होती वैसे ही नाम रखने से इंसान उस नाम अनुरूप नहीं हो जाता!
यही कारण है सयाने कह गये:–

“इंसान की पहचान नाम-जाति-धर्म से नहीं उसके कर्मों से होती है”

इसी पर कुछ अर्ज़ है:–

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गर नाम रखने से  ही कमाल होता,
तेरा नाम रोशनी रख उजाला कर लेता.!

चाँदनी से शीतल  कर लेता घर को,
तेरा नाम चाँदनी रख आँगन महका लेता.!!

अपने नाम के झंझट से बचाता तुझे,
अपना नाम राम,महेश,कृष्ण ही रख लेता.!

अरे दायें – बायें की छोड़ ना यार तू,
तेरा नाम सजनी रख हमसफ़र बना लेता.!!

 

कोई इसे व्यक्तिगत ना ले!

इंग्लीश विंग्लिश छोड़ो जी.!!


पता नहीं क्यूँ हम हिंदुस्तानियों को इंग्लीश में बात करना क्यूँ पसंद है ? आए ना आए कोशिश ज़रूर होगी ? दुनियाँ के लोग अपने-अपने देश की भाषा बोल चाँद – सितारों  पर  पहुँच गये और हम हैं कि इंग्लीश के पीछे ही दीवाने हुवे जा रहे हैं !
अँग्रेज़ी आना अच्छी बात है पर इसका ये मतलब तो नहीं की अपने देश में भी हर जगहा हम इसकी नुमाइश करें?जब हम सामने वेल का प्रशन समझ जाते हैं तो  हिन्दी  में ही क्यूँ  नहीं उत्‍तर  देते ? जापानी जापानी में चीनी चीनी में या हर मुल्क के लोग अपनी-अपनी  भाषा  में ही बात करते हैं बस हम ही दिखावा करना पसंद करते हैं !
फ़र्ज़ कीजिए एक हिन्दुस्तानी  अँग्रेजन  को हिन्दुस्तानी  देसी  लड़के से मुहब्बत हो जाए तो क्या होगा?

अज़ी साहब जवाब पता है’मुहब्बत की ज़ुबान नहीं होती‘!

छोड़िए ! देसी मुंडे की एक अँग्रेजन माशुका को आशिकी फरमाते देखिए:-

 

क्या करती गिट-पिट अपनी अँग्रेज़ी में.!

हम  तो  समझें  भाषा  अपनी  देसी  में.!!

हिन्दुस्तान में पैदा हुई बनी अँग्रेजन.!

कछु भी कर नहीं आएगी हमरे भेज़न.!!

मुंडा  सीधा – सादा  ना समझुँ  इंग्लीश.!

लारी-लपा करले भूल जाएगी विंग्लिश.!!

वक़्त ज़रूरत जोगी आती मुझ को भी इंग्लीश.!

आइ लव यू कह सकता मुश्किल नहीं इंग्लीश.!!

टूटी – फूटी  रोटी  खाना  मुझे नहीं भाता.!

सागर‘को हिन्दी में ही बात करना आता.!!

 

englishvinglish

 

Kya Karti Git-Pit Apni Angrezi Mein.!

Hum To Samjhein Bhasha Desi Mein.!!

 

Hindustan Mein Paida Huyi Bani Angrezan.!

Kachu Bhi Kar Nahin Aayegi Hamre Bhezan.!!

 

Munda Sidha-Sada Na Samjhun English.!

Aa Lari-Lapa Karle Bhool Jayegi Vinglish.!!

 

Waqt Zarurat  Jogi Aati Mujh Ko Bhi English.!

I Love You Keh Sakta Mushkil Nahin English.!!

 

Tooti-Phooti Roti Khana Mujhe Nahin Bhata.!

Sagar‘Ko Bas Hindi Mein Hi Baat Karna Aata.!!

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