Category Archives: Hussan-e-Ishaq Shayari

चाँद.//


चाँद छुपा है घटाओ में,
कभी तो बाहर आएगा./

दुआओं का होगा असर,
कभी तो नज़र आएगा.//

तेरी तस्वीर…


देखी है जब तेरी तस्वीर साडी में,
दिल दीवाना हो गया./

कहता कम्बखत तुझ शम्माँ का,
अब परवाना हो गया.//

वो हुस्न किस काम का जो गरूर न रखे.!!


वो हुस्न किस काम का जो गरूर न रखे,
आइना देखे और मगरूरियत न रखे.!

खुदा की बनाई यही वो सल्तनत”सागर“,
जिसे हर कोई पाने की चाहत रखे.!!

कसीदे.!!


वो ख्याल कहाँ से लाऊँ”सागर”उसके कसीदे पढ़ सकूँ.!

जो सामने देखूं उसे लफ़ज़ मिलते नहीं कुछ लिख सकूँ.!!

दाग…


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चाँद में उसका चेहरा नहीं दिखता क्यों”सागर“.!

गर दिखता तो शायद चाँद पर दाग न दिखता.!!

If…


यूँ सज-धज जो घर से निकलोगे,
पत्थर भी पिगल जाएंगे.!

सागर“हैं अदना-सा शायर यारा,
खुदको कैसे बचा पाएंगे.!!

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सब बेकार है.!!


यूँ सजना संवरना सब बेकार है गर कोई देखने वाला न मिले./

बा-मुश्किल से मिला तुझे है”सागर“फिर भी नज़र आती नहीं.//

तस्सव्वुर…


तेरे होते चाँद का तस्सव्वुर भला फिर कैसे हो सकता.!

क्या जहाँ में”सागर“दो-दो चाँद का रिवाज़ हो सकता.!!

सेल्फी…


खुदा की कसम है एक और सेल्फी न सेण्ड करना.!

वरना लोग चाँद को देखने रात का इंतज़ार न करेंगे.!!

हुस्न के जलवे…!!


मेरे हुस्न के जलवे अभी तुमनें देखे ही कहाँ हैं”सागर“.!

करीब आ कर तो देख दीदार-ए-ज़न्नत यही करा देंगे.!!

इंतज़ार…


रात भर किया इंतज़ार ए चाँद सुबह हो गईं.!

औस बनकर ही आ क्यों देर कर दी तुम ने.!!

ये चाँद…


ये चाँद रात अंधेरों ही क्यों निकलता.!
क्या मेरे मेहबूब से इतना है ये डरता.!!

दास्ताँ.!!


बड़ी शौख है उनकी अदाओं की दास्ताँ”सागर“.!
जाऊँ जहाँ भी एक उनका ही चैहरा नज़र आता.!!

 

पहरे.!!


ये नक़ाब के पहरे चेहऱे पर अच्छे नहीं लगते सुना है.! 

छिपाते वही जिनके पास दिखाने को कुछ नहीं होता.!!

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बेवफा आँखें…!!


बेवफा आँखों.jpg

अपनी बेवफा आँखों से मेरी तस्वीर न देख.!

मेरी वफाओं पर भी तुझे शक होने लगेगा.!!

एहसास.!!


रातों  को निकल ये चाँद मुझे चिढ़ा जाता है.!

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तन्हा हूँ बार-बार एहसास मुझे करा जाता है .!!

 

Garur…!!


यूँ आइना में न देखा करो,
गरूर खुद पर उसे नाहक ही हो जाएगा.!
पी जाम हुस्न-औ-जमाल का,
मगरूर सब को नज़रअंदाज़ कर जाएगा.!!

Garur

Yun aina mein na dekha karo

Garur khud par use nahak hi ho jaayega.!

Pee jaam husn-o-zamaal ka

Magrur sab ko nazarandaz kar jaayega.!!

Look So Beautiful…


क्या खूब है तेरी वो बाइक और ये कानपुरिया स्टाइल,
कभी हम को भी सैर करा जहाँ की.!

लाज़िम है तेरे साथ जो गुज़रेगा सफर सुहाना ही होगा,
कभी प्यास बुझा प्यासे”सागर“की.!!

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Beautiful..☆It’s 4 You…!!


बहुत गुमान  है ना  तुझे  अपने होंठों की लाली पर,
इक बार करीब आकर तो दिखा.!

चुरा लाली इन पे अपना नाम न लिख दूँ तो कहना,
ज़रा करीब आने की हिमत दिखा .!!

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Bahut gumaan hai na tujhe apne honthon  ki laali par,

Ik baar kareeb aakar to dikha.!

Chura  laali in pe  apna  naam  na  likh doon  to kehna,

Zra kareeb aane ki himat dikha.!!

खुदा का नज़राना…


फूलों का रास निकाल तेरे बदन की खुशबू में डाला है.!
चंदा की चांदनी से तेरे तन को मॉल-मॉल नहलाया है.!!
सारी क़ायनात के हुस्न के जलवे तेरे चहरे में समाया है.!
मेरे मेहबूब तुझे बड़ी फुरसत में उस खुदा ने बनाया है.!!

na-pila

Phoolon ka ras nikaal tere badan ki khushboo mein dala hai,

Chanda ki chaandni se tere tan ko mal-mal nahalaaya hai.!

Saari qaynaat ke husn ke jalwe tere chehare mein samaya hai,

Mere mehboob tujhe badi phursat se us Khuda ne bnaaya hai.!! 

Malik ki Khata hai…


Tum aate-jaate Rozedaron se bach kar chala karo,

Be-hya na bano zra hijab mein raha karo.!

Maalik ne banaaya Mehtaab-sa uski khata hai,

Mnale na koyi Eid zra chup-chup raha karo.!!

Before Office Time (Court)…


ये आप के चहरे पर की बेक़रारियाँ,
के जैसे साँझ को है ढलता सूरज.!

ज़िन्दगी कुछ लम्हों की दास्ताँ नहीं,
हर शाम बाद फिर उगता सूरज.!!

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Ye aap ke cheahre par ki beqarariyan,

Ke jaise sanjh ko hai dhalta Suraj.!

Zindagi kuch lamhon ki dastan nahin,

Har Shaam baad phir Ugta Suraj.!!

कुंवारे ज़ज़्बात..!!


छह फुट तीन इंच का बांका नौजवान हूँ.!
पतला हूँ मगर बड़ा खूबसूरत जवान हूँ.!!
भरती हैं पीछे-पीछे आहें कई तितलियाँ.!
सम्भाला है दिल को फिसलता कहाँ हूँ.!!

गोरा है मुखड़ा और सीना भी है चौढ़ा.!
देख हसीनाओं ने आँखों पे पल्ला ओड़ा.!!
बहकी है नज़र कई हसींन बालाओं की.!
देख बोलें हाय अल्लाह कहीं का न छोड़ा.!!

शायर हूँ दिल का थोड़ा खिलाडी भी हूँ.!
दिल के मामलों में बड़ा अनाड़ी-सा हूँ.!!
मगर करीब आने की ज़िद्द न करा करो.!
बाँहों में भर लूँगा थोड़ा-सा जुगाड़ी जो हूँ.!!

5

तुझ से बेहतर हैं कई मेरे पास.!!


वो दिन गुज़रे जब रात-रात भर जाग तेरे ख्यालों में,
अपनी शायरी की मलिका तुझे बनाया करते थे.!

आज तुझ से बेहतर हैं मेरे पास कई हुस्न वाले देख,
जो कभी करीब आने को तरस जाया करते थे.!!

2

क्यों.!!


बहुत मगरूर हैं आँखें बड़ी मशहूर हैं आँखें,
मैं इन में खो ना जाऊं क्यों.!
तुम्हारे प्यार का दीवाना है सारा जहाँ माना,
मैं किसी और को चाहूँ क्यों.!!

aankhe

Happy Sunday…


अपने रुख से पर्दा यूँ हौले-हौले सरकाओगे,
खुदा कसम देखने वालों को बेमौत मार जाओगे.!

महताब-कहकशां-चाँद-सितारे चूमेंगे कदम
ज़मीं पर उस रब्ब बाद एक तुम्हीं पूजे जाओगे.!!

2

ख्वाब.!!


एक शायर के ख्वाब से कम नहीं,
ये हसीन हुस्न-ए-ज़माल.!

देख खुदा भी परेशान है आजकल,
अपनी कला-ए-कलाम.!!

18

क्यों .!!


तेरे मखमली बालों से क्यों उलझना चाहता हूँ,
तेरे नरम  होंठों  को क्यों छूना चाहता हूँ.!

यर कैसी बेकसी है कैसा है ये खुमार “सागर“,
क्यों उनका अंग-अंग अपनाना चाहता हूँ.!!

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सुन्दर होगी ख्वाबों की ताबीर जैसी .!!


रोज़ मिलती बातें भी करती,
पर कभी देखा नहीं .!

सोचता हूँ बड़ी सुन्दर होगी,
ख्वाबों की ताबीर जैसी .!!

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Roz milti baatein bhi karti,

Par kabhi dekha nahin.!

Sochta hun badi Sundar hogi,

Khwabon ki tabeer jaisi.!!

क्या कहूं…!!


ज़न्नत कहूं कहूं तुझे मैं खुदा की कोई हूर.!

लफ्ज़ नहीं अलफ़ाज़ नहीं तू है बहुत खूब.!!

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