Category Archives: Ghazals Zone

बमुश्किल मिलते चाहने वाले…


दूर से तीर चलाना आसान है,
करीब आ दिखाओ तो जाने.!
महकती सांसों की खुश्बू से,
रूबरू करा जाओ तो जाने.!!

गर क़बूल निकले तेरे दिल से,
हर सजा क़बूल “सागर “को.!
क़तल फिर चाहे कर कितने,
तैयार हैं हर अदाको अपनाने.!!

दिल लेना-देना नहीं बता दो,
इस दिल के और कई दीवाने.!
बमुश्किल मिलते चाहने वाले,
ना कर”सागर“से इतने बहाने.!!

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न कर पढ़ाई का बहाना .!!


न कर पढ़ाई का बहाना तू,
क्यों तड़पाती हो.!
किताबों में लिख नाम मेरा,
क्यों शर्माती हो.!!

मुहब्बत में तक़रार होती है,
नाराज़ ना रहो.!
खुदा हुस्न डबको देता इतना,
क्यों इठलाती हो.!!

दिल में गर कुछ नहीं तो नैन,
क्यों लड़ाती हो.!
क़त्ल कर अपने बीमार क्यों,
पाक कहलाती हो.!!

हुस्न अदाओं पर है नाज़ तुझे,
क्यों बहकती हो.!
जिस्म है ठंडा-ठंडा ऊपर से,
बड़ा दहकती हो.!!

सागर“जैसा कहीं न मिलेगा,
भाव खाती हो.!
देर से आती बिन बताये फिर,
भाग जाती हो.!!

The Lady In Red

“सागर”से क्या खता हुई तकल्लुफ ही भूल बैठे.!!


मज़ाक को मज़ाक रहने दें,
हकीकत ना समझ बैठें.!
दो पल की ज़िन्दगी जानलो,
क्यों नाराज़ हो बैठे.!!

मानना है तो मान जाओ यूँ,
क्यों ज़िद्द कर बैठे.!
ज़रा सी मुहब्बत क्या जताई,
आप खुदा हो बैठे.!!

माना भँवरे बड़े मंडराने वाले,
पर क्यों फूल बन बैठे.!
सर्दी मौसम में जान-ए-जहाँ,
शोलों का शूल हो बैठे.!!

अभी तो शुरुवात ही हुई थी,
अंजाम तक पंहुच बैठे.!
सागर“से क्या खता हुई जो,
तकल्लुफ ही भूल बैठे.!!

2

 जानता हूँ ऑन हुवे बैठी है.!


❤️❤️

ये ख़ामोशी दिल तोड़ने वाली,
जानता हूँ ऑन हुवे बैठी है.!
नखरा किसे दिखाती हो सौचो,
कई हैं जो ऑन हुवे बैठी हैं.!!

देख रही है क्या-क्या लिख रहा,
यूँ ही नहीं मौन हुवे बैठी है.!
डरती भी दिल लगा बैठें ना कहीं,
तभी हाथ फोन लिए बैठी है.!!

और भी हैं दिल हाथ में लिए,
अपनी मगरूरियत लिए बैठी है.!
मानना है तो खुद ही मान जा अब,
क्यूँ अपनी ज़िद्द किए बैठी है.!!

सौचती है मनायेंगे रूठी जान कर,
शायद अपना होश खो बैठी है.!
सागर‘झुकता सिर्फ़ रब्ब के आगे,
खुद को रब्ब समझ बैठी है.!!

❤️❤️

3

यक़ीं नहीं”सागर”नसीब पर.!!


एक सर्द रात वो और चाँद,
इक फलक दूजा ज़मीं पर.!
नज़र चुराऊँ बता कहाँ से,
हुस्न का मिलन है जहाँ पर.!!

💘

तुझे देखूं या उसे कश्मकश,
पैर नहीं आजकल ज़मीं पर.!
खुद से हैरान हूँ मुक़द्दर से,
यक़ीं नहीं”सागर“नसीब पर.!!

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हुसन वालों की हसीन आदतें.!!


हुसन वालों की भी क्या-क्या हसीन आदतें होती.!
नींद में सोते-सोते लाइक टिक कर चैन से सोती.!!

इश्क तड़पता तड़पे रात-रात भर उनकी बलासे.!
सुबह उठ हाल पूछ फिर मुंह चुरा धीरे से हंसती.!!

हर बुत को खुदा ने एक-से-एक बढ़ कर बनाया.!
नखरा एक-सा बेशक तस्वीर सबकी अलग होती.!!

माना कोई रुका नहीं हरदम किसी खातिर यहां.!
जाते-जाते कम-से-कम गुड नाईट तो कहे होती.!!

सागर’ पछतायेगा ना मुहब्बत कर हुस्न वालों से.!
इतराना दिल चुराना इनकी तबियत ऐसी ही होती.!!

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ज़िन्दगी की राह में!!


मेरी ज़िन्दगी की राह में,
तेरी नसीहतें रही हैं शामिल.!
मुझे कुछ पता ना था,
तेरी मुहब्बत मिलने से पहले.!!

गिला कोई हो बता दे,
यारों में तो शिक़वे होते रहते.!!
जहाँ तक़रार कोई ना,
वहाँ प्यार में भरोसे कम होते.!!

दिल में यही कशमकश,
तेरे बिन अब कैसे जी सकूंगा.!
किसी और का ख्याल,
दिल में मैं कैसे बसा सकूंगा.!!

वो नदियां और होगी,
जो ‘सागर’ से खुदको बचाती.!
दिल बड़ा”सागर“का,
जब भी जी चाहे जो समाती.!!

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प्यार से उन्हें मोटी क्या कह बैठे.!!


प्यार से उन्हें मोटी क्या कह बैठे.!
जनाब  अपना  खाना  ही छोड़  बैठे.!!

छरछरहा बदन हर हुस्न की चाहत.!
पर ये क्या जिम ही घर को बना बैठे.!!

पहला इश्क़ है जनाब-ए-आली का.!
छोटी – सी बात तभी दिल पर ले बैठे.!!

अज़ी ऐसी गुफ्तगू तो होती रहती.!
मुहब्बत  से  क्यों  यूँ   मुंह  मोड़   बैठे.!!

क्या इतनी ही दिल्लगी है उनको.!
निगोड़ी  किताबों से दिल लगा  बैठे.!!

मोटी है या लंगड़ी-लूली सब मंजूर.!
रुह के खेल  में आइना क्यों ला  बैठे.!!

सागर“की दिलरुबा जान-ए-बहार.!
क़बूल हो फिर क्यों शिकायत ले बैठे.!!

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कहीं”सागर”ख्यालों में बसा तो नहीं रखा है.!!


किस खातिर ये दिल सब से संभाल रखा है.!
कहीं”सागर“ख्यालों में बसा तो नहीं रखा है.!!

 

सब को मिलते हो पर उखड़े-उखड़े होकर.!
क्या राज है दिल में जो सबसे छिपा रखा है.!!

 

जगती आँखों से भी हसीँ खवाब देखा करो.!
पलकों में गर इस अज़ीज़ को सजा रखा है.!!

 

पास बैठ कभी दिल-ए-गुबार अपना निकाल.!
दिल किस कम्भखत के नाम धड़का रखा है.!!

 

इस दिल के खवाबों की मलिका कब इंकार.!
क्यों दिल को शक-शुबहा में उलझा रखा है.!!

 

प्यार करना गुनाह नहीं जो डर रहो ज़माने से.!
इश्क़ ने हर वक़्त में अलग मुकाम बना रखा है.!!

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उम्मीद का क़ायल है”सागर”..!!


Good Bye November 2017…

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तेरी ज़ुस्तज़ू में रात जागने की,
अब आदत हो गयी है.!
जब से ए सनम तुझ संग मेरी,
आंख क्या लड़ गयी है.!!

न दिन को चैन न रात क़रार,
हालत ऐसी हो गयी है.!
न देखूं ज़िन्दगी बेज़ार लगती,
जान पर बन गयी है.!!

ज़िद्दी दिल है की मानता नहीं,
ऐसी मुहब्बत हो गयी है.!
ज़िन्दगी को अब क्या नाम दूँ,
बड़ी बेरहम हो गयी है.!!

उम्मीद का क़ायल है”सागर“,
नाराज़ थोड़े हो गयी है.!
इतनी संग दिल नहीं ना आये,
मगरूर थोड़ा हो गयी है.!!

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Ter zustzoo mein raat jagne ki,
Ab aadat ho gayi hai.!
Jab se ey Sanam tujh sang meri ,
Aankh kya lad gayi hai.!!

Na din ko chain na raat qaraar ,
Halat aisiho gayi hai.!
Na dekhun zindagi bezaar lagti ,
Jaan par ban gayi hai.!!

Ziddi dil hai ki manta nahin ,
Aisi muhabbat ho gayi hai.!
Zindagi ko ab kya naam dun.,
Badi beraham ho gayi hai.!!

Ummeed ka qayal hai”Sagar “,
Naraz thode ho gayi hai.!
Itni sang dil nahin na aaye ,
Magrur thoda ho gayi hai.!!

Oh.!!Dear…


वो इतनी जल्दी सोते नहीं सब पता है,
शिद्दत से पढ़ने वाले हैं.!
तरसाना-तड़पाना उन्हें अच्छा लगता,
जनाब इतराने वाले हैं.!!

मुश्किल मिलता प्यार करने वाला यहाँ,
दिल हारने वाले हैं.!!
आ दो घड़ी मिल इश्क़ की बातें करले,
जान लुटाने वाले हैं.!!

क्या करेगी पढाई-लिखाई जब ना रहेंगे,
सागर“जाने वाले हैं.!
दिल का रोग इस क़द्दर बड़ गया ऋतू,
रुखसत होने वाले हैं.!!

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ना खुद सोता ना सोने देता.!!


ना खुद सोता ना सोने देता,
अजीब नशा उसकी बाँहों में.!
करीब होतो जहाँ ज़न्नत लगे,
खूब कशिश उसकी सांसों में.!!

हर पल उसका साथ गवारा,
वो संग तो हर मौसम बहारों में.!
तन्हाई में उसका साथ भाता,
वक़्त गुज़रे बस फिर आहों में.!!

ये ज़िन्दगी की उसके नाम,
यक़ीनन ले जाएगा सितारों में.!
हर शय बड़ी खूब लगती जो,
खुद को देखूं उसकी आँखों में.!!

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रिवाज़ उल्फत का कैसे समझाऊँ तुम्हें.!!


मेरे सीने जो धड़कता है वो दिल हो तुम.!
फिर भी कहते हो मुझे भूल जाऊं तुम्हें.!!

शाख पर बैठा परिंदा होता उड़ा देता मैं.!
दिल में बसी तस्वीर से कैसे हटाऊँ तुम्हें.!!

हसीनों में हसीं हो महताब माफिक तुम.!
करो फैसला कैसे चाँद ना बुलाऊँ तुम्हें.!!

लोग करते तस्सवुर  तुम संग जीने का.!
फिर पलकों पर क्यों  ना बिठाऊँ तुम्हें.!!

इश्क़ में पाना-खोना मायने नहीं रखता.!
रिवाज़ उल्फत का कैसे समझाऊँ तुम्हें.!!

मासूम उधर हो मासूम इधर “सागर” भी.!
खुदा ही आकर बतलाये कैसे पाऊं तुम्हें.!!

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Mere seene jo dhadkta hai wo dil ho tum.!
Phir bhi  kehte ho mujhe bhool jaaoon tumhein .!!
Shaakh par baitha parinda hota uda deta main.!
Dil maein basi tasweer se kaise hataoon tumhein .!!

Haseenon mein haseen ho mahtaab mafik tum .!
Karo faisla kaise chaand na bulaaoon tumhein .!!
Log karte tassvur tum sang jine ka.!
Phir palkon par kyun na bithaaoon tumhein .!!

Ishq mein paana -khona maine nahin rakhta .!
Riwaaz ulfat ka kaise samjhaaoon tumhein .!!
masoom udhar ho masoom idhar “Sagar ” bhi.!
Khuda hi aakar batlaaye kaise paaoon tumhein .!!

बंधन है जहाँ प्यार सांसों से बेशुमार हुआ.!!


इक पल की मुहब्बत ने जन्मों का दर्द दिया.!
उन्हें इतना चाहते गए कि जीना दुश्वार हुआ.!!

मैखाने जा भी कभी खुद को पिए ना समझा.!
उनकी आँखों में क्या देखा मन खुमार हुआ.!!

बहुत रुस्वा हुए साथी की इक झलक खातिर.!
बदनाम हुए तो क्या दिल को करार तो हुआ.!!

शादी सिर्फ दो जिस्मों का मिलन नहीं जानम.!
ये बंधन है जहाँ प्यार सांसों से बेशुमार हुआ.!!

फलसफां उल्फत के बहुत सुने थे मगर यारो.!
प्यार क्या तभी जान पाए”सागर“इकरार हुआ.!!

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इक पागल-सी लड़की.!!


इक पागल-सी लड़की,
कभी लड़ती कभी बात करती.!
बड़ी मासूम है शायद,
फूलों से बेहतर चंदा-सी लगती.!!

हर रात जागती वो,
अपने खवाबों की ताबीर खातिर.!
इरादे बुलंद उसके,
कभी वार कभी तकरार करती.!!

उसके भी कुछ सपनें,
पंछी माफिक परवाज़ भरने के.!
खुले आस्मां की चाहत,
ज़िन्दगी को बहुत प्यार करती.!!

 

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रहे ना रहे चिराग उल्फत के जलाये रखना.!


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रहे ना रहे चिराग उल्फत के यूँही जलाये रखना.!
बमुश्किल मिलती वफ़ा नग्मों में सजाये रखना.!!
          रहे ना रहे चिराग उल्फत के…                                      

 कभी शेर बन कभी रुबाई तो कभी ग़ज़लों में.!
साथ गुज़ारे लम्हों को लफ़्ज़ों से बसाये रखना.!!
रहे ना रहे चिराग उल्फत के…

कब मुहब्बत को आसानी से क़बूल करे दुनियां.!
बेवफा ना होना यूँही जहाँ को झुकाये हुए रखना.!!
रहे ना रहे चिराग उल्फत के…

मुहब्बत बाज़ार में नहीं निभा कर कमाई जाती.!
पाक वफ़ा निभा भटकों को राह दिखाए रखना.!!
रहे ना रहे चिराग उल्फत के…

ज़िन्दगी है यहाँ फ़लसफां हो मिट जाने के लिए.!
वक़्त कैसा भी रहे”सागर“सब को हंसाये रखना.!!
रहे ना रहे चिराग उल्फत के…

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Lover’s Wish…पीला सूट…प्रोफइल पिक बदल दो अपनी.!


आवारा समझ के ना ठुकरा मुझे,
मान तेरा चाहने वाला हूँ.!
मुक़द्दर से  मिलता  जहाँ में प्यार,
तक़दीर सँवारने वाला हूँ.!!!

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आखिर सलाम…!!

कितने दिनों से पीला सूट प्रोफइल पिक में लगाए बैठो हो.!
लगता है जैसे महीनों से गुसलखाने से मुंह फुलाये बैठे हो.!!

अमां यार कुछ तो रहम खाओ अपने हुस्न-ए-ज़माल पर.!
क्यों इतने हसीं चहरे की ऐसी-तैसी करने को हो बैठे हो.!!

पीले सूट पर सफ़ेद कोर्ट लगे जैसे दिल का पन्ना ख़ाली.!
राह चलते आशिकों को भी एक खुला ऑफर दे बैठे हो.!!

माना इस दिल से नाराजगी बढ़  गयी ज्यादा आजकल.!
और भी दीवाने हैं आपके उनका दिल क्यों तोड़ बैठे हो.!!

इश्क गर ज़रा भी है तो प्रोफइल  पिक बदल दो अपनी.!
फिर ना कहना ‘सागर‘ दिल कहीं और क्यों लगा बैठे हो.!!

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Saturday (21/10/2017) at 1:19 AM

वो पीला सूट…


हाँ तुम्हें तंग करते हैं,
तुम्हारी तरह नहीं फिर भी.!
रात ख्वाबों चैन चुरा,
तुम्हारे तरह तंग नहीं करते.!!

फ़िरोज़ाबाद की गलियों की ख़ाक छान जो बन पड़ी वो ग़ज़ल

अर्ज़ है:-

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मुद्दत से तमन्ना है तुझ संग रूबरू हो बात करने की.!
तेरा-मेरा बेवक़्त आना-जाना कसक दिलमें छोड़ देता.!!

कभी तो वक़्त निकाल हाल-ए-दिल सुन-सुना अपना.!
कम्बखत तेरा इंतज़ार कोई और ख्याल आने नहीं देता.!!

जिक्र्र  किया  बार  किया अपनी शायरी में तेरा.!
शर्म-औ-हया है जो होंठों पर इक़रार आने नहीं देता.!!

जान कर भी अनजान क्यों हुए बैठी है जान-ए-जहाँ.!
कोई और हसीन हुस्न आँखों में आने नहीं देता.!!

कहने को बहुत कुछ है पर पास है महज़ एक तस्वीर.!

क्यों वो पीला सूट”सागर“को कोई रंग भाने नहीं देता.!!

Published
10/17/2017

Stunning Beauty…!!


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हर तस्वीर खुद ही बड़ा कुछ कहती,
रूप-यौवन ब्यान करती.!

यार”सागर“हम भंवरों का क्या कसूर,
कली जो इतनी हूर लगती.!!

हर अदा क़ातिल बेबाक हुस्न लाजवाब,
देख शरारत दिल रहती.!

खुदा भी हैरान-परेशान हुआ बनाकर,
खता”सागर“की फिर कैसी.!!

बड़ा रोका दिल को पर आवारा हुआ,
ख्वाहिश हर दिल रहती.!

ऐसा रूप-रंग देख दुल्हन शर्मा कहती,
दुल्हन तो ऐसी ही जंचती.!!

प्यार झुकता नहीं झुकाता”सागर”..!!


ना कोई वक़्त ना उम्र ना जाति-धर्म,
ना बोली भाषा का बंधन.!
प्यार तो एक बहती हवा जिसे बाँध,
सके ना कोई भी बंधन.!!

प्यार रांझे ने किया प्यार मीरा ने भी,
बहन का भाई कलाई बंधन.!
प्यार ने मुल्कों की सरहदें पार की,
डाल दिया जा अपना बंधन.!!

प्यार में इतनी कशिश रब्ब झुकाये,
करवाए वादों से बंधन.!
लड़ाई चाहे घर की या सरहदों की,
प्यार से अमन का बंधन.!!

प्यार झुकता नहीं झुकाता”सागर“,
प्यार में जन्मों का बंधन.!
दरिया का पानी “सागर” की और ,
प्यार रोक बांधे बंधन.!!

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ज़िन्दगी में प्यार तो सभी किया करते.!.!.!!.!!


ये मेरे शेर नहीं मेरे दिल के टूटे अरमान हैं.!

जो तन्हाई में किसी को याद कर लिखे मैंने.!!

2

ज़िन्दगी में प्यार तो सभी किया करते.!
कुछ ऐसे जो बस एतबार किया करते.!!

एक बार जो करें फिर मुकरें ना कभी.!
लोग ऐसे भी यही व्यपार किया करते.!!

दिल ले बदलने की आज आदत बड़ी.!
पागल अब प्यार इक बार किया करते.!!

ज़िकर होता है अक्सर मिट जाने बाद.!
पाक वफ़ा ही सब सलाम किया करते.!!

उम्मीद का”सागर“बन सबको रिझाया.!
हद – हदें पार तो प्यासे ही किया करते.!!

ज़िन्दगी तेरे बिन कैसे फिर गुज़र पायेगी.!!


कल सुबह जब कॉलेज जायेगी,
राहों में खड़े अपने दीवाने को पाएगी.!

सखियाँ देखेंगी तो चिढ़ जायेगी,
मुहब्बत कितनी है खुद छलक जाएगी.!!

Saturday की छुट्टी तो नहीं,
गर हुयी तो दो दिन बाद ही मिल पाएगी.!

कैसे कटेगा वक़्त बिन देखे,
अमां यार दुल्हन बन घर कब आएगी.!!

सागर“ज़िन्दगी उस सिवा,
जैसे बेल सीधे-सपाट पेड़ चढ़ जाएगी.!

तूँ ना मिली तो ज़रा सोच,
ज़िन्दगी तेरे बिन कैसे फिर गुज़र पायेगी.!!

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सर रख तकिये रात बहुत रोवोगी.!!


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यूँ प्यार से गर बातें करोगे,
देखना एक दिन जान लेकर ही रहोगी.!
रह जाएंगी अधूरी हसरतें,
फिर सर रख तकिये रात बहुत रोवोगी.!!

दिल अपना फरेबी माना,
प्यार के नाम पर कभी धोखा ना करेगा.!
साथ जन्म-ओ-जन्म का,
एक जीवन एतबार कर साथ निभाओगी.!!

प्यार में गिले हैं अक्सर,
कई शिकायतें सनम के दिल में भी होंगी.!
ना-ना करलो कितना भी,
एक दिन “सागर” की बन कर ही रहोगी.!!

क्या करोगे..!!


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क्या करोगे घर का पता जान,
तुमने कौन डोली बैठ घर आना.!

पहले भी कई पूछ बना चुके,
दिल ने अब झांसे में नहीं आना.!!

खबर दिलको आग उधर भी,
फिर भी हर कदम सोच उठाना.!

शम्मा चाहत में अक्सर जला,
आशिक पागल-दीवाना परवाना.!!

ऐसी ही हवा ऐसी ही फ़िज़ा,
मिला था खुदा का एक नज़राना.!

वक़्त की गर्दिशें छीन ले गयी,
पीछे रह गया यादों का अफसाना.!!

सच आपके शहर-गली से हूँ,
कभी अपना भी था वहां ठिकाना.!

फिर इक ऐसी हवा चली यारा,
सागर“का बदला नाम-ठिकाना.!!

“सागर”से आँख लड़ाई आवारा से नहीं.!!


बतमीज़  कहीं  की  कितना  सोती है,
यहां ज़िन्दगी याद कर – कर रोती है.!

तड़पा ले जितना है तड़पा सकती,
शुरू-शुरू हुस्न आदत ऐसी होती है.!

असाइनमेंट्स बनाने मुश्किल हैं माना,
बट सी एस की पढाई आसान होती है.!

तकिया कमर के पीछे लगा बैठा कर,
जवानी अक्सर नज़रअंदाज़ होती है.!

दे वक़्त नहीं सारे शहर बदनाम होगी,
टॉपर मैडम इश्क में भी फ़ैल होती है.!!

सागर“से आँख लड़ाई आवारा से नहीं,
ज़िन्दगी में मुहब्बत कभी-कभी मिलती है.!

तेरी इक ख़ुशी के पीछे मुझे मिले हैं हज़ारों गम.!!


ग़ज़ल

तेरी इक ख़ुशी के पीछे मुझे मिले हैं हज़ारों गम.!

मिले मुझे ना फिर भी क्या खता हुयी थी सनम.!!

ख्वाहिशें हों सारी तेरी पूरी यही खवाहिश रही.!
राह से कांटें निकाल फूल बिछाते रहे हर दम.!!

कोई चाहे किसी को जी भर और वो दूर हो जाए.!
क्यों शिकायतें इतनी क्यों मुहब्बत में इतने भरम.!!

तेरे पास आज सब कुछ मेरे पास बस तेरी यादें.!
तेरे दर से जब गुज़रूँ हरे हो जाएँ पुराने जख्म.!!

किसी देवता को गर पूजते वो भी जरूर मिलता.!!
क्यों फिर उम्र भर एक जिन्दा बूत के पीछे हम.!!

देख कर भी ना देखूं तेरे करीब कैसे न आऊं.!.
जो चिराग कभी जले थे वो कैसे हों जाएँ खत्म.!!

ख्वाहिशों की इंतहा”सागर“कभी होती नहीं पूरी.!
तेरे एक दीदार की खातिर सहै है लाखों सितम.!!

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खुदा करे.!!


लेट नाईट जागना,
ऑनलाइन रहना,
ना सोना और ना ही सोने देना.!
अज़ी अभी ये हालत,
बाद क्या करोगे,
लगता मुर्गा पूरा हलाल करोगे.!!

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लबों की हंसी यूँही तेरे मुक़द्दर में शुमार रहे.!!
खुदा की हर इनायत तुझ पर बरक़रार रहे.!!

खुश रहे हरदम हर पल यही दुआ रब्ब से.!
मौसम कोई हो तेरे आँगन यूँ ही बहार रहे.!!

मुहब्बत में अक्सर बेक़रारी बढ़ जाती है.!
जब कभी मिले तेरे चेहरे पर क़रार रहे.!!

हुस्न बदल देता रंग मौसम गुजरने बाद.!
खुदा करे तेरे हुस्न पर हरदम शबाब रहे.!!

फूल बहुत है इस बहार-ए-चमन में यारो.!
दिल एक तुझ पर”सागर“का निसार रहे.!!

तुझे डर है कहीं तेरे घर का पता ना बता दूँ.!!


तेरे हाथों में रख दी ‘सागर‘ ने अपनी जान.!
जियाना चाहे तो जिया वरना मौत दिला दे.!!

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मेरे मेहबूब उस दिन क़यामत होगी,
जब तेरी ना  में  बगावत होगी.!
आँखें करेंगी इशारा मुझ गरीब और,
तेरे दिल में कोई शरारत होगी.!!

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ग़ज़ल मात्र कल्पना पर आधारित है,वास्तविकता में इसका कोई वजूद नहीं…

अर्ज़ है:-

तेरे शहर से हूँ तेरे घर का पता भी जनता हूँ.!

कम्बख्त दिल तेरे घर जाने को नहीं मानता.!!

तुझे डर है तेरे शहर का नाम बता चुका हूँ.!
कहीं जहाँ को तेरे घर का पता ना बता दूँ.!!

अरे पागल वफ़ा करने वाले मरते-मरते भी.!
मुहब्बत को सरे बाजार रुस्वा नहीं करते.!!

किस स्कूल में टीचर है कहाँ से आती-जाती.!
सब जानता पर दूर-दूर से दीदार कर लेता.!!

हो जाए गर मुहब्बत तो यहाँ फूल भेज देना.!!
इतनी ना हो हिम्मत प्रोफइल पिक बदल लेना.!!

तेरी ख़ुशी तुझे मुबारक मुझे मेरे गम हैं प्यारे.!
दुआ यूँ ही खुशियों से तूँ लबरेज़ हो जी जाए.!!

ना बोलने की कसम तूने खाई सब जानता हूँ.!
सागर‘की भी कसम है कभी आवाज़ ना देगा.!!

बड़ी डरामे बाज़ है पढ़ाई तो महज़ बहाना है.!!


कई साल पहले(जनवरी 2009)में जब यहाँ पर लिखना शुरूकिया था कई लोग जुड़े,
उन संग हसीं खट्टी-मीठी यादें जुडी…
कई हैं और ज़्यदातर चले गए ख़ास कर…?
अब कोई गर लौटकर आता भी है तो उनकेमामा-मामा कह बुलाते हैं…!!

बड़ा अच्छा लगता है(कर भी क्या सकते हैं मजबूरी है भाई)
लगता है किसी की इतिहास फिर दोहराने की तैयारी है…?
सच कहते हैं

बेटियां पराया धन होती हैं

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वो क्वह्ते हैं आजकल उन्हें टाइम नहीं है,
माशाल्लाह  हुस्न  को झूठ बोलना भी नहीं आता.!
इसे उनकी मजबूरी कहें या कुदरती हया,
सागर‘ ठीक से उन्हें इंकार करना भी नहीं आता.!!

 

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बड़ी डरामे बाज़ है पढ़ाई तो महज़ बहाना है.!
असल मकसद यारों को जी भर तड़पाना है.!!

दिल करता तेरा बोलने का खबर है फिर भी.!
तरसाना-इतराना यूँही नहीं हुस्न की आदत है.!!

मान वरना कसम खुदा की तेरे दर जान देंगे.!
वैसे भी शम्मा की चाहत में परवाना जलता है.!!

इक बार करीब तो आ जाने का नाम ना लेगी.!
लबों की प्यास जो बुझती जिस्म और जलता है.!!

होंगे कई परवाने यहाँ चाहने वाले कब इंकार.!
अजी”सागर“सामने जहाँ में कोई कब टिकता है.!!

गुस्सा.!!


जिस पे होता ज्यादा गुस्सा,
उसी पर प्यार आता.!
प्यासा ही जाता कुएं पास,
कुआं बरक़रार रहता.!!
जिस पे होता ज्यादा गुस्सा…

 

मुहब्बत का दस्तूर है यही,
उसी से जहाँ झगड़ा.!
जहां ना हो नौक-झौंक,
मज़ा क्या ख़ाक रहता.!!
जिस पे होता ज्यादा गुस्सा…

 

कसमें वादों भरा है बंधन,
साथी के संग सफर.!
जो निभा ना सके सब,
वफ़ा बदनाम करता.!!
जिस पे होता ज्यादा गुस्सा…

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Published
25/10/2017 at 11:48 AM

Beauty of Patiyala…


अपनी खता क्या थी क्या करते,
जब हर दरवाज़ा बंद था इजहार -ए -वफ़ा करने का.!
हुस्न वालों की मजबूरी या हया,
बस यही रास्ता दिखा’सागर‘दिल की बात करने का.!!

अर्ज़ है:-

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तेरे शहर में आ हमनें खता की,
बड़े रुस्वा हुए सनम तेरे प्यार में.!
पूआ करी मंदिर की मूरत जान,
ज़िन्दगी  तबाह  की  तेरे  इंतज़ार  में.!!

इक तस्वीर सहारे तलाश की,
हसींन हसीनों से भरी बहार में.!
कोई सौदा नहीं जो खरीद लेते,
इश्क बिकता नहीं  मंडी – बाज़ार  में.!!

कभी करना यक़ी‘सागर‘का,
वरना ज़िन्दगी कटेगी सवाल में.!
हाथ-हाथों थमाते तो अच्छा था,
ज़िन्दगी वही जो गुज़रे सच्चे प्यार में.!!

दिल फ़रेब कुड़ी ❤️…Wish U a Happy Diwali.!!


 

आज दीपों का पर्व दीपावली है और
सब अपने-अपने घरों-दुकानों आदि
को दीयों से जग-मग कर रहे होंगे…
और हज़ूर आप भी…?

जो दिए दीपावली के छत पर जला रहे हो,
इक दिया यार नाम का भी जला देना.!
क्या खबर अगले बरस कोई ना छेड़े तुझे,
याद कर ‘सागर‘ को मुस्कुरा देना.!!

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होंगे चर्चे तेरे शहर की गलियों में बहुत,
सारा शहर तेरे नाम का दीवाना होगा.!
दिल-औ-जान नाज़ तुझे है न बहुत खुद पर,
देखना एक दिन मेरे दर आना ही होगा.!!

कहती हो शायरी में दिल बसता है बहुत,
गीत-ग़ज़लों से क़बूल करवाना होगा.!
गर शायरी में दम होगा एहसास करा देंगे,
इस ज़िन्दगी का तुझे गीत बनना होगा.!!

उधर तूँ ज़िद्दी बहुत पर इधर भी कम नहीं,
इक़रार अपनी ज़ुबान तुझे लाना होगा.!
तेरी से गली जब अपनी मयियत निकलेगी,
दीदार करने छत पर आना ही होगा.!!

शिद्दत से हर रोज़ तेरे शहर में तलाश की,
दिल फ़रेब  कुड़ी तुझे मिलना ही होगा.!
चाहे कितनी भी मशगूल आगे पढाई में,
सागर‘वास्ते वक़्त निकालना ही होगा.!!

No Second Option…


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तेरे ख्याल से बेहतर ज़िन्दगी का कोई ख्वाब नहीं.!
फिर भी चाहती है दुनियां तुझे भूल जाऊंगा मैं.!!

तीसरा पहर है जागती आँखों में तेरी ही तस्वीर.!
कैसे नज़म ग़ज़लों में तेरा जिक्र्र करूँगा ना मैं.!!

दिन गुजरता शाम आती रात याद कर बीत जाती.!
सुबह ओस की हर बूँद में तेरी रूह तकता मैं.!!

हुस्न-ए-जाना इतना सितम ना कर इस बीमार पर.!
इक बार अपनी झलक दिखा चला जाऊंगा मैं.!!

बेमुरब्बत दुनियां उस बिन’सागर‘के किस काम की.!
वादा रहा अगले जन्म अपना बनाने आऊंगा मैं.!!

Nothing is Pretty,

Nothing is Lovable.!

Without You,

Life is Charmless.!!

मुहब्बत निभाना मुश्किल होता.!!


बंद कमरे में बैठ मुहब्बत पर बयान देना आसां होता.!
ज़रा मुहब्बत कर देख निभाना कितना मुश्किल होता.!!

हर पल बेचैनी हर शय में चेहरा मेहबूब का ही होता.!
सोचो जो भी करो जो भी बस ख्याल मेहबूब का होता.!!

उड़ने की चाहत भला किस जींव में नहीं क़ाबिज़ होती.!
वक़्त मद-मस्त हर हाल में मन-चाही मंज़िल को होता.!!

कुछ तो होती मज़बूरियां यूँ ही कोई बेवफा नहीं होता.!
गौर से देखना पाक वफ़ा वाला कभी बेवफा नहीं होता.!!

ज़िन्दगी में यहाँ भी बहुत कुछ कर गुजरने की चाहत.!
सागर” वही होता तक़दीर में जो मंजूर-ए-खुदा होता.!!

naam

Happy Karwachauth…


इसमें कोई दौराये नहीं कि एक औरत अपने पति/खामिंद से बेइंतहा मुहब्बत करती है,
हर पल अपने सुहाग वास्ते लम्बी उम्र,स्वास्थ,तरकी आदि की दुआ रहती करती है और…
मर्द(सभी नहीं) इससे कोसों दूर हैं!
माना कुछ हैं जो वक़्त की पाबंद ना हों पर अपवादों सहारे दुनियां का आंकलन नहीं होता!

सच तो ये है एक अच्छी पत्नी वास्ते तो हर दिन करवाचौथ होता है,
गर उसका पति उसे समझे?उसकी भावनाओं को जाने?
दिल से सवीकार और बेइन्तहा प्यार करे?

But…?

अर्ज़ किया है:-

चाँद भी आहें भरेगा,
देख हुस्न आज हसीनों का.!
मर्दों की क्या बिसात,
सोचें कहीं और जाने का.!!

सज धज के बैठी हैं,
घर-घर की लक्ष्मियाँ आज.!
हर घर में है रौनक,
मौका नहीं बाहर जाने का.!!

पप्पू की मम्मी,
दादी-नानी सारी जनांनियाँ.!
बनी फिर दुल्हन,
जश्न जेब ख़ाली कराने का.!!

ऐश करो यारो,
मिलता कहाँ मौका हरदम.!
एक दिन तो है,
जी भर-भर रोटी खाने का.!!

मुबारक करवाचौथ,
सुहागनों पूरी हों ख्वाहिशें.!
बार-बार मिले मौका,
इन्हें करवाचौथ मनाने का.!!

Happy Karwachauth.jpg

चलते-चलते चार पंक्तियाँ ख्वाहिशों के नाम…

रख लेती गर ‘सागर‘ नाम का करवाचौथ,
तुझे क्या  फर्क पड़ जाता.!
दिलफ़रेब दिल वालिये बदनाम होती माना,
पर चर्चा जहाँ में रह जाता.!!

Good Bye…


dua

गर मुहब्बत में किसी के इज़हार पर इक़रार न कर सको.!
कम से कम इतनी जेहमत तो उठाइये इन्कार कर सको.!!

 

बमुश्किल मिलता जहाँ में बेइंतहा प्यार करने वाला कोई.!
इतने संग दिल ना बनो के बाद किसीसे तकरार कर सको.!!

 

अपने दिल की खुद जान यहाँ तो बेपनाह मुहब्बत सनम.!
पूछो दिल से ताकि जरुरत पर खुदसे फ़रियाद कर सको.!!

 

ये शायरी किस काम की जहाँ यार मेहबूब का ना बसेरा.!
दुआ खुदा से यही अगले जन्म उन्हें’सागर‘का बना सको.!!

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