Author Archives: Dilkash Shayari

ग़ज़ल


क्या खूब हैं तेरी ये मतवाली आँखें,!
नशीली आँखें ये कजरारी आँखें…!!

मय का प्याला हैं तुम्हारी ये आंखें,!
कहीं देखीं न ऐसी निराली आंखें…!!

सुबह होती जो देखें तुम्हारी आँखें,!
शाम ढले गर नज़र न आएं आँखें…!!

खवाबों से लबरेज़ हैं शराबी आँखें,!
जान से प्यारी हमें तुम्हारी आंखें…!!

लम्हें


देखा चाँद को पहली बार ज़मीं पर नज़र न लगे l
चंडीगढ़ की आब-ओ-हवा में और निखर आया है ll

छुप छुप कर न देखा करो के
शक में पड़ जाएँ l
इस क़द्दर भी न चाहो न मिले तो
मर ही न पाएं ll

ज़िन्दगी के ये कारवां यूँही चलते रहेंगे,
लोग आएंगे जाएंगे मस्ले होते रहेंगे l
तुझको चुननी जो राह चुन ले वो “रवि”,
ये दौर ज़िन्दगी के यूँही गुज़रते रहेंगे ll

हया का ऐसा सरूर था
इक़रार था मगर ज़माने का खौफ भी l
यारो इश्क़ छुपाये न छिपे
सामने आते ही झुकी नज़रें बयाँ कर गई ll

तेरी चूडियाँ और माथे की बिंदिया
मेरे दिल का चैन चुराती हैं l
फिर कहती तुम न इश्क़ करो भला
सामने क्यूँ सजधज आती है ll

तेरी सांसों से ये महकती हवाएं
मेरी सांसें भी महका जाती l
अहसास दिलाती करीब है मेरे
दिल का क़रार और बढ़ाती ll

झूठी थी वो और झूठी उन की मुहब्बत l
ज़रा सी आँख हटी गैर बाँहों में समा बैठे ll
हया का ऐसा सरूर था
इक़रार था मगर ज़माने का खौफ भी l
यारो इश्क़ छुपाये न छिपे
सामने आते ही झुकी नज़रें बयाँ कर गई ll

खवाबों से लबरेज़ हैं शराबी आँखें,
जान से प्यारी हमें तुम्हारी आंखें…

जिसके लिए जीते थे वही साथ छोड़ रही l
लगता जैसे सांसें जिस्म से साथ छोड़ रही ll

Wada hai tujhse,
Zindagi tujh sang hi guzrni l
Na mili to kasm,
Ab duniya hi fir chhod drni ll

आशा की किरणों सांग नई सुबह आई है.!
सतरंगी सपनें पूरे होंगे उम्मीद ले आई है…!!

ज़िन्दगी तो इससे बेहतर भी हो सकती थी मगर !
उन्हें तो याद है बस लड़ना इससे फुर्सत ही कहाँ !!

एक ज़माना था उनसे रूबरू हुआ करते थे,
जिन्हें मुहब्बत में वफ़ा रखने की चाहत थी…

ये है मुहब्बत आजकल
जब चाहो किसी से प्यार करो जब चाहो दूजे से l
ऐसो को क्या करें यारों
चलो सबक सिखाते उनके कॉलेज जा मशहूर करते ll

न कर मतलबीपन की बातें
ये साथ सात जन्मों का
अब न छूटेगा दुनियां के रहते
ये रिश्ता है मुहब्बत का

तेरी गली को भूलना गंवारा न था
तेरे बिन जीना कभी भाया तो न था l
तू करती रही शिक़वा कदम कदम
तेरे ख्यालों में भी तो कोई और न है ll

मुझे शौक़ नही है बेवफाई का
जैसे भी हो निभाता मैंने l
तू इलज़ाम लगाती रही फिर भी
दिल खोल सताया तूने ll

न कर मेरे काफिले पर वार तू
क़तरा क़तरा कर संजोया है मैंने l
बंद कर आँखें ज़रा सोचना तू
नफरती अँधियों से तूने क्या पाया ll

ना करो मालिक से शिक़वा शिकायत…
जैसे भी हो औरों से बहुत खूब हो यारा.!!!

ज़िन्दगी एक सफर है हम हैं राही…
जाने किस गली शाम हो जानी है !!

आइना जब तब देखूं
तेरी तस्वीर नज़र आये…
बेवफा मैं हूँ या फिर तू
आइना देख के तो बता.!!

रुखसत तो होना ही एक दिन सनम…
क्यों न तेरी गली गुज़रे आखिर कारवां.!

वाक़िफ़ हूँ हुस्न ए शबाब से…
मगर डर लगता है तेरे बाप से.!

लगता है तुझे मर्ज़ ए इश्क़ हो गया बच्चा…
मेहबूब गली जा करा इलाज़ अपना सच्चा.!!

माँ बाप क़दमों तले ज़न्नत…
मांग वहां पर जाकर मन्नत.!!

जिसने न पाया माँ बाप का यक़ीन…
उसने न पाया दुनियां का भी यक़ीन.!!

ज़िन्दगी दो चार लफ़्ज़ों की दास्ताँ नहीं
पढ़ो और बुला दो…
ज़िन्दगी वो अफसाना जिसे सदियों तक
भुला न जा सके.!!

ज़िन्दगी और भी बेहतर हो सकती थी…
हर गर्दिश ए हवाओं ने साथ दिया होता.!!

वाक़िफ़ हैं हम भी गर्दिश ए हालात से…
फिर भी माँगा तुझे खुदा से फरियाद में.!!

जो रुस्वा करते हैं.मुहब्बत को वो आशिक़ी न करते…
मुहब्बत तो इबादत रब्ब की जो करते फन्हा हो जाते.!!

दिल की लगी में जो मुहब्बत दागदार करे…
वो आशिक़ नहीं आशिक़ी बदनाम है करे.!!

कौन कहता है के तुम जहाँ में तनहा हो…
गौर से देखो ज़मीं आसमाँ सब साथ हैं.!!

ज़िन्दगी के चार दिन यारा
हंस कर या तो कर जी ले…
मगर न खामोश गुज़ार इसे
जैसे हो ज़िन्दगी गुज़ार ले.!!

इतना रुक रुक धीरे धीरे जो बढ़ोगे…
प्यार तुम क्या ख़ाक किसी से करोगे.!!

न सहारे की परपरवाह खौफ जुदाई का…
निकल उस डगर जो मंज़िल खुद निकाले.!!

कर खुद पर और अपनी तक़दीर पर…
खुदा मायूस न करता अपने करीब को.!!

तुझसे गुफ्तगू की चाहत फिर तेरे करीब लाई !
बहुत चाहा भुलाना नगर चाहकर भुला न पाए.!!

बेवफा..!


इतनी बेवफा न होना हम मजबूर हो जाएं /
कानपूर की गलियों मुहब्बत रुस्वा हो जाए //

गैर मर्दों से हंस हंस बात करती हो,
क्या सच में हम से प्यार करती हो /
शिकायत है तुम्हारी खुदा से हमारी,
क्या तुम भी बिन हमारे तड़पती हो //

दुआओं में शुमार हो ज़िन्दगी हो तुम /
ये और बात पहचस्न सकी न हो तुम //

फूलों सी नाज़ुक है वो
कलियों सी खूबसूरत /
बिहार में पैदा हुईं है वो
संगमरर सी वो मूरत //

तेरी बेवफाई को देख
ज़रा भी हैरत नहीं हुईं.!
तू भी तो इसी दुनियां
का नायब हीरा है.!!

कुछ तो रही होंगी मजबूरियां,
कौन बेवफा होना है चाहता
कुछ सीने अपने भी देख ज़रा,
खता पे ख्याल कम ही जाता.!!

चिराग उल्फत के जलाये रखना,
वादा है शाम तेरी गली ही होगी.!!

हज़ारों में किसी एक को बनाया खुदा बे हमारे लिए,
और दुनियां कहती छोड़ दें बताये तो किस के लिए.!!

खुदा हुस्न देता तो नज़ाकत दे ही देता 

इश्क़ को तड़पाने की आदत दे ही देता

मुहब्बत तो सच्ची मगर तेरी नज़र में धोखा
एक दिन जान जाएगी तेरे दर समझ जाएगी

अपनी जुल्फों के साये में आखिर शाम बसर कर लेने दो
ना जाने कब बिछड़ जाएँ और ख्वाब अधूरे रह जाएँ फिर

Zindagi teri duniya se dil bhar gya
Bas mehman hain kuch din yahan

Khuda kre tere kreeb aane se pahale
Maut raah badle or mujhe sath le jaye

कौन कहता दूर हैं तुझ से
दिल में झांक करीब है तेरे

ये है मुहब्बत आजकल
जब चाहो किसी से प्यार करो जब चाहो दूजे से l
ऐसो को क्या करें यारों
चलो सबक सिखाते उनके कॉलेज जा मशहूर करते ll

न कर मतलबीपन की बातें
ये साथ सात जन्मों का
अब न छूटेगा दुनियां के रहते
ये रिश्ता है मुहब्बत का

तेरी गली को भूलना गंवारा न था
तेरे बिन जीना कभी भाया तो न था l
तू करती रही शिक़वा कदम कदम
तेरे ख्यालों में भी तो कोई और न है ll

मुझे शौक़ नही है बेवफाई का
जैसे भी हो निभाता मैंने l
तू इलज़ाम लगाती रही फिर भी
दिल खोल सताया तूने ll

न कर मेरे काफिले पर वार तू
क़तरा क़तरा कर संजोया है मैंने l
बंद कर आँखें ज़रा सोचना तू
नफरती अँधियों से तूने क्या पाया ll

कांच का दिल


यूँ ज़ोर ज़ोर से न हँसिये.!
दिल कांच का टूट जायेगा.!!

“लम्हें”


बैठ दरवाज़े किस का इंतज़ार करते हो,
ख्यालों मे खोये हुए बेकरार से लगते हो…

आधा निकला है चाँद क़यामत बन..
खुल कर सामने आ गया क्या होगा…

जहाँ शक है वहां प्यार कहाँ,
बिन एतबार जां निसार कहाँ..

अब तो किताबों में रखे फूल भी सूखने लगे..
जिनमें तेरी सूरत देख सीने से लगा रखा था…

क्या खूब हैं तेरे चेहरे पर ये दो आंखें,
नींद उड़ाती चैन चुराती तेरी ये आंखें…

बस इतना ही बता दो न,
मुस्कुराने की वजह क्या…

ए दिल तू किसी और जहाँ को चल,
यहाँ वफ़ा के बदले बेवफाई मिलती…

शौख ए नज़र के तीर यूँ चलाइये न,
कमजोर है दिल कम्बख्त आ जाये न…

अब जो हूऐ मुहब्बत तो कई बार सोचना होगा,
वक़्तिया तो नहीं पहले जांचना परखना होगा…

यूँ न रोज़ रोज़ हमारी गली गुज़रा करो,
कहीं दिल पर ले बैठे क्या होगा हमारा…

तस्वीर जबसे अपनी दिखाई.!
आँखों रास्ते दिल में समाई है..!!

आँखों की नींद ले बैठी है तूँ.!
जब से यूँ ज़िन्दगी में आई है..!!

‘लम्हें’


तेरी सांसों की खुशबु से तेरा पता पहचान लेते.!
जान ए जहाँ कुछ इस तरह तेरा घर तलाश लेते.!!

इश्क़ के नज़राने हैं जो पल तेरे साथ साथ गुज़रे.
मैखाने की ज़रूरत नहीं यही काफी जीने लिए…

शम्माँ जलाये बैठे हैं तेरे दीदार को..
देखना ज़ुस्तज़ु में कही मर ही न जाएं…

मुहब्बत कर तो लें लेकिन
किस पत्थर की मूरत से..
बेवफा ज़माना है नहीं मिलती
वफ़ाएं किसी सूरत में…

बस बस रहने दो आग लगा चले जाते..
तकिया भर बाँहों में रोने को छोड़ जाते…

ज़िन्दगी को क्या बताएं बेवफा है..
कुछ लम्हों का ही तो सिलसिला है…

माना के तेरी नज़रों का नूर ए नज़र नहीं..
मगर ये सांसें तेरी खुशबु की तलबगार हैं…

बाली उम्र है माना मगर फिर भी सम्भल रहा करो..
यूँ झुल्फों की क़यामत सरे राह न बिखराया करो…

न खुद पढ़ती है न हमें पढ़ने देती..
लव यू लव यू बोल परेशान करती…

गर इश्क़ में जनून ए शिद्दत शामिल हो..
खुदा भी क़बूल कर क़ायनात झुका देता…

किसी को दीवानी की हद तक
चाहना और बात निभाना और..
हक़ीक़त से रु बरु होते जब
लोग कसमें वादे भूल जाया करते…

न कर इश्क़ पहले
वफ़ा कारण तो सीख..
बेवफा दीवानों ने
कई ज़िन्दगी बर्बाद की…

न कर इश्क़ से इश्क़ यारा..
ज़िन्दगी में कुछ और भी है…

बहुत किया इंतज़ार
बस और नहीं..
चलते हैं तेरे कूचे से
यादों को लिए…

कुछ इस तरह से मिला करो
लगे दिल को मेरी हो..
दूर दूर से नज़रें मिला भला
प्यार कहाँ हो पाता है…

जो फूल भेजे थे किताबों में
अब भी संभाल रखे..
कम्बख्त सूख गए बेशक
तेरी सांसों की खुशबु देते हैं…

जब झूठ अदा से बोला जाये तो..
सच भी शक के दायरे में आता…

सीने के जब करीब होते हो
धड़कनों क हाल समझ जाते..
कितनी मुहब्बत हमसे तुम्हें
राज़ दिल का यूँ ही बता जाते…

कुछ इस तरह तुम तसव्वुर में रहते हो..
जिस और देखूं तुम ही नज़र आते हो…

जी भर करो तौहीन फिर मासूम से हो जाओ..
खता अपनी न मानों इलज़ाम दूजे पे लगाओ…

न हो शोहदाई हमारे इश्क़ में..
इस दिल के तल्बगार हज़ारों…

ए पर्दानशीं रूठा न करो..
हम भी तो तेरे दीवाने हैं…

उनका नज़रें मिला झुकाना
जैसे इजहार ए मुहब्बत..
उस पर होली होली मुस्कुराना
क़बूल क़बूल क़बूल…

जब तेरा दिल गवारा करेगा ग़लती मान लेना
हम जहाँ थे वहीँ मिलेंगे वादा है सनम…

खता होती है इंसान से कब इंकार किया..
गल्ती कर न माने उससे बड़ा गुनहगार नहीं…

उफ्फ कम्बख्त ये कॉलेज की पढ़ाई..
मार डालेगी मुझ को तेरी जुदाई …

न आजमा मेरे Atitude को..
जो टूट गया चूम होंठों को Smile भी ले जाऊंगा…

अभी सताया ही कहाँ रात तो आने दे ज़रा..
बाँहों में भर लेंगे अभी तड़पाया ही कहाँ है…

ठोढी पर तिल मॉंग में सिंदूर और माथे की बिंदिया..
एहसास करा रही इस दिल को अब गैर अमानत है…

बेपनाह हुस्न आपकी कशिश भर आँखें..
कर रही मदहोश ज़माने को ये शरारतें..

कुछ इस तरह से बेवफाई के रिश्ते निभाए हैं..
हर तरफ गुज़रे लम्हों के मंज़र नज़र आये हैं…

एक पल की मुहब्बत कर बना लेते हैं दूरियां..
आजकल कुछ यूँ लोग निभाते वादा ए वफ़ा…

नादाँ उम्र है इश्क़ की गलियों में
चलना सम्भल सम्भल..
कोई दीवाना देखे न तेरी
रूह ए दिलकश बचना ज़रा…

हिज़्र की रात वो न आये तो
क़यामत होगी..
कटेगी पल्कों में बेशक सूरत
आँखो में होगी…

इतना Hate u Hate u न कहो तुम्हें Love हो जाये..
रुस्वा हो जाओ अपनी नज़रों में और नज़रें झुक जाएं…

कसम है तुम्हे तेरे बनाने वाले की
खुदको और अपने हुस्न को पहचान…
यहाँ कदम कदम पर क़ातिल बैठे
मासूम से दिल का क़त्ल करने वाले…

इस क़द्दर तुझसे मुहब्बत हुई.!
सारी दुनियां में तन्हा हो गए.!!

कहीं से नयन कहीं से गेसू कहीं से अदाएं लाया होगा..
तुझे बनाने में खुदा ने जाने कितना वक़्त लगाया होगा..

जब से तुझे देखा है हम अपना दिल हार गए..
जान-ए-जां तेरी आँखों में खुद को निहार गए…

अक्सर रुस्वा हुए तेरे कूचे आ कर
तेरी सखियों ने तुझे मेरे नाम से पुकारा

अरे आपस में न लड़ो दोनों को कण्ट्रोल कर लेंगे..
एक को नीचे का तो दूजी को ऊपर कोठी दे देंगे…

तुस्सी काले काले ओ
कुज साडी क़द्दर करो..
इस दिल नूं तुस्सी वडे
प्यारे प्यारे ओ…

सखियों में हंस हंस यूँ चर्चा
हमारा न किया करो..
कोई छिपा तुमसे I Love u
कह देगी तो क्या करोगे…

अब से अगर किसी को सब्ज बाग दिखाओ..
खुदा कसम दिल दुखता जब कोई दगा देता…

इक दिल है और सौ दीवाने यहाँ..
किस को करूं हां
किस Miss को करूं न…

यूँ मदहोश आँखों से देखा न करो
कोई परिंदा राह भटक परदेसी हो जायेगा..
इश्क़ की डगर बढ़ दीवाना पागल
तेरे दर अपनी सांसों की डोर तोड़ जायेगा…

जब से तुझे देखा है हम अपना दिल हार गए..
जान-ए-जां तेरी आँखों में खुद को निहार गए…

कहीं से नयन कहीं से गेसू कहीं से अदाएं लाया होगा..
तुझे बनाने में खुदा ने जाने कितना वक़्त लगाया होगा..

तेरा वज़ूद एक खूबसूरत वहम सिवा कुछ भी नहीं..
यूँ भी हमें परछाई का पीछा करने की आदत नहीं…

गुस्ताख़ नज़रों से कह दो यूँ देखा न करें..
गर इश्क़ हो गया तो इलज़ाम लगाओगे…

बारिश की बूंदों से एहसास हो रहा है..
तड़पा वो भी रात भर हमें याद कर के…

मेरी ज़िन्दगी वो खता हो
जिसे सज़ा समझ निभा गया..
शिद्दत से चाहा उसे मगर
वो सेज़ गैर संग सज़ा गया.

मीर की ग़ज़ल सी खय्याम की रुबाई हो..
फुरसत से बनाई खुदा की जैसे खुदाई हो…

चलते आजकल वो राहें बदल कर..
जो कहते थे कभी प्यार बड़ा तुमसे…

क्यों हमसे करते हो इतनी मुहब्बत..
न मिले तो साँस लेना भूल जाओगे…

सितारे भी निकल चुके
रात भी ढलने को..
सांसें हैं अटकी हुई तेरे
दीदार को सनम…

न करो मेरी नज़र को
नज़र का इशारा..
आ गया दिल तो
जान ए जाँ पछताओगे…

मेरी दुनियां है तेरी हद से
मेरे इक़रार की यही कहानी..
तेरी हंसी आँखों की शरारत
मेरे जीने की बस यही निशानी…

ओये एक Request है आज के बाद
दिल से हो प्यार तो किसी को
I love you कहन…

दर्द ए दिल किसे सुनाएं..
कोई एक हो तो बताएं…

चलते हैं तेरी बज़्म से
कोई शिक़वा नहीं..
जो भी वक़्त गुज़रा
यहां खुब गुज़रा यारा…

दो पल की ख़ुशी खातिर कुछ लोग हैवान बन जाते..
अबला पर ज़ुल्म ढा इंसानियत शर्मसार कर जाते…

तेरे वज़ूद से रोशन है मेरी दास्ताँ..
हूँ ज़िंदा तेरी सांसों की महक ले कर…

अक्सर रुस्वा हुए तेरे कूचे आ कर..
तेरी सखियों ने तुझे मेरे नाम से पुकारा…

माथे की बिंदिया
बहुत कुछ कहती..
मेरी नहीं हो अब
एहसास कराती है…

यूँ न मिला करो अब रात की तन्हाई में
तुम को मुहब्बत मुझ से सब जानते है..
तेरी रुस्वाई दिल को ज़रा भी मंज़ूर नहीं
इश्क़ छुपता न चेहरा सब पहचानते हैं…

नहीं चाहिए तेरी बिंदिया
तेरी पायल चूड़ियां..
ये सब गैर है तू अमानत
है किसी और की…

ए रक़ीब-ए-हुस्न यूँ मुंह न फुला..
मानाने की आदत नहीं यूँ न रुला…
यूँ न कर कानों में सरगोशियां..
इश्क़ छुपता ना छिपाये से भी…

क्यों करते इंतज़ार जबकि
वाक़िफ़ है तुम न आओगे..
झूठा वादा करना फितरत
अपनी रंगत तो दिखाओगे…

इश्क़ उनसे न करना जिन्हें इश्क़ की इबारतें न पता हों..
वादा करना तो आता हो मगर निभाने की वफ़ा न हो…

ऐसी वाणी न बोलिये की
दूसरे का मन आहत हो..
आपकी की कीर्ति कम और
श्राप के भागीदार हों…

सच्ची मुचि क्या तुम इतनी सुन्दर हो या..
डिपी और की लगा लड़के बिगाड़ने बैठी…

मेरी सुबह भी तेरे नाम से और शाम भी..
और बात मैं तेरी दुआओं में शामिल नहीं…

तम्मना ए इश्क़ में क्या से क्या हो गए..
ज़ुस्तज़ु में उनकी जहाँ में रुस्वा हो गए…मेरे मेहबूब मिला कर तो रोज़ मिल..
खुदा कसम हर लम्हाँ याद सताती…

कोई माने या ना माने पर यही हकीकत..
ख्वाब दिखाए मगर इंतज़ार न क़र सकी…

ये जो तेरी हल्की हल्की सी शरारतें है..
दिल का चैन चुराती घायल करती हैं…

एक दो दिनों में ही इतना करीब आ गई हो..
सोचता हूँ इतने दिनों तुम कहाँ थी…

नाम लेने की अब ज़रूरत नहीं..
लोग बेवकूफ नहीं समझ न पाएं…

तेरे लिए आसां होगा Miss u I love u कह भूल जाना..
मेरे लिए तो प्यार Is a worship of God जैसा…जीवन में Serious होना भी ज़रूरी
तभी सही फैसला लिया जा सकता…

न कर अपनी तस्वीर की
जग में यूँ नुमाइश ..
मुझे पाना तो ज़माने से
खुदको छुपाना होगा…

क़बूल तेरा
Good Bye करना..
कसम है
दिल में याद न करना…

अब तक जी थे सकूँ से
उनसे आँख क्या लड़ी..
बेगाने खुद से हुए ‘सागर’
नींद आँखों से जा उडी…

कभी रूठ जाऊँ तो मनाना नहीं
मर जाऊँ ज़नाज़े पर आना नहीं..
नहीं चाहिए दिखावे की उल्फत
जब तक हूँ ख्वाब में आना नहीं…

अपनी आँखों के पैमानों से यूँ न पिलाओ..
कोई राह भटक जायेगा मुसाफिर की तरह…

क्या खूब हैं तेरी आँखों के दो तीर मतवाले..
घायल करते है दिल चाहे घर यहीं बना लें…

Uff यार इतना न शरमाया कर .!
कसम से जान निकल जाती है.!!
गालों में डाल उँगलियाँ वो कुछ यूँ बैठे हैं,
जैसे हमारी याद में खुद को भुला बैठे हैं…

माना के तेरी नज़र में तलबगार नहीं मगर,
तेरी नज़र का धोखा है यक़ीन करके तो देख…

रिश्तों और अरमानों की ताबीर हूँ,
खुदा कसम मैं ही तेरी तक़दीर हूँ…

उफ़्फ़ कम्बख्त ये उनकी दो आँखें
क्या खूब है आंटी की बेटी की बातें,
जब खिलखिलाती कहकशां बरसे
याद आएं सब दिन साथ गुज़री रातें…

न कर इतना मजबूर की तेरे बापू को सब बता दूँ,
करके रुस्वा न अपना बनाऊं न गैर का होने दूँ…

कोठी उत्ते काँव वोल्दा
काशनी दुपटे आलिये
मैं राह तेरी तकदा…

ए हुस्न अपनी नज़ाक़त पर
इतना ना इतरा,
एक दिल है सौ नहीं हर किसी
को देता फिरूं…

आखरी पल है आखरी सांसें ढूंढ रही
तस्वीर तेरी आँखों में रह रह घूम रही हैं,
मुझसे तेरा शिक़वा माना मगर आजा
जाने से पहले सासें तेरा हाल पूछ रही हैं…

ए दिल चल तेरे कूचे से निकल जाते,
तू फिक्रमंद रहे कभी गंवारा न होगा…

बेशक रात गुज़री है करवटें बदलते मगर..
कम्बख्त फिर भी I❤️ You कह न पाई..

इतनी फुरसत कहाँ
किसी के मैं नखरे उठाऊं,
जिसे होगी मुहब्बत
खुद बखुद खींची आएगी…

अनार खाने का दिल था,
पाग़ल ने अंगूर दिखा दिए..

जो मजा तुझसे लड़ने में
दो पैग शराब पीने में कहाँ,
बहुत खूब बहुत खूब हो
बिन तेरे जीने में मजा कहाँ…

तुस्सी प्यारे न्यारे ओ
कुज ते रेहम करो
साढ़े पिंड आलेय ओ…

हमारी ज़िन्दगी की दास्ताँ है जब जब,
अच्छा बनना चाहा लोग बुरा बना गए…

अधूरी ख्वाहिशें अधूरे
फलसफां का कारवां हूँ,
ज़िन्दगी बड़ी खूबसूरत
जीना फिर भी चाहिए…

अनार खाने का दिल था,
पाग़ल ने अंगूर दिखा दिए..

न तू राधा है न मैं कृष्णा,
आज तू भी बेवफा मैं भी…

अपने इश्क़ को पाबंदियों में न रख यारा,
खुली हवा जिया कर ज़िन्दगी हसीँ लगेगी !!

इश्क़ करना तो करो तुम बातें बहुत बनाते हो,
बेवजह छत पर बुला इंतज़ार बड़ा करवाते हो.!!

मेरे ख्याबों में तू मेरी सांसों में भी./
तू नहीं तो बता जियूं कैसे तेरे बिन.//

तेरे ख्याल से रोशन मेरी ज़िंदे की राहें,
कैसे करूँ तस्सव्वुर तेरे बिन जीने का..

किस बात पर शर्माना
जब दिल से दिल मिल चुके..
सांसों का मिलना बाक़ी
कुछ रश्म ओ रिवाज़ बाक़ी…

Qayal hai ye dil apki zrra nawazi ka,
Mere mehboob mujhe roz mula kar…

उफ्फ इश्क़…कम्बख्त
कितना नादाँ है,
सर चढ़ बोलता फिर
नींदें चुरा बीरान करता…

अपनी निगाहों के पैमाने से यूँ न पिला.!
कहीं इश्क़ हो गया तो बताओ क्या करेंगे…!

Ayenge jb milne
Rukh se naqab tum hta lena.!
Deedar krna hai
Hya se chehra na chhoa lena…!

दावा था जिन्हें मुहब्बत का.!
इक हवा के झोंके से बेवफा हो गए…!

अपनी निगाहों के पैमाने से यूँ न पिला.!
कहीं इश्क़ हो गया तो बताओ क्या करेंगे…!!

खूबसूरत घटाओ मेरे मेहबूब पर कुछ तो तरस खाओ .!
बानुश्कि घर से निकला तुम हो के करीब आने न देती…!

उफ्फ पहले ही हुस्न ए क़यामत कम थी.!
जो Reply न कर और कुफर करने लगे…!

न कर बेबाक निगाहों से मेरी आरज़ू.!
इतना खुसनसीब नहीं पा सकूँ तुझे..!!
मुझे हर तरफ तुम ही तुम नज़र आते,
तेरे दिए गुलाब को सीने से लगा कुछ राहत लेता हूँ…

मुद्दत से परेशान था,
कोई चैन चुरा ले ना…

दिल से बुलाया है
आएंगे ज़रूर 20 बाद,
वादा निभाना ज़रूर
अब देखती जाओ यारा..

हमनें कब कहा के मेहमान है
गर क़बूल तो दिल औ जान हैं

Betabiya is qaddar na bdhao
Jine ki aarzoo bdh jaaye..
Tah umar tera sazda karne ki
Khwahish jiggar kr jaaye…

Na kar meri muhabbt pr naaz…
Khuda ne mushqil nzrana diya…

Is tarah zindagi me shamil…
Chah kr bhi bhula na paun…
इक शाम का धुआं हुँ जाने कब उड़ जाऊंगा,
ले कर तेरी यादें संग दुनियां छोड़ जाऊंगा…

ये इंतखाब भी कितना बेकरार करता है,
आँखों से नींद दिल का चैन चुरा लेता है…

दिल में फ़क़त इक तम्मना है
तेरे करीब आने की,
पर ये न समझना एक तुम ही
प्यार करने के लिए…

हर सितम सहेंगे मगर
खुद पर ये सितम न करेंगे,
इस ज़िन्दगी में अब
कभी किसी से प्यार न करेंगे…

Garzprst jahan se
wafa ki umid na kr
Mtalb ki Duniyan
pyaar ki chaht na kr…

उफ़्फ़्फ़ ये अदा बेबाकियाँ और मौसम सुहाना,
मार डालेगी मुझ को तुझसे ये जुदाई की सज़ा…

Gar muhabbt ho jaye chli ana Sanam,
Kl bhi the aaj bhi deedar ke deewane…

शायर की ग़ज़ल का साज़ हो
झील में उगता गुलाब हो,
देखूं जिस और नज़र आते हो
मेरी ख्वाहिश ख्वाब हो…

कोई I ❤️ U कहे और Me 2 कहें,
खुदा जाने कब ऐसा करवाएगा हमसे..!

ये हमारी बदनसीबी उनके हो न पाए,
जिसने चाहा शिद्दत से न समझ पाए…

उम्र जे इस पड़ाव पर आ बहुत उदास हूँ..
सोचता इश्क़ तुझ से कर मुझे क्या मिला…

जिससे करनी उससे बात कर,
तेरी ज़िन्दगी जिसे सुपुर्द कर..

न कर मेरे दिल पर इस तरह राज़..
दुनियां रश्क़ करे हो तुझ पर नाज़…

खास तो खास होते ;
न भूलने कीआस होते..!!

इक नई सुबह नई शुरुआत
जीवन का यही सार,
जो बीत गया उसे भूल जा
वर्तमान का स्वागत कर…

वो जो हमारी होगी सिर्फ हमारी होगी,
न किसी को Reply न ही Like देगी…

न कर इतना गरूर खुद पर
एक तू ही नहीं तक़दीर वाली,
तेरे बाद भी ज़माने में कई
एक तू ही नहीं चाहने के लिए…

कितना झूठ दिन भर तो हमसे लड़ती रहती,
झाड़ू ले पीछे भागती ख्वाब कब देख लिया…

किताब ए इश्क़ का तर्ज़ुमा
करना तो सीखी,
हम हर लफ्ज़ से तहरीर ए वफ़ा
लिख देंगे…

बहुत हुए तेरे प्यार में पागल यारा
अब गुंजाईश नहीं,
एक वो दिन था रात इंतज़ार किया
अब ख्वाहिश नहीं…
.
जिन रिश्तों में गंभीरता न हो
वो रेत के महल जैसे होते,
हवा के हल्के झोंके से बिखर जाते…

चली हम भी रायपुर हो आते हैं
हीर की गली राँझा बन आते हैं,
सब्जी बेचै गाय चुगाएं या भेड़ें
एक नया फलसफां बन आते हैं…

मुहब्बत एक पाक रिश्ता है
रब्ब की इबादत जैसा,
मगर कुछ लोग बदनाम करते
वादा ए वफ़ा न निभा पाते…

तू ही मेरा रब्ब तू दिल ओ जान
ये सोच तुझे चाहा था,
मालूम न था एक पत्थर की मूर्त
को आँखों का नूर बनाया…
फिर एक वादा और उस पर फिर से दगा,
क्या यही मुहब्बत है इंतज़ार सिर्फ इंतज़ार..

खुद को बार बार आईने में देखा न करो.!
कहीं खुद को खुदकी नज़र न लग जाये…!!

ये वफ़ा के किस्से मुहब्बत के नग्में और कसमें वादे,
सब झूठ आज एक हाथ में तो दूजे से हों कसमें वादे…
बहुत हुए तेरे प्यार में पागल यारा अब गुंजाईश नहीं,
एक वो दिन था रात इंतज़ार किया अब ख्वाहिश नहीं…

इक रूहानी सी सूरत और
उस पर शोख अदाएं,
कैसे हो लफ़्ज़ों पर यक़ीन
मेरी हो और की नहीं…

मुहब्बत यूँ न कर
के भुला ही न पाए..
देखे जो भी शय
चेहरा मेरा नज़र आए…

मुम्मक़िन है ज़िंदगानी में लौट कर न आऊं,
तेरी नज़र बेवफा थी भला कैसे भुला पाऊँ…

शौक़ नहीं था दिल लगाने का..
तेरे हुस्न की खता दीवाने हुए…
चल आ जी भर के देख लूँ तुझे..
जाने फिर मुलाक़ात हो ना हो…

इससे बेहतर भी ज़िंदगी हो सकती थी..
गर तेरी वफाओं ने साथ न छोड़ा होता…

खता सिर्फ हमारी ही क्यों बताते हो..
क्या तुमने भी वफाओं से वफ़ा करी…

क्यूँ लड़ती हो जो इतनी मुहब्बत है..
अब Strike से उठो और हमे मनाओ…

चल बैठी रह फिर फोटोशूट करवा..
जब कोई गाड़ी पीछे से ठोकेगी तब देख…

शुकर है खुदा का वक़्त रहते हकीकत से रू-बरू हो गए..
इक बेवफा आवारा का होने पहले उनसे वाक़िफ़ हो गए…

इंतज़ार करें और कितना इंतज़ार करें
कई सुबह से रात और दिन हो चले..

माना इक दिन इक़रार भी होगा ज़रूर
सोचो जवानी के दिन बेकार हो चले…

यूँ मदहोश आँखों से
देखा न करो
कोई परिंदा राह भटक
परदेसी हो जायेगा..
इश्क़ की डगर बढ़
दीवाना पागल
तेरे दर अपनी सांसों की
डोर तोड़ जायेगा…

होंठों को छिपाने से क्या होगा
आँखें हाल ए दिल बयाँ कर रही..
हो रहा है प्यार धीरे धीरे इन्हें
शर्म ओ हया से पलकें झुक रही…

दिल ए नादां ज़रा धीरे धीरे मचल
अभी तो वो आये भी नहीं..
नज़रों से नज़रें मिलेगी क्या होगा
बैठ सामने वो शर्माए भी नहीं…

तुम गल्ती भी करो और हम उफ्फ तक न करें.
इतने नहीं तुमने घी के चिराग उल्फत में जलाये…

ए हुस्न अपनी जुल्फों में कैद न कर,
बैगाने घर में घुट घुट के मर जाऊंगा…

उस हुस्न ने बस दिल ही दुखाया,
जिसे चाहा अपना खुदा जान कर…

एक बार कह तो सही तकिया बन जाऊंगा…
बाँहों में भर रखना तुं यूँही करीब रह पाउँगा…

क्यों कपड़ों की तरह वो बदलते हैं दिल
आज लोग मुहब्बत को तमाशा समझते…

तू सच में इतनी सुन्दर है या
ब्यूटी पार्लर से लिप-टिप आई है..
सच सच बता दीवानों ने तेरे
पीछे मर-मरने की कसम खाई है…

किसी के इश्क़ में जीना.!
इबादत सी बात होती है.!!

मुहब्बत यूँ न कर
के भुला ही न पाए..
देखे जो भी शय
चेहरा मेरा नज़र आए…

ये वफ़ा के किस्से मुहब्बत के नग्में और कसमें वादे,
सब झूठ आज एक हाथ में तो दूजे से हों कसमें वादे…
बहुत हुए तेरे प्यार में पागल यारा अब गुंजाईश नहीं,
एक वो दिन था रात इंतज़ार किया अब ख्वाहिश नहीं…

चले हैं वो इश्क़ करने,
जिन्हें वक़्त पर ठहरना न आता…

हुस्न हया और सदिगी में होता,
रंग रूप तो आती जाती माया…
न रात सोई न सोने दिया,
फिर ख्वाब कहाँ देख लिया…

ये हमारी बदनसीबी उनके हो न पाए,
जिसने चाहा शिद्दत से न समझ पाए…

उम्र जे इस पड़ाव पर आ बहुत उदास हूँ..
सोचता इश्क़ तुझ से कर मुझे क्या मिला…

जिससे करनी उससे बात कर,
तेरी ज़िन्दगी जिसे सुपुर्द कर..

न कर मेरे दिल पर इस तरह राज़..
दुनियां रश्क़ करे हो तुझ पर नाज़…

खास तो खास होते ;
न भूलने कीआस होते..!!

इक नई सुबह नई शुरुआत
जीवन का यही सार,
जो बीत गया उसे भूल जा
वर्तमान का स्वागत कर…

वो जो हमारी होगी सिर्फ हमारी होगी,
न किसी को Reply न ही Like देगी…

‘लम्हें’


काश तूने कभी करीब आने की ज़िद्द की होती.!
खुदा कसम मुहब्बत की तस्वीर कुछ और होती.!!

अब तुझे भी मेरे बिन तड़पना ही होगा.!
सफर ज़िन्दगी का यूँही तय करना होगा.!!

ज़िन्दगी के सफर में अकेला ही रहा.!
वो मिले तो सही मगर बेवफा होकर.!!

इक अज़ीम शाम की अज़ीम दास्ताँ हो.!
खुदा ने तराशा जिसे फुरसत के लम्हों में.!!

जिसे चाहा था दिल ए जान समझ.!
वही मेरी मौत का सामान निकला.!!

न कर मुझ पर और मेरी मुहब्बत का यक़ीन.!
मगर मैंने तुझे अपने होंठों की मुस्कुराहट समझ.!!

ज़िन्दगी प्यार का नगमा है.!
जिसे गा कर गुज़र जाना है.!!

दर्द दिल का इस क़द्दर बढ़ गया.!
दुनियां में दवा कहीं नहीं इसकी.!!

Tujh se achhi to duniya hai.!
Km se km bewafa to nhin.!!

Unki baton se itna hurt hua.!
Duniya chhodne ka dil krta.!!

Mental pta nhin kiske liye sambhal rkha khud ko.!
Na kuch dikhlati hai tadpati hai bchati khud ko.!!

क्या खूब है उनकी अदाओं का आलम यारो.!
सही है भाई खुदा जब हुस्न देता अदा भी देता.!!

बेपर्दा हो शहर में यूँ ना घूमा कीजिये.!
जाने कब बहशी से मुलाक़ात हो जाये.!!

न बोल इतना झूठ के याद न रहे कब कब क्या बोला.!
याद रखने को किताब रखनी पड़े खुद को भूल जाये.!!

एक पत्थर से पूछा मुहब्बत क्या है.!
बोला सर टकराओ तो जानो क्या है.!!

उनकी मुहब्बत एक धोखा थी.!
आँखों में बेवफाई बातों में साज़िश थी.!!

पाक निगाहों को तरसती अब तो मुहब्बत.!
आज बेवफा भी सनम होने का दावा करते.!!

उस की मुहब्बत भी फरेबी है उस की तरह.!
क्या समझती पागल हो जायेंगे उसके बिना.!!

Kon kehta hai Muhabbt aaj zinda hai.!
Sb kitabi batein Wafa aj bewafa ho gyi.!!

Pahale baat kuch or thi maga Ab kuch aur hai.!
Kai dino Intzaar bad miln ki raat aaye pr Adhuri.!!

मांग में सजती थी झूठी मुह्ज़ब्बत.!
सच्ची होती तो हर दिन याद रखती.!!

Jhuth pr jhuth or kitne jhuth wo bolegi.!
Ab tk Kaid thi Clg khul the kitni se khelegi.!!

वो जो करते थे दावा प्यार का
दिल से निकाल बैठे हैं.!
कहाँ गई प्यारी वफ़ा की बातें
क्यों मुंह छिपाये बैठे हैं.!!

बस बहुत हुआ तेरे प्यार का झूठा इक़रार.!
वो दिन गुज़रे जब था रहता दिल बेक़रार.!!

Wo aaye msg chhoda or chale gaye.!
Bina sochey ke agla zinda bhi ya nyin.!!

जब दिल आये जवाब दे दिल आये चेहरा दिखा.!
सुनते वक़्त रुकता नहीं कहीं वक़्त गुज़र न जाए.!!

आँखें भी थक गई थी तेरी उड़िकान कर कर.!
सांसें थमने लग अब तेरी राह तकते तकते.!!

उनके चहरे देख ख़ुशी बिछड़ने के बाद.!
सोचा उनसे मिले ही क्यों थे यारो हम.!!

उन की यादों में रात कुछ ऐसे गुज़री.!
दिन में ही Good Night कहना पड़ा.!!

वादा न कर जो मुक़म्मिल न कर पाए.!
प्यार करने वाले तो जान दे भी निभाते.!!

न कर दुआओं में शामिल मुझको यूँ तूँ.!
खराब अधूरे रह जाएं तो दर्द बड़ा होता.!!

खुद तो सौ है जाती आराम से हमें जगा जाती.!
दिन भर कोसती रहती तुम्हें प्यार नहीं मुझ से.!!

ये तेरी मुहब्बत जा असर
ज़िन्दगी गुलज़ार हो गई.!
हर तरफ जलवे ही जलवे
जबसे आँखें चार हो गई.!!

न कर इस क़द्दर मुहब्बत
की फना हो जाए.!
आरज़ू मुक़ामिल न हो गर
तू तनहा हो जाए.!!

मुहब्बत दिखाने की चीज़ नहीं
महसूस की जाती.!
दिल ओ दिमाग पर छाई रहती
बगावत किये जाती.!!

तुमसे मुहब्बत है कितनी कह नहीं पाते.!
तुम हो की सितम पर सितम किये जाते.!!

Bistar par todti aaj Wafa
Pakdi jaate to Ulta ilzaam lga deti.!
Deti duhaai muhabbt ki
Beshq hr din jism ki fitrat bdl jaati.!!

Darr kr Muhabbt ki to kya Muhabbt ki.!
Dil se Wafa ki hoti to baat hi aur hoti.!!

रात को खाना छीना अब सुबह का नाश्ता भी छीन लिया.!
बस अपने मन की कर बेवफा ने मुहब्बत को रुस्वा किया.!!

न जाने ज़िन्दगी अब किस और ले जाएगी.!
पर यक़ीनन अब शाम तेरी गली न हो पायेगी.!!

मस्त मस्त है उसकी ज़िन्दगी सहपाठी यारों में.!
तभी न टाइम पाबन्दी न जलवा नई लश्कारों में.!!

उसके नां से ज़िन्दगी बसर करने की कसम खाई है.!
ये और बात उसकी निगाहों हमारी वफ़ा बेवफाई है.!!

Unki Aadt thi Wada kr na Nibhane ki.!
Yahi kmi rahi Rishton mein Daraar ki.!!

जलवा दिखाने का वादा किया था मगर
एक बार फिर से वादा निभाया न उसने.!
चाँद के दीदार में है परेशां दिल ये मगर
एक बार फिर से छकाया मन को उसने.!!

यहाँ कौन अपना है कौन पराया समझ नहीं आता.!
कभी इतने करीब हुए किसी के अब मन नहीं भाता.!!

जिस घर को बनाया था जतन से.!
घर के चिराग ने फन्हा करा ज़िद्द से.!!

इक अज़ीम शाम की अज़ीम दास्ताँ हो.!
खुदा ने तराशा जिसे फुरसत के लम्हों में.!!

कुछ नहीं कहना बस इतना ही कहना है.!
इल्ज़ाम लगाते कभी अपनी ख़ता देख लेते.!!

न कर मेरी ख्वाहिश को पूरा तू,
अरमां दिल का दिल में लिए चला जाऊंगा.!
तू कहती समझती हरजाई मुझे,
याद रख बाद में तुझे मैं बहुत याद आऊंगा !!

नफा नुकसान देखने का वक़्त किसे गर इश्क़ परवान पर.!
फुरसत मिली गर देख लेना हमने तन्हाई को कैसे जिया है.!!

तुझ से मुहब्बत कर हमें क्या मिला,
बेवफाई जिल्ल्य शर्तें और शिकायतें.!
हमारी खता थी प्यार की उम्मीद की,
चल बहुत हुआ दुनियां से अब चलते.!!

कुछ उदास हूँ कुछ नाखुश ज़िन्दगी से
सोचता हूँ तन्हा हो कर भी चाँद कितना हसीं है.!
मनचाहा हर किसी को नहीं मिलता यहाँ
जा रहा हूँ देखूंगा मैं भी मेरे बिन कितना खुश है.!!

Teri Khwahish tera Arman kiye Duniyan se jayeinge !
Pyaar Kitna hai Tujh se kuch aisa kar Dikha jayeinge.!!

जब से तुम बाहर जाने लगी
कॉलेज में नज़र आने लगी.!
भूलने सी लगी हो हमें यार
हाँ हाँ तुम बदलने हो लगी.!!

देख सामने नज़रों के हया में
दाँतों से होंठ दबा बैठे.!
पहला इस्तखबल किय ऐसा
उफ़ क्या सितम कर बैठे.!!

जो छुपते छुपाते वो प्यार नहीं करते.!
दीवानें कब कैद हुए आज़ाद ही रहते.!!

Ruk Ruk kr unka like dena ya reply.!
Kahin gair ki Bahon mein to nhin.!!

मुहब्बत..!


तीन लफ़्ज़ों का खेल नहीं मुहब्बत.!
साथ कुर्बानी वफ़ा का नाम मुहब्बत.!!

दिलदारियां..!


न कर मेरे काफिले पर वार तू
क़तरा क़तरा कर संजोया है मैंने l
बंद कर आँखें ज़रा सोचना तू
नफरती अँधियों से तूने क्या पाया ll

मुझे शौक़ नही है बेवफाई का
जैसे भी हो निभाता मैंने l
तू इलज़ाम लगाती रही फिर भी
दिल खोल सताया तूने ll

तेरी गली को भूलना गंवारा न था
तेरे बिन जीना कभी भाया तो न था l
तू करती रही शिक़वा कदम कदम
तेरे ख्यालों में भी तो कोई और न है ll

बेवफा.!!


तेरी बेवफा सी आँखों में,
वफ़ा की उम्मीद कैसी.!
तुझे शौक़ नए हाथ थामने का,
हमसे उम्मीद कैसी.!!

Thought of the day


Forgetting those who hurt you,But don’t forget those who hurt your feelings…

क़तरा क़तरा.!!


न कर मेरे काफिले पर वार तू
क़तरा क़तरा कर संजोया है मैंने l
बंद कर आँखें ज़रा सोचना तू
नफरती अँधियों से तूने क्या पाया ll

लम्हें


यूँ तेरा रुक रुक आना शर्मा चले जाना l
इक इशारा है तुझे भी प्यार होने लगा है ll

यूँ चेहरे को छुपा घर में न रहा करो
किसी शाम बाहर गली में मिला करो l
दिल मचल रहा बहुत कुछ कहने को
हाल-ए-दिल कहने का मौका दिया करो ll

मैं रहूं न रहूं हमारी मुहब्बत ज़िंदा रहनी चाहिए l
मेरे दिल में क्या है ये बात तुझी तक रहनी चाहिए ll

Dukh is baat ka nahin log kya kahte l
Gum is baat ka hai tum kya sochte ll

आज शाम रंगीन होगी
अपनों के बीच होगी.!
पर अधूरी ख्वाहिश होगी
मेरी ना तस्वीर होगी.!!

तेरी यादों को दिल में सजाये फिरते हैं
फिर भी कहते हो की हमें मुहब्बत नहीं.!
वक़्त आएगा यक़ीनन एक दिन देखना
फिर उस दिन हम नहीं मगर तुम भी नहीं.!!

हम रहेंगे न अब मगर ऐसा कुछ कर जाएंगे.!
वो ज़िंदा तो रहेंगे पर घुट घुट याद कर मरेंगे.!!
Silence……..
Is the best way for Self Control.

तेरी बेवफा सी आँखों में
वफ़ा की उम्मीद कैसी.!
तुझे शौक़ नए हाथ थामने का
हमसे उम्मीद कैसी.!!

लम्हें


यूँ छुप छुप न देखा करो हमारी प्रोफाइल को l
मुहब्बत गर दिल में तो सीधा वार किया करो ll

बचपन की मुहब्बत रूह की मुहब्बत होती l
न जिस्म की चाहत न रूप तंग की परवाह.ll

ज़िन्दगी में सब बर्दाश
मगर बेइज़्ज़ती नहीं l
वक़्त रहते वादा निभा
वरना ये ज़िन्दगी नहीं ll

कोई दिल का अरमाँ हो तो
लिख सकते हो.!
सुना है आज कल जनाब को
नींद न आती.!!

बेवफा दुनियां में वफ़ा की तलाश न कर.!
यहाँ एक चहरे पर कई चेहरे लगाते लोग.!!

इश्क़ इबादत ए इश्क़ पूजा l
जिनूँ मिल्या इश्क़ रब्ब ए ll

एक सहारे नहीं छोड़ी जाती दुनियां
जीवन तो आना जाना है.!
जो गुज़र गया उसे भूलना है बेहतर
अपनों के लिए भी जीना है.!!

यूँ न इतराओ इस जवानी के नूर पर,
उतर जायेगी एक दिन चढ़ो न खजूर पर.!
लोगों का क्या कब एतेबार उनका
किया कीजिये.!
खुद को बचाना है तो हिफाज़त
खुद ही कीजिये.!!

क्या निगाहें उठा झुका समझना चाहो,
दिल ना फिसलेगा तुझ हुस्न ए लंगूर पर.!!

कोई दिल का अरमाँ हो तो लिख सकते हो.!
सुना है आज कल जनाब को नींद न आती.!!

लम्हें


मेरे अरमानों की कुछ ऐसी होली जली,
दिल-ए-गुलशन की न खिल सकी कली.!

कभी फुरसत मिले तो पीछे मुड देखना ज़रूर.!
ज़िन्दगी में क्या ठुकराया और क्या खोया यहाँ.!!
कुछ अच्छा करने की चाहा में कई दिल तोड़ दिए,
मगर हक़ीक़त ये है यहाँ हक़ीकत की कीमत नहीं.!!

अपने दिल से पूछो ये सवाल क्यों प्यार करते हो,
कुछ तो हमारी भी खता होगी जो करते एतबार.!!

मुहब्बत में जिस्म से जिस्म का मिलना ज़रूरी नहीं,
अफ़सोस आज बिस्तर बिन मुहब्बत मुक़म्मिल नहीं.!!

रात को तेरी नज़रों में बसने वाला नवाब हूँ मैं,
सुबह उठ Unfollow करने वाला ख्वाब हूँ मैं !!
जली कटी सुनाने में तेरा कोई भी तोड़ नहीं,
तेरा प्रेमी कोई और है मुझ पे तेरा ज़ोर नहीं.!!

जैसी भी तुम हो मेरी नज़रों का नूर हो,
चाहूंगा ताह उम्र बेशक तुझे नामंज़ूर हो.!!

हर Atitude रखने वाली को Unfollow कर दिया,
क्यूंकि हम भी Handsome हैं और Atitude रखते.!!

हाँ जी हाँ क्यों न करेगी साइंस की पढ़ाई दूजे की
तस्वीर जो दिल में बसाई,
जाती है मेरी जान जाये तेरी बला से तूने तो करनी
चढ़ाई खानी है रस मलाई.!!
एक काम कर बोरिया बिस्तर उठा और सीधे मेरे,
घर चली आ जो सच में थम सा गया है सब कुछ !!

हक़ीक़त में जीना है
हक़ीक़त में मरना,
हक़ीक़त ये है की तू
अब मेरे पास नहीं.!!

कोई बात दिल से कह के सारी उम्र तुझे याद रखूं,
दिल को छु जाए तुझे अपना बनाने की चाहा रखूं.!!

ये ऊँची इमारतें किस काम की गर दिल में सकूँ नहीं,
गरीब की झोंपड़ी में जा देखो मुहब्बत की गंगा बहती.!!

मेंढक जैसी आँखें इसकी
घोड़ी जैसी चाल,
सर पर लगा के टोपी रखे
छुपाती गंजी बाल.!!

इक बार हाँ तो कर खुदा को भी मना लूंगा,
तक़्क़्दीर का क्या फिर पल में बदलवा लूंगा.!!

मृत्यु वास्तविकता है किन्तु
इंसान फिर भी मोह माया
नहीं त्यागता !!

उनकी आँखें हैं जैसे
फलक पर चमकते
हैं रोशन सितारे,
आधी रात को भी
जगती याद करा करा
हो गए हम बेचारे !!

क्या सच में इतनी सुन्दर हो या डी पी में चुराई पिक लगा बैठी हो,
सच सच बताना तड़पाओ ना कई दीवानो का चैन ही चुरा बैठी हो.!!

बहुत कुछ जहाँ में तेरे मांगने के लिए,
एक हम ही नहीं ज़रूरी जीने के लिए !!

एक को चाहेंगे एक को पूजेंगे और उसी खातिर जान देंगे ,
वो कभी पसंद नहीं एक को ख्वाब दिखा दूसरे भी साथ रखें..!

ज़िन्दगी में आज दिल का साफ़ होना गुनाह हो चला /
अबतो किताबों में ही ये शब्द बहुत अच्छे लगते यारो //

ज़िन्दगी बहुत प्यार तुझ से किया है हमनें मगर l
तेरी आदत बेवफाई की एक दिन कर के रहेगी ll

ये जो छुप छुप रातों को बात करती हो l
सच बोलो क्या दिल से प्यार करती हो ll

बहुत शौक़ है ना I Love U Love U करने का l
चल आ रोज़ रात 11 से 3 Duty पर ll

एक तेरी पढ़ाई फिर अदाओं का सितम l
मारडालेगी एक दिन हमें फुर्सत में सनम ll

वक़्त रहते जो सम्भल जाते
तो अच्छा था l
मगर उसे आदत थी हर बात
बहसबाज़ी की ll

ज़िन्दगी बहुत प्यार तुझ से किया है हमनें मगर l
तेरी आदत बेवफाई की एक दिन कर के रहेगी ll

उन्हें दीखते हैं बस “रवि” अपने रंज ओ गम l
कभी फुरसत निकाल इन आँखों के आसूं देख लेते वो ll

बुझने से पहले लौ की फड़फड़ाहट है l
दिया प्यार का जो हमनें जलाया था ll

All chapters are feel good,
If your partner is Loyal

एक तेरी पढ़ाई फिर अदाओं का सितम l
मारडालेगी एक दिन हमें फुर्सत में सनम ll

ये जो छुप छुप रातों को बात करती हो l
सच बोलो क्या दिल से प्यार करती हो ll

अपने मौत का मंज़र दिखा वफ़ा साबित कर जाएंगे l
मेरे मेहबूब इक तुझे ही आखिर साँस तक हम चाहेंगे ll

ना शौक रख गलतफ़हमी का l
हम जाते तो वापिस न आते ll

बेशक मौत तो एक दिन आनी है
ज़िन्दगी हसीं है बात पहचानी है

उन को कुछ यूँ चाह बैठे हैं
के ये दुनियां भूल बैठे हैं l
सोते जागते उनका तस्सव्वुर
दिल से मजबूर हो बैठे हैं ll

दिल की तो बात न कर “रवि’ सम्भल l
आजाये तो जीना मुश्किल हो जाता है ll

खुद से और खुदा से भी किया इश्क़ l
ज़िन्दगी तो वही जो तेरे साथ बसर हो ll

चाहत का सरूर है मुश्किल भरा
जिसे चढ़ा बर्बाद हो दर दर फिरा

फन्हा होती ना मुहब्बत आज नहीं l
सरूर ए उल्फत ने रुस्वा ही किया ll

मंज़िल गर सामने हो”रवि”तो l
मुक़ाम खुद बखुद मिल जाता ll

इक बार राज़ ए दिल तो बता फिर देख l
मक़सद मिलते ही मंज़िल असां हो जाये ll

शुभ रात्रि शब्बा खैर Good Nigh l
ज़िन्दगी रही तो मिलते “रवि”दोबारा ll

ख्यालों की बस्ती है,
जो चाहे दिल बना लीजिये l
ज़िन्दगी यहाँ सस्ती है,
प्यार की उम्मीद न कीजिये ll

सुप्रभात..!! 🙏🌹🙏

ज़िन्दगी अनमोल है
बे-मोल की नाराज़गी ll
देखो यूँ रूठा न करो
किसीको याद आती है ll

तेरे क़दमों में तेरी पन्हाओं में रहते हर निगहाओं में /
फिर भी तुम्हें यक़ीन न तो जाँ दे देते हैं तेरी राहों में //

Mere mehboob mujhe apni bahon ka sahara de /
Jin mein so kar main sakun se zindagi basar kr skun //

जिसने न पाया विश्वास किसी का
उसका वज़ूद खत्म हो गया l
बेशक हो वो कितना भी मशहूर
जीने का मकसद खत्म हो गया ll

उतारी हमने क़िश्ती इश्क़ के दरिया में l
किनारे लगाए उस साहिल की तलाश में ll

नज़रें ज़ुबाँ बन जाती सासें पैगाम l
इश्क़ के मौसम में ऐसा हो अंजाम ll

एक सर्द सुबह ज़िन्दगी की फिर नसीब हो आई है l
कौन जाने वो आखिर शाम फिर सुबह नसीब न हो ll

आँधियों ने कुछ कहा तूफ़ान ने कुछ,
मगर ज़िन्दगी हर वार सह आगे बढ़ती गई l
यही जीवन है यारो यही एक हकीकत,
वक़्त का जो सामना करे वही नैया पार हुई ll

तेरी चूडियाँ और माथे की बिंदिया
मेरे दिल का चैन चुराती हैं l
फिर कहती तुम न इश्क़ करो भला
सामने क्यूँ सजधज आती है ll

Dear God.
Let every person
fulfill their desired
wish,Except evil.

अखियां उडीकां कर कर थकियाँ,
कब आओगे बोलो न l
के महारि सज़ा केसे महारा कसूर,
कद मानोंगे बोलो न ll

ज़िन्दगी की आखिर शाम,
तुम्हारी जुल्फों तले गुज़रे l
यही दुआ है बस क़बूल हो,
मौत भी कुछ हसीं गुज़रे ll

At one stage
I think we’re
made for each other,
but very next seconds
I think
our thinking is different.

जो न कर पाया अपने
माता पिता की सेवा छोड़ उन्हें l
उसके पास सब कुछ पर
दुनियां का विश्वास अधूरा ll

रात गुज़रो है तेरे ख्यालों में,
सुबह को फिर भी तू न आई l
यूँ एक दूसरे से दूर हो जाएंगे,
कभी ये बात गवारा न हो पाई l

बहुत लफ़्ज़ों में नहीं चंद दिल-ए-अल्फ़ाज़ ही काफी हैं बयाँ करने को गर गर्व से कहते हैं l
एक वतन एक जान हैं एक को छोड़ सब बहिन भाई हैं हिंदुस्तान हमारी शान है ll
Life is a Challenge,
Except it’s each & every
Movement.of your
Life…..

तूने क्या खोया है क्या पाया
याद आएगा साथ गुज़रा वक़्त मेरे जाने के बाद l
दुनियां का दस्तूर न क़द्दर कभी
रंग लाती हिना”रवि”पत्थर पर पिस जाने के बाद ll

ज़िन्दगी के दौर में ये मैं कहाँ आ गया
पतझड़ के मौसम सा जैसे मैं मुरझा गया हूँ l
शाख से टूटे पत्ते सा वज़ूद है आज मेरा
दुनियां-ए-रंज-ओ-गम सहते कहाँ आ गया हूँ ll

ऐसी कोई वजह भी तो बता
के दिल से निकाल पाऊं तुझे l
बड़ी सिद्दत से घर में बिठाया
ये घर अब उझड़३ पाऊं कैसे ll

वादा..!
चिराग उल्फत के
जलाये रखना
वादा है शाम तेरी
गली ही होगी ll

सकूँ मिलता गर बाज़ारों में,
लोग दर दर क्यूँ भटकते फिर l
अमीर के घर गूंजते कहकहे,
गरीब सकूँ से रात सौ न पाता ll

तूने क्या खोया है क्या पाया
याद आएगा साथ गुज़रा वक़्त मेरे जाने के बाद l
दुनियां का दस्तूर न क़द्दर कभी
रंग लाती हिना”रवि”पत्थर पर पिस जाने के बाद ll

हम भी गैर हैं और की हैं अमानत l
रूठा न कर दुआ है तू रहे सलामत ll

सकूँ मिलता गर बाज़ारों में,
लोग दर दर क्यूँ भटकते फिर l
अमीर के घर गूंजते कहकहे,
गरीब सकूँ से रात सौ न पाता ll
झूठी थी वो और झूठी उन की मुहब्बत l
ज़रा सी आँख हटी गैर बाँहों में समा बैठे ll

न टूटे दिल से बात कर ज़िन्दगी न मुश्किल मिलती l
खुदा की हर बात में वजह अपनी राजा यही जाने ll

इक उम्र के बाद मंज़िल और न ही
ठिकाने का पता l
ख्वाहिश भी अपने हाथ न होती
न पूरी होने का पता ll

शाहजहां ने बनाया मुमताज़ महल
उनके प्यार की निशानी है l
ये मेरे शेर ओ शायरी तेरी नज़र है
दुनियां दोहराये वो कहानी है ll

अगर तन्हाई ल सताने लगे याद हमारी आने लगे तो l
चले आना ये घर पहले भी खुला था आज भी खुला ll

मेरा खत मेरा है पैगाम
इस मिटटी इस वतन के नाम l
जीने मरने की चाह है तो
ज़िन्दगी हो अपनी देश के नाम ll

मेरा एक सपना है कोई मुझे चाहे अगर
वो मुझे चाहे वही वही मेरा अपना हो l
और को ना देखे और को ना चाहे फिर
उसकी आँखों में बस मेरा ही सपना हो ll

Happy Gurunanak Jainti..!

दिल नाल दिल तै
बन्दे नूं बंदा समझो l
एही गुरुनानक जी दी
सच्ची अरदास ll

छुप छुप कर न देखा करो के
शक में पड़ जाएँ l
इस क़द्दर भी न चाहो न मिले तो
मर ही न पाएं ll

Yun zor se na hansiye l
Dil kaanch ka tut jayega ll

“लम्हें”



हाँ मैं शराबी हूँ पी है
तेरी आँखों के छलकते पैमानों से
लबों पर तबस्सुम की कहकशां से
सांसों की महकती खुशबु से
तेरे लौंग के लशकारे से
हाँ मैं शराबी हूँ पी है…
सुराहीदार गर्दन से
तेरी लचकती कमर से
यौवन भरी अंगड़ाई से
पैरों की झांझर से
हाँ मैं शराबी हूँ पैर है…

ना रखिये ज़मीं पर यूँ नाज़ुक कदम मैले हो जाएंगे l
कहती किसी दीवाने से फूल ज़मी पर ला बिछा देता ll

जो हाल उधर है तेरा वो हाल इधर मेरा भी है l
पलकें खुलें बंद रहें चेहरा तेरा ही नज़र आता ll

सत्ता का नशा.!!

जब तक है ज़िन्दगी
कुर्सी मैं न छोडूंगा l
कुर्सी की चाहत ऐसी
सारे रिश्ते भूलूंगा ll

चल पंछी वापिस उन घरोंदों को जहाँ तेरा रेन बसेरा l
इन ऊँची ऊँची इमारतों में ज़ज़्बातों की कीमत कोई नहीं ll

सुना था प्यार में लोग पागल हो
अंधे हो जाते देख भी लिया /
सबूत पर सबूत मिलने बाद भी
कोई आबरू लुटाने को तैयार //

अतीत याद रखना
चाहिए,किन्तु अतीत
में जीना नहीं चाहिए
उससे प्रगति रुक जाती l

उफ़ क्या गुनाह किया
उनसे तस्वीर मांग /
इतरा बोले मेरे पास नहीं
मुस्कुरा चल दिए //

खुदा हुस्न देता तो
नज़ाकत दे ही देता /
इश्क़ को तड़पाने की
आदत दे ही देता //

मिलना फिर बिछड़ना फिर मिलना न हो तो /
मुहब्बत के फलसफां सब मशहूर न हो जाते //

शक्ल तेरी तो देख ली खूबसूरत है /
काश दिल देखने जा आइना होता //

दुआ कभी तुम अच्छी भी मांग लिया करो /
है मुहब्बत तो कभी इज़हार कर दिया करो //

गर मुहब्बत हो पाक हर बात मेहबूब की अच्छी लगती /
वैसे इश्क़ में कैसी खता क्या गिला इसमें भी मुहब्बत होती //

ज़िन्दगी गुजर सकती तेरी
पान्हाओं तो अच्छा था /
जब मुकद्दर ही साथ न हो
फिर तेरा गुन्हा क्या था.//

ना दिन का चैन है अब
ना रातों को क़रार हमें /
सुनाते हमें दीवाने हुए,
तुम्हारे इश्क़ में सनम //

क्यों रातों को चुपचाप
छुप कर सो जाता है /
चल छत पर आ तुझे
चाँद बहाने देख लूंगा //

मार डालेगी तुझे
ये साइंस की पढ़ाई /
बदले में मिलेगी
लगता मेरे को जुदाई //

कभी रात दिन तुम भी हमारी तरह रहा करो /
उठते बैठते और ख्यालो में भी याद किया करो //

तेरा दिल तो नादाँ है,
मेरे दिल से गुस्ताखियाँ न करा /
न आ यूँ करीब और करीब,
तेरी सांसों से डर लगता //

हमनें देखा है ज़माने को बड़े करीब से /
ज़िन्दगी वही जो तेरे साथ बसर होती //

ए हुस्न मुझे यूँ
बेबाक नज़रों से न देख l
फरिश्ता नहीं हूँ
न जाने कब बहक जाऊँ ll

आगे से न लोगी,
पीछे से भी न लोगी /
तो क्या रिश्वत,
टेबल के नीचे से लोगी //

चाँद सितारों की ख्वाहिश की.
जो मिला उसी को सरहाया
फिर भी बेरहम था…
गैर की हो गैर निकली वो मूरत
जिसे चाहा शिद्दत से अफ़सोस
शायद वक़्त बेरहम था…
वतन खातिर जां देने की तमन्ना
मगर दिल की दिल रही हसरत
ज़माना जो बेरहम था…

ज़िन्दगी तेरी बाँहों में यूँ ही
गुज़र जाए तो अच्छा /
मगर हर किसी की ख्वाशीषें
मुक़म्मिल तो न होती //

लम्हें


  

दिन ज़िन्दगी के यूँही कट जाएंगे /
तेरे साथ ही गुज़रे यही आरज़ू है //

ज़िन्दगी में अक्सर ऐसा क्यों होता यारो /
जब सच सच बोलते लोग झूठ समझते //

मेरे हाथों की चूड़ियां हैं श्रृंगार तेरे नाम का /
बता तूने कहाँ कहाँ लिखा रखा मेरा नाम //

कोई फायदा नहीं
ज़ुस्तज़ु ए तमन्ना करने का /
आज इश्क़ नहीं
लोग व्यपार किया करते हैं //

You’re only one in my life /
I mean to say Special one /

यूँ चाँद को तुम न देखा करो घूर घूर कर /
उसका दिल आ गया तो मेरा क्या होगा //

Chase your Goals own. Nobody supports you without his interest.
So please fight for your target. Then you enjoy your life with full confidence.

बाते ही ना उनकी वो खुद भी हैं बेमिसाल l
जिन्हें मिले साथ आपका हो जाये बेमिसाल ll

न छुड़ा मेरे हाथों से अपना हाथ /
बमुश्किल से मिलता चाहने वाला //

सामने हो जो हुस्न का बहता दरिया तो l
कैसी परवाह बस डूबने को जी चाहता ll

जन्म जन्म का है नाता मेरा तुम्हारा सजनवा l
ये और बात तुझे सात फेरों पर भी यक़ीन नहीं ll

अपनी भी हालत कुछ यूँ ही थी,
दिल में इक तुझे ही सज़ा रखा /
तुझे ही पूजा तेरा ही तस्सव्वुर,
जान को तेरी अमानत बना रखा //

मुझे अपना बनाना चाहते थे,
मैं मिली भी मगर गैर की हो l
तुम जीत कर भी प्यार मेरा,
क्यों मेरा श्रगार ना बन सके ll

Don’t say Sorry,
There is no scope for it
in friendship.
If somebody
believes in
this Word he’s
not you
with by Heart

कितना नखरा है तुझे अपने हुस्न पर,
हमसे क्या बहुत इत्तर हो /
पिया मिलन की छह रखती दिल में,
पर नाक पे नखरा लिए हो //

ना कर ख्यालों में भी याद मुझे /
चला गया जहाँ से तो तड़पेगी //

तुम इस तरह से ख्यालों में रहते हो /
ज़िन्दगी तुम बिन अधूरी सी लगती //

हर शाम ये ख्याल आता कल शाम भी होगी l
वक़्त का क्या है भरोसा जाने कब शाम होगी ll

लम्हें


अब पाक-ए-वफ़ा का ज़माना न रहा l
मुहब्बत तो करते निभाना न जानते ll

आपके जिस्म में रूह
अपनी देखते हम l
आपकी आँखों से देखते
अब जहाँ हम ll

अपनी अपनी बिसातें अपनी हैं सब की कहानियां l
जीवन है सारा जाता और फिर बदलती कहानिया ll

यूँ तो इस दुनिया में
कई करते हैं यहाँ वास l
इक तेरी ही श्रद्धा दिल में
इक तेरी ही आस ll

दुनियां के मेले में
आज हम सब अकेले हैं l
कहने को रिश्त हैं
आजमाएं तो मुंहबोले हैं ll

दो पल फुरसत के निकल,
चली आना ख्यालों में /

कब रात होई कब दिन गुज़रा
तुम में हम ऐसे उलझे सुच बुध अपनी भूल गए l
हर लम्हा रहता इंतज़ार तुम्हारा
अपनों में रहते भी हम घर ही अपना भूल गए ll

जीवन अतीत से आगे भी,
निकल रौशनी तलाश में //

वो काफिर होगा जो दगा दे गया
मुहब्बत कर मुहब्बत रुस्वा कर गया l
लोग कहते हैं उन्हें पाक वफ़ा हूई
माईने जानते नही प्यार कैसे हो गया ll

ए दिल अब चल उस ज़हान को जहाँ प्यार से प्यार हो l
न जाति का बंधन न मज़हब की दीवारों बस एतेबार हो ll

इक बार जिसे दिल से निकाल दिया l
फिर घर बनाने की इज़ाज़त ना देते ll

Please Respect Innocents..!

नादाँ कली बेक़रार थी
फूल बनने को मगर l
भंवरा करीब हो भी ख्याल अपने
आंगन का कर गया ll

वो हमें कहते है तुम अभी
बच्चे हो ABC भी न जानते /
काश दिली कह पाते तुम्हीं
हमारे टीचर बन जाओ ना //

शराब में डूब कर गम भुलाये जा सकते बस कुछ पल को,
ज़िन्दगी कटती नहीं मगर भुलाये अपनों को कुछ पल को.!!

चिराग ए उल्फत यूँ न जला,
यहाँ हर शाख पर अंधेरा है /
लोग करते हैं मुहब्बत यहाँ,
मन की प्यास मिटाने लिए //

जीवन में यदि आप किसी की
इज़्ज़त करते हों और उनसे
दिल से बात करें किन्तु वो
आप से कहें…
“टाइम पास कर रहे”
कैसा लगेगा ?

मेरी तस्लश मेरी ज़ुस्तज़ु
है तेरे नाम से /
तू नहीं तो बता क्या रखा
है अब जीने में //

मम्मी अक्सर कहती
बेटा किसी लड़की का दिल न तोडना ll
अब उन्हें क्या कहें
आज कल उनके पास दिल होता कहाँ ll

कभी सोचा न ऐसा भी कभी बन जाऊंगा l
तू न मिलेगी तो जमने को आग लगाऊंगा ll

नज़र से नज़र मिला दिल चुरा ले गए /
देखा सारी दूनियाँ में मशहूर करा गए //

तुम उतनी हसीं न जितना सर चढ़ा दिया l
मान मेरा अहसान मशहूर तुझे करा दिया ll

तुम जैसी भी हो मेरे
ख्यालों की ही मूरत हो /
मेरी नज़रों से कोई
देखे कितनी खूबसूरत हो //

किताबों में मिलते आज चर्चे अब मुहब्बत के l
नए ज़माने में इबारतें पाक ए वादा बदल गई ll
ताली एक हाथ नहीं दोनों और से बजने लगी l
खुदगर्ज़ वो ही नहीं अपनी भी आदत बदलने गई ll

मेरे मुस्कुराने की वजह तुम हो l
लोग समझते बेवजह मुस्कुराता ll

अपने दिल की लिखूं तो क्या कहूं
कम्बख्त तेरा चेहरा सामने आ जाता l
जिधर देखूं तू ही तू नज़र आये अब
क्यूँ तेरा ख्याल न जीने न मरने देता ll

किसी को पैसे की,
किसी को जिस्म की,
कोई भूखा शोहरत का l
कुर्सी की चाहत है,
इंसानियत से धोखा,
क्यूँ हो गए हवस के पुजारी ll

ज़िन्दगी एक सफर जो गुज़रता जा रहा मगर /
जाने कब ज़िन्दगी की गाडी रुक जाए न खबर //

उन्हें Wait करने की आदत न थी और हमें Tine पर आने /
अब गाड़ी प्रेम की बड़े भी तो कैसे कोई रास्ता बता दो //

तेरी मुहब्बत थी तो जीने का मक़सद भी था,
तू नहीं क्या मज़ा दुनियां में l
कोई वजह ऐसी बता तेरे बिन जीने के लिए,
क्या रखा तेरे बगैर दुनिया में ll

मुसाफिर हूँ पल दो पल का
सफर जाने कब खतम हो जाए /
एक अनजान सी डगर जीवन
जाने इसे मंज़िल कब मिल जाए //

देख तुझे प्यार करना तो कर नहीं भी चलेगा
मगर please मुझे भैया न कहना /
नहीं बनना तेरे बच्चों का मामा मुझे कल को
देख please ये कुफर मत तोलना //

बेचैन कर रही हैं ज़िन्दगी में उम्मीदें /
कुछ पूरी होंगी तो कुछ अधूरी रहेंगी //

तू पट जा इक बार
तेरी मम्मी को भी पटा लेंगे l
अरे मम्मी तो क्या
तेरे पापा से भी हाँ करा लेंगे ll

यूँ छुप छुप घूर घूर
क्यों देखती
हो प्रोफाइल हमारी l
नज़र लगा दोगे तो
बिन दवा मर
जाएंगे लोकदोन में ll

ए बिसाले सनम एक बार आ चेहरा तो दिखा जा l
थक गई आँखें सांसें खुदा हाफिज कहना चाहती ll

ये मुस्कुराती कलियाँ
जीने की नई आस दे जाती हैं l
दुनियां अब भी हसीं
उम्मीदें जगा सकूँ दे जाती हैं ll

यूँ तीर ए नज़र न चलाओ
ज़माना खराब है l
हो जाए ना घायल सम्भल
वक़्त बेईमान है ll

इंतज़ार मिलने का है दिल है बेक़रार भी
मगर जब सामने होते सोचता क्या कहूं या सुनता रहूं l
ये दिल की नेताबिय बड़ी अजीब होती
जितना मिलने का इंतज़ार होता बाद इतना ही इंतज़ार ll

वो पूछते बड़ी मासूमियत से
हमें क्या उनसे प्यार है
क्या बताएं उन्हें खुदा की हर
शे से हमें मुहब्बत है…
और इस आबो हवा में उनके
तन की खुशबु भी है
क्या अब सासें लेना छोड़ दें
सांसों से मुहब्बत है…

किस्मत से मेरे पास थी
किस्मत से ही दूर है
रब्ब करे किस्मत से ही
फिर मिल जाए मुझे…
किस्मत है तो सब कुछ
बिन इसके कैसे जियें
मेहनत बड़ी चीज़ माना
न किस्मत तो न मिले…
किस्मत के खेल निराले
रंक बने राजा कभी
न किस्मत हो तो राजा
भी फ़कीर हो जाए…

जिस शाम गुज़रो हमारी गली,
मौहल्ले की सब लड़कियां रुठ जाती l
अब तुम ही बताओ क्या करें,
क्यों इसमें भी हमारी खता ढून्ढ लाती ll

I’m a mirror,
Without me,
Everyone is invaluable.
But I wish,
Smiles on everybody’s
Face…

उसे आदत है
भैया भैया कहने की l
हमें चाहत नहीं
मामा कहलाने की ll

लम्हें


इश्क़ गैरों से जो हम करते
तेरी गली क्यूँ रोज़ गुज़रते l
तुम्हें ही चाहा तुम्हें ही पूजा
बेवजह हो क्यूँ शक करते ll

मुहब्बत भरे दिए जब जब कोई रोशन करे
दिल से आह निकले l
परेशां है दिल बेवरार है दिल उसके बिना मैं
उदास हूँ बस उदास हूँ ll

तेरे दीवाने होंगे कई
मेरे पास एक तू ही है l
तुझे न प्यार मगर मेरी
दुआओं में तू शामिल है ll

जो बिक जाएँ रवि वो रिश्ते कहाँ l
हालत तो बिगड़ते संवरते रहते हैं ll

कितना असां होता इन हुस्न वालों के लिए कहना
हमें तुमसे प्यार हो गया l
जब ज़मीं नीचे की हकीकत देखिये तो पता चलता
दिलों से खेलना आदत है ll

क्या खूब हंसी है इन लबों पर
खुदा सलामत रखे l
नसीब होगी न जाने किस को
हमारा ख्याल रखें ll

तकिया समझ न बींच बाँहों में,
कम्बख्त हमारी जान निकल जाएगी l
छाती के इतना करीब रखेगी तो,
खुद ही सोच रातों को कैसे सो पायेगी ll

इतना करीब न आईये बेपरवाह हो,
मुहब्बत रब्ब की इबादत की तरह l
कुछ रस्मों रिवाज़ों की बंदिशें होती,
पाक ए वफ़ा न करो नुमाइश तरह ll

मीर की ग़ज़ल सी तेरी आँखों की रुबाई,
छलकते जाम ए पैमाना बन मुझ में समाई l
आ करीब मेरे दूर दूर से ले क्यों अंगड़ाई,
क्या हुस्न पाया है तुझमें दिखे सारी खुदाई ll

वो भी क्या करता उसकी भी क्या खता थी /
मेहबूब की आँखों का नशा सब भुला देता है //
वो फिन और थे जब वतन परस्ती हर दिल थी l
तुम कहा हो जल्दी आओ ऐसे वीर नौजवानों ll

तुम उतनी हसीं न जितना सर चढ़ा दिया l
मान मेरा अहसान मशहूर तुझे करा दिया ll

तुम गुणा की शहज़ादी हो या मोरेना की
कोई फर्क नहीं l
हम बस ये जानते युवराज हैं ग्वालियर के
तुम पहचानते नहीं ll

कद से छोटी हो बेशक चलेगा👌👌
पर नाक से लम्बी न हो👃👃
क्युकी नाक पे गुस्से वाली सुन्दर लगती💘
फिर मर्द का जॉब पर जाना मुश्किल हो जाता💗💗

किसी न किसी की वफाओं में कमी थी l
वरना मुहब्बत यूँ कम ही मंज़िल न पहुंचे ll

ये बहकती आँखे और चाँद सा मुखड़ा
काफी हैं क़तल करने जे लिए l
इतरा कर आना मासूमियत से कहना
हम गुनहगार नहीं खुदा कसम ll

सुबह हो तो ऐसी चाय की चुस्कियां l
उनकी मुस्कान और खनकती चूड़ियां ll

हमसफ़र मिलता कोई न कोई ज़रूर l
वक़्त रहते ना पहचानते होते मगरूर ll

खामोश रहने की आदत न थी l
मुहब्बत ने मगर होंठ सिल दिए ll

जिसे होगी मुहब्बत सच्ची सच्ची l
करेगी हर बात वो अच्छी अच्छी ll
लड़कियां होती नहीं बच्ची बच्ची l
लड़के खुदही कराते कच्ची कच्ची ll

सुना था प्यार में लोग पागल हो
अंधे हो जाते देख भी लिया /
सबूत पर सबूत मिलने बाद भी
कोई आबरू लुटाने को तैयार //

सकूं भरी ज़िन्दगी मिलती
सागर किनारे l
साहिल की बाहों का सहारा
लगा दे किनारे ll

“लम्हें”


गर दिल में बसा चाहो किसी को
खामोश दिल भी चहकना सीख जाता

कसम खुदा की हंसने का दिल तो बहुत करता
मगर क्या करूँ तू मेरे करीब भी तो कम रहता

तेरा यूँ चाय पर बुलाना
नज़रें झुका मुस्कुराना
बनाता दिल को अपना
दिल का है दीवाना

एक बार आजमाओ तो सही
दिल के बदले दिल ही दोगे

चुलबुल से हम
बुलबुल सी तुम
होले हौले हम
करीब आ रहे हैं

कुछ ऐसी हवा चली यारो
सब को अपना गम प्यारा

मुसाफिर हूँ कुछ पल का
अब चले जाना,
तेरी यादों को साथ लिए
रुखसत हो जाना..!

तुझे चस्का फॉलो लड़के करने का
हमें मगर मंज़ूर नहीं,
बेवफाओं की फितरत ही ऐसी होती
तेरा कोई कसूर नहीं..!

शिद्दत से मुहब्बत की थी इक बेवफा से,
मालूम न था वो झूठी उसका प्यार झूठा..!

दम भरते हैं आजकल वो भी
जिन्हें मुहब्बत की ABC नहीं आती..!
आशिक़ बदलते पल पल जो
बातें वफ़ा की करते ज़रा शर्म न आती ..!

जीवन के सफर में
उस के बिछड़ने का गम क्या होगा,
जिस के आने से
सिवा दुःख और कभी कुछ न मिला..!

ज़िन्दगी वही
जो देश की खातिर फन्हा हो,
वो मौत हसीं
होगी जो वतन के काम आये..!

उनकी आरज़ू में कुछ ऐसे हुए,
हर वक़्त याद सताती है..!
देखें जिस और हर शे उन की,
तस्वीर नज़र आती है..!

तोहमतें न लगा
दिल ए यार पर,
खुद भी तो कम
गुनहगार नहीं. !

ए ढलती शाम ज़रा रुक जा अभी,
कई ख्वाहिशें और काम अभी बाकी है..!

लगा के लड़कों की फोटो
डरामा कर रही है,
समझती बेवकूफ दमादम
लड़कों से लगी है..!

ज़िन्दगी तेरे ख्वाबों की पनाहों में गुज़र सकती तो अच्छा था,
ताह उम्र तेरे बिन गुज़र करने से अच्छा है फिर मर ही जाएँ..!

ताह उम्र साथ निभाने की कसम खाई है,
तेरे बिन जीने में हमारी रुस्वाई है..!
तेरे अलविदा कहने से गर भूल सकते तो,
तेरे वादों से ये भी हमारी बेवफाई है..!

यूँ निगाहों के तीर
ना चलाया करो,
कोई बेमौत मर
जायेगा खुदा कसम..!!

Lamhey


I’m mirror,
Without me,
Everyone is invaluable.
But I wish,
Smiles on everybody’s
Face…

बारिश का मौसम हो
साथ में तुम हो,
हाथों में गर्म पकोड़े हों
साथ में चाट हो.!!

वो बेवजह हमें गुनहगार बना गया,
किसी को पाने की चाह में
दुरी हमसे बना गया.!!
7वो पब जी कुछ यूँ खेलती न बात करती न छोड़ती है,
बैठे रहते हैं बस इंतज़ार में जाने कुड़ी कब बोलती है.!!

Every girl is sweet,
want’s respect but some,
Idiots make noise…

मर्दों को पैदा किया औरत ने
बदले में मिली हवस रुस्वाई,
भूल जाते घर में माँ बहन है
फिर भी करते बाहर बेहयाई.!!

वक़्त बदला है जाने क्या बात है कोरोना से लगते वो आजकल,
जिन्हें गले लगा चूमने को दिल करता था वो बुरे लगते आजकल.!!

दिल में था इक़रार मगर
होंठों पर थी ना ना.!
तेरा रातों जाग बाते करना
महज़ इत्तेफ़ाक़ था..!!

यूँ तेज़ क़दमों से न चला करो मेरे सरकार,
मुहब्बत की राहें यूँ भी पत्थरीली होती हैं.!!

गर साथ तेरा हो फिर डार किस बात का,
राह के पत्थर भी फूल बन जाएंगे यक़ीनन.!!

माँ को भी समझा दो इतना बता दो,
साथ टूशन पढ़ने वाले कोई गैर नहीं.!!

होंसले बुलंद रख जो मिलना मिल कर रहेगा
खुदा की रज़ा न कोई समझा न ही समझेगा,
उस मालिक ने बनाया है वही फैसला करेगा
जी तेरा है ज़माना करे जतन तेरा ही रहेगा !!

Good people are always hee,it’s depand upon you. You find them or believe on Fake personality?
When the Proofs are Clear indicated..

लम्हें


Kids are futur of Nation,
Love and respect them.
If they becomes Bright,.
Futur of Nation is Bright…

हमनें देखा है ज़माने को बड़े करीब से,
ज़िन्दगी वही जो तेरे साथ बसर होती.!!

दिल तो चाहता है बड़ और मैं ठहर भी जाऊं,
तेरे इशारे पर नज़र झुका पलकें तो रुक जाऊँ.!!

हुस्न की यही अदा तो क़ातिल,
प्यार करता मगर इक़रार नहीं.!!

तीर ए नज़र चला वो खुद तो जा सौ गए,
बैचैन दिल के मारे रात करवटें बदलते रहे.!!

Your lips are like a rose’s petals,
Your eyes are Ghazal of a poet,
Pink cheeks like morning’s redness,
Tell me the reason,
Why I should not love you…
There is no one in World like you,
Moon is nothing in front of your beauty,
The beauties of world standing behind you,
Oh God.! then, 
Why I can’t propose you.

तेरे बिन जीने की आरज़ू हो कैसे,
हर हसरत में तेरी ख्वाहिश शामिल.!!
गर्दिश-ए-हालत बना देते गुनहगार
कौन नहीं यहाँ इज़्ज़त जा तलबगार,
दिए की रौशनी न बुझा सके कोई
जिसे खुदा ने किया गुल-ओ-गुलज़ार.!!
मुहब्बत में खोने पाने की फ़िक्र हो,
पाक वफ़ा करने वाले अंजाम न सोचते.!!

रूपए पैसों की ऐसी हवस जितना भी कमाइए कम है,
माँ कहती कामना है बेटा इंसानियत कमा सदियों तक चलेगी.!!

ज़िन्दगी यूँ रूठ कर दूर न जा
पुराणी यादें सकूँ से जीने न देती
पलट पलट कह
पलट दिया है
पलटने का रास्ता
पलट दिया l
पलट दिया दिल
इरादा भी पलटा
पलट में दिल
अपना पलटा लिया ll

आगे से सुन्दर हो इसलिए पीठ पीछे बुराई करते,
वैसे भी चापलूसों से दोस्ती करती है ये दुनियां.!!

इस को भी पागल उसको भी पागल कह वो खूब Manage करती है.!
नादाँ जानती नहीं खुद का तमाशा बनवा अपना Dismanage करती है.!!

Why…..


Your lips are like a rose’s petals,
Your eyes are Ghazal of a poet,
Pink cheeks like morning’s redness,
Tell me the reason,
Why I should not love you…
There is no one in World like you,
Moon is nothing in front of your beauty,
The beauties of world standing behind you,
Oh God.! then, 
Why I can’t propose you….

लम्हें


मेरे अरमानों की कुछ ऐसी होली जली,
दिल-ए-गुलशन की न खिल सकी कली.!

कभी फुरसत मिले तो पीछे मुड देखना ज़रूर.!
ज़िन्दगी में क्या ठुकराया और क्या खोया यहाँ.!!
कुछ अच्छा करने की चाहा में कई दिल तोड़ दिए,
मगर हक़ीक़त ये है यहाँ हक़ीकत की कीमत नहीं.!!

अपने दिल से पूछो ये सवाल क्यों प्यार करते हो,
कुछ तो हमारी भी खता होगी जो करते एतबार.!!

मुहब्बत में जिस्म से जिस्म का मिलना ज़रूरी नहीं,
अफ़सोस आज बिस्तर बिन मुहब्बत मुक़म्मिल नहीं.!!

रात को तेरी नज़रों में बसने वाला नवाब हूँ मैं,
सुबह उठ Unfollow करने वाला ख्वाब हूँ मैं !!
जली कटी सुनाने में तेरा कोई भी तोड़ नहीं,
तेरा प्रेमी कोई और है मुझ पे तेरा ज़ोर नहीं.!!

जैसी भी तुम हो मेरी नज़रों का नूर हो,
चाहूंगा ताह उम्र बेशक तुझे नामंज़ूर हो.!!

हर Atitude रखने वाली को Unfollow कर दिया,
क्यूंकि हम भी Handsome हैं और Atitude रखते.!!

हाँ जी हाँ क्यों न करेगी साइंस की पढ़ाई दूजे की
तस्वीर जो दिल में बसाई,
जाती है मेरी जान जाये तेरी बला से तूने तो करनी
चढ़ाई खानी है रस मलाई.!!
एक काम कर बोरिया बिस्तर उठा और सीधे मेरे,
घर चली आ जो सच में थम सा गया है सब कुछ !!

हक़ीक़त में जीना है
हक़ीक़त में मरना,
हक़ीक़त ये है की तू
अब मेरे पास नहीं.!!

कोई बात दिल से कह के सारी उम्र तुझे याद रखूं,
दिल को छु जाए तुझे अपना बनाने की चाहा रखूं.!!

ये ऊँची इमारतें किस काम की गर दिल में सकूँ नहीं,
गरीब की झोंपड़ी में जा देखो मुहब्बत की गंगा बहती.!!

मेंढक जैसी आँखें इसकी
घोड़ी जैसी चाल,
सर पर लगा के टोपी रखे
छुपाती गंजी बाल.!!

इक बार हाँ तो कर खुदा को भी मना लूंगा,
तक़्क़्दीर का क्या फिर पल में बदलवा लूंगा.!!

मृत्यु वास्तविकता है किन्तु
इंसान फिर भी मोह माया
नहीं त्यागता !!

उनकी आँखें हैं जैसे
फलक पर चमकते
हैं रोशन सितारे,
आधी रात को भी
जगती याद करा करा
हो गए हम बेचारे !!

बहुत कुछ जहाँ में तेरे मांगने के लिए,
एक हम ही नहीं ज़रूरी जीने के लिए !!

मंदिर मस्जिद जाते लोग
दिल काले मगर रखते हैं,
वही सच्ची पूजा करते हैं
जो दिल में खुदा रखते हैं.!!

उसकी मर्ज़ी के बिन तो कुछ भी मुम्मक़िन नहीं ,
मगर दिल न हों ज़ज़्बा तो शिकायत उससे नहीं,
ज़िन्दगी की नाव जो समुन्दर उतरे वही पार पावे
बिन लहरों के थपेड़ों के साहिल कोई बनता नहीं.!!
तुझे इश्क़ हो गया
कोई दिल चुरा गया है,
याद कर वो शक़्स
जो ज़ेहन में बस गया है.!!

मुहब्बत में यही दुश्वारियां,
मिले तो खूब न मिले दर्द.!!

.मुझसे ही प्यार कर तह उम्र
मेरी ही रहना,
मुझसे ही शादी करना बच्चों
जी मम्मी बनना.!!


Kuch hongi majburiyan Shahar se jane ki,
Muhabbat gar Dil mein ho Duriyan maybe nhin rkhti !!

लम्हें


मार डालेगी उनकी
जी जी एक दिन,
हज़ूर को ना ना कहना
भी नहीं आता..!

कुछ दायरे तेरे हैं,
कुछ मेरे भी तो हो सकते…
कुछ भी हों बेशक,
मगर बेवफा नहीं हो सकते..!

वो और होंगे जिन्हें,
तेरे हुस्न से प्यार है…
हमें पर्दानशीनों पर ,
बस एक एतेबार है..!

दिन में तो न आये मिलने
कल रात ख्वाबों में उन का दीदार हो गया…
क्या खूब लग रहे थे वो
आँखें तरसती लब नशीले जैसे प्यार हो गया..!

प्यार उसने हमसे बहुत किया
मगर शर्तों पर…
काश समझ पाते वो समझौते
प्यार में न होते..!

काश वक़्त ठहर जाये
इन मुहब्बत के पलों का…
ताह उम्र गुज़ारे यूँ ही
मिले सहारा इन बाँहों का..!

न खेल मेरे दिल से यूँ,
मिटाने के बहाने और भी है..!

यूँ रुक रुक कर न छेड़ मेरे दिल के तराने,
कोई एक बज गया तो बड़ा पछताएगी तू..!
न जी न गल्त तुम ना थे गल्त हम ही हैं,
तुम्हारी बन्दानवाज़ी न समझ सके…

अपनी मगरूरियत में इतने मशगूल हुए,
इंसानी ज़ज़्बों को ज़रा न समझ सके…!

कुछ दायरे तेरे हैं,
कुछ मेरे भी तो हो सकते…
कुछ भी हों बेशक,
मगर बेवफा नहीं हो सकते..!

तेरे पास होंगे कई दिल,
एक उसके लिए एक इसके…
मेरा दिल तो बस,
तेरा नाम ले ही धड़कता है..!

ना कर मुहब्बत किसी से इतनी “परदेसी”
के नाज़ुक दिल पत्थर हो जाये,
काँटों की राह गुज़र फूलों तक पहुंचना न
हो तो हर काम आसां हो जाये..!

अलविदा अलविदा अलविदा अलविदा,
कल भी झूठा था आज भी झूठा संसार..!

मौत मेहबूबा है उस संग भी साथ निभाना है,
तेरी मुस्कान खातिर जीना उसी खातिर मरना..!

तेरे पास होंगे कई दिल,
एक उसके लिए एक इसके…
मेरा दिल तो बस,
तेरा नाम ले ही धड़कता है..!

न समझ नहीं हो यारा इतने भी,
इजहार-ए-मुहब्बत नैनों की न समझो. !
हुस्न कल भी बेपरवाह आज भी,
भूल पाओगे क्या या दीवाना ही समझो..!

इश्क़ में तुम भी रूबरू हुआ करो,
किसी शाम घर की छत रहा करो..!
तरसती सांसों की उम्र बढ़ जाएगी,
कभी तो रेहम हम पर किया करो..!

तेरे बिन इस जहाँ में क्या रख है,
चाह नहीं हमारी तो कुछ भी नहीं..!

गल्त है इलज़ाम गल्त सारी बातें,
पीठ पीछे वार करने की आदत नहीं..!
प्यार करते हैं तुझसे करते रहेंगे,
किसी से भी लड़ने की ज़रूरत नहीं..!

प्रणाम 🙏

उम्मीद का सागर है
उगते सूर्य का आगमन,
नई ऊर्जा का जीवन
में फिर से है समागम..!

चाँद सी नटखट हो सुन्दर भी बहुत
कभी दिखती कभी छुपती,
दिल की खूबसूरत बातें प्यारी बहुत
कभी मिट्ठी कभी दिलकश..!

तेरे शौख ए क़दमों की इनायत,
जो जीने की आरज़ू हो आई..!
वरना इस दिल ने कब से यहाँ,
जीने की हसरत छोड़ दी थी..!

मार डालेगी उनकी
जी जी एक दिन,
हज़ूर को ना ना कहना
भी नहीं आता..!

इक नई सुबह का आना सदा बेहतर होता है,
पिछली बातों को भुला नया आगाज़ होता है..!

आओ न इतने करीब की सांसें महकने लगें,
बहक जाएं इस क़द्दर की दिल मचलने लगे..!

ख्वाब देखना गुनाह नहीं,
गर इरादे नैक हों..!
ऐसे भी ज़नून रखते तो,
मंज़िल मिलती नहीं..

हर सुबह जीने का एक नया पैगाम ले आती,
बीती बातों को भुलाने का अरमान ले आती.!!

आओ न इतने करीब की सांसें महकने लगें,
बहक जाएं इस क़द्दर की दिल मचलने लगे..!

मेरे मुस्कुराने की वजह तुम हो,
डर लगता कहीं रूठ न जाओ..!

तेरी ख्वाहिश तेरी ज़ुस्तज़ु,
मेरी ज़िन्दगी की हसरत..!
अब तू ही कर फैसला मैं,
तेरे बिन जियूं कैसे..!

होते जो दिलदार तेरे,
पलकों में संजोये रहते..!
गुज़ारिश न करते यूँ,
वफ़ा गर पाक तुम करते..!

छोड़ कर तन्हा बीच रह चले जाते,
फिर कहते तुम मुहब्बत हो हमारी..!
कितना तड़पते हैं तुम बिन सोचा,
कैसी हालत हुईं तुम बिन हमारी..!

तेरी वफ़ा ही मेरी ज़िन्दगी और मंज़िल,
वरना जीने को क्या रखा है अब जहाँ में..!

बेवजह धुआं उठता नहीं,
यक़ीनन कोई दिल जला रहा होगा..!
जान कर भी अनजान क्यूँ,
अब किस बात का इंतज़ार रहा होगा..!

पलकों में सज़ा रखा,
दिल में सज़ा रखा..!
होंठों इक तेरा नाम,
बता कैसे भुला रखा..!

ख्वाब देखना गुनाह नहीं,
गर इरादे नैक हों..!

ऐसे भी ज़नून रखते तो,
मंज़िल मिलती नहीं..!

बात करने की वजह ज़रूरी नहीं,
यूँ भी तुझे मेरी कोई ज़रूरत नहीं..!

फरेब है तू और तेरी मुहब्बत साथिया,
क्या करूँ फिर भी तेरी याद सताती है..!

अब अल्लाह ही बचाये इन हुस्न वालों से
दिल में है क़रार मगर ऊपर से न न करते..!

तुमने वादा किया था उम्र भर साथ निभाने का,
ज़रा सी आहट हुई तो तुम हाथ छुड़ा चल दिए..!

जिनकी बुनियाद टिकी फरेब पर
वो क्या वादा निभाते,
यहाँ यारा शिद्दत से इंतज़ार खबर है
तुम आज भी न आते…!

मौज़ों को गरूर सागर से जुदा न हो सकती,
नादाँ समझती नहीं किनारे से वो भी टकराती..

न समझ नहीं हो यारा इतने भी,
इजहार-ए-मुहब्बत नैनों की न समझो. !
हुस्न कल भी बेपरवाह आज भी,
भूल पाओगे क्या या दीवाना ही समझो..!

तुम वो दर्द हो,
न न बिलकुल नहीं..!
सच तो ये है जी,
तुम ज़िन्दगी हो मेरी..!

यूँ न मांगों दिन रात दुआओं में,
मरना चाहें तो मर न पाएं..!
साथ जीने का तस्सव्वुर लिए रहे,
बाद दुनियां में दौराहे जाएं..!

ना गुज़रा कर मेरी गली
से मुस्कुराते हुए,
गुमां हो जायेगा तुझे भी
मुझसे प्यार है..!

नज़र रखना अपने दिल पर हमारी यादें तुम्हारे साथ हैं,
और परिंदा न बैठ सकेगा शाख पर यक़ीन बेशुमार है..!

इक शेर ऐसा लिखना की मरना आसां हो जाये,
तेरी यादों के संग रुखसत कुछ कामयाब हो जाये..!

तेरी पलकों में कब कब देखा,
तस्वीर खुदकी नज़र आई..!
पलट कर देखा जो आईना तो,
तेरी तस्वीर खुदमें दिख आई..!

कुछ अहसास
इतने खुबसुरर होते,
ज़िन्दगी गुज़र
जाती पता न चलता..!

हाथों की मेहँदी में सजालो मुझको,
शिद्दत से सांसों में बसालो मुझको..!
इससे पहले किसी और के हो जाएँ,
मखमली बाँहों में सम्भालो मुझको..!

लम्हें


ज़िन्दगी जी है अपनी शर्तों पर मौत को भी उँगलियों पर नचाएंगे l
मगरूर नहीं मगर मंजूर नहीं सर झुकना हँसते हँसते मिट जाएंगेेll

कुछ इस तरह मेरे प्यार में तू घुलने लगी l
चाय में मिठास तेरे हाथों की आने लगी ll

मीर की ग़ज़ल है या है खैय्याम की रुबाई,
जो भी हो मगर इस दिल को खूब है भाई l
तुझे देखूं जी भर फिर भी दिल नहीं भरता,
सोचता हूँ रब्ब ने ये मूरत फुर्सत में बनाईंं ll

अपने होंठों की तब्बस्सुम बना लो मुझे l
यूँ ही करीब रह लब छू लिया करूँगा मैं ll

साँझ सवेरे जुल्फें बिखरा छत पे न आया करो l
दीवाने गुड नाईट कह देंगे तुझे चाँद समझ कर ll

न शिक़वा और न कोई शिकायत किसी से l
ज़िन्दगी हर मनचाही ख्वाहिश पूरी न होती ll

वर्क्ष को गरूर होता अपनी बड़ी बड़ी शाखाओं पर l
मगर फ़िज़ा के मौसम में पत्ते भी साथ छोड़ देते हैं ll


लम्हें


तुम मुझे याद करो न करो कोई फर्क नहीं पड़ता यारा l
मैं ताह उम्र तुम्हारी सलामती की दुआ करता रहूंगा ll

2)
शरबती आँखों से पिलाने की वजह तो बता दे l
कहीं तेरा भी मेरे होंठों का तल्बगार तो नहीं है ll

3)

न कोई आरज़ू न कोई हसरत अब बाकी l
ईश्वर ने जो भी दिया बहुत खूब है दिया ll

4)

चिराग ख्वाहिशों के दिल में जलाये रखना ‘रवि’ l
शाम तो होनी है मगर सुबह की आरज़ू ज़रूर रखना ll ाााााााााााााााााााााााााााााा

5)
जीना है तो ज़िंदादिली से जियो यारो l
जाने कौन पल मौत की अमानत हो ll

6)
लगा के डीपी हुस्न ए ज़माल की वो इतराते हैं,
व्हाट्सप्प पर भी कइयों को दीवाना बना के जाते हैं l
इससे भी न काम चले तड़पाने तरसाने का तो,
‘रवि’ कभी कभी प्रोफाइल पिक ब्लेंक छोड़ जाते हैं

7)

नज़रें मिला पलकें का मतलब तो समझ आता
मगर रुख पर पर्दा गिराने का मतलब क्या है
शर्म गैरों से किया करो मगर ‘रवि’ दिल से नहीं

तेरा मेरी ज़िन्दगी में आना इक ख्वाब से कम न था

है खबर मुझको भी हर ख्वाब मुक़म्मिल नहीं होता

देखा है ज़िन्दगी को बड़ा करीब से रिश्तों को टूटते अपनों को बदलते बाग़-ए-वफ़ा में इश्क़ फरमाते मगरदुःख इस बात का नहीं तुमने इक़रार न किया गम इस बात का तुमने इंकार भी तो न किया मैं उल्फत के चिराग दिल में जलाये बैठा रहा क्यूँ फिर मेरे बाद तूने किसी से प्यार न किया ll

“लम्हें”


किस बात का है गरूर
तड़पाया न करो..
अब यूँ पानी में भी आग
लगाया न करो…

जो फूल दिए तूने किताबो में रखे थे
वक़्त गुज़रे तेरी यादों के खत बन गए..
पढ़ता हूँ रोज़ ​जब तेरी याद सताती…

ज़िन्दगी के क़ाफ़ले में तन्हा ही रहे..
लोग मिलते रहे बिछड़ जाने के लिए…

मुसाफिर हूँ दो पल का
जाने कब चले जाना..
न ठोर न ठिकाना पता
अधूरा कुछ रह जाना…

सितारों उनसे कह दो मुहब्बत करके तो देखें,
इतने बुरे नहीं मर कर ही साथ छोड़ेंगे उनका…

न कर तीर ए नज़र का इस्तेमाल यूँ.
घायल हो दिल और ज़ख्म भी न भरे…

हर लड़की एक सी
जैसी मेरी माँ की..
छाती
सबको एक सी…

उन्हें भूलना ही बेहतर..
जो याद रखने लायक नहीं…

तुम आओ तो सही इक बार यार..
देखो ज़िन्दगी कैसे निखर जाती है…

क्यों कर करे सज़दा
इतना भी तल्बगार नहीं..
गर तू है पूरी बेवफा
तो हम भी तेरे यार नहीं..

नशेमन हूँ जब से देखा है मदहोश ही रहने दो..
आँखों के मैखाने में ज़िन्दगी बसर कर लेने दो…

उन्हें दावा था हमसे मुहब्बत का
मगर महफ़िल में रुस्वा करते गए..
जो बातें हमसे तन्हाई में करते थे
सर ए बाजार नुमाइश करते गए…

गर मुहब्बत तुमने दिल से की होतो..
प्यार हम भी फिर शिद्दत से निभाते…

बाली उम्र है माना मगर फिर भी सम्भल रहा करो..
यूँ झुल्फों की क़यामत सरे राह न बिखराया करो…

जवानी में यारो जब जब चढ़े
इश्क़-ए-ज़नून ..
पल्ट घर के कांच की खिड़कियाँ
भी देख लेना…

तेरी सांसों की खुशबु से तेरा पता पहचान लेते.!
जान ए जहाँ कुछ इस तरह तेरा घर तलाश लेते.!!

मॉ से बेहतर न कोई हुआ हैं न होगा..
जो न हुआ मैं का और का क्या होगा…

जब से तुझे देखा है हम अपना दिल हार गए..
जान-ए-जां तेरी आँखों में खुद को निहार गए…

की जब से देखा तुझे दिल बेताब सा रहता है..
दिन रात करवटें बदलते इंतज़ार सा रहता है…

बस मुंह फुला कर ही रहना
दूजा काम तो आता न,
कोई न प्यार किया है तो
नखरे भी तो उठाने होंगे…

माना के तेरी नज़रों का नूर ए नज़र नहीं..
मगर ये सांसें तेरी खुशबु की तलबगार हैं…

जब से तुझे देखा है हम अपना दिल हार गए..
जान-ए-जां तेरी आँखों में खुद को निहार गए…

मैं इक दूर का ख्वाब हूँ..
देखना अब बंद कर दो…

मेरी मुस्कुराने की वजह तुम हो..
मगर तुम तो धोखेबाज़ निकले…

न कर हुस्न की नुमाइश यूँ..
हर कोई मरने वाला नहीं…

इस क़ाबिल कहाँ की मेरी दुआओं में शामिल हो..
एक वक़्त था तुझे चाहा था सांसो से भी बढ कर…

न कर पलकें झुका एहतराम यूँ..
मेरा खुदा जनता तू ही मेहबूब है…
जो किया कोई वादा न निभा सके,
वो चले हैं वादा ए वफ़ा करने फिर…

ब्स मुंह फुला कर ही रहना
दूजा काम तो आता न,
कोई न प्यार किया है तो
नखरे भी तो उठाने होंगे…

न कर पलकें झुका एहतराम यूँ..
मेरा ईश्वर जनता तू ही मेहबूब है…

रंज नहीं इसका किसी ने क्या दिया,
जो भी दिया खूब दिया भरपूर दिया…

ख्याबों की दुनियां में कुछ ख्वाब अधूरे हैं,
फिर भी इस जीवन में फेहरिश्त लम्बी हैं…

दगदरों की कमी नहीं इस जहाँ में,
फिर भी क्यूँ लोग इश्क़ किया करते…

इस क़ाबिल कहाँ की मेरी दुआओं में शामिल हो..
एक वक़्त था तुझे चाहा था सांसो से भी बढ कर…

अब तो किताबों में रखे फूल भी सूखने लगे..
जिनमें तेरी सूरत देख सीने से लगा रखा था…

बस मुंह फुला कर ही रहना
दूजा काम तो आता न,
कोई न प्यार किया है तो
नखरे भी तो उठाने होंगे…

यूँही साल पर साल गुज़र जायेगा
देखते देखते तीन साल गुज़र जायेगा..
फिर होगी मिलना की घड़ी जानम
बाँहों में उम्र का शबाब गुज़र जायेगा…


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