Good Night To U.!!


जाने का तो दिल नहीं पर फिर भी गुड नाइट कहे जाते.!

रात सोने बाद खवाब में आना ये वादा आपसे लिए जाते.!!

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Jaane  Ka  To  Dil Nahin Par  Phir Bhi Good Night Kahe Jaate.!

Raat Sone Bad Khawab Mein Aana Ye Wada Aapse Liye Jaate.!!

Published
10/30/2015 02:05 A.M
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अगर-मगर.!!


अगर एक हिंदुस्तानी लड़के को पाकिस्तानी लड़की से प्यार हो जाए तो…
अर्ज़ है:-

आपसे प्यार हुआ मगर मिलन मुम्मकिन नहीं,
दिल बेक़रार हुआ मगर हाल-ए-दिल सुना पाया नहीं.!

फिर भी क्यों ये शम्मां वफ़ा की जलाये फिरते,
और क्यों इक़रार हुआ जिस को कभी पाया ही नहीं.!!

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गुनहगार


आप जीवन में एक बार जिस रस्ते चल धोखा खा चुके हैं,
फिर भी आप रास्ता नहीं बदलते तो गुनहगार आप स्वम हैं...

आप जीवन में एक बार जिस रस्ते चल धोखा खा चुके हैं,.jpg

गुरु और छात्र परम्परा को समझना होगा…


देश की शिक्षा सुधारने हेतु मात्र बड़े-बड़े नियम बना देने से ही कुछ नहीं होगा…
हमें भी स्वच्छ मानसिकता का परिचय देना होगा…
गुरु और छात्र परम्परा को समझना होगा…
सारा दोष किसी एक पर मढ़ने से कोई फ़ायदा नहीं…
पहले की भाँती शिक्षकों को कुछ अधिकार देने ही होंगे…
ज़रा-ज़रा-सी बातों पर स्कूल/शिक्षक पर ही सारा दोष मढ़ देना इंसानियत तो नहीं…

तुम्हें मुहब्बत का खुदा मान बैठे.!!


Still I’m Sick…

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तुम पानी का बुल-बुला थे,
बही भूल की जो तुम्हें मुहब्बत का खुदा मान बैठे.!
क्या करोगे वफ़ा किसी से,
इक अनजान पत्थर को यारो  क्यों रब्ब मान बैठे.!!

 

अफ़सोस कोई नहीं भी,
मगर घाव दिल  पर तुम नें दिया बड़ा  ही गहरा है.!
अब सोचता क्यों दिल में,
तुम्हारे  संग – संग  ख्वाहिशों का अम्बार लगा बैठे.!!

 

सिर्फ दोस्ती या मुहब्बत,
ये  उलझन  दिल  की  ज़रा तुम सुलखाओ तो सही.!
बीमार “सागर” को यारा,
ना  दे जवाब  सवालों  का और  भी परेशां कर बैठे.!!

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अभी “सागर”की मइयत न उठी मुंह मोड़ रहे हो.!!


बड़े बेएतबारे हो चले हो जनाब,
क्या कहीं और दिल लग गया है.!

अभी “सागर“की मइयत न उठी,
अभी से क्यों यूँ मुंह मोड़ रहे हो.!!

Welcome…


ये सच है जब तुम नाराज़ न हो बात करती हो,
कहकशां-चाँद-सितारे सब उतर आते “सागर” अंगने.!

बेजान से पड़े जिस्म की नस-नस खिल उठती,
नयी उम्मीदों से लबरेज़ ज़िन्दगी  के सज उठते सपने .!!

खुदगर्ज़ इन्सान.!!


मुहब्बत में इन्सान खुदगर्ज़ हो जाता है “सागर“.!
चाहता बस वो उससे ही बात करे और संग नहीं.!!

Broken Heart…


The broken heart never connects, like a broken glass never leaves a mark…

     @Sagar.

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Heartless…


At that time,
I was not wrong…

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A person with a narrow mind can never become a good friend…
                          @Sagar

तू ही मेरा रब्ब…


गर कोई तेरी जगह ले सकता तो कभी का,
मन-मंदिर कोई और मूरत बसा लेता.!

तू ही इक मेरा रब्ब है तेरी ही पूजा करूँ मैं,
बता कैसे तेरी जगह और को चाह लेता.!!

“सागर”अब सम्भलना होगा…


हर हाल में जीना होगा,
किसी के प्यार में जीना होगा,
किसी को न हो पर,
किसी को बड़ी ज़रूरत होगी,
किसी खातिर ही जीना होगा…

 

ज़िन्दगी उलझनों से भरी,
पेड़ पर पतंग-सी अड़ी,
किसी हाथ डोर,
कोई पेचा लड़ा रहा,
हर तज़ुर्बा लेना होगा,
किसी खातिर ही जीना होगा…

 

मुखोटे पर मुखोटे लगे,
प्यार में धोखे लगे,
जीने का मकसद मतलब,
गौरे तन दिल काले पड़े,
सागर“अब सम्भलना होगा,
किसी खातिर ही जीना होगा…

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Thanks…


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टहलते-टहलते ज़िन्दगी से मुलाक़ात हो गयी…


रात सड़क पर टहलते-टहलते,
ज़िन्दगी से मुलाक़ात हो गयी…
कुछ मासूम से कुछ भयानक,
फ़लसफ़ों से आँखें चार हो गयी…

कहीं सिहर रही थी,
कहीं ठिकाना ढूंढ़ती,
शून्य निगाहों से,
भीड़ भरी बस्ती में,
अपना तलाश रही थी,
रात सड़क पर टहलते-टहलते,
ज़िन्दगी से मुलाक़ात हो गयी…

आँखों में सपने,
जीने की आरज़ू भी,
सूखे होंठों पर,
बेबसी की छाया थी,
भूखी पत्थराइ पेट में,
पानी की मधुशाला थी,
रात सड़क पर टहलते-टहलते,
ज़िन्दगी से मुलाक़ात हो गयी…

बहुत पाया फिर भी,
और की चाहा है,
नसीबों वाले हैं,
जिनके सर छाया है,
पेट भरा है”सागर“,
मगर मन में मोह-माया है,
रात सड़क पर टहलते-टहलते,
ज़िन्दगी से मुलाक़ात हो गयी…

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Morning Special…


(1)
ज़िन्दगी दगा देने को है,
इस क़ाबिल भी न रहा के तुझे इजहार कर पाऊं.!
खुदा जाने”सागर“हाल,
जिया तो पर कभी ज़िन्दगी हंस कर ना जी सका.!!
(2)
ये मेरे सुख नग्मों की दास्ताँ,
जिनमें हर पल तेरी याद रही.!
फिर भी तेरी नज़रों हरदम,
सागर“वफ़ा बेवफा-सी रही.!!
(3)
आप संग मुहब्बत एक इत्तेफ़ाक़ रहा,
वरना जाते पंछी कभी ठोर – ठिकाना नहीं ढूँढ़ते.!
ज़िन्दगी और नहीं कब इन्कार किया,
यारों का क्या है यार बात बनाने का बहाना ढूँढ़ते.!!
(4)
तेरी चाहत में सुबह-शाम कसीदे पढ़ जाऊं,
गर सुनने को तैयार रहे.!
देखी ही कहाँ “सागर” सी मुहब्बत किसी ने,
यार दर मरने तैयार रहे.!!
(5)
हर इंसान का अपना नजरिया,
देखने-सुनने-परखने का.!
तुझे हक़ अपनी तरह जीने का,
यारों की इसमें ख़ुशी होती.!!
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Please…


बहुत कुछ है मेरे  पास  तेरी हस्ती मिटाने के लिए.!
मेरी शराफत को ना आजमा बाद पछ्तायेगी बड़ा.!!

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तू बेगैरत है…


अगर कोई चाहे एक पल में तुझे बेनक़ाब कर सकता.!
ये उसकी इंसानियत कहें के वो ऐसा कर नहीं सकता.!!

तू बेवफा है बेगैरत और बे अदब भी बहुत अबतो मान.!
कोई तेरा कभी हो भी जाए तू किसीका हो नहीं सकता.!!

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तेरे साथ जो भी हुआ  है  वो तेरे गुनाहों की सजा थी.!
दीख”सागर“दुनियां को अपनी खता और सर करते.!!

वफ़ा.!!


वो कहती है आज कल,
मजनूं सी वफ़ा न रही.!

काश अपने गिरेबां झांकती,
क्या वो लैला सी है.!!

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इंतहा…


शाख पर बैठे परिंदों से पूछो,
उनकी ख्वाहिशों की इंतहा क्या.!

बड़ी नादानी से बोलेंगे यारो,
ये शय हमारी खातिर बनी कहाँ .!!

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धुंआ…Morning Special…


भँवरे की क्या बिसात बिन मर्ज़ी कली फूल बना दे,
जब तल्क अपने यौवन पर इतरा वो दावत न देती.!

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अपने गुनाहों को कब तक औरों पर डालते रहोगे,
धुंआ वही पर उड़ता”सागर“जहाँ आग लगी होती.!!

साहिल …


वो तह उम्र मुहब्बत भरी किश्ती “सागर” में ना उतार सकेंगे.!
साहिल उन्हीं को मिलता जिन्हें मोज़ों की इन्तहां मालूम होती.!!

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बे-अदब…


हम पत्थर को मेहबूब समझ तह उम्र इबादत कर गए.!

वो इक इंसान से कुछ लम्हों की मुहब्बत न निभा सके.!!

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 कभी दिल खोया था यारों ने…


कभी दिल खोया था यारों ने,
तेरे शहर की गलियों में.!
सांसें महकती थी उन दिनों ,
तेरे शहर की गलियों में.!!
     कभी दिल खोया था यारों ने…

जवानी खूब थी हसीनों में,
उन सी क़यामत थी न कहीं मगर.!
कहकशां-चाँद-सितारों सी,
कोई हसीना वैसी न थी कहीं मगर.!!
     कभी दिल खोया था यारों ने…

सुर्ख होंठों पे शर्माती लाली,
जैसे सुबह-सवेरे सूरज की लाली.!
जहाँ पड़ते थे उसके कदम,
धरती पर खिल जाती थी हरयाली.!!
     कभी दिल खोया था यारों ने…

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बेवफा.!!


इतनी बेरुखी देख कर भी”सागर“,
कमब्खत दिल क्यों नहीं मानता वो बेवफा हैं.!
क्या इसी का नाम पाक मुहब्बत,
या फिर दिल-ए-नादाँ ये माज़रा कुछ और है.!!

prpse

राज-ए-गम-ए-ज़िन्दगी…


इक कहानी कभी तुमनें सुनाई थी,
सच है या झूठ तुम्हीं जानते.!

आओ इक सच से वाकिफ कराएं,
शायद इसे तुम झूठ मानते.!!

एक मित्र हैं जिन्हें हर तीन-चार महीनों बाद
डाइलिसिस की ज़रूरत होती है…
कुछ दिन पहले उनकी तबियत ख़राब थी,
उन्हें अस्पताल जाना पड़ा…
बहुत लोगों ने उनका हाल वहां जा कर और
सोशल साइट्स पर पूछा …
पर…?
उन्हें जिससे सब से ज्यादा उम्मीद थी…
वो आज तक खामोश हैं…
उन आँखों में कुछ सवाल देख एक ग़ज़ल
बन पड़ी यहाँ पेश है….

 

जब-तब ज़रूरत पड़े अपनों की,
सागर“वो बेगाने हो जाते.!
क्या इसी का नाम है इंसानियत,
लोग क्योंअफ़सानें हो जाते.!!

उड़ते पखेरू करीब आ शम्मां के,
जल कर दीवाने कहला जाते.!
मुहब्बत भी अजीब है यहाँ यारो,
जान के भी नज़राने दिए जाते.!!

वफ़ा करना असां बाद मुश्किल,
उल्फत में हरजाने लिए जाते.!
जो इश्क़ ही खातिर जियें या मरें,
वही ज़माने में याद किये जाते.!!

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दुःख-दर्द तो बस आप की ज़िन्दगी में ही हैं.!
बाकी तो यहाँ इक फरिश्ता बन पैदा हुए हैं.!!

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तक़रार-इक़रार-प्यार-इजहार सब जीते-जी  ही  नसीबों में होता है यारा.!
अपनी दुआओं में शामिल रखना ज़िन्दगी रही तो मुलाकात ज़रूर होगी.!!

दास्तान.!!


गिला उन से क्या”सागर“जो कभी वफ़ा क़ाबिल ही ना थे.!

अब तो लैला-मजनू श्री-फरहाद गुज़रे ज़माने की दास्तान.!!

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बदनुमा दाग…


इक बदनुमा दाग से कम नहीं तेरे बदन की खुशबू.!
ये और बात समझे है खुद को तू कलियों की खुशबू.!!

3

कौन जाने तू सच है या ख्वाब,…


तेरी बातों में ना पहले-सी गर्मी,
ना गुमराह करने वाली आदाएं.!

कौन जाने तू सच है या ख्वाब,
याद क्यों करूँ वो जूठी जफ़ाएं.!!
कौन जाने तू सच है या ख्वाब,…

तू भी हर कली माफिक बदसूरत निकली.!
गुनाह की चादर में लिपटी मगरूर निकली.!!
कौन जाने तू सच है या ख्वाब,…

जहाँ में कई जो खुद को तहजीब शुदा कहते.!
बेगैरत होते फिर भी खुदको मसीहा समझते.!!
कौन जाने तू सच है या ख्वाब,…

तेरी वफ़ा तेरा अपना-पन देख लिया”सागर“ने.!
क्यों तुझ जैसों का यक़ीन किया यार”सागर“ने.!!
कौन जाने तू सच है या ख्वाब,…

35

यूँही कोई बेवफा नहीं होता…Dedicated.


नैनों से अश्क़ ना चुरा सका,
गर होंठों पर मुस्कान ना ला सका.!
किस काम का शायर”सागर“,
ज़िन्दगी में मुक़ाम ना दिला सका.!!

 …..

इंसान चाहे कितना भी दुःख-तकलीफ में हो कुछ पल
अपने ख़ास लोगों के लिए निकाल ही लेता है…
बस ज़ज़्बा होना चाहिए अपने-पन का…

अर्ज़ है:-

वो कहते हैं कोई उनकी वफ़ा-मुहब्बत से खेल गया.!
कुछ तो रही होगी वजह यूँही कोई बेवफा नहीं होता.!!
यूँही कोई बेवफा नहीं होता…

 

इक ताली नहीं बजती इक हाथ बजा दिखा दीजिये.!
गर उधर कोई कमी होगी इधर भी खता रही होगी.!!
यूँही कोई बेवफा नहीं होता…

 

ज़ुबाँ आपकी कुछ भी बयान कर लीजिये सफाई में.!
वाक़्या और नज़र आता बिस्तर की सलइए देखकर.!!
यूँही कोई बेवफा नहीं होता…

 

बिन परखे तन-मन गैर नज़र करना कैसी है उल्फत.!
नापाक मुहब्बत में कमी क़ातिल आदाओं की भी हैं.!!
यूँही कोई बेवफा नहीं होता…

 

इक शम्मा-परवाने की बेवफाई से वफ़ा दागदार नहीं.!
इस सफर-ए-हयात पाने को अभी बहुत कुछ बाकी है.!!
यूँही कोई बेवफा नहीं होता…

 

गर आप से कोई खता हुई खता से सबक ले आगे बढ़ें .!
मुहब्बत में गर धोखे मर-मिटने वालों की भी कमी नहीं.!!
यूँही कोई बेवफा नहीं होता…

 

कैसे यक़ीन करे”सागर“बेवफा है सारा ज़माना यहाँ.!
लैला के नग्में फरहाद के किस्से क्यूँकर भूले ज़माना.!!
यूँही कोई बेवफा नहीं होता…

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Format Your Hard-Drive…


ना भूल ये शेर ये नग्में मेरी आखरी निशानी हैं,
इससे आगे तो बाद मेरी कहानी है.!

कैसे समझाऊँ तुझे अपनी तबियत का आलम,
कुछ पल की ज़िन्दगी की रवानी है.!!

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I know you don’t reply me back…
But if you really hate my love…
Please delete my memories in your heart…
It’s my humble request..

 

“सागर”आज दस्तूर ही ऐसा है.!!


ज़रूरत से जायदा आज किसी को मिल जाए तो वो मगरूर हो जाता…
इसी लिए बेवजह किसी का मौल बढ़ाने से बेहतर है उसे उसके हाल पर छोड़ दीजिये…
वो कितना गुनहगार है वो खुद ही जानता है…
पाक-साफ़ होने का नाटक कर क्या फायदा…
बेचारा मगरूर बेगैरत……??

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गिला तुम से नहीं है मुझे कोई,
आज कल हवा का रुख ही कुछ ऐसा है.!
अपना बन-बन मिलेंगे यहाँ,
दगा देंगे “सागर” आज दस्तूर ही ऐसा है.!!

ख्वाहिशों पर किसी का इख्तयार नहीं.!!


सब को हक़ है ज़िन्दगी अपनी तरह जीने का,
ज़िन्दगी इक बार मिलती बार-बार नहीं.!

मैंने भी अपने खवाबों का एक जहाँ बनाया है,
ख्वाहिशों  पर  किसी का इख्तयार नहीं.!!

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I’m not well,So I can’t keep my word completely…

Mistakenly….


My love is mine,
I can’t shared it.
I love you by mistakenly…

ज़रूरी नहीं लम्बी-लम्बी बातें कर ही अपनी बात/विचार रख जाएँ,
कम लफ़्ज़ों में भी बहुत ब्यान किया जा सकता…
समझने वाले होने चाहिए…

अर्ज़ है:-

कभी किसी से बैर रख क्या करना”सागर“.!
ज़िन्दगी कुछ लम्हों की फिर जाना”सागर“.!!

1

बहुत प्यार किया है ज़िन्दगी तुझसे…!!


ईश्वर ना करे परन्तु यदि कभी आप अस्पताल के बिस्तर पर
किसी कारणवश हों और रोज़ अपने आस-पास इंसानों को
मुर्दा बनते देखें तो आप को लगेगा

आप का दिन भी नजदीक ही है
बेशक ज़िन्दगी बेहतरीन है परन्तु मौत शाश्वत सच…

ईश्वर का लाख-लाख शुक्र है ज़िन्दगी को और मोहलत के लिए…

बहुत प्यार किया है ज़िन्दगी तुझसे मगर,
है खबर एक दिन बेवफाई यक़ीनन करेगी.!

माना तुझसे हसीं मेहबूबा और नहीं कोई,
पर एक दिन तेरी भी जवानी ढलनी जरूर.!!

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तसव्वुर.!!


कुछ उनकी हदें हैं कुछ अपनी भी,
उन ख्वाबों का क्यों तसव्वुर जो मुमकिन नहीं.!
कुंवारा दिल करता दोस्ती बहुतों से,
सागर”हर दिल भी तो मुहब्बत मुमकिन नहीं.!!

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