परिंदे.!!


हम से बेहतर हैं फलक पर उडते परिंदे जो मनचाही परवाज़ तो चढ़ लेते हैं .!

फलक छूने की चाहत हर किसी में”सागर“कितने जो हसरत पूरी कर लेते हैं .!!

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मिली है आप से जीने की वजह.!!


हम को मिली है आप से जीने की वजह,
इंकार कर न छीनिये ये हसीं जहाँ.!

न होंगे तो देखना तुम तड़पोगे एक दिन,
ढूंढोगे हमें पर हम न मिलेंगे यहाँ.!!

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Hum ko mili hai aap se jeene ki vajha,

Inqaar kar na chiniye ye haseen jahan.!

Na honge to dekhna tum tadpoge ek din,

Dhoondoge hume par hum na mileinge yahan.!!

उल्फत से मुंह न…!!


इस दौड़ भरी ज़िन्दगी में कुछ फुरसत के पल निकाल एक ग़ज़ल लिखी है,
अपने दिल के ज़ज़्बात लफ़्ज़ों में पिरोने की कोशिश है,जो आप सबके
समक्ष प्रस्तुत है:-

उल्फत से.jpg

उल्फत से मुंह न फेरिये वफ़ा न मिलेगी बार-बार.!
कहानी है ये चार दिन की रुत न आएगी बार-बार.!!
उल्फत से मुंह न…

जी भर के देख लीजिये अब न मिलेंगे तुम्हें हम.!
बेशक रहोगे रूह में सांसों के होंगे तुम्ही सनम .!!
उल्फत से मुंह न…

शिकवों का क्या मान लीजिये है दिल का भरम.!
हम न होंगे तबतो न होंगे तुम्हारी ज़िन्दगी में गम.!!
उल्फत से मुंह न…

दिल की सुना भी दीजिये क्यों हम से इतनी शर्म.!
इंकार कर देंगे क्यों है तुमको इस बात का वहम.!!
उल्फत से मुंह न…

मनचाहा जहाँ नसीब हो हैं सब के अपने करम.!
आँखों में सवाल क्यों क्यूँ इक-दूजे के लिए रहम .!!
उल्फत से मुंह न…

Hopeless…


Without you,
I’m।!
Hopeless aim less breathless,
Like।!
An unfinished poem।

ज़िन्दगी.!!


ज़िन्दगी सुलझी भी न थी उन संग मुहब्बत हो गई.!

आँख क्या अपनी”सागर“बात उलझ कर रह गई.!!

शायद.!!


तुझ संग मिलना तो था मगर शायद नसीबों  में न था.!

जब तल्क़ इक़रार कर पाते”सागर“तू गैर बाँहों में था.!!

Dp…


ये तेरा कभी हरे रंग का कभी लाल तो कभी गुलाबी सूट पहनना.!

मार डालेगा यारा धड़कने बढ़ा दिल की तेरा ये डीपी बदल जाना.!!

कसम है.!!


जब से हमनें”सागर“उनसे प्यार करना छोड़ दिया.!

कसम है अल्लाह-पाक की वो बेअदब-सा हो गया.!!

वो कहता.!!


वो कहता मैं बस्ता कण-कण में “सागर“.!

लोग हैं फिर भी खुदको पहचान न पाते .!!

बात मुहब्बत की.!!


बात मुहब्बत की है चाहे किसी को भी हो किसी से.!
नसीबों वाले “सागर” जिन्हें ऐसा दिल मिला खुदा से.!!

इक़रार…


हुस्न के जाल में न फंस इश्क़ तुझी से.!
इक़रार करवाएगा और मुकर जाएगा.!!

फैसला.!!


गलत-सही का फैसला यूँ न होगा”सागर“.!

जो रहते वादों पर क़ायम वही इश्क़ लायक होते.!!

 

तेरी बेवफा आँखें…


ये तेरी बेवफा-सी आँखें पहले फॉलो करती.!

फिर राह-ए-ज़न्नत दिखा अनफॉलो करती.!!

 

राहें.//


कठिन हैं राहें मगर इतनी भी कटीली नहीं”सागर“./

कुछ पाना तो काँटों का तस्सव्वुर भी करना होगा.//

मंजिल.!!


मेरी मंजिल भी तुम मेरी राहें भी तुम.!

मेरा सफर हो तुम मेरा मक़सद तुम .!!

 

चाँद बन ज़िन्दगी में क्या आये.!!


तुम चाँद बन ज़िन्दगी में क्या आये हम खुद को सूरज ही समझ बैठे.!

भूल इस रीत को अपना मिलन नामुंमकिन बेशक रोशनी हमारी हो.!!

पहरे…


न कर इंतज़ार कुछ न मिलेगा.!

यहाँ वफ़ा पर पहरे हैं अनेक .!!

 

खवाबों से मुहब्बत.!!


खवाबों से मुहब्बत की थी तो हकीकत कैसे बनती.!

राधा का ज़माना गया कृष्ण कहाँ बास्ते यहाँ”सागर“.!!

तस्वीर.!!


जब से अपनी तस्वीर अखियन से हटाई है जिग्गर में आग-सी लगाई है.!

फिर कहते हो शिकायत न करें खुदही फैसला करो जिएं तो कैसे जिएं .!!

 

मतलबी इंसानों की बस्ती.!!


मतलबी इंसानों की बस्ती है”सागर“.!

वक़्त पड़े सब पूछें फिर पहचाने ना.!!

नज़रों का वहम..!!


ये तेरी नज़रों का वहम है करीब हैं तेरे “सागर“.!

बस ज़रा नज़रें झुका के तो देख सीने में क्या है.!!

 

इक़रार…


दिल ले न इक़रार करने की हुस्न की आदत “सागर“.!

गर कहें कल न रहेंगे कहते विद्यवा बना क्या छोड़ोगे.!!

लम्हां.!!


गर तुम साथ हो तो हर लम्हां याद बन ज़िन्दगी में रह जाएगा.!!

सागर” दुनियां में यूँ भी कुछ नहीं क्या साथ तेरा मिल पायेगा.!!

 

 

कम्बखत दिल.!!


बड़ा बेवफा है कम्बखत ये दिल देखे जिस.!

हुस-ए-जहाँ को वही सीने से निकल जाता.!!

इशारा.!!


इशारा कर अपनी गली के चकर कटवाती फिरती हो,
जा सखियों में”सागर“को पागल कहती हो।!

खुद को पागल समझें या ये भी है कोई हुस्न की अदा,
नींद चुरा चैन चुरा क्यों इतराती चलती हो ।!

दिल तुझ पर आ जाएगा.!!


न कर मुझसे यूँ सर-ए-राह छेड़ा-छेड़ी दिल तुझ पर आ जाएगा.!

सारी दुनिया में बदनाम करेगी “सागर” नाम मशहूर हो जाएगा.!!

हुस्न की आदत होती.!!


हुस्न की ये आदत होती है इश्क़ को इशारा कर मुकर जाना.!
बेचारा दिन-रात फिर चाहे फिर मारा-मारा। उसी पर इक शेर नज़र है.!!

यक़ीन क़ाबिल न हों.!!


न कर यक़ीन उनपर जो यक़ीन क़ाबिल न हों “सागर”.!

अपना बन-बन मिले लोग धोखे पर यक़ीन कराने वाले.!!

पेडे यहाँ भिजवा देते…


दो-चार पेडे यहाँ भिजवा कुछ करने की ताक़त दिलवा देते./

जश्न फिर हम भी मनवाते तुम्हारी सेहत टना-टन बनवा देते.//

 

हकीकत.!!


ख्यालों से इतनी मुहब्बत न कर जो दिल में है हकीकत बना./

रोज़ जगता रहता नहीं दिल अपने को अपनों से वाकिफ करा.//

 

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