Always Waiting For U…


तय समय पर ना आना,इंतज़ार कराना
हुस्न की पुरानी आदत है!
ज़रा-सा हिंट दे दो तो जनाब कहते हैं
वोहमारे शहर के हैं !! बेचारे……..
काश आईना देख लेते तो जान पाते कौन हैं “वो“?
अर्ज़ है:-

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इंतज़ार इंतज़ार बस इंतज़ार ही किया,
ना आना था और ना आए तुम.!
कहते हो वो हमारे शहर के हैं वो मगर,
आईने  में  ना  देख  पाए   तुम.!!

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Intzaar      Intzaar      Bas      Intzaar      Hi      Kiya,

Na Aana Tha  Aur Na Aaye Tum.!

Kahte Ho Wo Humare Shahar Ke Hain Wo Magar,

Aaine Mein Na Dekh Paaye Tum.!!

Pain of Heart…


ज़िंदगी  ने   इतना   रुलाया  है ‘सागर‘,
अब किसी पर यक़ीन ही ना रहा.!
जिस किसी को चाहा दिल-ओ-जान से,
बदले में सिर्फ़ दर्द-ए-दिल मिला.!!

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Zindagi Ne Itna Rulaya Hai’Sagar‘,

Ab Kisi Par Yaqeen Hi Na Raha.!

Jis Kisi Ko  Chaaha Dil-o-Jaan Se,

Badale Mein Sirf  Dard-e-Dil Mila.!!

Oh.!! Innocent…Please…


क्यूँ आप इतनी जल्दी किसी पर यक़ीन करने लगते हैं?जबकि आप उन्हें जानते ही कितना हैं?जुम्मा-जुम्मा एक-दो-या कुछ दिन से??
माशाल्लाहा आप खूबसूरत हैं हसीन हैं और
ऊपर से अकल्मंद भी?फिर भी??
आख़िर क्यूँ लुभावनी बातों में आ रहे हैं?

आपकी अपनी कोई वजह या तर्क हो सकते हैं पर फिर भी ये ठीक नहीं…..
अर्ज़ है:-0009ed5b

अंजान शक्सियतों से दोस्ती किया नहीं करते,
ख़ुदग़र्ज़ बेवफा ज़माने में यूँ एक  दम यक़ीन किया नहीं करते.!
लोग यहाँ चेहरा पर  चेहरा  लगा  मिला करते,
कहे’सागर‘यारा यूँ अनजानों को एक पल में दिल दिया नहीं करते.!!

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Anjaan Shaksiyaton  Se  Dosti Kiya Nahin Karte,

Khudgarz Bewafa Zamaane Mein Yun Ek Dum Yaqeen Kiya Nahin Karte.!

Log Yahan Chehara Par Chehara Laga Mila Karte,

Kahe ‘Sagar‘ Yaara Yun  Anjaanon  Ko Ek  Pal  Mein Dil Diya Nahin Karte.!!

चिराग-ए-उलफत.//


ये शेर-ओ-शायरी है तेरे प्यार की नज़र.!
जो किया था कभी तूनें’सागर‘से जी भर.!!

blueten

चिराग उलफत के ना जलाओ.!
अब बेवफ़ाई की आँधियाँ चलती हैं.!!

पाक वफ़ा का ज़माना गया.!
अब वफ़ा महज किताबों में मिलती है.!!

ना कैस ना लैला हीर रांझा.!
होते ही मुहब्बत बिस्तर पर दम तोड़ती है.!!

बुलंद थे कभी महल वफ़ा से.!
मिसालें इबारतें बन दीवारों पर लिखी हैं.!!

बैठा हूँ शम्मा उम्मीद की जलाए.!
देखें कब तक इश्क़ के अंधेरे रहते हैं.!!

किया था इश्क़’सागर‘ने भी कभी.!
यादें शायरी बन काग़ज़ पर बिखरती है.!!

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Chiraag Ulfat Ke Na Jalaao.!

Ab Bewafai Ki Aandjiyan Chalti Hain.!!

Pak Wafa Ka Zamana Gaya.!

Ab Wafa Mahaj Kitabon Mein Milti Hai.!!

Na Kais Na Lailla Heer Ranjha.!

Hote Hi Muhabbat Bistar Par Dam Todti Hai.!!

Buland The Kabhi Mahal Wafa Se.!

Misalein Ibartein Ban Deewaron Par Likhi Hain.!!

Baitha Hun Shamma Ummeed Ki Jalaye.!

Dekhein Kab Tak Ishq Ke Andhere Rahte Hain.!!

Kiya Tha Ishq’Sagar’Ne Bhi Kabhi.!

Yaadein Shayari Ban Kagaz Par Bikhartri Hai.!!

These Days…


लगता  है  मेरे  होंठों  पर  कुछ  फूल  तुझे  प्यारे  नहीं  लगते,
तभी आजकल पहले से इशारे नहीं होते.!
इक  ग़ज़ल  तुझ  पर  क्या  लिख  दी  मुँह  फूला  यूँ  बैठ  गयी,
जैसे ‘सागर‘ के  शेर  अब प्यारे नहीं होते.!!

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Lagta Hai Mere Hontho Par Kuch Phool Tujhe Pyaare Nahin Lagte,

Tabhi Aajkal Pahale Se Ishaare Nahin Hote.!

Ik  Gazal  Tujh  Par  Kya  Likh  Di  Munh  Phula  Yun  Baith  Gayi,

Jaise’Sagar‘Ke Share Ab Pyaare Nahin Hote.!!

A Beauty From Firozabad…(Dedicated)


कुछ शायरों का क्या है दिल हाथ में लिए फिरते हैं,जहाँ देखा बेपनहां हुस्न फिदा हो गये और लिख दी नज़्म / ग़ज़ल !! शायद दिल बस इसी काम के लिए रखते हैं?
यूँही फ़िरोज़ाबाब की गलियों में घूमते-फिरते
इक हसीन हुस्न दिख गया और ग़ज़ल अर्ज़ हो गयी:-

Dedicated To A Beautiful/Intelligent (Married) Teacher From

Firozabadssemras21

बेरहम बेहया हैं वो,
फिर भी क्यूँ उनसे दोस्ती की है.!
प्यार करने के क़ाबिल नहीं,
ए दिल क्यूँ उनसे मुहब्बत की है.!!

वादा पूरा करते नहीं,
फिर भी आने का कर जाते हैं.!
क्यूँ करता यक़ीन दिल,
क्यूँ आरज़ू उनकी ज़ुस्तज़ू की है.!!

प्यार करने की आदत नहीं,
आँख लड़ी है किसी से पहली बार.!
परेशान हो गया हूँ,
दिल कहता क्यूँ ऐसी दिल्लगी की है.!!

हुस्न-ए-जाना फ़िरोज़ाबाद की,
हसीनों में एक ही हसीन है.!
हसरातों की इन्हां होती नहीं,
क्यूँ’सागर‘उनकी ख्वाहिश की है.!!

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Beraham Behaya Hain Wo,

Phir Bhi Kyun Unse Dosti Ki Hai.!

Pyaar Karne Ke Qaabil Nahin,

Ey Dil Kyun Unse Muhabbat Ki Hai.!!

Waada Poora Karte Nahin,

Phir Bhi Aane Ka Kar Jaate Hain.!

Kyun Karta Yaqeen Dil,

Kyun Aarzoo Unki Zustzoo Ki Hai.!!

Pyaar Karne Ki Aadat Nahin,

Aankh Ladi Hai Kisi Se Pahali Baar.!

Pareshaan Ho Gaya Hoon,

Dil Kehta Kyun Aisi Dillagi Ki Hai.!!

Husn-e-Jaana Firozabad Ki,

Haseenon Mein Ek Hi Haseen Hai.!

Hasraton Ki Inhaan Hoti Nahin,

Kyun ‘Sagar‘ Unki Khwahish Ki Hai.!!3e27712d-9043-4302-aa8a-d4898f2ab058

Note:-

 ” दिल की आरज़ू  है जब  भी वो आयें,
पढ़ कर इठलायें-बलखायें पर नाराज़ ना हों.!
मान कर’सागर‘दीवाने की गुस्ताख़ी,
मुस्कुरायें और माफ़  कर  रब्ब  से सब्ब पायें.!!

 

Posted On Dec 2, 2016 10:21 AM

Very Strange…


 एक लड़के को एक लड़की से प्यार हो गया,यों कहें कि

दोनो को एक दूसरे से प्यार हो गया,परंतु एक दिन लड़की उसे छोड़ किसी

और की हो गयी! लड़का हरदम यही सौचता रहा कि

उसकी मुहब्बत उससे दूर हो गयी“!
ऐसा ही कुछ हर लड़का-लड़की सौचते हैं
जो किसी ना किसी को चाहने का दावा
करते हैं!उनकी शादी कहीं और हो जाती है?
किंतु जो चला गया क्या उसे मुहब्बत का खिताब देना कहाँ तक सही है??
कहीं हम जो करीब है उसकी तौहीन तो नहीं कर रहे?
अर्ज़ है:-a4a0528ccab25b9881348ff5b47ad184_we

Duniyan Ka Azeeb Chalan Hai’Sagar‘,

Jo  Mili  Naa  Use  Muhabbat  Samjha.!

Jo  Kareeb  Hai  Uski  Kaddar  Naa Ki,

Waah Ri Duniyan Tri Azab Hai Maya.!!

 

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दुनियाँ का अज़ीब चलन है’सागर‘,
जो मिली ना उसे  मुहब्बत समझा.!
जो करीब है उसकी कद्दर  ना की,
वाह री दुनियाँ तेरी अज़ब है माया.!!

 

Values Of Relationship…


आज जब रिश्तों को यक़ीन तोड़ते-टूटते देखता हूँ तो दिल में अजीब सा दर्द होता है!
क्यूँ अपने रिश्तों को जतलाने की ज़रूरत आन पड़ी
है?क्या हमारी मोरल वॅल्यूस कमजोर पड़ गयी हैं? ये वो मुल्क है जहाँ दोस्त की बहन-बेटी को अपनी बेटी-बहन,सहेली के भाई को भाई,चाचा-ताई,दादा-दादी,नाना-नानी,
यहाँ तक की पड़ोस के रिश्तों को भी एहमियत
दी जाती रही है पर आज?
अर्ज़ है:-

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दिल के रिश्तों को तरज़ू में ना तौलिए,
बाज़ार  में  बिकता  कोई  सामान नहीं.!
माना आज रिश्तों का मौल ज़्यादा नहीं,
फिर भी इंसान से आगे कुछ और नहीं.!!

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Dil Ke Rishton Ko Tarazu Mein Na Tauliye,

Bazaar Mein Bikta Koyi Saamaan Nahin.!

Maana Aaj Rishton  Ka Maul Jyaada Nahin,

Phir Bhi Insaan Se Aage Kuch Aur Nahin.!!

My Promise…


जब बार-बार समझाने के बाद भी माशुका ना यक़ीन करे और ना ही इक़रार करे तो इसके सिवा
कोई और रास्ता ही नहीं बचता !
अर्ज़ है:-

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इक तुझको ही चाहा है तेरी माँ की कसम,
ख़ाता  तेरी  कसम  तो  मानती  ना उन के सर की कसम.!
नकद से मूल प्यारा होता तुमनें सुना होगा,
कर इक़रार वरना दूँगा होने वाली अपनी सास की कसम.!!

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तेरा गैर संग बात करना गंवारा.!!


भूली-बिसरी यादों के कारवाँ से गुज़रे हुए वक़्त में लिखी एक बेदील के लिए ग़ज़ल अर्ज़ है:-

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तेरा गैर संग बात करना  गंवारा नहीं इस दिल को.!
बस इतना जानता इस धरती पर आई हो मेरे लिए.!!

क्यूँ और इन झुलफो की छाँव तले दिन बसर करे.!
ये  घने  बादलों  की  चादर  बनी  है बस मेरे  लिए.!!

मेरे बिन कभी और की  हो जाएगी मुम्मक़िन नहीं.!
ये ज़िंदगी तो बनी जान- ए- ज़िग्गर बस तेरे लिए.!!

दुप्पटे के कोने  में  मुँह  छिपा  क्यूँ  शरमाती हो.!
ये शर्म-ओ-हया बनी  है क्या बस एक मेरे लिए.!!

दिल की ना हो सकी गैर भी ना होना ख्वाहिश यही.!
तोड़ना ना दिल खुदा ने बक्शा हुस्न ‘सागर‘के लिए.!!

तेरा गैर संग बात करना गंवारा नहीं इस दिल को.!.jpg

Tera Gair Sang Bat Karna Ganwara Nahin Is Dil Ko.!

Bas Itana Jaanta Is Dharti Par Aayi Ho Mere Liye.!!

Kyun Aur In Jhulfo.n Ki Chanw Tale Din Basar Kare.!

Ye Ghane Badlon Ki Chadar Bani Hai Bas Mere Liye.!!

Mere Bin Kabhi Aur Ki Ho Jaayegi Mummqin Nahin.!

Ye Zindgi To Bani Hai Jaan-e-Jiggar Bas Tere Liye.!!

Duppate Ke Kone Mein Munh Chipa Kyun Shrmati Ho.!

Ye  Sharm -o- Haya  Bani  Hai  Kya  Bas Ek Mere Liye.!!

Dil Ki Na Ho Saki Gair Bhi Na Hona Khwahish Yahi.!

Todna Na Dil  Khuda Ne Baksha Husn’Sagar‘Ke Liye.!! 

Written By Me On Jan 6, 2016 6:00 AM

No One Is Like Me…


तुझ से  बेहतर नहीं हूँ,
मगर  कुछ  कम भी नहीं.!
तभी तूने प्यार किया है,
कोई और’सागर‘सा नहीं.!!

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Tujh Se Behtar Nahin Hun,

Magar Kuch Kam Bhi Nahin.!

Tabhi Tune Pyaar Kiya Hai,

Koyi  Aur ‘Sagar‘ Sa Nahin.!!

Feel Good…


आपका करीब रहना दिल को अच्छा लगता है.!
फिर और किसी की ज़रूरत नहीं समझता है.!!

लोग कहते हैं आपसे मिल ख़ुदग़र्ज़  हो गया हूँ.!
कैसे बताऊँ आपके सिवा और नहीं दिखता है.!!

दिल है किसी से मुहब्बत  तो ज़रूर करेगा ना.!
आप को  चाहा  है  क्या अच्छा नहीं लगता है.!!

आप बिन जीने की तमन्ना कैसे अकरे दिल.!
आप हैं  तभी  तो सीने का दिल धड़कता है.!!

दर्द क्या है अब किसको खबर यहाँ पर’सागर‘.!
दवा का काफिला  तो  आप  के साथ चलता है.!!

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Massage For Some One Special…


आप की सौच हरदम ऊँची होनी चाहिए,
किसी ने क्या कहा / लिखा और आपने
क्या समझ लिया?
पहले इस बात को साफ करलें तभी
किसी को अपना फ़ैसला सुनायें?
आपकी ज़रा सी नासमझी किसी को
चुभ सकती है?और आप किसी को
खो सकते हैं?हाँ अगर आपने उसे
पाया ही नहीं तो बात और है?
कोई भी रिश्ता तभी कामयाब हो सकता
है जहाँ विश्वास है यक़ीन है एक-दूसरे
की भावनाओं की कद्दर है?
अन्यथा सब बेक़ार है…
फिर तो यही लिखा / कहा जा सकता है
अब कभी आप से बात न्ना करेंगे !

Bye Stay Happy…

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तेरी इक नासमझी’सागर‘को दर्द दे गयी.!
क्या से  क्या  माना  था  तुझे क्या हो गयी.!!

Sorry to Say…


हसीनों की इक ख़ास अदा होती’सागर‘,
बिन बताए आना बिन बताए जाना.!
शरमाना  इठलाना  तरसाना – तड़पाना,
फिर  चुप  कर  तन्हा  छोड़  जाना.!!

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Haseenon Ki Ik Khaas Ada Hoti’Sagar‘,

Bin Bataye Aana Bin Bataye Jaana.!

Sharmana Ithalana Tarsana-Tadpana,

Phir Chup Kar Tanha Chod Jaana.!!

That’s Only For You…


बार-बार वो पूछते है’सागर‘ का नाम,
क्या बतायें बहती धाराओं के  नाम  नहीं हुआ करते.!
नदियाँ  बहती  हैं  यहाँ  से  वहाँ  मगर,
सागर‘में जा मिलती क्यूँ कि वहाँ ज़ज़्बात नहीं होते.!!

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Please On Line On…


माशुका बदनाम ना हो इसलिए इश्क चाहता है वो सरे आम ना मिले इंटरनेट पर ऑन-लाइन हो मिला करे?
भाई नया ज़माना है कुछ तो फ़ायदा उठाना ही चाहिए ना??
अर्ज़ है:-

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सुबहा की लाली दोपहर-शाम,
यारा’सागर‘से मिलने ना आया करो.!
रुसवा   हो  जाओगे  बेहतर  है,
देर रात  ऑन लाइन  हो  जाया करो.!!

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Subaha Ki Laali Dopahar-Shaam,

Yaara’Sagar‘Se Milne Na Aaya Karo.!

Ruswa Ho Jaaoge Behtar Hai,

Der  Raat  On  Line  Ho J aaya  Karo.!!

Don’t Annoyed…


ना रूठ खुद से और अपने मुक़द्दर से ए दोस्त‘सागर’की बस  यही इलतज़ा.!
जो मिला उसका शुककर अदा कर कई ऐसे जो इससे भी महरूम रह जाते.!!

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Na Rooth Khudse Aur Apne Muqaddar Se Ey Dost’Sagar‘Ki Bas Yahi Iltza.!

Jo Mila Us Kaa Shukkar Kar Kai Aise Jo Isse Bhi Mehroom Reh Gaye.!!

After Good Night…


रात के बाद जब सुहानी सुबहा आती है और महबूब के सामने दीदार हो जायें तो ज़िंदगी की नये दिन की शुरूवात बड़ी अच्छी लगती है!
घर के सामने का छत ख़ास हो जाता है!
अर्ज़ है:-

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गर रोज़ सुबहा छत पर आती रहे,
नई ज़िंदगी की शुरूवात कराती रहे.!
कौन काफ़िर तेरी इबादत ना करेगा,
ज़िंदगी हर पल यूँ ही मुस्कुराती रहे.!!

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Gar Roz Subaha Chat Par Aati Rahe,

Nayi Zindagi Ki Shuruwat Karati Rahe.!

Kaun Kafir Teri Ibadat Na Karega,

Zindagi Har Pal Yun Hi Muskurati Rahe.!!

खुदा की रुसवाई.!!


 वो इतने हसीन हैं कि जो कोई उन्हें देखे उनका दीवाना हो जाए,बेदाग हुस्न और खूबसूरत नयन-नक्श की मलिका हैं वो!
अर्ज़ है:-g

   पूरब से पच्छिम उत्तर से दक्षिण,
   है तेरे रूप की दुहाई.!

   कैसे ना देखूं तुझे करूँ ना प्यार,
   होगी ये खुदा की रुसवाई.!!

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  Purab   Se  Pachchim  Uttar  Se Dakshin,

  Hai Tere Roop Ki Duhai.!

  Kaise Na Dekhun Tujhe Karun Na Pyaar,

  Hogi Ye Khuda Ki Ruswai.!! 

04/16/2016 12:19 PM

Muhabbat.!!


कभी दिल से चाहा होता तो जानते मुहब्बत की कशिश.!
दूसरों की सुनकर तो सभी पाक वफ़ा का दम भरते.!!

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Kabhi Dil Se Chaha Hota To Jaante Muhabbat Ki Kashish.!

Doosaron Ki Sunkar To Sabhi Pak Wafaa Ka Dum Bharte.!!

 

Waada.!!


ये तेरा ख्याला  ही है जिसके सहारे जी रही हूँ.!
तुझसे किया था कभी वादा तेरे बगैर जीने का.!!

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Ye Tera Khyala Hi Hai Jiske Sahaare Jee Rahi Hoon.!

Tujhse Kiya Tha Kabhi Waada Tere Bagair Jeene Ka.!!

In Her Eyes…


जब  भी  भूल  जाता  हूँ  मैं खुद को.!
उनकी आँखों में देख लेता खुद को.!!

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Jab Bhi Bhool Jaata Hoon Main Khud Ko.!

Unki Aankhon Mein Dekh Leta Khud Ko.!!

Her Face…


उन की यादों नें इतना बेक़रार किया है ‘सागर‘.!
जहाँ तक जाती नज़र उनका चेहरा नज़र आता.!!

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Unki Yaadon Nein Itna Beqaraar Kiya Hai’Sagar‘.!

Jahaan Tak Jati Nazar Unka Chehara Nazar Aata.!!

Nobody Is Like U…


ये तेरी नज़र-ए-इनायत है वरना’सागर‘इस क़ाबिल कहाँ.!
तुझ से  बेहतर  और  नहीं  यहाँ  ढूंडे कोई चाहे दोनो ज़हान.!!

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Ye Teri Nazar-e-Inaayat Hai Warna ‘Sagar‘ Is Qaabil Kahaan.!

Tujh Se Behtar Aur Nahin Yahan Dhoonde Koyi Chahe Dono Zahan.!!

Deewaana Dil.!!


यूँ रुक-रुक कर आना और तड़पाना-तरसाना.!
बना देता है’सागर‘इस दिल को और भी दीवाना.!!

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Yun Ruk-Ruk Kar Aana Aur Tadapaana-Tarsaana.!

Bana Deta Hai ‘Sagar‘ Is Dil Ko Aur Bhi Deewaana.!!

Her Pic…


उनकी तस्वीर से बेहतर और कुछ नहीं ‘सागर‘ अब ज़माने में.!
कभी भूल से रख छोड़ी थी किताब में अपनी किताब समझ कर.!!

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Unki Tasweer Se Behtar Aur Kuch Nahin ‘Sagar‘ Ab Zamane Mein.!

Kabhi Bhool Se Rakh Chodi Thi Kitab Mein Apni Kitab Samajh Kar.!! 

After Many Days…


कई दिनों बाद तुझे देख हैरत में आ गया हूँ,
सौचता था खुश है पर ये क्या देख रहा हूँ.!
अब तू ही कर अपनी इस सफ़र-ए-हयात का फ़ैसला सनम,
तेरी खुशी में ही अपनी खुशी देखता रहा हूँ.!!

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Kai Dinon Baad Tujhe Dekh Herat Mein Aa Gaya Hun,

Sauchta Tha Khush Hai Par Ye Kya Dekh Raha Hun.!

Ab Tu Hi Kar Apni Is Safar-e-Hayaat Ka Faisla Sanam,

Teri Khushi Mein Hi Apni Khushi Dekhta Raha Hun.!!

 

Enmity…


तेरे साथ  जीने  की आरज़ू क्या कर ली,
हमनें तो सारे जहाँ से दुश्मनी कर ली.!
लोग अज़ीब-अज़ीब नज़रों से देखते हैं,
ए  खुदा जब से तुझ से  दोस्ती कर ली.!!

Loyalty…


जीते जी’सागर‘की हो ना सकी,
मर जाऊं जब तो थोड़ी वफ़ा निभा जाना.!

आ  मेरे  ज़नाज़े  पर  तुम,
दो  अश्क  अपनी  आँखों  से  बहा  जाना.!!

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Jeete Ji’Sagar‘Ki Ho Na Saki,

Mar Jaaoon Jab To Thodi Wafa Nibha Jaana.!

Aa  Mere  Zanaaze  Par Tum,

Do  Ashq  Apni  Aankhon  Se  Bahaa Jaana.!!

Why U Met Me…


कितने मुश्किल होते हैं वो पल जब कोई पुराना जान-ए-जिग्गर मिल जाए ?
जिसे आपने जान से बढ़ कर चाहा हो ?
अर्ज़ है:-

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परेशान हो गया हूँ फिर तुझे अपने शहर में देख कर.!
क्यूँ याद कराते हो बीते पल अबकी मिलना’सागर‘के ज़नाज़े पर.!!

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Pareshaan Ho Gaya Hun Phir Tujhe Apne Shahar Mein Dekh Kar.!

Kyun Yaad Karate Ho Beete Pal Abki Milna’Sagar’Ke Zanaaze Par.!!

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