चाँद बहका-बहका-सा क्यों है.!!


अपनी तारीफ सुन किस क़द्दर इतरा रहा,
ये चाँद बहका-बहका-सा क्यों है.!

खुदा की इनायत है फिर भी ‘सागर‘ क्यों,
ये चाँद तनहा-तनहा-सा क्यों है.!!

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Life.!!


Of course life is more than Love,
But life is less than Someone’s Feelings…

बेशक जिंदगी प्यार से बढ़कर है,
लेकिन जीवन किसी की भावनाओं से कम है.!!

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दुहाई.!!


किन रिश्तों की दुहाई देते हो जनाब,

जो मतलब से शुरू होते गरूर पर ख़त्म होते हैं.!!

तेरे दिल का वहम.!!


ये तेरे दिल का वहम है तू हर पल ख्यालों में है.!

कोई पहर ऐसा न गुज़रा तेरा तस्सव्वुर न किया.!!

हम बीमार क्या हुए तुम…


आज थोड़े से बीमार क्या हुए लोगों ने मुंह ही फेर लिया,
सोचा क्यों दिल के ज़ज़्बात पेश किये जाएं।
अर्ज़ किया है:-

हम बीमार क्या हुए तुम Ignore कर बैठे .!

इक Like न दी तो तुम Dislike कर बैठे.!!

न जानेगा ‘सागर’ औरत की बंदिश-ए-दास्ताँ.!!


मेरी वफाओं को तूने बेवफाई का नाम दिया,
काश मेरी जगह होता समझता मजबूरियों को.!

न जानेगा ‘सागर‘ औरत की बंदिश-ए-दास्ताँ,
कैसे सहना होता रिवाज़ों की पहरेदारियों को.!!

दर्द-ए-नासूर.!!


कुछ ऐसे भी दर्द-ए-नासूर को भी दुआ मान बैठ ज़िन्दगी बसर कर गए.!

अश्क़ बहते रहे फिर भी मुस्कुरा ज़िन्दगी अमानत यार के नाम कर गए.!!

💘💘I Think You’re Perfect…💘💘


मैं तुझे चाँद समझ कब तक तक सरहाऊंगा,
लगे सागौन को कैसे छुपाऊंगा.!

अज़ीज़ में ज़रा भी खोट पसंद करे न दुनिया,
कमी हर शय कैसे समझाऊंगा.!!

Main  tujhe  Chaand  samjh  kab  tak  sarhaunga,

Lage dagon ko kaise chupaunha.!

Azeez mein zra bhi khot pasand  kre na duniyan,

Kami har shai kaise samjhaunga.!!

ज़ुस्तज़ू.!!


रात खवाब की खवाबों से मुलाक़ात हो गई,
हसरतों की फिर से बरसात हो गई.!

बेघर-सो हो गई थी जो यादें बिछड़ “सागर“,
ज़ुस्तज़ू फिर से जैसे आबाद हो गई.!!

ज़िन्दगी कई रंगों से सजी-धजी.!!


ज़िन्दगी कई रंगों से सजी-धजी,
कुछ खूबसूरत कुछ बदनुमाँ.!

राहों को हम ही चुनते “सागर,
जिनपे चलना होता उम्र तमाँ.!!

साजिशें…


यूँ दिल तोड़ने की साजिशें क्यों”सागर“से.!

चाहा है तुझे खुदा की  इबादत से बढ़ कर.!!

वक़्त की गर्दिशें…


वक़्त की गर्दिशें इंसान को क्या क्या बना देती हैं.!
कभी अपना कभी अपनों को बेगाना बना देती हैं.!!

कैसी ये लगन कैसी अगन फिर भी हो जीवन में.!
कभी दौर ऐसा गुज़रे शम्माँ-परवाना बना देती हैं…

वक़्त रहते जो सम्भला-पहचाना जीवन-जंजाल.!
उन राहों को रहमतों का पैमाना सा थमा देती हैं…

तह उम्र जिन सहारे जीने की हो उम्मीद “सागर“.!
पल भर में उन सपनों को अनजाना बना देती हैं…

Seene mein Bsa rkha hai.!!


Apne seene mein teri hasti ko bsa rakha hai,

Ya yun kahun poori basti ko sja rkha hai.!

Ik baar teri nazarein-e-inayat mujhe qbool karein,

Apni hasti ko maine to daw par lga hai.!!

 

💘💘Muhabbat.!!💘💘


मेरे शेरों को इतनी सी मुहब्बत देदे.!

तुझे याद आऊं क़यामत के दिन भी.!!

Mere sheron ko itni si muhabbat de de.!

 Tujhe yaad aaun  Qayamat ke din bhi.!!

इत्तेफ़ाक़…


ज़िन्दगी भी क्या अजीब इत्तेफ़ाक़ है यार’सागर‘.!

किसी को जी भर देती कहीं निवाला छीन लेती.!!

Zindagi bhi kya azeeb itefaq hai yaar ‘Sagar‘.!

Kisi jo jee bhar deti kahin ek Niwala cheen leti.!!

क़बूल-क़बूल-क़बूल.!!


मेरे शेरों को तूने एक निकाहनामा बना रखा है.!

जब देखो क़बूल-क़बूल-क़बूल लिखती रहती है.!!

Sms-ग़ज़ल 


Sms-ग़ज़ल 

भेजे हुए Sms दिखा तो न दोगे.!
ज़माने में रुस्वा करा तो न दोगे.!!…

पहली बार लगी आँख किसीसे.!
ज़हान से खफा करा तो न दोगे.!!…

मिलती है वफ़ा बमुश्किल यहाँ.!
हंसीं-हंसीं में ही उड़ा तो न दोगे.!!…

दुशमन-ए-मुहब्बत सारा ज़हान.!
हाथों से लकीरें मिटा तो न दोगे.!!…

मज़हब-जाति में कैद हुई वफ़ा.!
रिवाज़-ए-परवाह करा तो न दोगे.!!…

न हुए”सागर“के न होंगे गैर के.! 
बाद कोई सेज़ सजा तो न दोगे .!!…

“हद हो गई”…


हर बात की एक इंतहां होती है,
और कार्य का प्रतिकार्य भी
फिर भी वो कहते हैं “हद हो गई“…

बहुत भेजें हैं मुहब्बत के पैगाम,
जवाब देकर नेक काम कर ले.!

इससे पहले तुझे Blocked करूँ,
दिल में मुझे Locked कर ले.!!

पहली मुलाक़ात.!!


वो पहली मुलाक़ात का नज़राना,
सलामत अब भी मेरी किताबों में.!

रूह की सांसों बसी रूहानी यादें,
तेरी तस्वीर हर पल है निगाहों में.!!

क्यूँ हार मान.!!


इतनी जल्दी क्यूँ हार मान बैठे सरकार,
इश्क़ का ताज मिले काँटों की राह गुज़र.!

शक न कर”सागर“की वफ़ा-ए-उल्फत,
तेरी बातों का यहाँ भी हुआ न कम असर.!!

वाकिफ हैं तेरे इलज़ाम से.!!


वाकिफ हैं तेरे इलज़ाम से हम,
फिर भी तेरा तस्सव्वुर कैसा.!

है खबर अंजाम-ए-उल्फत की,
करे दिल क्यूँ इक़रार तुझसे.!!

सुप्रभात…


स्वीकार किया आप का सुप्रभात,
शायद इसी बहाने दिन अच्छा गुज़र जाए यारा.!

यूँ भी तेरी कम हो इनायत-ए-नज़र,
क्या करे”सागर“आखिर दिल है ठहरा आवारा.!!

खामोश किस्से…


कुछ खामोश किस्से,
जो तुझे सुनाने हैं,
रात के गुज़रे पहर के,
सौ अफ़सानें हैं…

न दिल को चैन मिला,
न सांसें हुई अपनी,
खुली हवा झोंके-सी,
ज़िंडी गुजरी अपनी,
कई बातें कहनी,
कई नज़राने हैं…

कभी रूठें तो वो,
जो मना पाएं उनको,
दिल-ए-अरमाँ कई,
क्यूँ समझाएं उनको,
उम्मीदें लाख हुई,
नए तराने हैं…

Qayamat ke Din…


मुम्मक़िन‘सागर’कभी काम आये उनके ये ज़िंदगानी.!

क़यामत के दिन भी उनके चेहरे पड़ेगी न पशेमानी.!!

Mummqin ‘Sagar‘ kabhi  kaam aaye unke ye zindagani.!

Qayamat ke din bhi unke chahare padegi na pashemani.!!

तेरी तस्वीर…


देखी है जब तेरी तस्वीर साडी में,
दिल दीवाना हो गया./

कहता कम्बखत तुझ शम्माँ का,
अब परवाना हो गया.//

सिर्फ और सिर्फ मेरी बन जा .//


किसी और को लिखे प्यार के अफ़साने क़बूल नहीं इस दिल को./

या सिर्फ और सिर्फ मेरी बन जा नहीं छोड़ दे नादान की दिल को.//

💘 सु-प्रभात 💘


💘सु-प्रभात💘

ज़िन्दगी दो-चार दिन की है या पल भर की पता नहीं.!

जो भी है हंस-खेल जीलो अब है बाद कुछ पता नहीं.!!

“Lamhein”


1.वकील हूँ कोई क़ातिल नहीं जो तेरे अरमानों का क़त्ल कर दूँ./
इक बार अपनी दरखास्त लगा तो सही ज़माने से लड़ जाऊँगा.//

2 हंसने को तो हंसा देंगे पर क्या करें कम्बखत दिल फिर कैसे संभलेगा./ 
अकसर सुना करते बड़ों से लड़की हंसी नहीं तो फांसी बताओ क्या करें.//

3 अपनी-अपनी फितरत है,
जिसे जो करना वही करता./
आसमाँ ज़मीं को देखता,
ज़मीं फलक की परवाज़ को.//

4.बहुत देर कर दी हज़ूर आते-आते,
निगाहें थक गयी थी इंतज़ार करते-करते./
माना महताब का दीदार नहीं आसां,
बाहें थक गयी थी फ़रियाद करते-करते.//

5 कभी-कभी झूठ भी किसी की ज़िन्दगी बन जाता./
सच कहना तो चाहिए मगर उतना दिल न दुखाये.//

6 अभी देखी ही कहाँ शायरों की शायरी भरी आंधियां./ 
जो बात नज़र न सुना  पाए  शेरों  में ब्यान कर जाते./

7 मुम्मक़िन तू भूल जाए लेकिन इस दिल से तेरा नाम मिटाना मुश्किल./
जितने भी टुकड़े करले हर  हिस्सा  तेरा  नाम ले-ले कर ही धड़केगा.//

8 बिन बताये तेरा यूँ जाना बड़ा नागवार गुज़रता है./
कम से कम इत्तला पाने की गुंजाइश तो रखते हैं.//

9 निशानियां हैं ये मुहब्बत की जो किसी संग हो गई है./
वो ख़ास मुक़द्दर का शहंशा  जिसे क़ामिल हो गई है.//

10.बड़ी बतमीज़ थी कम्बखत बिन बताये गैर हो गयी./
करते रहे इंतज़ार”सागर”औरों की सेज़ सजा गयी.//

11.सवालों में ही जवाब छुपा होता है यारा./
और बात न समझने वाले न समझ जाते.// 

निशानी…


मेरी ग़ज़लों में तेरी जवानी है,
चार चाँद लगाए तेरे हुस्न पर./

प्यार की अनमोल निशानी है,
क़ुरबान सबकुछ तेरे दर पर.//

मेरे बाद.!!


मुम्मक़िन है मेरे बाद मुझे न याद रखे./

तेरे  पास  और  भी  तो काम बहुत हैं,//

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