Category Archives: Shayari-e-Dard

ग्वालियर को बदनाम ना कर…


जाने कहाँ गए वो लोग जिनकी आँन- बाण-शान होती थी.!

यही मेरे शहर की पहचान थी कभी शान हुआ करती थी.!!

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Dedicated to Daughter of India…


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एक झटके में मिटा दी,
मेरी हस्ती.!
खुशियों से बस्ती थी,
मेरी बस्ती.!!
मां की थी लाडली पापा,
की दुलारी.!
मशहूर थी घर में,
मेरी मस्ती.!!
ख्वाहिशों की कमी ना थी,
ज़िन्दगी में.!
बाबुल के आँगन से डोली,
मेरी सजती.!!
हवस की पुजारियों ने,
करी मनकी.!
दरिंदों की नज़र ज़िन्दगी,
मेरी सस्ती.!!
इक अबला की आज़ादी क्या,
गुनाह है.!
हिम्मत दिखाई लड़ी खूब,
मेरी गलती.!!
ना रही मलाल नहीं मुझको,
मेरे प्यारो.!
इक दिन जरूर मिसाल बनेगी,
मेरी हस्ती.!!

Post.

 

Good Bye (Forever) …Ball Is In Your Court…


बस बहुत हुए तेरे नाम के चर्चे,
नहीं करनी तुझ संग और मुहब्बत.!

मुझसे बेहतर कई होंगे माना यारा,
कमतर ना होगी’सागर‘की मुहब्बत.!!

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Bas Bahut Huye Tere Naam Ke Charche,

Nahin Karni Tujh Sang Aur Muhabbat.!

Mujhse Behtar Kai Honge Maana Yaara,

Kamtar Na Hogi’Sagar‘Ki Muhabbat.!!

Pain of Heart…


ज़िंदगी  ने   इतना   रुलाया  है ‘सागर‘,
अब किसी पर यक़ीन ही ना रहा.!
जिस किसी को चाहा दिल-ओ-जान से,
बदले में सिर्फ़ दर्द-ए-दिल मिला.!!

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Zindagi Ne Itna Rulaya Hai’Sagar‘,

Ab Kisi Par Yaqeen Hi Na Raha.!

Jis Kisi Ko  Chaaha Dil-o-Jaan Se,

Badale Mein Sirf  Dard-e-Dil Mila.!!

एहसास…


कभी चोट लगेगी दिल को तो समझना,
दर्द  का  एहसास  कैसा  होता  है.!

दूसरों के घर फैंक पत्थर ‘सागर‘,
बातें आसानी से बनाई जा सकती.!!

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Kabhi Chot Lagegi Dil Ko To Samajhana,

Dard Ka Ehasaas Kaisa Hota Hai.!

Dusaron Ke Ghar Faink Paththar’Sagar‘,

Batein Aasani Se Banaai Ja Sakti.!!

Life’s Attitude…


ज़िंदगी  में  जब  भी  चाहा  किसी को अपना बनाना.!
वो इक पल ठहरा मुस्कुराया और चल दिया ‘सागर‘.!!

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Zindagi Mein Jab Bhi Chaaha Kisi Ko Apna Banana.!

Wo Ik Pal Thehara Muskuraya Aur Chal Diya’Sagar‘.!!

बिखरे अरमान उजड़ा चमन.// GOOD BYE…


हम उनकी धुन में कुछ ऐसे खोए,
मंज़िल की राहें ही भूल गए./

आज जब देखते’सार’अपना ही घर,
सोचते हो ना हो है देखा हुआ.//

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Hum Unki Dhun Mein Kuch Aise Khoye,

Manzil Ki Rahein Hi Bhul Gaye./

Aaj   Jab   Dekhte  ‘Sagar’  Apna   Hi Ghar,

Sochte Ho Na Ho Hai Dekha Hua.//

 

Can’t Understand…


कुछ लोग जब हिन्दी समझ लेते हैं पढ़ भी लेते हैं
फिर क्यूँ अपना जवाब या रिप्लाइ इंग्लीश में लिखते हैं?
शायद अभी भी गुलामी करने की आदत गयी नहीं?
हो सकता है कुछ की कोई मजबूरी भी हो?
खैर छोड़िए जिसे जो अच्छा लगे काए?
अर्ज़ है:-

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ना आ करीब मेरे दिल जला हूँ,
तुझे भी जला खाक कर दूँगा.!

खुद अपने ही हाथों से अपनी,
हस्ती-दुनियाँ बर्बाद कर दूँगा.!!

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Na Aa Kareeb Mere Dil Jala Hun,

Tujhe  Bhi  Jala  Khaak Kar Dunga.!

Khud Apne Hi Haathon Se Apni,

Hasti-Duniyan Barbad Kar Dunga.!!

Your Faithlessness…


तेरी बेवफ़ाई को हमनें कदम-कदम पर पाला है.!
यही वज़ह तूने हर दम हमें बेवफ़ाई से नवाज़ा है.!!

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Teri  Bewafaai  Ko Humnein Kadam – Kadam Par Pala Hai.!

Yahi Wajah Tune HarDum Hume Bewafaai Se Nawaza Hai.!!

देवता बसते नहीं हर बुत में…


   तुझे चाँद समझ के चाहा था,
   तू तो काँच से बत्तर निकला.!

   देवता बसते नहीं  हर  बुत में,
   तू महज एक पत्थर निकला.!!

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   Tujhe Chand Samjh Ke Chaha Tha,

   Tu To Kanch Se Bttar Nikala.!

   Devta  Baste  Nahin  Har But Mein,

   Tu Mahaj Ek Paththar Nikala.!! 

Disloyal Lover…


मुहब्बत में अक्सर लोग बेवफा हो जाते हैं और ठीकरा वक़्त-मजबूरी आदि पर फोड़ते हैं!
खुशकिस्मत हैं वो जो अपनी मुहब्बत को मुकाम तक पहुँचाने में सफल रहते हैं!
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कभी  बेवफ़ाई  को  मजबूरी  ने थामा,
कभी वक़्त के तकाज़े ने.!

हर बेवफा ने बेवफ़ाई कर यही जवाब,
महबूब को दिया अक्सर.!!

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Kabhi Bewafai  Ko Majboori Ne Thaama,

Kabhi Waqt Ke Takaze Ne.!

Har Bewafa Ne Bewafai Kar Yahi Jawab,

Mehboob  Ko  Diya  Aksar.!! 

 

भूल सकता गर’सागर’.!!


कौन  चाहता  है   दर्द – ए – गम  में  जीना,
किसी  की  यादों  में  मरना ‘सागर‘.!

भूल सकता गर कभी का भुला गया होता,
दर-ए-दिल से नीज़ात पा गया होता.!!

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Kaun Chaahta Hai Dard-e-Gum Mein Jeena,

Kisi Ki Yaadon Mein Marna’Sagar‘.!

Bhool Sakta Gar Kabhi Ka Bhula Gaya Hota,

Dar-e-Dil Se Nizaat Pa Gaya Hota.!!

बाद पच्छताए क्या हो.!!


उस मुहब्बत का क्या फ़ायदा जो आप किसी के जीते जी इज़हार ना कर पायें?उसे तड़पाते रहें और उसके मरने बाद अश्क़ बहा-बहा सारा जीवन गुज़ार दें?
अगर किसी को प्यार ही देना है तो उसके जीते-जी दीजिए ताकि वो भी उस का आनन्द ले सके!
अर्ज़ है:-

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मेरे  बाद  मेरी  यादों  में  बहे  उन  अश्कों  का मैं क्या करूँ.!
उमर भर तड़पया मुझे और कभी तूने कोई खुशी ना दी.!!

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Mere Baad Meri Yaadon Mein Bahe Un Ashqon Ka Main Kya Karun.!

Umar Bhar Tadpaya Mujhe Aur Kabhi Tune Koyi Khushi Naa Di.!!  

Kaash.!!


कभी वक़्त को सरहाया,
कभी मुहब्बत की ज़िंदगी से.!

वक़्त  रहते  जो  संभलते,
तो दगा  ना  खाते  ज़िंदगी से.!!

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Kabhi Waqt Ko Sarhaaya,

Kabhi Muhabbat Ki Zindagi Se.!

Waqt Rahte Jo Sambhalte,

To Daga Na Khaate Zindagi Se.!!

My Last Wish…


ब्राह्मण माता-पिता की संतान हूँ,भारतीय हूँ इसका गर्व है हमें और मरते दम तक रहेगा भी परन्तू हमारा ऐसा मानना है कि जाती-धर्म तो हम बनाते हैं मालिक तो सबको इंसान बना भेजता है नर-मादा और रब्ब के बंदे?

 ईश्वर से जो माँगा मिला किन्तू फिर भी इंसान हूँ ना?आख़िर दम तक माँगने की आदत जाते ही जाएगी.!!

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ज़रूरी नहीं मेरी पहचान मेरे मज़हब से हो,
मेरा चर्चा  जहाँ  भी हो मेरी बातों से हो.!
हिंदू हूँ मुसलमान हूँ या सिख-ईसाई जो भी,
मेरे बाद मेरी विदाई हर इक दिल से हो.!!

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Zaruri Nahin Meri Pehchan Mere Mazhab Se Ho,

Mera Charcha Jahan Ho Meri Baton Se Ho.!

Hindu Hun Muslimaan Hun Ya Sikh-Isaai Jo Bhi,

Mere Baad  Meri Vidaai  Har  Ik Dil  Se Ho.!!

Sanam Harjai.!!


छोड़ दिया तुझे को और तेरे खवाबों को हमनें,
अब सफ़र तन्हा ही तय करने की सौची है.!

तुझ से कैसे वादा -ए -वफ़ा निभाने की आरज़ू,
तूने  तो  हरदम  गैरों  से  ही दोस्ती  की है.!!

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Chod Diya Tujhko Aur Tere Khwabon Ko Humnein,

Ab Safar Tanha Tay Karne Kee Sauchi Hai.!

Tujh Se Kaise Waada-e-Wafa Nibhaane Ki Aarzoo,

Tune To Hardam Gairon Se Hi Dosti Ki Hai.!!

 

Think Positive…


खुदा ने जब भी दिया है दिया छप्पड़ फाड़ कर.!
क्या ये  कम  नहीं तू गयी तो पर यादें छोड़ कर.!!

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Khuda Ne Jab Bhi Diya Hai Diya Chappad Phaad Kar.!

Kya Ye Kam Nahin Tu Gayi To Par Yaadein Chod Kar.!!

हक़ीक़त.!!


  मेरे कफ़न की तैयारी करलो दोस्तो,
  ज़िंदा लाश हूँ जाने कब गिर जाऊं.!

  मेरी  बात  सुन  कुछ  हँसे  भी  होंगे,
  फिर भी सौचना कैसे शम्भल पाऊँ.!!

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  Mere Kafan  Ki  Taiyaari Kar Lo Dosto,

  Zinda Laash  Hun  Jaane  Kab Gir Jaaun.!

  Meri Baat Sun Kuch Hanse Bhi Honge,

  Phir Bhi Sauchna Kaise Sambhal Paaun.!!

 

 

ज़िंदगी सस्ती नहीं.!!


अभी शहर की हवा सुधरी नहीं,
माना मेरी गर्दन उतरी नहीं.!

सम्भल – सम्भल के चलना यारो,
ज़िंदगी इतनी भी सस्ती नहीं.!!

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Abhi Shahar Ki Hawa Sudhari Nahin,

Mana Meri Gardan Utari Nahin.!

Sambhal – Sambhal Ke Chalana Yaaro,

Zindagi  Itani Bhi  Sastee  Nahin.!!

 

Kahin…


  तेरे इंतज़ार में ये रात कहीं इतनी लंबी ना हो जाए.!
  कि सुबहा तू तो उठे पर मेरी सुबहा हो ही ना पाए.!!

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  Tere Intzar Mein Ye Raat Kahin Itni Lambi Na Ho Jaaye.!

  Ki Subaha  Tu To  Uthe Par Meri Subaha Ho Hi Na Paaye.!!

उनकी खता.!!


   उनकी अदा उनकी खता बन गयी,
   वफ़ा की पर बेवफा कहला गयी.!

   ये कैसा इंसाफ़ और कैसी सज़ा,
   मुहब्बत की देवी रुसवा हो गयी.!!

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    Unki Ada Unki Khta Ban Gayi,

    Wafa Ki Par Bewafa Kehala Gayi.!

   Ye Kaisa Insaaf Aur Kaisi Saja,

   Muhabbat Ki Devi Ruswa Ho Gayi.!!

दर्द.!!


  आपके पहलू में आ भूला हूँ ज़माने का दर्द.!
  आप सिवा दूजा नहीं इस दिल का हम दर्द.!!

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Aapke Pehalu Mein Aa Bhula Hun Zmane Ka Dard.!

Aap  Siwa  Dooja  Nahin  Is  Dil  Ka  Hum  Dard.!!

माशुका के बच्चों का मामा.!!


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एक आशिक के लिए वो पल कितना दुख-दाई होता है जब उसकी माशुका किसी और की हो जाती है,और कुछ सालों बाद दो-चार बच्चों की माँ बन वापिस शहर-मुहल्ले में आती-जाती रहती है?और आशिक उसके बच्चों को अगर प्यार करना चाहे अथवा उठाना चाहे तो वो उसे मामा-मामा कह कर पुकारते हैं?
अर्ज़ है:-

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जान-ए-ज़हाँ वो दिन,
क़यामत का होगा.!

तू किसी गैर बाहों में,
अमानत-सा होगा.!!

दो-चार बच्चे साथ,
तेरा खामिंद होगा.!

बदलेंगे रिश्ते अपने नया,
नाम मामू होगा.!!

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Jaan-e-Zahaan Wo Din,

Qayamat Ka Hoga.!

Tu Kisi Gair Bahon Mein,

Amanat-Sa Hoga.!!

Do-Chaar Bachche Sath,

Tera Khamind Hoga.!

Badaleinge Rishte Apne Nya,

Naam Mamu Hoga.!!

रोया हूँ अक्सर.!!


हर इंसान के जीवन में कभी ना कभी बहुत से हसीन पल गुज़रे होते हैं पर वक़्त गुज़रे बाद बस उन लम्हों की यादें ही रह जाती हैं और यही यादें कभी अश्क तो कभी लफ्ज़ बन कागज पर बिखर जाती हैं!
अर्ज़ है:-

 

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     तेरे साथ गुज़रे लम्हों को याद कर,
     तन्हाई में रोया हूँ अक्सर.!
     वो वक़्त याद आता जब बाहों में,
     हुआ करते थे हर वक़्त.!!

Tere Sath Guzare Lmhon Ko Yaad Kar,

Tnhai Mein Roya Hun Aksar.!

Wo Waqt Yaad Aata Jab Baahon Mein,

Hua  Karte  The  Har Waqt.!!

एक और शाम बीत आई.!!


सुबहा उगते सूरज को देखा  तो जीने की चाह हो आई.!
शाम ढलते जाना ज़िंदगी की एक और शाम बीत आई.!!

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Subaha Ugate Suraj Ko Dekha To Jeene Ki Chah Ho Aayi.!

Shaam Dhalte Jaana Zindagi Ki Ek Aur Shaam Beet Aayi.!!

तेरी गलतफहमी.!!


 

      ये तेरी गलतफहमी सिवा और कुछ नहीं.!
      तेरे बाद मेरे जीने की और भी वजह होंगी.!!

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Ye Teri Galatfahmi Siwa Aur Kuch Nahin.!

Tere Bad Mere Jine Ki Aur Bhi Wajha Hongi.!!

Dushamani Nahin Usse.!!


इन आँखों  की  नींद चुरा  तू भी ना  चैन से रह सकेगा.!

तुझे सब मनचाहा दिया अपनी भी दुशमनी नहीं उससे.!!

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In Aankhon Ki Neend Chura Tu Bhi Na Chain Se Reh Sakega.!

Tujhe Sab  Manchaha Diya Apni Bhi Dushamani Nahin Usse.!!

तहज़ीब ना रिश्‍तों की.!!


कुछ लोग खुद को बहुत अच्छा और समझदार समझते है और दूजे को सिफ़र?
काश जब वो आईने के सामने होते हैं खुद को देखें और फ़ैसला करें क्या वो किसी की दोस्ती के काबिल भी हैं या नहीं?
खुद को सही ना कर दूसरों की कमी निकालते रहना उनकी फ़ितरत बन जाती है,
ईश्वर भी उन पर हंसता ही होगा और पछताता होगा ऐसे नक़ाबिल लोग क्यूँ बनाए!
अब बना दिए तो ऐसे लोगों को झेलना तो होगा ही ना??

कृपया इसे कोई व्यक्तिगत ना ले…

 

अर्ज़ है:-

 

कभी आईना तो देख लेते,

देखते खुद को समझते,

क्या  क़ाबिल  हैं  दोस्ती के.!

जिसे तहज़ीब ना रिश्‍तों की,

पल में बिगड़े बोल बोले,

कहाँ गुंजाइश फिर मौके की.!!

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Kabhi Aaina To Dekh Lete,

Dekhte Khud Ko Samajhte,

Kya  Qaabil  Hain  Dosti  Ke.!

 

Jise Tehzeeb Na Rishton Ki,

Pal Mein Bigade Bol Bole,

Kahan Gunjaish Phir Mauke Ki.!!

 

Second Chance…?


Every One Deserve A Second Chance?

No/Never…

Of Course/Why Not…..

Sometime Consider But Sometimes Not Consider.

 

इस बात की क्या गारन्टी है कि ग़लती करने वाला दोबारा ग़लती नहीं करेगा?
मुश्किल प्रशन है कभी उत्‍तर हाँ कभी ना है!

दो लाइन अर्ज़ हैं:-

 

क्यूँ ना पहले ही संभल-संभल कर जीवन में रास्ते तय करें.!
ग़लती की गुंजाइश ही ना रहे ना और मौकों देने की बात हो.!!

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यारी का मतलब.!!


दुनियाँ में कुछ लोग ऐसे होते हैं जो हर किसी को अपना बेस्ट फ़्रेंड बता देते हैं बिना जाने-समझे की वो इस लायक है भी कि नहीं ? जबकि वो बेस्ट फ़्रेंड की परिभाषा भी नहीं जानते?
बेस्ट फ़्रेंड मतलब सच्चा दोस्त,वो है जो आपका ख़याल हर छोटी-से छोटी बात में करे,आपको क्या अच्छा लगता है और क्या नहीं इसका ध्यान रखे,आपके हर सुख-दुख  में आपके साथ  खड़ा दिखे ?आपके  लिए  त्याग  की  भावना  रखे,कोई-किसी  प्रकार  का भेद-भाव  ना रखे/करे!
किसी को दोस्त बनाना-कहना आसान है दोस्ती निभाना बहुत मुश्किल!

 

अपनी लिखी कुछ पंक्तियाँ पेश हैं:-

 

वही दोस्ती  का  दम  भरते  जो दोस्ती का ए बी सी भी नहीं जानते.!
दोस्त तो जाने कब दोस्ती निभा जाते कानों-कान खबर नहीं होती.!!

जब तल्क दुनियाँ वाले कुछ समझ पाते दोस्त-दोस्ती निभा जाते.!
छोड़ यादों के फल्सफान दोस्त खातिर दोस्त दुनियाँ ही छोड़ जाते.!!

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Wahi  Dosti  K a Dum  Bharte  Jo Dosti Ka A B C Bhi Nahin Jaante.!

     Dost To Jane Kab Dosti Nibha Jaate Kano-Kan Khabar Nahin Hoti.!!

Jab Talq Duniyan Wale Kuch Samjh Pate Dost-Dosti Nibha Jate.!

     Chod Yaadon Ke Falsafaan Dost Khatir Duniyan Hee Chod Jate.!!

हर एक पल शिद्दत से जिया है”सागर”.!!


ज़िंदगी  के हर एक पल को शिद्दत  से जिया है”सागर“.!

वक़्त चाहे जैसा भी रहा हो हंस कर सहा है”सागर“.!!

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Zindgee Ke Har Ek Pal Ko Shiddat Se Jeeya Hai”Sagar“.!

Waqt Chahe Jaisa Bhi Raha Hans Kar Saha Hai”Sagar“.!!

ज़िंदगी रही तो मुलाक़ात यक़ीनन होगी.!!


तेरी  दुनियाँ  से  दूर  चला  आया हूँ.!

ज़िंदगी रही तो मुलाक़ात यक़ीनन होगी.!!

पहचानना या ना पहचानना मुझ को.!

मेरी  आँखों   में  यूँ   ही   बरसात होगी.!!

तेरी दुनियाँ से दूर चला आया हूँ.!

Teri  Duniyan  Se  Door  Chala  Aaya Hoon.!

Zindgi  Rahi  To  Mulaqat  Yaqeenan Hogi.!!

Pehchanna  Ya  Na  Pehchanna  Mujh Ko.!

Meri  Aankhon  Mein  Yun  Hi  Barsat Hogi.!!

कैसे तुझ बिन जीता हूँ.!!


तेरी यादों संग सोता हूँ,
तेरी यादें लिए उठता.!
खुद ही समझ ज़िंदगी,
कैसे तुझ बिन जीता हूँ.!!

तेरी यादों

Teri Yadon Sang Sota Hoon.

Teri Yaadein Liye Uthta.!

Khud Hi Samjh Zindgee,

Kaie Tujh Bin Jeeta Hoon.!!

बहुत सहे तेरे नाज़-नखरे सनम अब चलता हूँ.!!


बहुत सहे तेरे  नाज़-नखरे सनम,

अब तेरे शहर से चलता हूँ.!

गर कभी हो ज़रूरत हो”सागर“की,

याद करना सामने पाओगे.!!

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Bahut Sahe Tere Naaz-Nakhare Sanam,

Ab Tere Shahar Se Chalta Hun.!

Gar Kabhi  Ho  Zarurat Ho “Sagar” Kee,

Yaad Karna Samane Paoge.!!

जाने के बाद.!!


 Apne Baare Mein Kya Achcha Kiya Kya Bura,

Kyun Kar Hisab Rakhun.!

Ye To Duniyan Batayegi Achcha Tha Ya Bura,

Mere  Jaane  Ke Baad.!!

अपने बारे में क्या अच्छा किया क्या बुरा,

अपने बारे में क्या अच्छा किया क्या बुरा,
क्यूँ कर हिसाब रखूं.!
ये तो दुनियाँ बताएगी अच्छा था या बुरा,
मेरे जाने के बाद.!!

ज़रूरत पढ़ेगी दुनियाँ बुलाएगी.!!


खुद ग़र्ज़ दुनियाँ में आजकल ये चलन हो गया है,
जब तक मतलब पूरा नहीं होता रिश्ते-नाते,यारी-दोस्ती,
मतलब निकालने बाद सब रिश्ते झूठे?
माना सभी ऐसे नहीं पर प्रतिशत 90% है!

इसी को ध्यान में रख चन्द पँतियाँ पेश हैं:-


जब ज़रूरत पढ़ेगी दुनियाँ बुलाएगी,
वक़्त निकालने बाद भूल जाएगी.!
यही है चलन”सागर“अब जमाने का,
मतलब  बाद  गले  ना लगाएगी.!!

Baad Duniya bhool

Jab Zarurat Padegi Duniyan Bulayegi,

Waqt Nikalne Baad Bhool jaayegi.!

Yahi hai Chalan”Sagar“ab Zamane ka,

Matlab  Baad Gale Na Lagaayegi.!!

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