Yun Ruthna Manana

Kab Tk Chlega…
Zra Ye Bhi
Bta To Do…!

एक तरफ़ा मुहब्बत का हासिल कब बेहतर हुआ है..
दिलजले होकर रह गए जो बिन मंजिल आगे बड़ा है..!

न कर इतनी मुहब्बत जुदा
हो जीना मुश्किल हो जाए..
आज बिछड़ी कल मिलना
वक़्त तन्हाई का गुज़र जाए..!

मुहब्बत का कोई वादा ऐसा न कर..
गर निभाना पद जाए तो मुषस्किल हो..!

Yun aankhein Nm na kr Hum hain na..
Mile honge ab tlq Bewafa Magar Hum na..!

होगी उसकी नाराज़गी की कोई अपनी वजह हमें तो इसमें भी मुहब्बत का एहसास मिलता..
एक बार पलट कर तो देखो हंसी उड़ाने वालो हमें तो ज़िन्दगी जीने का नया पैगाम मिलता..!

कुछ दिन रो पीट सब खामोश हो जाते
ज़िन्दगी भर किसी के लिए कौन रोता है..
यही दस्तूर रहा है ज़माने का रिश्तों को
बस लफ़्ज़ों तक ढोता है..!

इतनी मुहब्बत न कर चाहा कर भी भुला न सकूँ..
मौत आये जो कभी मर ही न सकूँ..!

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Posted on December 6, 2019, in Shayari Khumar -e- Ishq. Bookmark the permalink. Leave a comment.

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