तुझ से मिलना भी कोई मिलना था लगता सब आँखों का भरम था..
आँख खुलते इंतज़ार हो आता फिर भी तेरी आँखों में पानी कम था..!
ये तेरी ख़ता ही थी जो तू उन सांग दिल लगा बैठी जो मुहब्बत का ABC नहीं जानते..
गुरुर में डूबें हैं इस क़द्दर खुदसे बड़ा कोई न मानते..!
Posted on December 6, 2019, in Shayari Khumar -e- Ishq. Bookmark the permalink. Leave a comment.
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