इतने ज़िद्दी न बनो के कोई तुम्हारी
ज़िन्दगी से ही चला जाए.
रहो अपनी ही धुन में वो फिर
लौट कर ही न आये..!

गवां मत खूबसूरत पल किसी की खातिर ज़िन्दगी. से खूबसूरत और कुछ नहीं..
ये सिलसिले गिले शिकायतों के चलते हैं चलते रहेंगे ज़िन्दगी बेहतर और कुछ नहीं..!

तुझसे बिछड़ जीना पड़ेगा कभी सोचा ना था..
ज़िन्दगी होगी यूँ बेज़ार कभी समझा ना था..!

उन्हें फुरसत न थी हमारे लिए ये और बात..
Wada तह उम्र निभाने का कर गए..!

कभी याद करना न सफर थोड़ा ही था साथ गुज़रा..
जो भी गुज़रा था बहुत खूब गुज़रा..!

तू कल भी बेवफा थी आज भी है और कल भी रहेगी..
ए हुस्न किस दिन तू बेवफाई का दमन छोड़ेगा…!

तेहर ख्वाब मुक़म्मिल होगा..

दुआओं का असर जरूर होगा..!

जब तक हैं सांसें बदन में लिखते रहेंगे..
गम-ए-दिल को लफ़्ज़ों में पिरोते रहेंगे..!

जो भी गुजरी चाहे थोड़ी ही सही मगर बहुत खूब गुज़री..
मैं भी सोचूंगा तू भी सोचना गर उम्र का साथ हो क्या खूब गुज़रती..!

कोई और नज़र उठे तेरी तरफ इस दिल को कभी गवारा न था..

बेशक कुछ मजबूरियां इधर भी हैं मगर आशिक़ आवारा न था..!

तुझ से नाराज हो कहाँ जाऊंगा ज़िन्दगी..
तू है तो ही है मेरी मेहफ़ूज़ ज़िन्दगी..!

मेरी शायरी की इक अधूरी ग़ज़ल हो..
तुम नहीं तो ये बज़म किस काम की..!
कभी अहल-ए-दिल के बदले वफ़ा मिलती थी..
ये वो दौर है जब मुहब्बत का सिला रुस्वाई से मिला करता है..!

इस दुनियां में अपना कोई नहीं है सब अपना होने का नाटक करते हैं..
खुद यक़ीन के क़ाबिल नहीं इसीलिए दूजे पर भी यक़ीन करते नहीं..!

Unknown's avatar

About Dilkash Shayari

All Copyrights Are Reserved.(Under Copyright Act) Please Do Not Copy Without My Permission.

Posted on December 5, 2019, in Shayari Khumar -e- Ishq. Bookmark the permalink. Leave a comment.

Comments / आपके विचार ही हमारे लिखने का पैमाना हैं.....ज़रूर दीजिये...