बेशक खत्म हो रही गर किताब है सदियों तक पढ़ी जायेगी..
हम तो महज़ लफ्ज़ है आज पढ़े कल फिर भुला दिए जाएंगे..!

दुनियां वाले हैं दुनियां वालों की कुछ परवाह भी किया करो..
माना आज़ाद ख्याल बताती खुद को मगर रीती रिवाज़ों की परवाह भी किया करो..!

तू किसी और को चाहे दिल को गवारा नहीं,
अपनी मुहब्बत का हमें क़बूल बटवारा नहीं..
हाँ ऐसे ही हैं क्या करें खालिस इशारा नहीं,
फिर ना कहना जां देने से पहले संवारा नहीं..!

मुद्दत से चाहत रही इक गरीब मगर दिल की अमीर मिले..
खुदा भी वही दुआ मानता जो दिल से न निकली हो..!

 

माना हम नाराज हैं मगर तुमने वजह भी तो न पूछी
दिल से अगर चाहते तो क्या मना ना लेते..!

कुछ लम्हों की दास्ताँ है ज़िन्दगी सब जानते हैं..
फिर भी ज्यादा को लालच रखते कहाँ मानते हैं..!

उम्मीद की हसरत में नाउम्मीद से उम्मीद कर बैठे..
बड़े नादाँ निकले एक पत्थर पर यक़ीन कर..!

 

गैर अमानत हो रोकती बंदिशें ज़रा..
इश्क़ की बारीकियां हमें न समझाया करो..!,

हाँ तू आवारा है तभी तो घाट घाट पानी पीती..
एक संभलता नहीं दूजे का दामन थामती..!

मुझे बताना है तुम्हें यूँ छेड़ा छड़ी हमसे न करो..
कम्बख्त दिल नादाँ होता आ गया तो पछताओगे..!

ज़िन्दगी तू हसीं तो है मगर इतनी भी नहीं..
हमें अपनी ज़िद्द से क़दमों में ला सके..!

कुछ टूटे हुए सपनें हैं उनमें हो तुम,
भीगे हुए अरमाँ हैं ऐसी बारिश हो तुम..
तुम नहीं ये ज़िन्दगी किस काम की,
धड़कते दिल की आखिर सांसें हो तुम..!

दर का सिहासन है क़दमों की धूळ नहीं
जिसने पैदा किया उसका अपमान क्या भूल नहीं..
नारी भोग विलास नहीं पालनहार हर घर का सुख संसार
खुशबू समझ निचोड़ो ऐसा फूल नहीं..!

ज़िन्दगी इतनी हसीं यारो जी नहीं भरता,
जाने के वक़्त पर भी मन नहीं करता..
कुछ पल की कहानी फिर भी मोह माया,
जाने इंसान मगर फिर भी न सम्भलता,,!

जब से हुई गैरों संग तेरी दोस्ती अब तुम कम याद आते हो..
कितना समझाया न करो उनसे बातें मगर तुम कहाँ मानते हो..!

दुनियां वाले हैं दुनियां वालों की कुछ परवाह भी किया करो..
माना आज़ाद ख्याल बताती खुद को मगर रीती रिवाज़ों की परवाह भी किया करो..!
ये दुनियां एक धोखा है जनाब..
यहाँ मुहब्बत न कीजिये..!

मुझे बताना है तुम्हें हर मनचाही आरज़ू पूरी नहीं होती..
जैसे समुन्दर में उतारी हर किश्ती किनारे नहीं लगती..!

करलें बेशक इजहार-ए-मुहब्बत..
ज़िन्दगी तो बेवफा है ठुकरा कर ही मानेगी..!

ये दिल की लगी भी बड़ी ज़ालिम है..
दोस्तों ना सोने देती न जागने..!

जहां में एक तुम हो नहीं हो रूप.की रानी हम भी है शोहरत के शहंशाह..
हमारे दिल की छोड़िये हज़ूर अपनी सोचिये फिर न कहना दिल पर है किस का इख्तियार..!

कोशोषें लाख तुम करो कोशिश हम भी करते दूर होने की l
मगर नामुमकिन फूल से खुशबू कभी जुदा हो सकती नहीं ll
 
बहुत गुमाँ था हमें अपने इश्क़ पर
मगर तेरी नादानियों कारण एक न चली
तू अपनी हरकतों से न बाज़ आई
हम भी तुझे इस रूप में क़बूल कर न सके

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Posted on December 3, 2019, in Shayari Khumar -e- Ishq. Bookmark the permalink. Leave a comment.

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