मेरी शायरी की इक अधूरी ग़ज़ल हो
तुम नहीं तो ये बज़म किस काम की
ज़िन्दगी से मिले आज हम खुद से मुलाक़ात हो गयी
अब तक जो अधूरी थी ख्वाहिशों की बरसात हो गई
शौख गुनाहों की दिल फरेब मंडी ये दुनियां.!
यहाँ हर कोई आया शोहरत कमाने के लिए.!!
पैगाम-ए-उल्फत यूँ न पहुंचाइए.!
दिल से तो गए हैं जां से भी जाएँ.!!
ये तेरी ख़ताओं की या मेरी खता की कोई सज़ा है.!
मंज़िल करीब थी मगर रास्ते न जाने कहाँ खो गए.!!
जुल्फों को यूँ न लब छूने दीहिये.!
रश्क़ होता कम्बख्त हक़ मार रही.!!
लब = होंठ
रश्क़ = जलन,चिढ
Posted on October 29, 2019, in Shayari Khumar -e- Ishq. Bookmark the permalink. Comments Off on .