वो फूल अब तक संभाल रखा है जो दिया था कभी छुपा के किताबों में.!!
सोचता देखूं फिर रख देता हूँ किताब डरता कही आ जाये न ख्यालों में.!!
कभी फुर्सत मिले तो पल्ट कर देख लेना.!
मैं आज भी वहीँ हूँ जहाँ कल इंतज़ार था.!!
ए मेरे नादान दिल यूँ उदास न हो.!
पल्ट उसे आना ही होगा तुझ सा चाहने वाला कहाँ मिलता.!!
Posted on September 30, 2019, in Shayari Khumar -e- Ishq. Bookmark the permalink. Leave a comment.
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