क़ाबिल.!!
माना तेरी नज़रों के क़ाबिल हम न रहे,
इतने तो न थे के लौट के हाल-चाल ना पूछा.!
कभी की थी तुमने भी मुहब्बत बेइंतहा,
रातों को जागे साथ-साथ इक़रार भी किया था.!!
Posted on July 30, 2018, in Shayari-e-Dard. Bookmark the permalink. Leave a comment.
माना तेरी नज़रों के क़ाबिल हम न रहे,
इतने तो न थे के लौट के हाल-चाल ना पूछा.!
कभी की थी तुमने भी मुहब्बत बेइंतहा,
रातों को जागे साथ-साथ इक़रार भी किया था.!!
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