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Meri Khata…Gazal.


मुझ को मेरी खता तो बता ए मेरे खुदा.!
क्या यही के चाँद छूने की खता की है.!!
मुझ को मेरी…
पंछियों संग खिलखिलाना कितना अच्छा लगता है.!
क्या यही खता है के मैंने उड़ने की चाहत की है.!!
मुझ को मेरी…
मनचाहा पाने की किस दिल हसरत नहीं होती है.!
क्या यही खता है मैंने प्यार करने की ज़ुर्रत की है.!!
मुझ को मेरी…
हसींन दुनियां में हर शक़्स ख़ुशी को चाहता है.!
मेरी खता है जो मैंने जीने की यहाँ आरज़ू की है.!!
मुझ को मेरी…
दिल ज़िद्दी है नादाँ है संभाले सम्भलता नहीं है.!
क्या खता है धड़कते दिल ने बाहर दोस्ती की है.!!
मुझ को मेरी…

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Mujh ko meri khata to bata ey mere Khuda.!

Kya yahi ke Chaand choone ki khata ki hai.!!..

Panchiyon sang khilkhilana kitna achcha lagta hai.!

Kya yahi khata hai ke maine udne ki chahat ki hai.!!..

Mujh ko meri…

Manchaha paane ki kis dil ki hasrat nahin hai.!

Kya yahi khata hai maine pyaar karne ki zurat ki hai.!!..

Mujh ko meri…

Haseen duniyan mein har shaqs khushi ko chahta hai.!

Meri khata hai jo maine jeene ki yahan aarzoo ki hai.!!..

Mujh ko meri…

Dil ziddi hai nadan hai sambhale sambhlta nahin hai.!

Kya  khata  hai  dhadkate  dil  ne  bahar  dosti  ki  hai.!!..

Mujh ko meri…

यलगार.!!


Instantly (Online) लिखी गई ग़ज़ल पेश है :-

 

यार का यार यार नहीं,
रकीब होता है./
ढूंढ़ता रहता है कमियां,
क्या शरीफ होता है.//

सही रास्ता न दिखा,
दोनों को करता है दूर./
वक़्त सिखाता बेशक,
कुछ पल करीब होता है.//

मन में डाल दरार रखे,
जो दूजे को दूर./
वो शक्श दिल का ही,
बड़ा गरीब होता है.//

जियो और जीने दो,
सब को साथ ले चलो./
ऐसी सोच वाला ही,
दिल के करीब होता है.//

हदें ना पार कर और,
न करने दे “सागर“./
शायर है यार तू तो,
शायर फ़कीर होता है.//

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शायरी वो जो पढ़ने वाला उसे खुद में महसूस करे./
कहे यार-दोस्तों को देखो मुझ पर ही तो लिखा है.//

Dil Se…


इक ग़ज़ल किसी ख़ास के नाम,
जो रोशन है सितारों में,
चमकती चाँदनी की तरह.!

कौन है किस पर है,
इस पर ना जाइए,
बस दिल की लगी का,
मज़ा उठाइए.!! 

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वैसे भी घर जला जब-जब किसी किसी का
दुनियाँ ने है लुत्फ़ उठाया’सागर‘.!
आखों में आँसू तो भरे और होंठों पर आह,
तन्हाई मिलते ही ठहाका लगाया.!!

अर्ज़ है:-

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तुझ  से  बिछड़  कभी  भी  एक  पल चैन से  रह  पाया ना मैं.!
ये   और  है  बात   हर  पल   तेरे   सामने  मुस्कुराया  हूँ मैं.!!

इक  तू  ही  थी  जिस  संग  बात करी दिल खोल कर हरदम.!
तेरे  बाद  सिर्फ़  काग़ज़  पर  ग़ज़ल  बन  सिमट आया हूँ मैं.!!

कभी  तूने  कहा  था  अब  ना  कभी  बोलूँगी  तुझ  संग मैं.!
उस   पल  से   ही   हसीन  दुनियाँ  से  लौट  आया   हूँ मैं.!!

तेरा  शहर  तेरा  वजूद  तुझ   को   ही  मुबारक़  हो  सनम.!
तेरे  नाम   की  दुआ  मंदिर  –  मस्ज़िद  माँग  आया  हूँ मैं.!!

सागर‘ को  भुला  पाना  गर  मुमक़िन  तो ज़रूर भुला लेना.!
अब  सब  कुछ  तेरे  हाल – ए – दिल  पर  छोड़ आया हूँ मैं.!!

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Tujh Se Bichad Kabhi Bhi Ek Pal Chain Se Reh Paya Na Main.!

Ye Aur Baat Hai Har Pal Tere Samne Muskuraya Hun Main.!! 

Ik Tu  Hi Thi  Jis Sang  Baat  Kari Dil  Khol  Kar Hardum.!

Tere Bad Sirf Kagaz Par Gazal Ban Simat Aaya Hun Main.!!

Kabhi Tune Kaha Tha Ab Na Kabhi Bolungi Tujh Sng Main.!

Us Pal Se Hi Haseen Duniyaan Se Laut Aaya Hun Main.!!

Tera Shahar Tera Wajood Tujh Ko Hi Mubaraq Ho Sanam.!

Tere Naam Ki Dua Mandir-Maszid Maang Aaya Hun Main.!!

Sagar‘Ko Bhula Paana Gar Mumqin To Zarur Bhula Lena.!

Ab Sab Kuch Tere Haal-e-Dil Par Chod Aaya Hun Main.!! 

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