Category Archives: Hussan-e-Ishaq Shayari

तेरे हुस्न पर शबाब भी ना होता.!!


   ये  दिल  गर  शायर  ना होता तो तय था,
   तेरी खूबसूरती का कोई कायल भी ना होता.!

   ना शायरी होती ना महफ़िल-ए-मुशायरा,
   तेरे हुस्न  पर फिर ऐसा शबाब भी ना होता.!!

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   Ye Dil Gar Shaayar Na Hota To Tay Tha,

   Teri  Khubsurati  Ka Koyi Kayal Bhi Na Hota.!

   Na Shayri Hoti Na Mehfil-e-Mushayara,

   Tere Husn Par Phir Aisa Shabab Bhi Na Hota.!!

 

बेमिसाल.!!


 

   हुस्न मिला है तो नज़ाक़त भी मिली होगी,
   मालिक ने कूट-कूट कर हिमाक़त भी दी होगी.!

   अज़ी  ये जो  रूठ जायें रुत जाए फ़िज़ा भी,
   कलियों ने खिलने की इनसे इज़ाज़त ली होगी.!!

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  Husn Mila Hai To Nazaqat Bhi Mili Hogi,

  Malik Ne Koot-Koot Kr Himaqat Bhi Di Hogi.!

  Azi Ye Jo Rooth Jayein Ruth Jaye Fiza Bhi,

  Kaliyon Ne Khilane Ki Inse Izaazat Lee Hogi.!!

चाँदनी यूँ ना इतरा.!!


   शायरी में चाँदनी की तुलना माशुका से की गयी है और आफताब को माशूक माना है!

अर्ज़ है:-  

 

     चाँदनी यूँ ना इतरा अपने हुस्न-ए-जमाल पर.!
     रोशन है तब तक जब तक आफताब आबाद है.!!

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  Chandni Yun Na Itara Apne Husn-e-Jamal Par.!

  Roshan Hai Tab Tak Jab Tak Aaftaab Aabad Hai.!!

कशमकश.!!


  बड़ी शिद्दत से खुदा ने तुझे बनाया होगा,
  कहीं-कहीं से ऐसे नय्न-नक्श लाया होगा.!
  तुझ हसीन को बनाने के बाद यक़ीनन वो,
  भेज ज़मीन पर तुझे बहुत पछताया होगा.!!

 

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Badi Shiddat Se Khuda Ne Tujhe Banaya Hoga,

Kahin-Kahin Se Aise Nayn-Naqsh Laya Hoga.!

Tujh Haseen Ko Banane Ke Baad Yaqeenan Wo,

Bhej Zameen Par Tujhe Bahut Pachataya Hoga.!!

आप की आँखें.!!


  आप  की  आँखें  हैं  के चंदा की बिखरती चाँदनी.!
  लबों की छलकती लाली जैसे शायर की रागनी.!!

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Aap Ki Aankhein Hain Ke Chanda Ki Bikhrti Chandni.!

Labon Kee Chalakti  Laali Jaise Shayar Kee Raagani.!!

‘सागर’का मुक़द्दर बना निकले.!!


   जब-जब निकले हो घर से,
   ग़ज़ल लिखने के बहाने निकले.!

   सरकया रुख़ से जो नक़ाब,
   चौहदंवी के चाँद-सा निकले.!!

   हुस्न भी शर्मा जाए देखे,
   गर जान-ए-बाहर का चेहरा.!

    क्या खूब आए ज़िंदगी में,
   ‘सागर‘का मुक़द्दर बना निकले.!!

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Jab-Jab Nikale Ho Ghar Se,

Gazal Likhne Ke Bahane Nikale.!

Sarkaya Rukh Se Jo Naqab,

Chuahdanwi Ka Chaand Nikale.!!

Husn Bhi Sharma Jaaye Dekhe,

Gar Jaan-e-Bahaar Ka Chehara.!

Kya Khub Aaye Zindagi Mein,

‘Sagar’Ka Muqaddar Bana Nikale.!!

क्यूँ इतराते हो.!!


     बात-बेबात रूठ कर बैठ जाते हो.!
     हुस्न वाले क्यूँ इतना इतराते हो.!!

     चार दिन चाँदनी है और कुछ नहीं.!
     वक़्त से  ख़ौफ़  क्यूँ नहीं खाते हो.!!

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Baat-Bebaat Ruth Kar Baith Jate Ho.!

Husn  Waale  Kyun Itana Itraate Ho.!!

Chaar Din  Chandni  Aur Kuch Nahin.!

Waqt Se Khauf Kyun Nahin Khate Ho.!!

फूल सी आँखें.!!


क्या  खूब  हैं  तेरे  चेहरे  पर  ये  दो  फूल  सी आँखें.!

इनसे पी कुछ यूँ बहकता खाना-पीना सब भूल जाता.!!

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Kya Khub Hain Tere Chehare Par Ye Do Phool Si Aankhein.!

In Se Pee Kuch Yun Behakta Khana-Peena Sab Bhool Jaata.!!

परियों से प्यारी महबूबा वो हमारी.!!


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फूलों से नाज़ुक हो,

परियों से प्यारी.!

रब्बा कुछ  ऐसी हो,

महबूबा वो हमारी.!!

 

जो देखे उसे देखता,

ही रह जाए.!

चाँद-सितारों में एक,

हो दुल्हन हमारी.!!

 

खवाबों की आदत नहीं,

फिर भी देखते.!

खुदा पूरी करे यही,

बस हसरत हमारी.!!

 

निकलें जब घर से दोनो,

लोग देखते रह जायें.!

दुनियाँ से हसीन हो,

ईक़् जोड़ी हमारी.!!

 

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Phoolon Se Nazuk Ho,

Pariyon Se Pyaari.!

Rabba Kuch  Aisi Ho,

Mehbooba Wo Humari.!!

 

Jo Dekhe Use Dekhta,

Hi Reh Jaaye.!

Chaand-Sitaron Mein Ek,

Ho Dulhan Humari.!!

 

Khawabon Ki Aadat Nahin,

Phir Bhi Dekhte.!

Khuda Poori Kare Yahi,

Bus Hasrat Humari.!!

 

Nikalein Jab Ghar Se Dono,

Log Dekhte Reh Jayein.!

Duniyan Se Haseen Ho,

Iq Jodi Humari.!!

 

क्या कनक्शण है चाँद से बता.!!


     क्या कनक्शण है तेरा चाँद से बता.!

     जब भी निकला सितारे क्यूँ निकल पढ़े.!!

 

     आँख उठा देखा तेरे रुख़ की तरफ.!

     चाँद  पर  बादलों  के  पर्दे  घिरने  लगे.!!

क्या कनेक्षन है तेरा चाँद से बता.!.jpg

     Kya Connection Hai Tera Chaand Se Bata.!

     Jab Bhi Nikala Sitaare Kyun Nikal Padhe.!!

 

     Aankh Uthe Dekha Tere Jo Rukh Ki Taraf.!

     Chaand Par Badalo Ke Parde Ghirne Lage.!!

Mere Mehboob Ki Ada.!!


आखों पे चस्मा  नाक़ पे गुस्सा होंठों पर हँसी,

कुछ ऐसी मेरे महबूब की अदा.!

जो देखे हो जाए घायल जो ना देखे वो भी घायल,

बस ऐसी है मेरे हजूर की अदा.!!

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Aakhon Pe Chasma Naaq Pe Gussa Honthon Pe Hansi,

Kuch Aisi Mere Mehboob Ki Ada.!

Jo Dekhe Ho Jaaye Ghayal Jo Na Dekhe Wo Bhi  Ghayal,

Bus Aisi Hai Mere Hajoor Ki Ada.!!

लगती जैसे कोई हूर.!!


आँखों  में  कशिश,

मुख  पर  चाँदनी  सा  नूर.!

सागर“दीवाना हुआ,

लगती दिल को जैसे कोई हूर.!!

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Aankhon Mein Kashish,

Mukh Par Chandni Sa Noor.!

Sagar” Deewana Hua,

Lagti Dil Ko Jaise Koyi Hoor.!!

देखना मार डालेंगी ज़ालिम क़ातिल निगाहें.!!


Uff Ye Shokhiyan Ye Bankpan Aur,

Masti Bhari Adayein.!

Maar Daleingi Dekhna Ek Din Ye,

Zalim Qatil Nigahein.!!

 

उफ्फ ये शोखियां ये बांकपन और,

उफ्फ ये शोखियां ये बांकपन और,

मस्ती  भारी  अदायें.!

मार  डालेंगी  देखना  एक दिन ये,

ज़ालिम क़ातिल निगाहें.!!

 

Khuda Ne Badhi Furasat Se Banaya Tujh Ko.!!


Kya Khub Hai Tera Har Ang Aur Husn Ka Zamaal.!

Lagta  Khuda  Ne  Badhi  Furasat  Se Banaya Tujh Ko.!!

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क्या  खूब  है  तेरा  हर  अंग  और  हुस्न  का ज़माल.!

लगता खुदा ने बढ़ी फुरसत से बनाया तुझ को.!!

तेरी सूरत.!!


Ab  To Har Shayi Mein Teri Surat Nazar Aati Hai.!

Kya Karoon Is Dil Ka Teri Yaad Bada Tadpati Hai.!!

अब तो हर शय में तेरी सूरत नज़र  आती  है.!

अब  तो  हर  शय  में  तेरी  सूरत नज़र आती है.!

क्या करूँ इस दिल का तेरी याद बड़ा तड़पाती है.!!

इतनी भी खूबसूरत नहीं हो.!!


Itani Bhi Khubsurat Nahin Ki Din-Raat,

Aanhein Bharoon.!

Tere Khayalon Mein Khoya Rahoon Teri, 

Zustzoo Karoon.!!

इतनी भी खूबसूरत नहीं की दिन-रात,

इतनी भी खूबसूरत नहीं की दिन-रात,

आँहें  भरूं.!

तेरे  ख़यालों  में  खोया  रहूं  और तेरी,

ज़ुस्तज़ू करूँ.!!


Larzate Honthon Ki Mayi Ko Sambhal Kar Rakh Ey Dost.!

Kabhi Kisi Manchahe Ko Madhosh Karne Ke Kam Aayegi.!!

 

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लरज़ते  होंठों  की  मयि  को  संभाल  कर रख ए दोस्त.!

कभी किसी मनचाहे को मदहोश करने के काम आएगी.!!

शहज़ादे हैं अपने दिल के.!!


तुझे   गुमान   है   गर   अपने  हुस्न  पर,

मुझे  भी  नाज़ अपने इश्क़ पर.!

होगी महलों की रानी किसी सलतनत की,

शहज़ादे यहाँ भी अपने दिल के.!!

तुझे गुमान है

Tujhe Guman Hai Gar Apne Husn Par,

Mujhe  Bhee  Naaz Apne Ishq Par.!

Hogi Mehalon Ki  Rani Kisi Saltnat Ki,

Shehazade Yahan Bhi Apne Dil Ke.!!

याद आए हो बहुत.!!


बीच घटाओं से जब-जब निकला चाँद.!
मेरे महबूब याद आए हो बहुत.!!
जब-जब हुए हो रु-बरु आँखों सामने.!
जान-ए-बहार शरमाये हो बहुत.!!

बीच घटाओं से

Beech  Ghataon  Se  Jab-Jab Nikla Chaand.!

Mere Mehboob Yaad Aaye Ho Bahut.!!

Jab-Jab Huye Ho Ru-Baru Aankhon Samane.!

Jaan-e-Bahar Sharmaye Ho Bahut.!!

मैं तुझ को चाँद समझता हूँ.!!


ज़रा निकल छत पर सामने आ,

मेरे  घर   में   बहुत  अंधेरा  है.!

मैं  तुझ  को  चाँद  समझता  हूँ,

तेरे अक्स से मेरा घर रोशन है.!!

ज़रा निकल छत पर सामने आ,

Zara Nikal  Chat Par Samane Aa,

Mere Ghar Mein Bahut Andhera Hai.!

Main Tujhe Chaand Samjhta Hun,

Tere Aks Se Mera Ghar Roshan Hai.!!

तुझे भेज धरती पर वो बाद में पछताया होगा.!!


अपनी बनाई मूरत देख वो भी शरमाया होगा.!
दिल की बात दिल में सोच वो मुस्कुराया होगा.!!

तुझ हसीं को बना वो खुदा भी ललचाया होगा.!
तुझे भेज धरती पर वो बाद में पछताया होगा.!!

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Apni Banaai Murat dekh  Wo bhi Sharmaya hoga.!

Dil kee Baat Dil  mein Souch Wo Muskuraya hoga.!!

Tujh Haseen ko Bana Wo Khuda bhi Lalchaya hoga.!

Tujhe Bhej  Dharti par Wo Baad mein Pachtaya hoga.!! 

तेरी आँखों पर सदके ज़ाउन.!!


तेरी आँखों  पर सदके ज़ाउन,

तेरी  बातों  पर  मैं  मिट ज़ाउन.!

तुझसे हो गयी इतनी मुहब्बत,

इंतज़ार का इटनज़र करे ज़ाउन.!!

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Teri Aankhon Par Sadke Jaaun,

Teri Baaton Par Mit Jaaun.!

Tujh  Se Ho Gayi Itni Muhabbat,

Intzar Ka Itnzar Kre Jaaun.!!

ये आखें हैं पैगाम.!!


ये  आखें  हैं  या  मुहब्बत  का  पैगाम.!
देखे जो इनको वही खिंचा चला आता.!!

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Ye  Aakhein  Hain Ya Muhabbat Ka Paigam.!
Dekhe Jo Inko Wahi Khincha Chala Aata .!!

झुल्फों के सयाहे यूँ ना फैला.!!


     अपनी झुल्फों के सयाहे यूँ ना फैला.!

कहीं और जाने को दिल ही ना करे.!!

     बैठ ज़ाउन यहीं पर घर बना अपना.!

ताहा उमर का सफ़र बस  यहीं कटे.!!

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Apni Jhulfon Ke Sayahe Yun Na Faila.!

Kee  Kahin Aur Jaane Ko Dil Na Kare.!!

Baith Jaun Yahin Par Ghar Bna Apna.!

Taha Umar Ka Safar Bas Yahin Kate.!!

सर्द रात वो और चाँद.!!


एक सर्द रात वो और चाँद,
इक फलक दूजा ज़मीं पर.!
नज़र चुराऊँ बता कहाँ से,
हुस्न का मिलन है जहाँ पर.!!

तुझे देखूं या उसे कश्मकश,
पैर नहीं आजकल ज़मीं पर.!
खुद से हैरान हूँ मुक़द्दर से,
यक़ीं नहीं”सागर”नसीब पर.!!

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बिन पिए नशा होता देख तेरे नैना को


माना हुस्न खुदा ने तुझे दिया है,
नज़ाक़त से बड़ा लबरेज़ तुझे किया,
निकलती जब घर से बिजलियाँ गिराती,
आशिक़ों के दिल की धड़कने बढ़ाती,
मंज़िल कोई हो पहुँचती तेरे घर तक,
बिन पिए नशा होता देख तेरे नैना को,

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Maana husn Khuda ne tujhe diya hai,
Nazaqat se bada labrez tujhe kiya,
Nikalti jab ghar se bijliyan girati ,
Aashiqon ke dil ki dhadkane badhati,
Manjil koyi ho pahunchti tere ghar tak,
Bin piye nasha hota dekh tere naina ko,

तंमना .!!


मुद्दत से तंमना थी कोई साथी खूबसूरत मिले.!
तुम मिले खूब मिले हसरतें दिल की कबूल हुई.!!

Muddat se tammna thi koyi sathi khubsurt mile.!
Tum mile khub mile hasratein dil ki kabool huyi.!!

डरता हूँ.!!


डरता हूँ कहीं तेरे चेहरे की,

मुस्कान को नज़र ना लग जाए.!

बुरी नज़र वालो की कमी नहीं,

है इस दुनिया में.!!

Darta hoon kahin tere chehre ki,

Muskan ko nazar na lag jaaye.!

Buri nazar walo ki kami nahin,

Hai is duniya mein.!!

क्या कहें उस बनाने वाले को.!!


क्या कहें उस बनाने वाले को,

आईना देखो तो आईने को खुद पे गरूर हो जाए.!

वो खुदा भी अपनी कलाकर्ती पे,

देख  ज़माने  की  वाह – वाहई  मगरूर  हो जाए.!!

क्या कहें उस बनाने वाले को,

Kya kahein Us banaane wale ko,

Aaina dekho to aaine ko Khud pe Garur ho jaaye.!

Wo Khuda bhi Apni Kalaakrti pe,

Dekh Zamaane ki Waah-Waahai Magrur ho jaaye.!!

दीदार को.!!


इतने खूबसूरत भी नहीं हो की दिन-रात,
तुम्हारे घर के चक्कर काटते रहें.!

ज़रा घर से बाहर निकल कर देखो कितने,
चाहने वाले खड़े हमारे दीदार को.!!

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Itne Khubsurat Bhi Nahin Ho Ki Din-Raat,
Tumhare Ghar Ke Chakkar Katte Rahein.!

Zra Ghar Se Bahar Nikal Kar Dekho Kitne,
Chahane Wale Khade Humare Deedar Ko.!!

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