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“लम्हे”


हर रोज़ रात खवालो में आती है,
वो बन बना अपनी.!!
सुर्ख जोड़े में लिपटी जैसे दुल्हन,
बनती फिर सजनी.!!

वैसे तो तू बड़ी बिगड़ी है
इश्क़ हो जायेगा तो देखना,
मुहब्बत अच्छे अच्छे को
बेहतर इंसान बना देती.!!

बड़ी माज़ुक़ छुई मुई सी है वो
देख हमें सिमट जाती वो,
मुहब्बत गर उन से हो गई तो
जाने क्या हाल करेगी वो.!!

ज़िन्दगी में मुहब्बत करना
मगर बेवफा से नहीं,
बेवफा के नहीं आज़माना
कभी रूठ कर सही.!!

मिले तो वो ऐसी मिले
हर हाल में साथ चले,
राहें बेशक हों कटीली
पर सफर सुहाना हो.!!

मिले तो वो ऐसी मिले
हर हाल में साथ चले,
राहें बेशक हों कटीली
पर सफर सुहाना हो.!!

कुछ खतायें मेरी रही
हॉंगी माना मगर,
इस दिल ने बस एक
तेरी ही पूजा की.!!

कभी शिद्दत से तुझे
चाहा था,
अब सोचता कितना
मासूम था.!!

दिल में कुछ है मगर ऊपर से
दिखाते कुछ और,
मेरे हमराह कुछ इस क़दर है
इतराते आज कल.!!

ए घटा रुक ज़रा उनको आने तो दे,
बरसना इतना फिर वो जाने न पाएं.!!

पहली नज़र में देखा
तो प्यार हुआ,
दिल का क्या कसूर
जो इक़रार हुआ.!!

उन संग मुहब्बत कर भला क्या मिला,
इंतज़ार इंतज़ार ज़ुस्तज़ु भरा इंतज़ार.!!

इतना आसाँ न होगा दिल से भुला पाना,
यही वजह थी कभी दिल में बसाया नहीं.!!

बात बेबात रूठना उनकी आदत
उन्हें मानना न आता हमें मनाना,
दिल की हालत दोनों रह न पाते
उन्हें कहना न आता हमें बताना.!!

मिले तो वो ऐसी मिले
हर हाल में साथ चले,
राहें बेशक हों कटीली
पर सफर सुहाना हो.!!

कभी शिद्दत से तुझे
चाहा था,
अब सोचता कितना
मासूम था.!!

कुछ खतायें मेरी रही
हॉंगी माना मगर,
इस दिल ने बस एक
तेरी ही पूजा की.!!

खबर न थी दीदार करने को
इतने बेताब थे,
नहीं तो हम सांसें भी आप के
दामन में लेते.!!

बहुत प्यार किया था
तेरे क़दमों की धुल को भी,
मगर तुम तो हमे इक
आवारा समझ नकार गए.!!

उफ्फ कम्बख्त ये बाली उम्र
उस पर ये कमसिन अदा,
जैसे चाँद धरती पे हो उतरा
दे रहा दीवानों को सज़ा.!!

“लम्हे”


मुझे चाहना न चाहना
मेरे बस में नहीं,
तुझे चाहूँ तह उम्र कोई
रोक नहीं सकता.!!

पहले देश है फेर है तुझ से मुहब्बत,
जाँ देंगे देश खातिर तेरे लिए दुआएँ.!!

गर तेरी इज़ाज़त हो यारा ,
तेरे आँगन में बस जाऊँ.!!

बड़ी बड़ी बातें न किया करें
अगर निभा नहीं पते तो
हो सकता है कोई अच्छी धारणा
बना ले और आप उस पर खरे न उतरें…..

इश्क़ हम से और शिकायत ज़माने से
ये क्या बात हुई,
दुनियां कब सरहाये ये बात सब जानें
तू क्यूँ ना समझी.!!

But who’s reall,
We don’t find it.

मेरे दुश्मनों से दोस्ती की
क्या खता क्यूँ सजा थी,
चाहा दिल ओ जान से
क्या यही इक वजह थी.!!

मुहब्बत के भंवर में
किश्ती उतार कर देखेंगे,
देखते अंजाम ए खुदा
दिल उनसे लगा देखेंगे !!

कुछ लोग दोस्ती का दम भरते मगर,
नाक पर ईगो रख हर वक़्त घूमते हैं.!!

न कर इश्क़ मेरी बर्बादी से,
शम्माँ करीब आ जल जाते.!!

क्या वफ़ा करेंगे कभी जिन्हें
यक़ीन करना न आता,
प्यार का नाम सुना होगा
मगर प्यार करना न आया.!!

वादा न करो गर निभा न पाओ,
इससे ज्यादा बेअदबी और नहीं.!!

विश्वास तोड़ने वाले न वनो,
कोई विश्वास करे तो जान दे कर,
उस पर खरे उतरो……

दो चार नहीं इस दिल को चाहने वाले,
इक तू ही जिसने चाहा सरहाया मुझे.!!

सिर्फ एक मुस्कराहट से
वो दिल दे गई
नज़र फेरी ज़रा जो तो वो
बैचैन हो गई.!
गरूर था हुस्न पर बड़ा
हसीं शम्माँ को
ज़ुस्तज़ु कर रात क्या दिन
भी जल गई.!!

चेहर को छिपा किताब में यूँ न देखा करो,
यूँ भी ईद का चाँद दीदार कहाँ कराती हो.!!

वो दोस्ती किस काम की
जिसमें नाराज़गी तो हो,
मगर मनाने बाद फिर से
मानने की आदत न हो.!!

जिन्हें ईद का चाँद समझे थे
वो भी दागदार निकले,
क्यों जवानी आजकल बिन
मुहब्बत बसर नहीं होती.!!

मौत का खौफ उन्हें है
जिन्हें ज़िन्दगी से चाहत होती,
मंझधार में चलने वाले
किनारों की परवाह नहीं करते !!

गर निगाहों से पिलाओगी तो
जैसे भी हो जी लेंगे,
वरना ज़िन्दगी तेरे बिन बसर
हुआ करे कैसे बता.!!

ए हुस्न हमें देख चहरे पर
नक़ाब न डाला करो,
एक तो वैसे भी मिलती न
फेर कुफर करती हो.!!

यूँ चुपके से आना ख्यालों में
दांतों तले ऊँगली दबा मुस्कुराना,
इश्क़ न तो और क्या है बता
दुआ यही तह उम्र यूँही मुस्कुराना.!!

कुछ तो बात है तेरी बातों में
बतियाने को जी चाहता,
लम्हें दर लम्हें ग़ुज़रें फिर भी
दिल है के भर नहीं पाता.!!

न कर मुहब्बत बेशक मगर
रक़ीबो से दोस्ती न कर,
दिल औ जान से चाहा तुझे
बेशक एतेबार न कर.!!

मौत इक दिन आनी है
सब कह गए ,
फिर भी कोई में गुन्हा
सब कर गए.!!
इक फॉलो तो कर न सकती इश्क़ खाक करोगी,
यूँ भी हमने हुस्न पर एतेबार करना छोड़ दिया है.!!

सूरज चढ़ा सुबह हुई
ये तो होना ही था,
जाने कब शाम होगी
ज़िन्दगी की पता नहीं.!!

यूँ जो साँझ सवेरे मिलने आते हो
धड़कन की उम्र बड़ा जाते हो,
ज़िन्दगी जितनी देना चाहो दे दो
जीने की चाहत बड़ा जाते हो.!!

न बिखरा जुल्फों का दामन यूँ,
किसीका दिल मचलता देख के.!!

मेरे हाथों में तेरे नाम की लकीरें तो थी मगर,
कुछ तो कमी रही तेरी चाहत में तेरे हो न सके.!!

नाराज़गी बेशक न कहो आँखों से बता जाते,
इश्क़ में तुमने ये हुनर भी खूब सीख लिया है.!!

शौख निगाह से देख मुस्कुरा कर
यूँ गुस्ताखियां न किया करो !
कसम खुदा की घायल दिल का
ज़ख्म भरने में वकत लगता.!!

अब तक किसी से लगाया नहीं,
क्या जानें दिल की क्या आदत है.!!

एक मुद्दत बाद तुझ सा हसीं पाया है,
और बात फिर भी तू न समझ पाया है.!
ज़िन्दगी बस गुज़र रही थी जैसे तैसे,
तुझ में जन्मों की मुहब्बत को पाया है.!!

ना दिखा यूँ चुडिया खनखा खनखा,
यूँही तेरी आँखों ने मदहोश कर रखा.!!

इक रात का मुसाफिर नहीं दो घूंट पी भूल जाऊंगा,
जन्म जन्मों साथ चल सकता आज़मा कर तो देख.!!

चोट लगती है तो दर्द भी होता है,
मगर मेरे ज़ख्मों की मरहम है तू.!!

एक तरफ गेंहूं की बालियान
उस पर तेरा मचलता यौवन ,
उफ्फ सम्भलता नहीं दिल देख
अपने खेतों का ये मिलन.!!

जो जो सुपने देखे सै
दुआ रब्ब से सारे हों पूरे,
घणा अच्छा लागे सै
जब छोरी आगे बड़े सै.!!

ना कर अपनी रौशनी पर इतना गरूर,
सुबह का सूरज साँझ होते ढल जायेगा.!!

इन आँखों में बसे सपनों में
मुझे यूँही कैद रखना,
रहूं या न रहूं फिर भी सनम
यूँही प्यार करते रहना.!!

न कर इतनी मुहब्बत
जी मर भी न पाऊँ,
जीने की ख्वाहिश गर
करूं जी ही न पाऊँ.!!

हमारा कोई प्रेमी ही नहीं
तो हम क्या मांगे ,
चलो छोड़ देते सब
मुक़म्मिल दिया उस ने.!!

अपनी सखियों से कह दो
मेरा नाम न किया करें,
दुःख नहीं हम बदनाम होते
तुझे रुस्वा न किया करें.!!

जब से मिले हो न आँखों में नींद और न क़रार,
सोते जागते तेरा ही ख्याल लगता हो गया प्यार.!!

कौन कहता तेरा शहर छोड़ गए,
दिल में तो देख ठिकाना बदला है.!!

दो चार नयीं
साढ़े दिल दे सनम,
इक तुस्सी
जिन्नू चाहया दिल ने.!!

तेरे चेहरे में मुझे खुद जा अक्स नज़र आता,
जिधर देखूं जान ए जान बस तू नज़र आता.!!

Yun Ishq na kr khwabon se,
Suna hai kbhi pure na hote.!!

तेरे वादों के नग्में तेरी गलियों में गाये,
बेवफाई की बाते कभी भुला न पाए.!!

क्या खूब उनकी अदा है यारो,
ISHQ
खुद करते गुनहगार दूजा बताते.!!

इन शरबती आँखों से पी लेने दो
कुछ यूँ ज़िन्दगी बसर कर लेने दो,
रात दिन है बेकरार दिल ख्यालों में
बस इसी तरह से यारा जी लेने दो.!!

आदमी चाहे भी तो
धरती आसमाँ
मिला सकता नहीं,
मालिक मर्ज़ी बिना
एक पत्ता भी
हिला सकता नहीं.!!

इश्क़ में जीने की ख्वाहिश
तो कभी की छोड़ दी,
और बात मनचाही कब
पूरी होती हर किसी की.!!

बंद होने होंगी जो आँखें
नज़रों के सामने रहना,
क्या खबर अश्क़ देख वो
बदल दे अपना फैसला.!!

Her eyes are
Poet’s dream
Her lips are
Like patal of rose
Her friends said
She’s mine
Only mine…..

दिल को गंवारा नहींऔर से बतियाये
याद रख मेरे हर ख्वाब की ताबीर हो

क्या खूब उनकी अदा है यारो,
ISHQ
खुद करते गुनहगार दूजा बताते.!!

जाने क्या बात
जो पुकारा सखियों ने तुझे,
मेरा नाम निकला
ज़ुबाँ से तेरे नाम से पहले l.!!

चांदनी रात ईच
ओ साढ़े नाल से,
रूह दे मेल सी
तन बेशक जुदा.!!

खत लिखे तेरी याद सरहाने रख सो गई,
सुबह जब उठी तो आसुंओं से मिटे थे.!!

किन्नी तू कन्ना दी कच्ची
होर दी गल्लां च आ,
दिल दी यारियां तोड़ दी
वाह सदके जावां.!!

‘लम्हें’


तेरी सांसों की खुशबु से तेरा पता पहचान लेते.!
जान ए जहाँ कुछ इस तरह तेरा घर तलाश लेते.!!

इश्क़ के नज़राने हैं जो पल तेरे साथ साथ गुज़रे.
मैखाने की ज़रूरत नहीं यही काफी जीने लिए…

शम्माँ जलाये बैठे हैं तेरे दीदार को..
देखना ज़ुस्तज़ु में कही मर ही न जाएं…

मुहब्बत कर तो लें लेकिन
किस पत्थर की मूरत से..
बेवफा ज़माना है नहीं मिलती
वफ़ाएं किसी सूरत में…

बस बस रहने दो आग लगा चले जाते..
तकिया भर बाँहों में रोने को छोड़ जाते…

ज़िन्दगी को क्या बताएं बेवफा है..
कुछ लम्हों का ही तो सिलसिला है…

माना के तेरी नज़रों का नूर ए नज़र नहीं..
मगर ये सांसें तेरी खुशबु की तलबगार हैं…

बाली उम्र है माना मगर फिर भी सम्भल रहा करो..
यूँ झुल्फों की क़यामत सरे राह न बिखराया करो…

न खुद पढ़ती है न हमें पढ़ने देती..
लव यू लव यू बोल परेशान करती…

गर इश्क़ में जनून ए शिद्दत शामिल हो..
खुदा भी क़बूल कर क़ायनात झुका देता…

किसी को दीवानी की हद तक
चाहना और बात निभाना और..
हक़ीक़त से रु बरु होते जब
लोग कसमें वादे भूल जाया करते…

न कर इश्क़ पहले
वफ़ा कारण तो सीख..
बेवफा दीवानों ने
कई ज़िन्दगी बर्बाद की…

न कर इश्क़ से इश्क़ यारा..
ज़िन्दगी में कुछ और भी है…

बहुत किया इंतज़ार
बस और नहीं..
चलते हैं तेरे कूचे से
यादों को लिए…

कुछ इस तरह से मिला करो
लगे दिल को मेरी हो..
दूर दूर से नज़रें मिला भला
प्यार कहाँ हो पाता है…

जो फूल भेजे थे किताबों में
अब भी संभाल रखे..
कम्बख्त सूख गए बेशक
तेरी सांसों की खुशबु देते हैं…

जब झूठ अदा से बोला जाये तो..
सच भी शक के दायरे में आता…

सीने के जब करीब होते हो
धड़कनों क हाल समझ जाते..
कितनी मुहब्बत हमसे तुम्हें
राज़ दिल का यूँ ही बता जाते…

कुछ इस तरह तुम तसव्वुर में रहते हो..
जिस और देखूं तुम ही नज़र आते हो…

जी भर करो तौहीन फिर मासूम से हो जाओ..
खता अपनी न मानों इलज़ाम दूजे पे लगाओ…

न हो शोहदाई हमारे इश्क़ में..
इस दिल के तल्बगार हज़ारों…

ए पर्दानशीं रूठा न करो..
हम भी तो तेरे दीवाने हैं…

उनका नज़रें मिला झुकाना
जैसे इजहार ए मुहब्बत..
उस पर होली होली मुस्कुराना
क़बूल क़बूल क़बूल…

जब तेरा दिल गवारा करेगा ग़लती मान लेना
हम जहाँ थे वहीँ मिलेंगे वादा है सनम…

खता होती है इंसान से कब इंकार किया..
गल्ती कर न माने उससे बड़ा गुनहगार नहीं…

उफ्फ कम्बख्त ये कॉलेज की पढ़ाई..
मार डालेगी मुझ को तेरी जुदाई …

न आजमा मेरे Atitude को..
जो टूट गया चूम होंठों को Smile भी ले जाऊंगा…

अभी सताया ही कहाँ रात तो आने दे ज़रा..
बाँहों में भर लेंगे अभी तड़पाया ही कहाँ है…

ठोढी पर तिल मॉंग में सिंदूर और माथे की बिंदिया..
एहसास करा रही इस दिल को अब गैर अमानत है…

बेपनाह हुस्न आपकी कशिश भर आँखें..
कर रही मदहोश ज़माने को ये शरारतें..

कुछ इस तरह से बेवफाई के रिश्ते निभाए हैं..
हर तरफ गुज़रे लम्हों के मंज़र नज़र आये हैं…

एक पल की मुहब्बत कर बना लेते हैं दूरियां..
आजकल कुछ यूँ लोग निभाते वादा ए वफ़ा…

नादाँ उम्र है इश्क़ की गलियों में
चलना सम्भल सम्भल..
कोई दीवाना देखे न तेरी
रूह ए दिलकश बचना ज़रा…

हिज़्र की रात वो न आये तो
क़यामत होगी..
कटेगी पल्कों में बेशक सूरत
आँखो में होगी…

इतना Hate u Hate u न कहो तुम्हें Love हो जाये..
रुस्वा हो जाओ अपनी नज़रों में और नज़रें झुक जाएं…

कसम है तुम्हे तेरे बनाने वाले की
खुदको और अपने हुस्न को पहचान…
यहाँ कदम कदम पर क़ातिल बैठे
मासूम से दिल का क़त्ल करने वाले…

इस क़द्दर तुझसे मुहब्बत हुई.!
सारी दुनियां में तन्हा हो गए.!!

कहीं से नयन कहीं से गेसू कहीं से अदाएं लाया होगा..
तुझे बनाने में खुदा ने जाने कितना वक़्त लगाया होगा..

जब से तुझे देखा है हम अपना दिल हार गए..
जान-ए-जां तेरी आँखों में खुद को निहार गए…

अक्सर रुस्वा हुए तेरे कूचे आ कर
तेरी सखियों ने तुझे मेरे नाम से पुकारा

अरे आपस में न लड़ो दोनों को कण्ट्रोल कर लेंगे..
एक को नीचे का तो दूजी को ऊपर कोठी दे देंगे…

तुस्सी काले काले ओ
कुज साडी क़द्दर करो..
इस दिल नूं तुस्सी वडे
प्यारे प्यारे ओ…

सखियों में हंस हंस यूँ चर्चा
हमारा न किया करो..
कोई छिपा तुमसे I Love u
कह देगी तो क्या करोगे…

अब से अगर किसी को सब्ज बाग दिखाओ..
खुदा कसम दिल दुखता जब कोई दगा देता…

इक दिल है और सौ दीवाने यहाँ..
किस को करूं हां
किस Miss को करूं न…

यूँ मदहोश आँखों से देखा न करो
कोई परिंदा राह भटक परदेसी हो जायेगा..
इश्क़ की डगर बढ़ दीवाना पागल
तेरे दर अपनी सांसों की डोर तोड़ जायेगा…

जब से तुझे देखा है हम अपना दिल हार गए..
जान-ए-जां तेरी आँखों में खुद को निहार गए…

कहीं से नयन कहीं से गेसू कहीं से अदाएं लाया होगा..
तुझे बनाने में खुदा ने जाने कितना वक़्त लगाया होगा..

तेरा वज़ूद एक खूबसूरत वहम सिवा कुछ भी नहीं..
यूँ भी हमें परछाई का पीछा करने की आदत नहीं…

गुस्ताख़ नज़रों से कह दो यूँ देखा न करें..
गर इश्क़ हो गया तो इलज़ाम लगाओगे…

बारिश की बूंदों से एहसास हो रहा है..
तड़पा वो भी रात भर हमें याद कर के…

मेरी ज़िन्दगी वो खता हो
जिसे सज़ा समझ निभा गया..
शिद्दत से चाहा उसे मगर
वो सेज़ गैर संग सज़ा गया.

मीर की ग़ज़ल सी खय्याम की रुबाई हो..
फुरसत से बनाई खुदा की जैसे खुदाई हो…

चलते आजकल वो राहें बदल कर..
जो कहते थे कभी प्यार बड़ा तुमसे…

क्यों हमसे करते हो इतनी मुहब्बत..
न मिले तो साँस लेना भूल जाओगे…

सितारे भी निकल चुके
रात भी ढलने को..
सांसें हैं अटकी हुई तेरे
दीदार को सनम…

न करो मेरी नज़र को
नज़र का इशारा..
आ गया दिल तो
जान ए जाँ पछताओगे…

मेरी दुनियां है तेरी हद से
मेरे इक़रार की यही कहानी..
तेरी हंसी आँखों की शरारत
मेरे जीने की बस यही निशानी…

ओये एक Request है आज के बाद
दिल से हो प्यार तो किसी को
I love you कहन…

दर्द ए दिल किसे सुनाएं..
कोई एक हो तो बताएं…

चलते हैं तेरी बज़्म से
कोई शिक़वा नहीं..
जो भी वक़्त गुज़रा
यहां खुब गुज़रा यारा…

दो पल की ख़ुशी खातिर कुछ लोग हैवान बन जाते..
अबला पर ज़ुल्म ढा इंसानियत शर्मसार कर जाते…

तेरे वज़ूद से रोशन है मेरी दास्ताँ..
हूँ ज़िंदा तेरी सांसों की महक ले कर…

अक्सर रुस्वा हुए तेरे कूचे आ कर..
तेरी सखियों ने तुझे मेरे नाम से पुकारा…

माथे की बिंदिया
बहुत कुछ कहती..
मेरी नहीं हो अब
एहसास कराती है…

यूँ न मिला करो अब रात की तन्हाई में
तुम को मुहब्बत मुझ से सब जानते है..
तेरी रुस्वाई दिल को ज़रा भी मंज़ूर नहीं
इश्क़ छुपता न चेहरा सब पहचानते हैं…

नहीं चाहिए तेरी बिंदिया
तेरी पायल चूड़ियां..
ये सब गैर है तू अमानत
है किसी और की…

ए रक़ीब-ए-हुस्न यूँ मुंह न फुला..
मानाने की आदत नहीं यूँ न रुला…
यूँ न कर कानों में सरगोशियां..
इश्क़ छुपता ना छिपाये से भी…

क्यों करते इंतज़ार जबकि
वाक़िफ़ है तुम न आओगे..
झूठा वादा करना फितरत
अपनी रंगत तो दिखाओगे…

इश्क़ उनसे न करना जिन्हें इश्क़ की इबारतें न पता हों..
वादा करना तो आता हो मगर निभाने की वफ़ा न हो…

ऐसी वाणी न बोलिये की
दूसरे का मन आहत हो..
आपकी की कीर्ति कम और
श्राप के भागीदार हों…

सच्ची मुचि क्या तुम इतनी सुन्दर हो या..
डिपी और की लगा लड़के बिगाड़ने बैठी…

मेरी सुबह भी तेरे नाम से और शाम भी..
और बात मैं तेरी दुआओं में शामिल नहीं…

तम्मना ए इश्क़ में क्या से क्या हो गए..
ज़ुस्तज़ु में उनकी जहाँ में रुस्वा हो गए…मेरे मेहबूब मिला कर तो रोज़ मिल..
खुदा कसम हर लम्हाँ याद सताती…

कोई माने या ना माने पर यही हकीकत..
ख्वाब दिखाए मगर इंतज़ार न क़र सकी…

ये जो तेरी हल्की हल्की सी शरारतें है..
दिल का चैन चुराती घायल करती हैं…

एक दो दिनों में ही इतना करीब आ गई हो..
सोचता हूँ इतने दिनों तुम कहाँ थी…

नाम लेने की अब ज़रूरत नहीं..
लोग बेवकूफ नहीं समझ न पाएं…

तेरे लिए आसां होगा Miss u I love u कह भूल जाना..
मेरे लिए तो प्यार Is a worship of God जैसा…जीवन में Serious होना भी ज़रूरी
तभी सही फैसला लिया जा सकता…

न कर अपनी तस्वीर की
जग में यूँ नुमाइश ..
मुझे पाना तो ज़माने से
खुदको छुपाना होगा…

क़बूल तेरा
Good Bye करना..
कसम है
दिल में याद न करना…

अब तक जी थे सकूँ से
उनसे आँख क्या लड़ी..
बेगाने खुद से हुए ‘सागर’
नींद आँखों से जा उडी…

कभी रूठ जाऊँ तो मनाना नहीं
मर जाऊँ ज़नाज़े पर आना नहीं..
नहीं चाहिए दिखावे की उल्फत
जब तक हूँ ख्वाब में आना नहीं…

अपनी आँखों के पैमानों से यूँ न पिलाओ..
कोई राह भटक जायेगा मुसाफिर की तरह…

क्या खूब हैं तेरी आँखों के दो तीर मतवाले..
घायल करते है दिल चाहे घर यहीं बना लें…

Uff यार इतना न शरमाया कर .!
कसम से जान निकल जाती है.!!
गालों में डाल उँगलियाँ वो कुछ यूँ बैठे हैं,
जैसे हमारी याद में खुद को भुला बैठे हैं…

माना के तेरी नज़र में तलबगार नहीं मगर,
तेरी नज़र का धोखा है यक़ीन करके तो देख…

रिश्तों और अरमानों की ताबीर हूँ,
खुदा कसम मैं ही तेरी तक़दीर हूँ…

उफ़्फ़ कम्बख्त ये उनकी दो आँखें
क्या खूब है आंटी की बेटी की बातें,
जब खिलखिलाती कहकशां बरसे
याद आएं सब दिन साथ गुज़री रातें…

न कर इतना मजबूर की तेरे बापू को सब बता दूँ,
करके रुस्वा न अपना बनाऊं न गैर का होने दूँ…

कोठी उत्ते काँव वोल्दा
काशनी दुपटे आलिये
मैं राह तेरी तकदा…

ए हुस्न अपनी नज़ाक़त पर
इतना ना इतरा,
एक दिल है सौ नहीं हर किसी
को देता फिरूं…

आखरी पल है आखरी सांसें ढूंढ रही
तस्वीर तेरी आँखों में रह रह घूम रही हैं,
मुझसे तेरा शिक़वा माना मगर आजा
जाने से पहले सासें तेरा हाल पूछ रही हैं…

ए दिल चल तेरे कूचे से निकल जाते,
तू फिक्रमंद रहे कभी गंवारा न होगा…

बेशक रात गुज़री है करवटें बदलते मगर..
कम्बख्त फिर भी I❤️ You कह न पाई..

इतनी फुरसत कहाँ
किसी के मैं नखरे उठाऊं,
जिसे होगी मुहब्बत
खुद बखुद खींची आएगी…

अनार खाने का दिल था,
पाग़ल ने अंगूर दिखा दिए..

जो मजा तुझसे लड़ने में
दो पैग शराब पीने में कहाँ,
बहुत खूब बहुत खूब हो
बिन तेरे जीने में मजा कहाँ…

तुस्सी प्यारे न्यारे ओ
कुज ते रेहम करो
साढ़े पिंड आलेय ओ…

हमारी ज़िन्दगी की दास्ताँ है जब जब,
अच्छा बनना चाहा लोग बुरा बना गए…

अधूरी ख्वाहिशें अधूरे
फलसफां का कारवां हूँ,
ज़िन्दगी बड़ी खूबसूरत
जीना फिर भी चाहिए…

अनार खाने का दिल था,
पाग़ल ने अंगूर दिखा दिए..

न तू राधा है न मैं कृष्णा,
आज तू भी बेवफा मैं भी…

अपने इश्क़ को पाबंदियों में न रख यारा,
खुली हवा जिया कर ज़िन्दगी हसीँ लगेगी !!

इश्क़ करना तो करो तुम बातें बहुत बनाते हो,
बेवजह छत पर बुला इंतज़ार बड़ा करवाते हो.!!

मेरे ख्याबों में तू मेरी सांसों में भी./
तू नहीं तो बता जियूं कैसे तेरे बिन.//

तेरे ख्याल से रोशन मेरी ज़िंदे की राहें,
कैसे करूँ तस्सव्वुर तेरे बिन जीने का..

किस बात पर शर्माना
जब दिल से दिल मिल चुके..
सांसों का मिलना बाक़ी
कुछ रश्म ओ रिवाज़ बाक़ी…

Qayal hai ye dil apki zrra nawazi ka,
Mere mehboob mujhe roz mula kar…

उफ्फ इश्क़…कम्बख्त
कितना नादाँ है,
सर चढ़ बोलता फिर
नींदें चुरा बीरान करता…

अपनी निगाहों के पैमाने से यूँ न पिला.!
कहीं इश्क़ हो गया तो बताओ क्या करेंगे…!

Ayenge jb milne
Rukh se naqab tum hta lena.!
Deedar krna hai
Hya se chehra na chhoa lena…!

दावा था जिन्हें मुहब्बत का.!
इक हवा के झोंके से बेवफा हो गए…!

अपनी निगाहों के पैमाने से यूँ न पिला.!
कहीं इश्क़ हो गया तो बताओ क्या करेंगे…!!

खूबसूरत घटाओ मेरे मेहबूब पर कुछ तो तरस खाओ .!
बानुश्कि घर से निकला तुम हो के करीब आने न देती…!

उफ्फ पहले ही हुस्न ए क़यामत कम थी.!
जो Reply न कर और कुफर करने लगे…!

न कर बेबाक निगाहों से मेरी आरज़ू.!
इतना खुसनसीब नहीं पा सकूँ तुझे..!!
मुझे हर तरफ तुम ही तुम नज़र आते,
तेरे दिए गुलाब को सीने से लगा कुछ राहत लेता हूँ…

मुद्दत से परेशान था,
कोई चैन चुरा ले ना…

दिल से बुलाया है
आएंगे ज़रूर 20 बाद,
वादा निभाना ज़रूर
अब देखती जाओ यारा..

हमनें कब कहा के मेहमान है
गर क़बूल तो दिल औ जान हैं

Betabiya is qaddar na bdhao
Jine ki aarzoo bdh jaaye..
Tah umar tera sazda karne ki
Khwahish jiggar kr jaaye…

Na kar meri muhabbt pr naaz…
Khuda ne mushqil nzrana diya…

Is tarah zindagi me shamil…
Chah kr bhi bhula na paun…
इक शाम का धुआं हुँ जाने कब उड़ जाऊंगा,
ले कर तेरी यादें संग दुनियां छोड़ जाऊंगा…

ये इंतखाब भी कितना बेकरार करता है,
आँखों से नींद दिल का चैन चुरा लेता है…

दिल में फ़क़त इक तम्मना है
तेरे करीब आने की,
पर ये न समझना एक तुम ही
प्यार करने के लिए…

हर सितम सहेंगे मगर
खुद पर ये सितम न करेंगे,
इस ज़िन्दगी में अब
कभी किसी से प्यार न करेंगे…

Garzprst jahan se
wafa ki umid na kr
Mtalb ki Duniyan
pyaar ki chaht na kr…

उफ़्फ़्फ़ ये अदा बेबाकियाँ और मौसम सुहाना,
मार डालेगी मुझ को तुझसे ये जुदाई की सज़ा…

Gar muhabbt ho jaye chli ana Sanam,
Kl bhi the aaj bhi deedar ke deewane…

शायर की ग़ज़ल का साज़ हो
झील में उगता गुलाब हो,
देखूं जिस और नज़र आते हो
मेरी ख्वाहिश ख्वाब हो…

कोई I ❤️ U कहे और Me 2 कहें,
खुदा जाने कब ऐसा करवाएगा हमसे..!

ये हमारी बदनसीबी उनके हो न पाए,
जिसने चाहा शिद्दत से न समझ पाए…

उम्र जे इस पड़ाव पर आ बहुत उदास हूँ..
सोचता इश्क़ तुझ से कर मुझे क्या मिला…

जिससे करनी उससे बात कर,
तेरी ज़िन्दगी जिसे सुपुर्द कर..

न कर मेरे दिल पर इस तरह राज़..
दुनियां रश्क़ करे हो तुझ पर नाज़…

खास तो खास होते ;
न भूलने कीआस होते..!!

इक नई सुबह नई शुरुआत
जीवन का यही सार,
जो बीत गया उसे भूल जा
वर्तमान का स्वागत कर…

वो जो हमारी होगी सिर्फ हमारी होगी,
न किसी को Reply न ही Like देगी…

न कर इतना गरूर खुद पर
एक तू ही नहीं तक़दीर वाली,
तेरे बाद भी ज़माने में कई
एक तू ही नहीं चाहने के लिए…

कितना झूठ दिन भर तो हमसे लड़ती रहती,
झाड़ू ले पीछे भागती ख्वाब कब देख लिया…

किताब ए इश्क़ का तर्ज़ुमा
करना तो सीखी,
हम हर लफ्ज़ से तहरीर ए वफ़ा
लिख देंगे…

बहुत हुए तेरे प्यार में पागल यारा
अब गुंजाईश नहीं,
एक वो दिन था रात इंतज़ार किया
अब ख्वाहिश नहीं…
.
जिन रिश्तों में गंभीरता न हो
वो रेत के महल जैसे होते,
हवा के हल्के झोंके से बिखर जाते…

चली हम भी रायपुर हो आते हैं
हीर की गली राँझा बन आते हैं,
सब्जी बेचै गाय चुगाएं या भेड़ें
एक नया फलसफां बन आते हैं…

मुहब्बत एक पाक रिश्ता है
रब्ब की इबादत जैसा,
मगर कुछ लोग बदनाम करते
वादा ए वफ़ा न निभा पाते…

तू ही मेरा रब्ब तू दिल ओ जान
ये सोच तुझे चाहा था,
मालूम न था एक पत्थर की मूर्त
को आँखों का नूर बनाया…
फिर एक वादा और उस पर फिर से दगा,
क्या यही मुहब्बत है इंतज़ार सिर्फ इंतज़ार..

खुद को बार बार आईने में देखा न करो.!
कहीं खुद को खुदकी नज़र न लग जाये…!!

ये वफ़ा के किस्से मुहब्बत के नग्में और कसमें वादे,
सब झूठ आज एक हाथ में तो दूजे से हों कसमें वादे…
बहुत हुए तेरे प्यार में पागल यारा अब गुंजाईश नहीं,
एक वो दिन था रात इंतज़ार किया अब ख्वाहिश नहीं…

इक रूहानी सी सूरत और
उस पर शोख अदाएं,
कैसे हो लफ़्ज़ों पर यक़ीन
मेरी हो और की नहीं…

मुहब्बत यूँ न कर
के भुला ही न पाए..
देखे जो भी शय
चेहरा मेरा नज़र आए…

मुम्मक़िन है ज़िंदगानी में लौट कर न आऊं,
तेरी नज़र बेवफा थी भला कैसे भुला पाऊँ…

शौक़ नहीं था दिल लगाने का..
तेरे हुस्न की खता दीवाने हुए…
चल आ जी भर के देख लूँ तुझे..
जाने फिर मुलाक़ात हो ना हो…

इससे बेहतर भी ज़िंदगी हो सकती थी..
गर तेरी वफाओं ने साथ न छोड़ा होता…

खता सिर्फ हमारी ही क्यों बताते हो..
क्या तुमने भी वफाओं से वफ़ा करी…

क्यूँ लड़ती हो जो इतनी मुहब्बत है..
अब Strike से उठो और हमे मनाओ…

चल बैठी रह फिर फोटोशूट करवा..
जब कोई गाड़ी पीछे से ठोकेगी तब देख…

शुकर है खुदा का वक़्त रहते हकीकत से रू-बरू हो गए..
इक बेवफा आवारा का होने पहले उनसे वाक़िफ़ हो गए…

इंतज़ार करें और कितना इंतज़ार करें
कई सुबह से रात और दिन हो चले..

माना इक दिन इक़रार भी होगा ज़रूर
सोचो जवानी के दिन बेकार हो चले…

यूँ मदहोश आँखों से
देखा न करो
कोई परिंदा राह भटक
परदेसी हो जायेगा..
इश्क़ की डगर बढ़
दीवाना पागल
तेरे दर अपनी सांसों की
डोर तोड़ जायेगा…

होंठों को छिपाने से क्या होगा
आँखें हाल ए दिल बयाँ कर रही..
हो रहा है प्यार धीरे धीरे इन्हें
शर्म ओ हया से पलकें झुक रही…

दिल ए नादां ज़रा धीरे धीरे मचल
अभी तो वो आये भी नहीं..
नज़रों से नज़रें मिलेगी क्या होगा
बैठ सामने वो शर्माए भी नहीं…

तुम गल्ती भी करो और हम उफ्फ तक न करें.
इतने नहीं तुमने घी के चिराग उल्फत में जलाये…

ए हुस्न अपनी जुल्फों में कैद न कर,
बैगाने घर में घुट घुट के मर जाऊंगा…

उस हुस्न ने बस दिल ही दुखाया,
जिसे चाहा अपना खुदा जान कर…

एक बार कह तो सही तकिया बन जाऊंगा…
बाँहों में भर रखना तुं यूँही करीब रह पाउँगा…

क्यों कपड़ों की तरह वो बदलते हैं दिल
आज लोग मुहब्बत को तमाशा समझते…

तू सच में इतनी सुन्दर है या
ब्यूटी पार्लर से लिप-टिप आई है..
सच सच बता दीवानों ने तेरे
पीछे मर-मरने की कसम खाई है…

किसी के इश्क़ में जीना.!
इबादत सी बात होती है.!!

मुहब्बत यूँ न कर
के भुला ही न पाए..
देखे जो भी शय
चेहरा मेरा नज़र आए…

ये वफ़ा के किस्से मुहब्बत के नग्में और कसमें वादे,
सब झूठ आज एक हाथ में तो दूजे से हों कसमें वादे…
बहुत हुए तेरे प्यार में पागल यारा अब गुंजाईश नहीं,
एक वो दिन था रात इंतज़ार किया अब ख्वाहिश नहीं…

चले हैं वो इश्क़ करने,
जिन्हें वक़्त पर ठहरना न आता…

हुस्न हया और सदिगी में होता,
रंग रूप तो आती जाती माया…
न रात सोई न सोने दिया,
फिर ख्वाब कहाँ देख लिया…

ये हमारी बदनसीबी उनके हो न पाए,
जिसने चाहा शिद्दत से न समझ पाए…

उम्र जे इस पड़ाव पर आ बहुत उदास हूँ..
सोचता इश्क़ तुझ से कर मुझे क्या मिला…

जिससे करनी उससे बात कर,
तेरी ज़िन्दगी जिसे सुपुर्द कर..

न कर मेरे दिल पर इस तरह राज़..
दुनियां रश्क़ करे हो तुझ पर नाज़…

खास तो खास होते ;
न भूलने कीआस होते..!!

इक नई सुबह नई शुरुआत
जीवन का यही सार,
जो बीत गया उसे भूल जा
वर्तमान का स्वागत कर…

वो जो हमारी होगी सिर्फ हमारी होगी,
न किसी को Reply न ही Like देगी…

‘लम्हें’


काश तूने कभी करीब आने की ज़िद्द की होती.!
खुदा कसम मुहब्बत की तस्वीर कुछ और होती.!!

अब तुझे भी मेरे बिन तड़पना ही होगा.!
सफर ज़िन्दगी का यूँही तय करना होगा.!!

ज़िन्दगी के सफर में अकेला ही रहा.!
वो मिले तो सही मगर बेवफा होकर.!!

इक अज़ीम शाम की अज़ीम दास्ताँ हो.!
खुदा ने तराशा जिसे फुरसत के लम्हों में.!!

जिसे चाहा था दिल ए जान समझ.!
वही मेरी मौत का सामान निकला.!!

न कर मुझ पर और मेरी मुहब्बत का यक़ीन.!
मगर मैंने तुझे अपने होंठों की मुस्कुराहट समझ.!!

ज़िन्दगी प्यार का नगमा है.!
जिसे गा कर गुज़र जाना है.!!

दर्द दिल का इस क़द्दर बढ़ गया.!
दुनियां में दवा कहीं नहीं इसकी.!!

Tujh se achhi to duniya hai.!
Km se km bewafa to nhin.!!

Unki baton se itna hurt hua.!
Duniya chhodne ka dil krta.!!

Mental pta nhin kiske liye sambhal rkha khud ko.!
Na kuch dikhlati hai tadpati hai bchati khud ko.!!

क्या खूब है उनकी अदाओं का आलम यारो.!
सही है भाई खुदा जब हुस्न देता अदा भी देता.!!

बेपर्दा हो शहर में यूँ ना घूमा कीजिये.!
जाने कब बहशी से मुलाक़ात हो जाये.!!

न बोल इतना झूठ के याद न रहे कब कब क्या बोला.!
याद रखने को किताब रखनी पड़े खुद को भूल जाये.!!

एक पत्थर से पूछा मुहब्बत क्या है.!
बोला सर टकराओ तो जानो क्या है.!!

उनकी मुहब्बत एक धोखा थी.!
आँखों में बेवफाई बातों में साज़िश थी.!!

पाक निगाहों को तरसती अब तो मुहब्बत.!
आज बेवफा भी सनम होने का दावा करते.!!

उस की मुहब्बत भी फरेबी है उस की तरह.!
क्या समझती पागल हो जायेंगे उसके बिना.!!

Kon kehta hai Muhabbt aaj zinda hai.!
Sb kitabi batein Wafa aj bewafa ho gyi.!!

Pahale baat kuch or thi maga Ab kuch aur hai.!
Kai dino Intzaar bad miln ki raat aaye pr Adhuri.!!

मांग में सजती थी झूठी मुह्ज़ब्बत.!
सच्ची होती तो हर दिन याद रखती.!!

Jhuth pr jhuth or kitne jhuth wo bolegi.!
Ab tk Kaid thi Clg khul the kitni se khelegi.!!

वो जो करते थे दावा प्यार का
दिल से निकाल बैठे हैं.!
कहाँ गई प्यारी वफ़ा की बातें
क्यों मुंह छिपाये बैठे हैं.!!

बस बहुत हुआ तेरे प्यार का झूठा इक़रार.!
वो दिन गुज़रे जब था रहता दिल बेक़रार.!!

Wo aaye msg chhoda or chale gaye.!
Bina sochey ke agla zinda bhi ya nyin.!!

जब दिल आये जवाब दे दिल आये चेहरा दिखा.!
सुनते वक़्त रुकता नहीं कहीं वक़्त गुज़र न जाए.!!

आँखें भी थक गई थी तेरी उड़िकान कर कर.!
सांसें थमने लग अब तेरी राह तकते तकते.!!

उनके चहरे देख ख़ुशी बिछड़ने के बाद.!
सोचा उनसे मिले ही क्यों थे यारो हम.!!

उन की यादों में रात कुछ ऐसे गुज़री.!
दिन में ही Good Night कहना पड़ा.!!

वादा न कर जो मुक़म्मिल न कर पाए.!
प्यार करने वाले तो जान दे भी निभाते.!!

न कर दुआओं में शामिल मुझको यूँ तूँ.!
खराब अधूरे रह जाएं तो दर्द बड़ा होता.!!

खुद तो सौ है जाती आराम से हमें जगा जाती.!
दिन भर कोसती रहती तुम्हें प्यार नहीं मुझ से.!!

ये तेरी मुहब्बत जा असर
ज़िन्दगी गुलज़ार हो गई.!
हर तरफ जलवे ही जलवे
जबसे आँखें चार हो गई.!!

न कर इस क़द्दर मुहब्बत
की फना हो जाए.!
आरज़ू मुक़ामिल न हो गर
तू तनहा हो जाए.!!

मुहब्बत दिखाने की चीज़ नहीं
महसूस की जाती.!
दिल ओ दिमाग पर छाई रहती
बगावत किये जाती.!!

तुमसे मुहब्बत है कितनी कह नहीं पाते.!
तुम हो की सितम पर सितम किये जाते.!!

Bistar par todti aaj Wafa
Pakdi jaate to Ulta ilzaam lga deti.!
Deti duhaai muhabbt ki
Beshq hr din jism ki fitrat bdl jaati.!!

Darr kr Muhabbt ki to kya Muhabbt ki.!
Dil se Wafa ki hoti to baat hi aur hoti.!!

रात को खाना छीना अब सुबह का नाश्ता भी छीन लिया.!
बस अपने मन की कर बेवफा ने मुहब्बत को रुस्वा किया.!!

न जाने ज़िन्दगी अब किस और ले जाएगी.!
पर यक़ीनन अब शाम तेरी गली न हो पायेगी.!!

मस्त मस्त है उसकी ज़िन्दगी सहपाठी यारों में.!
तभी न टाइम पाबन्दी न जलवा नई लश्कारों में.!!

उसके नां से ज़िन्दगी बसर करने की कसम खाई है.!
ये और बात उसकी निगाहों हमारी वफ़ा बेवफाई है.!!

Unki Aadt thi Wada kr na Nibhane ki.!
Yahi kmi rahi Rishton mein Daraar ki.!!

जलवा दिखाने का वादा किया था मगर
एक बार फिर से वादा निभाया न उसने.!
चाँद के दीदार में है परेशां दिल ये मगर
एक बार फिर से छकाया मन को उसने.!!

यहाँ कौन अपना है कौन पराया समझ नहीं आता.!
कभी इतने करीब हुए किसी के अब मन नहीं भाता.!!

जिस घर को बनाया था जतन से.!
घर के चिराग ने फन्हा करा ज़िद्द से.!!

इक अज़ीम शाम की अज़ीम दास्ताँ हो.!
खुदा ने तराशा जिसे फुरसत के लम्हों में.!!

कुछ नहीं कहना बस इतना ही कहना है.!
इल्ज़ाम लगाते कभी अपनी ख़ता देख लेते.!!

न कर मेरी ख्वाहिश को पूरा तू,
अरमां दिल का दिल में लिए चला जाऊंगा.!
तू कहती समझती हरजाई मुझे,
याद रख बाद में तुझे मैं बहुत याद आऊंगा !!

नफा नुकसान देखने का वक़्त किसे गर इश्क़ परवान पर.!
फुरसत मिली गर देख लेना हमने तन्हाई को कैसे जिया है.!!

तुझ से मुहब्बत कर हमें क्या मिला,
बेवफाई जिल्ल्य शर्तें और शिकायतें.!
हमारी खता थी प्यार की उम्मीद की,
चल बहुत हुआ दुनियां से अब चलते.!!

कुछ उदास हूँ कुछ नाखुश ज़िन्दगी से
सोचता हूँ तन्हा हो कर भी चाँद कितना हसीं है.!
मनचाहा हर किसी को नहीं मिलता यहाँ
जा रहा हूँ देखूंगा मैं भी मेरे बिन कितना खुश है.!!

Teri Khwahish tera Arman kiye Duniyan se jayeinge !
Pyaar Kitna hai Tujh se kuch aisa kar Dikha jayeinge.!!

जब से तुम बाहर जाने लगी
कॉलेज में नज़र आने लगी.!
भूलने सी लगी हो हमें यार
हाँ हाँ तुम बदलने हो लगी.!!

देख सामने नज़रों के हया में
दाँतों से होंठ दबा बैठे.!
पहला इस्तखबल किय ऐसा
उफ़ क्या सितम कर बैठे.!!

जो छुपते छुपाते वो प्यार नहीं करते.!
दीवानें कब कैद हुए आज़ाद ही रहते.!!

Ruk Ruk kr unka like dena ya reply.!
Kahin gair ki Bahon mein to nhin.!!

“लम्हें”



हाँ मैं शराबी हूँ पी है
तेरी आँखों के छलकते पैमानों से
लबों पर तबस्सुम की कहकशां से
सांसों की महकती खुशबु से
तेरे लौंग के लशकारे से
हाँ मैं शराबी हूँ पी है…
सुराहीदार गर्दन से
तेरी लचकती कमर से
यौवन भरी अंगड़ाई से
पैरों की झांझर से
हाँ मैं शराबी हूँ पैर है…

ना रखिये ज़मीं पर यूँ नाज़ुक कदम मैले हो जाएंगे l
कहती किसी दीवाने से फूल ज़मी पर ला बिछा देता ll

जो हाल उधर है तेरा वो हाल इधर मेरा भी है l
पलकें खुलें बंद रहें चेहरा तेरा ही नज़र आता ll

सत्ता का नशा.!!

जब तक है ज़िन्दगी
कुर्सी मैं न छोडूंगा l
कुर्सी की चाहत ऐसी
सारे रिश्ते भूलूंगा ll

चल पंछी वापिस उन घरोंदों को जहाँ तेरा रेन बसेरा l
इन ऊँची ऊँची इमारतों में ज़ज़्बातों की कीमत कोई नहीं ll

सुना था प्यार में लोग पागल हो
अंधे हो जाते देख भी लिया /
सबूत पर सबूत मिलने बाद भी
कोई आबरू लुटाने को तैयार //

अतीत याद रखना
चाहिए,किन्तु अतीत
में जीना नहीं चाहिए
उससे प्रगति रुक जाती l

उफ़ क्या गुनाह किया
उनसे तस्वीर मांग /
इतरा बोले मेरे पास नहीं
मुस्कुरा चल दिए //

खुदा हुस्न देता तो
नज़ाकत दे ही देता /
इश्क़ को तड़पाने की
आदत दे ही देता //

मिलना फिर बिछड़ना फिर मिलना न हो तो /
मुहब्बत के फलसफां सब मशहूर न हो जाते //

शक्ल तेरी तो देख ली खूबसूरत है /
काश दिल देखने जा आइना होता //

दुआ कभी तुम अच्छी भी मांग लिया करो /
है मुहब्बत तो कभी इज़हार कर दिया करो //

गर मुहब्बत हो पाक हर बात मेहबूब की अच्छी लगती /
वैसे इश्क़ में कैसी खता क्या गिला इसमें भी मुहब्बत होती //

ज़िन्दगी गुजर सकती तेरी
पान्हाओं तो अच्छा था /
जब मुकद्दर ही साथ न हो
फिर तेरा गुन्हा क्या था.//

ना दिन का चैन है अब
ना रातों को क़रार हमें /
सुनाते हमें दीवाने हुए,
तुम्हारे इश्क़ में सनम //

क्यों रातों को चुपचाप
छुप कर सो जाता है /
चल छत पर आ तुझे
चाँद बहाने देख लूंगा //

मार डालेगी तुझे
ये साइंस की पढ़ाई /
बदले में मिलेगी
लगता मेरे को जुदाई //

कभी रात दिन तुम भी हमारी तरह रहा करो /
उठते बैठते और ख्यालो में भी याद किया करो //

तेरा दिल तो नादाँ है,
मेरे दिल से गुस्ताखियाँ न करा /
न आ यूँ करीब और करीब,
तेरी सांसों से डर लगता //

हमनें देखा है ज़माने को बड़े करीब से /
ज़िन्दगी वही जो तेरे साथ बसर होती //

ए हुस्न मुझे यूँ
बेबाक नज़रों से न देख l
फरिश्ता नहीं हूँ
न जाने कब बहक जाऊँ ll

आगे से न लोगी,
पीछे से भी न लोगी /
तो क्या रिश्वत,
टेबल के नीचे से लोगी //

चाँद सितारों की ख्वाहिश की.
जो मिला उसी को सरहाया
फिर भी बेरहम था…
गैर की हो गैर निकली वो मूरत
जिसे चाहा शिद्दत से अफ़सोस
शायद वक़्त बेरहम था…
वतन खातिर जां देने की तमन्ना
मगर दिल की दिल रही हसरत
ज़माना जो बेरहम था…

ज़िन्दगी तेरी बाँहों में यूँ ही
गुज़र जाए तो अच्छा /
मगर हर किसी की ख्वाशीषें
मुक़म्मिल तो न होती //

लम्हें


1.हर किसी की मनचाही मुरादें कभी न मुक़म्मिल होती.!

स ज़रा हौंसला चाहिए ज़िन्दगी बसर करने के लिए.!!

2.गर मुहब्बत करते तो करते दिल-ओ-जान से.!
हमारी बेवफाई के किस्से भी गूंजे हैं ज़हान में.!!

तेरे दिल में क्या ये तो खबर नहीं
अपने दिल में तो तेरी ही मूरत बसी

वही हसरत वही इश्क़ का रोना
जान तेरे हैं बंद कर रोना धोना

कुछ तो रहती मजबूरियां यूँ ही कोई बेवफा नहीं होता
इश्क़ में होंगी उनकी भी दुश्वारियां मगर कह नहीं पाते

पलकें बिछाये बैठे हैं दीदार को
कब आओगे बता दो न यार को
और कुछ को पहचानने के लिए
प्यार की तलवार ही काफी है

ये तीर-ए-नज़र यूँ न चलिए
आशिक़ हैं आपके जी यूँ न मारिये
न रहे तो बर्बाद हो जाओगे
दो-चार फ्लाइंग किस तो उछालिए
ये तेरी Cute से Smile
कर देती हमें Mute
कितनी शिद्दत से तराशा
हाँ कर न हो Rude

गर सुबह-सवेरे चाँद सा चेहरा दिखा देगी
क्या बिगड़ेगा यारों का यारा दिन बना देगी

इंतज़ार करना बुरी बात नहीं होती
वादा कर न आना बुरी बात होती

लम्हें


1.हजूर ये ख़ामोशी क्यों छाई है
कुछ गुनाह कर दिया क्या.!
हुस्म पर क्यों मदहोशी छाई है
कहीं दिल लगा लिया क्या.!!

2.लोग कहते हैं सच बोलिये
मगर सच बोलना आज गुनाह है.!
झूठ पर झूठ बोलते रहिये
ज़माना यक़ीन कर प्यार लुटायेगा.!!

3.मुहब्बत तो की होती मगर नुमाइश नहीं,
शायरों ने अपनी अलग दुनियां बसाई होती.!
ये ओर बात वो हँसते-लिखते ओर खातिर,
उनसे बेहतर किसी ने न वफ़ा निभाई होती.!!

4.एक ही रास्ता बचा है
चुन ले जीवन की डगर.!
इधर चल या उधर चल
बना ले कोई हमसफ़र.!!

5. अच्छी खासी सूरत को वो बिगाड़ बैठे हैं.!
मुहब्बत कर अपना क्या हाल कर बैठे हैं.!!

 

  1. मतलब तू ऐसे बाहर न आएगी,
    बारात लेकर आएंगे तभी बाहर आएगी
    यूँ इठलाना बलखाना ठीक नहीं,
    इक दिन तू भी इश्क़ में अश्क़ बहायेगी
  2. इश्क़ क्या हुआ होंठों में ज़ुबान दबा बैठे
    कुछ तो कह लेते हज़ूर यूँ क्यों शर्मा बैठे

  3. अभी इजहार भी न किया कोर्ट कचहरी तक ले बैठे
    गर इश्क़ हो गया तो जाने तुम क्या क्या कर बैठोगे

  4. गैर की अमानत है यूँ न बलखा
    दिल आ गया तो बेवफा कहलाएगी

10.न बुला करीब बड़ा पछताएगी फिर
बाँहों में भर लिया तो छटपटायेगी

  1. ये तुम्हारी गलतफहमी है
    न तुम सम्भले न हम बदले

12.

हमारा इंतज़ार इतंज़ार ही रह गया
और वो गैर बन जा सो गया
अच्छी सजा दी प्यार करने की हमें
गलत फरमाइश तो न की

बैठे हैं वो अपने साजन से मुंह सुजाये हुए
हज़ूर इतना तो बता दें मानने का क्या लेंगे

रहतें थोड़ी थोड़ी ही मिल जिंदगी संवार जाती
ज्यादा की लालच नहीं कोई सहारा प्यारा मिले

इतना न तड़पा तरसा वक़्त गुज़रे बाद पछताना पड़े
ज़िन्दगी इक बार मिलती जाने कब दाना पानी उठे

लम्हें


हमने तो कोशिशें की थी बड़ी शिद्दत से “सागर”
जाने किसी की खता थी अश्क़ निकले आँखों से

सही फरमाया तूने कुछ मुझमें कुछ तुझमें है जरूर
तभी धरती पैदा कर मिलाया खुदा ने दोनों को हज़ूर

मगर एक फर्क और रहा दोनों में
हम मर गए मगर तुम मर न सके

खामोश रह रह हुस्न इश्क़ का क़त्ल कर गया”सागर”
बेचारा उफ़ क्या करता इलज़ाम क़तल का लग गया

बहुत शौक है उन्हें खुद पर और अपनी वफ़ा पर”सागर”
ज़रा नज़र से नज़र मिला तो देखें रुख साफ़ हो जायेगा

 

आँखों की नमीं तो सफर कर लेगा “सागर”
तेरे दिल पर पड़ी धुल का हिसाब कौन देगा

आज की क़यामत की होगी,
गर न आई तो देखना
वक़्त गुज़रे याद करेगा ज़माना
बस तू चूक न करना

ये बेवफाओं का शहर है,
यहाँ मुहब्बत का मौल कुछ नहीं.!
वादे-कसमें दिख्झावा हैं,
यहाँ इंसान की कीमत कोई नहीं.!!

आपका यूँ खफा होना
जान ले जायेगा.!
दिल की गहराई बसा प्यार
और बड़ा जायेगा !!

Us mein or Hum mein yahi PhRk raha
Wo Baat Baat pr Block kr deti…
Deactivate ho jaati…
Hum Chaha kr bhi Aisa kr Na Sake…

Gar keh do Inhein Bewafa,
Teer Inhein Fir Chubh jaata hai.!
Koyi Pooche Inse Zra Inko,
Waqt Pr aana kyun na aata hai.!!

Aansuon ki Dhaar Par Bah kar,
Jiwan Roopi NaiYa Na Chle.!
Aage Badhna To Himmat Se Kaam,
Le Mushkilon Ka SamNa Kro.!!

RaAt ki Sheetal Hawayein
Jo Chalein
Tum Yaad Aate Ho Bahut
Yaad Aate Ho

जाने से पहले कुछ ऐसा कर जाओ,
अपनों को कभी याद न आओ.!

तह उम्र कौस्ते रहे जी भर आपको,
ख्यालों में कभी उनके न आओ.!!

बहुत नाज़ तुझे खुद पर और अपनी वफाओं पर.!
देखना एक दिन तेरा गरूर तुझे कहीं का न छोड़ेगा.!!

वो हवा क्या करे जो तेरे बदन की खशबू से लबालब.!
मेरे दिल की धड़कनों में सांसों की राह हो समाई है.!!

हुस्न के आगे हर कोई यारो हो जाए बेहाल
वक़्त आता इश्क़ का भी दिल ज़रा संभाल

जब ज़नाज़ा निकले मेरा यार की गली।।।
रोक कर देखना तस्वीर किसकी लिए जा रहे।।।

कभी कुछ कभी कुछ ख्याल बदल सकते मगर
कलम स्याही का लिखा न मिटे युगों-युगों तक

मानते हैं हुस्न के आगे इश्क़ हमेशां लाचार रहा
मगर घायल होते ही तीर-ए-नज़र से बेज़ार रहा

सामने देखी तस्वीर निगाहों को धोखा दे सकती
मगर जो तस्सव्वुर में रहे कौन जुदा कर सकता

हुस्न के लबों ख़ामोशी अच्छी नहीं लगती
के जैसे बिन चाँद रात सुहानी नहीं लगती

अज़ी हुस्न कब खफा हो जाए कब एतबार किये इसका
ये वो शोख बहती नदी है जब चाहे मुद जाए और दिशा

चल यही क्या कम है आशिक बदल दिल-ए-धड़कन नहीं
उम्मीद पर क़ायम है दुनियां इक दिन दिल भी बदल लेगी

आँखों को कुछ राहत भी दे सनम
चल आते हैं अब तेरी गली सनम

न छेड़ मुझको और मेरी दिल-ए-धड़कनों को
आ गया गर तुझ पर तो बहुत पछ्तायेगी फिर

यूँ क़ातिल निगाहों से न देख,
शर्म आती है हमको
तू तो हो गयी है बेपर्दा सनम,
क्यों तड़पती हमको

मामू बन कर ये चैन की नींद सुलाता है
जानू बन जाए तो सुबह-शाम तड़पता है

 

“लम्हें”


1. न कर हुस्न पर इतना नाज़,
कोई सदा मुक़म्मिल न रहा.!
सूरज भी इतराया कुछ यूँही,
शाम ढलने से रोक न पाया.!! 

2. शाम ढले किसी दिन आकर तो मिल,
देख अपने दीवाने का हाल।!
कौन संग दिल खुद ही फैसला करना,
क्या खबर हो जाए बेहाल।!!

3. मुझ से इतनी मुहब्बत न कर सनम,
बाद मेरे रह न पाए.!
ज़िन्दगी में होती सब की मजबूरियां,
बाद में न संभल पाए.!!

4. अंग-अंग तेरा जैसे कोई नगीना,
देखे जो कोई छूटे पसीना.!
चाँद से भी खूबसूरत तू है हसीना,
नहीं अब तेरे बिना है जीना.!!

5. ज़िन्दगी में तेरा यूँ आना,
साँझ को किरणों का दिख जाना.!
सागर‘ की गहराईयों में,
चांदनी का शर्मा कर समां जाना.!! 

6. मैं ‘सागर‘ हूँ तू है धरा,
मैं तुझ में और तू मुझ में.!
फिर भी मिलन न होगा
यही फर्क तुझ में मुझ में.!! 

7.गर तूने मुझसे न बात करने की कसम खाई है,
मैंने भी रुस्वा न कर बात पूरी निभाई है.!
तेर कसम न टूटे मेरी मुहब्बत भी न रुस्वा हो,
तो ही तेरी तस्वीर इस सीने में बसाई है.!!

8. तेरी मुहब्बत बस I Love U I Miss U जानूं तक सिमटी रह गयी
हमने खवाब सजाये थे घर बसाने के.!
तेरी मांग सज़ा अपने घर की जीन्नत बना हर अरमाँ पूरा करते तेरा,
छः-सात बच्चों की मम्मी बनाने की.!!

9. क्या खबर तस्वीर तेरी न हो और की हो.!
क्यों हर बात तू अपनी और खींच लाइ है.!!

10. कहते हैं वो “सागर” हम से जनसंख्या घटायें.!
फिर ग्यारह कार्टूनों की तस्वीर क्यों दिखाई है.!!

11. जो दावा करते थे तह उम्र साथ चलने का.!

गर्दिस-ए-हवा क्या चली साथ छोड़ गए.!!

12. Girls Aksar Ye Kyun Samjhti Unki Hi Respect Hoti Hai.!
Kya Unke Papa-Brother Male Hain Is Karan Unki Nahin.!!

13.तू रात में जितनी खुशियां देती,
दिन होते मय ब्याज वसूल करलेती.!
कैसी है और कैसी तेरी मुहब्बत,
ज़िन्दगी क्यों’सागर’को उलझा देती.!!

14. कुछ तेरी हैं अगर मजबूरियां कुछ मेरी भी हैं.!
सुना ज़रूर होगा यूँ ही कोई बेवफा नहीं होता.!!

15. कभी कभी एक ज़िद्द आपको अपनों से दूर कर देती.!
जब के आप सच्चाई जान कर भी बहसबाजी करते.!!

16. छोड़ “सागर” अपनी राहें बदल ले.!
तू नहीं है क़ाबिल दुनियां बदल ले.!! 

17. जब तल्क़ न देगी आवाज़ अब बुलाएंगे.!
रहना ज़िद्द ही में तुझ से दूर चले जाएंगे.!!

18. मौसम के हर रंग को बदलते देखा है,
जवां रातों में आवारा दिल धड़कते देखा है.!
वही जोश वही उल्फत वही नफरत,
सब वही है मगर किरदार बदलते देखा है.!!  

19. मेरे नग्में मेरी शायरी तेरे प्यार की अमानत हैं.!
तुझ से मुहब्बत कितनी मेरी वफ़ा की ज़मानत हैं.!!

20.शिक़वा तुझे मुझ से हो सकता,
शिकायत मुझे तुझसे.!
मगर न तेरी मुहब्बत में कमी है,
न मेरी नियत में है.!!

21. समझदारी इसी में है ऐसे बेगानों से बचकर रहिये.!
जो जिस्म से खेलें रूह से खेलें और धोखा दे जाएं.!!

22. इतनी खूबसूरत अदाओं से
गर मनाओगे.! 
कौन कम्बख्त न मानने की
गुस्ताखी करेगा.!!

23. इतनी प्यार-वफ़ा की बातें हुस्न के मुंह से अब अच्छी नहीं लगती.!
हमनें अक्सर देखा है इश्क़ को हुस्न की गलियों में ख़ाक छानते.!!

24. घडी अपनी तो चला लें मगर ये खुदगर्ज़ कहाँ ले जाएं.!
जो जीते महज़ मतलब खातिर ऐसे दीवाने कहाँ ले जाएं.!! 

25.तेरी चाहतों का हुआ ये असर अब दिल में सब बेअसर.!
मिल जाए जो तू कर लूँ सलाम दुनियां से हूँ मैं बेखबर.!!

26. मैं अवद की शाम हूँ तू लखनऊ की सुबह.!
मैं हूँ नाचीज़ शायर तू अदब की कहकशां.!!

27. तुझ से मुहब्बत है कभी इंकार भी न था.!
मगर क्या करते तुझे कभी एतबार न था.!!

28.दूर से ही सही तेरे साथ गुज़रे लम्हें तह उम्र की अमानत हैं.!
तेरी रुस्वाई क़बूल नहीं मेरी सांसें इस बात की ज़मानत हैं.!!

29.सर्द हवाओं संग आज फिर तेरी याद चली आई.!
क्यों लगता है इस दिल को तू यहीं कहीं करीब है.!!

30. रहने दो मेरी खामोशियों को मेरे पास तुम्हारी नज़रों में गुनहगार ही सही मगर.! 
हो सके मेरे ज़नाज़े पर आ इंतज़ार करती खुली आँखों की तस्वीर पहचान लेना.!! 

“लम्हें”


1. ये ख्यालों की दुनियां है यहाँ तस्सव्वुर में वादे.!
जाने किस दिल पाक वफ़ा किसके नेक इरादे.!!

2. कोई वजह तो होगी “सागर” यूँही कोई बेवफा नहीं होता.!
कुछ अनकही मजबूरियां रहती यूँही कोई खफा नहीं होता.!!

3. कमी मुझ में न थी कमी तुझ में भी न थी.!
ये तो वक़्तिया हालात थे जो दूरियां हो गई.!!

4. न कर शिक़वा खुदा की बनाई तक़दीर से.!
कहीं कोई तो होगा तेरे दिल का भी रहनुमां.!!

5. घटाएं छाई हैं बदरा भी बरस गए,
मौसम भी बदल रहे.!
उस दिल का मौसम कब बदलेगा,
जहाँ उम्मीद लगा रहे.!!

6. न गरूर कर खुद पर और खुदके
हुस्न-ए-ज़माल पर.!
गर हुआ इश्क़ मुंह ले बैठ जाएगी
इतरा न शबाब पर.!!

7. कुछ तो होगी उस की भी मजबूरी
यूँही कोई बेवफा नहीं होता.!
कुछ वक़्त कुछ तक़ाज़ा-ए-तक़दीर
यूँही कोई तबाह नहीं होता.!!

8. चाँद तारों का क्या करेंगे,
जो बात तुझ में वो कहीं और कहाँ.!
रख साऱी खुदाई पास,
बता कब मिलेगी किस और कहाँ.!!

9. काश मेरी मजबूरियों को जान सकती.!
यूँ️️️️️️️️ सर-ए-शहर बदनाम न करती फिर.!!

10. दिल की बातें दिल ही में रहने दो यारा.!
कहीं राज-ए-दिल जान दिल न दे बैठो.!!

11.  मुहब्बत में कैसा जीतना और कैसा हारना यारा.!
ये तो दिल की खलिश है जो मिटा लेते बात कर.!!

12. यूँ हर किसी को इक चश्में से देखना मुनासिब नहीं.!
कुछ रहती मजबूरियां यूँ ही कोई बेवफा नहीं होता.!!

13.  न करो मेरे दिल से यूँ शरारतें,
आ गया तो बहुत पछताओगे.!
मैंने अब तक संभाल रखा था,
तुम अपना भी न बचा पाओगे.!

14. मुद्दत से तमन्ना थी तू कभी नशेमन हो,
बहके और बहकने को मजबूर करे.!
सागर” भी आज़मा लें खुद को ज़रा,
देखें ज़ज़्बातों को कैसे काबू में करें.!!

15. तेरे बिन कोई और शौक का सोचूं
इतनी फुर्सत कहाँ.!
ज़िन्दगी तो वही जो तेरे साथ बसर
तुझसा कोई न यहाँ.!!

16. इतना रुक रुक गर जवाब दोगी तो इस दिल का क्या होगा.!
पहले ही हैं घायल सोचो फिर आगे क्या होगा .!!

17. कोई ऐसा जतन भी कर,
जो तेरा है वो मेरा हो जाए.!
कर मुझ संग मुहब्बत तू,.
जो मेरा है वो तेरा हो जाए.!! 

18. हो सकता”सागर“उनकी आँखों का धोखा हो.!
जिसे वो नफरत समझते वो भी कोई अदा हो.!!

19. गर इतना ही है दिल का आलम-ए-दस्तूर./
बैठ डोली बन जा दिल की चश्म-ए-बदूर.//

20. दिल बेफिक्र है यक़ीन तुझ पर जान से भी ज्यादा./
अपनी सुना क्या”सागर”पर इतमीनान कर पाएगी.//

21. जानता था तू यूँ न करेगी इक़रार तभी तो दिल पर जख्म दे बैठे.!
जो हाल था वो हाल उधर भी देखा कैसे हिसाब बराबर कर बैठे.!!

22. तूने देखी कहाँ किसी की दिल्लगी,
काश कभी होती किसी संग पाक वफ़ा तो जानती.!
यक़ीन पर टिकी मुहब्बत ईमारत,
अपने दिल को किसी का बनाती तो शायद जानती.!!  

23. बहुत शोक है न तुझे अच्छा जी अच्छा जी करने का./
करीब आ तेरी नस-नस में खुद की सांसें न उतार दूँ.// 

24. बड़ी जालिम है वो जान-ए-बहार,
दो बार क़बूल-क़बूल बोल गयी.!
तीजी बार का इतंज़ार करते रहे,
गैर बाँहों में जा उसकी हो गयी.!!

25. दुनियां से ठुकराया हूँ,
फल्क़ से गिराया हूँ./
गर ज़रा भी है यक़ीन,
आ थाम ले मुझको.//

26. न कर इंतज़ार उस का जिस पर”सागर“इख्तयार नहीं.!
सुना है मनचाहा न पूरा हो दर्द-ए-दिल बेकाबू हो जाता.!!

27. ज़िन्दगी मैंने तेरा साथ दिया क्या तू भी देगी./
या सारे ज़हाँ में रुस्वा कर मुझे गैर बना देगी.//

28. न आजमा मेरे सब्र को,
कहीं पासा उल्टा न पड़ जाए.!
तू भी तड़पे मछली जैसे,
तेरी हालत कुछ वैसी हो जाए.!!

29.बेबस सी है मेरी मुहब्बत,
हर दास्ताँ-ए-उल्फत माफ़िक़./
सोचता हूँ नई इबारतें लिखूं,
आने वाली नई नस्लों जानिब.//

30. अपने लफ़्ज़ों की तराज़ू में ज़रा तौल कर हर बात रखना.!
ज़माना इतना नहीं सुधरा के माफ़ करने की तमीज रखे.!!

31. हिज़्र की रात इतनी लम्बी हो,
मुरादों की फेहरिस्त मुक़म्मिल न हो.!
जिस तरह”सागर“को सताया,
तेरी दुआएं कभी कहीं क़ामिल न हों.!!

32. दिल चुराना “सागर“का तेरे बस की बात नहीं./
किसी का हो चुका अब कोई और मंजूर नहीं.//

33. दिल घायल होता है अपनों की तीखी बातों से.!

अरे गैरों की किसे परवाह लगते क्या नातों से.!!

34. बोतल शराब की हो यारा नशा फिर क्यों न होगा.!

जो बिन पिए मदहोश तुझे देख लेंगे तो क्या होगा.!!

35. नहीं आना मिलने तो क्यों खवाबों में चले आते हो.!

इस तरह बीमार “सागर“और बीमार कर जाते हो.!!

36. चाहतें मुक़म्मिल जो हों तो फिर दर्द के मायने कौन समझे.!

हर किसी को मनचाहा नसीब हो तो खुदा को कौन समझे.!!

37. वो क्या जाने इश्क़ की बिसात जो न समझे उल्फत को.!

वो शक़्स भला क्या इबादत करेगा तो न माने खुदा को .!!

!38. किसी से किये वादों की कमजोरियां हैं.

जोड़ तो देता मगर कुछ मजबूरियां हैं.!!

39. जिस दिन से आँख लड़ी “सागर” संग खुद से बेगाने तुम हुए.!
वो और दिन थे जब शहर में तुम्हारे नाम के चर्चे हुए करते थे.!!

40. न कर मुझ संग इतनी मुहब्बत मेरे बाद जी ना पाए.!
शहर में चर्चा अच्छा लगता मुहब्बत हुई है किसी से.!!

41. जिसको देखो वही इस शहर का बादहशा बनना चाहता.!
कम से कम कोई नेक काम कर लें शहंशा कहलवाओगे.!!

42. ये घटायें तो उठती हैं तेरी जुल्फों की खुशबू लेकर यारा.!
मेरे आने की नहीं तेरी वफाओं की महक से महके समा.!!

43. कुछ ऐसी भी दुश्वारियां होती जो बताये न कही जाएँ.!
न हम कल बेवफा थे न आज न मरते दम तक रहेंगे.!!

44. दिल में तेरा घर बसाने की चाहत है.!
काश कभी प्यार से इक बार देखते.!!

45.थोड़ा-सा किनारा क्या किया दिल से लगा बैठे.!
बड़ी मुश्किल मिले मुहब्बत ये हम भी जानते.!!

46. न इतरा इतना खुदा की इनायत पर यारा.! 
किसी-किसी पर ही ऐसी मेहरबानियां होती.!!

47. तुझी से शिक़वा तुझी शिकायत भी होगी,
तुझ से मुहब्बत फिर किससे अदावत होगी.!
जानती खूब तेरे नैनों का दीवाना है दिल,
मेरे मेहबूब ज़रा सोच किससे शरारत होगी.!!

48. अच्छे-अच्छों को टूटते देखा है”सागर“,
तख़्त-ओ-ताज को छूटते देखा है.!
खुद पर यूँ इतराना ठीक नहीं यारा,
वक़्त आये पे पत्थर पूजते देखा है.!!

49. तू सच में इतनी सुन्दर है Dp गैर की लगा बैठी.!
बेवजह भँवरों के तड़पने का सामान जुटा बैठी!!

50. लोग तो लोग हैं लोगों की क्या परवाह.!
ज़िन्दगी जब तल्क़ हंस गुज़ार “सागर“.!!
51.कमियां औरों में खोजने से पहले खुद को संवार लेना ही बेहतर.!

लोगों की परवाह तब तक ‘सागर‘जब तल्क़ अंजाम आये बेहतर.!!

52. क्यों झूठ बोलती जान-ए-वफ़ा इश्क़ ना किया.! 
तेरा दिया फूल अब तल्क़ सलामत किताबों में.!!

53.छोड़िये ये सब गुज़रे ज़माने की दास्ताँ हो चुके.!
आज खुदगर्ज़ी की तराज़ू में वफ़ाएं तौली जाती.!!

54. ख्वाबों के पहर ज़िन्दगी गुज़ार दें ऐसे दीवाने नहीं’सागर‘.!
खबर दिल को भी इंसानी ज़िन्दगी बार-बार नहीं मिलती.!!

55. अभी तो शुरुवात है जीने-मरने की न कर.!
जाने कब बुलावा आ जाये वक़्त जायँ न कर.!!

56. क्यों झूठ बोलती,
सुबह-सुबह.!
कब तूने मनाया,
उलटे ज़ालिम सताया.!!

57. नोट्स लेने-देने फुर्सत के इन दिनों किसी बहाने से ही आ जाओ.!
मौका भी है मौसम भी उम्र का दस्तूर निभाने आ जाओ.!!

58. न खता हो कोई फिर गुनहगार सा समझें.!
मुहब्बत की यही हसीं शरारत है ‘सागर‘.!!

59. हो सकता है तेरी निगाहों की खता हो.!
करीब चाहने वाले हों ना देख पाई हो.!!

50. कुछ जुर्म ऐसे हुआ करते’सागर’जिनकी सज़ा जितनी हो कम.!
दिल इश्क़ का तोड़ हुस्न गैर हो जाए बता दें क्या इसकी सज़ा.!!

61. यहाँ इश्क़ में सौदे मंजूर नहीं,
तूने उल्फत की शुरुवात ही नाप-तौल कर की.!
अब खुद ही जवाब तलाश ले,
यूँ भी शहर में तेरी समझदारी के चर्चे बहुत हैं.!!

62. सितारों से चाँद ने आ,
कानों में होल से सरगोशी की.!
बताओ जगाने की वजह,
सागर“हुस्न क़ातिल क्यों होता.!! 

63. तेरी नज़रों की खता है जो पहचान पाई न मुझे.!
तेरे जाते ही जहाँ छोड़ जाने की कसम खाई है.!!

64. जो न जाने उल्फत की रस्में,
उनसे वफ़ा की उम्मीद की होगी.! 
न भूलना कभी इसी दुनियां में,
लैला भी हुई केस भी हीर-राँझा भी.!!

65.काम ही ऐसे न कर के गिरना पड़े.!
किसी हाथ का सहारा न लेना पड़े.!!

66. हार-जीत हर शै में शामिल है ‘सागर‘.!
न सोच ज्यादा सफर तय करता चल.!!

67. क्या खबर दिल की कोई बताना न चाहे.!
दिन ज़िंदगी के गर थोड़े इश्क़ क्यों करे.!!

68. जब देखता हूँ मौत को करीब आते,
मुझे तुम याद आते हो.!
क्यूँ कर बताऊँ तुम्हें हाल-ए-तबियत,
मुस्कुराते हुए भाते हो.!! 

69.गर साथ देने का वादा करो.!
हर वक़्त मुस्कुराने का वादा लो.!!

70. वाकिफ हैं हुस्न के फरेब से ‘सागर‘.!
इश्क़ कहीं वादा कहीं डोली और संग.!! 

71. हो ही इतनी खूबसूरत महताब भी शर्मा जाए.!
बादलों का सहारा ले-ले कर चेहरा छिपाये.!!

72. ज़िन्दगी बेरंग नहीं मन की न हो पूरी रंग सब फीके लगें.!
ये न भूल ‘सागर‘ इस बार मिला जाने फिर इंसानी रूप मिले न मिले.!!

73. क्यों झूठ बोलते,
कब से बैठे दीदार को.!
भरी भीड़ में,
पहचानते नहीं हम को.!!

74. जैसा भी हूँ ,
ऐसा ही हूँ ,
इसी हाल करना तो क़बूल कर .!
कल का भरोसा नहीं ,
जामे कब क्या हो,
यूँ नाराज न हुआ कर.!!

75. हुस्न के वादों को देखा है.!
अब नहीं हिम्मत और दिल लगाने की.!!

76. लगता कुछ लोग यहाँ बस लड़ने को आते,
सीधी बात का भी उल्टा मतलब लगते.!
अरे शायर हैं भाई इश्क़ के खिलाडी नहीं,
शायरी करते क्यूँ मतलब ग़ल्त लगाते.!!

78. यक़ीन तुझ और तेरी मुहब्बत पर.!!
मगर तक़दीर कहाँ ले जाए ‘सागर‘.!!

79. ज्यादा की ख्वाहिश न थी,
इक आकांशा की कमी रही.!!
ज़िन्दगी में जो चाहा मिला,
सागर‘इक हसरत अधूरी रही.!! 

80. न दिखा सब्ज-बाग़ उझड़े चमन की हसरतों को.!
हमनें हर आकांशा को गैर बाँहों में जाते देखा है.!!

81. धुआं उठा है कुछ तो ज़रूर हुआ होगा.!
गौर से देखो कहीं कोई दिल जला होगा.!!

82. यूँ ही बेवजह कुछ’सागर‘लिखा नहीं जाता.!
दिल में कुछ हो आखिर ज़ुबाँ आ ही जाता.!!

83. बेफिकक्र रहिये जी “सागर“का दिल यूँ.! 
आवारा नहीं जो हर कली पे बहक जाए.!!

84. ज्यादा की चाहत नहीं है थोड़े में गुज़ारा नहीं.!
बहुत काम और भी कोई एक आकांशा नहीं.!!

85. यूँ बार-बार मांग माफ़ी यारा शर्मसार ना किया करते.!
आप भी हो तलबगार-ए-दिल यूँ शरमाया नहीं करते.!!

86. बड़ा नाज़ है हज़ूर को दिल न देने पर,
संभाल रख कहीं’सागर’हो काबू न रहे.!
अभी देखे ही कहाँ आवारा भँवरे यारा,
कली कैसी भी हो ख्वाहिश वो भी रखे.!!

87. आखिर दे गयी न देगा”सागर”को,
दिया साथ तूने भी गैरों को.!
बड़ी उम्मीद से तेरी और देखा था,
माना था अपना न औरों को.!!

88. चल छोड़ ‘सागर‘ दो के फेर में वक़्त जायँ न कर.!
काम बहुत पड़े हैं अभी ज़िन्दगी के पहले वो कर.!!

89. यूँ न छेड़ दिल के तराने रहने दे,
चाहत नहीं तेरी रातों की नींदें क़ुर्बान कराऊँ.!
न भूल जन्म दिया मुझे भी नारी ने,
उसी ने सिखलाया है नारी की मैं इज़्ज़त करूँ.!!

90. तेरा बिन बात किये यूँ रूठ जाना,
जैसे”सागर”की लहरों में तैर जाना.!
बेशक तुझे पसंद है खुदा मनवाना,
यारों की आदत रूठों को मनाना.!!

91. जवां दिल का बहकना लाज़िम है,
हुस्न गर हसीं हो सम्भलना मुश्किल.! 
खबर भी न होगी जो बेकाबू होगा,
नाज़ जिस दिल पर अपना न रहेगा.!!

92. यूँ बाग़ में लेट किसका है इंतज़ार,
खुदा तेरी भी करेगा पूरी मनचाही मुराद.!
तुझे चाहना पूजना हर दिल ख्वाहिश,
जाने कब पूरी होगी नाचीज़’सागर‘की मुराद.!!

93. कहाँ फंस गए”सागर“किस-किस को खुश करोगे.!
एक को किया तो दूजा ताने मारने को तैयार खड़ा.!!

94. हर किसी को मनचाहा नहीं मिलता,
किसी को ज़मीं किसी को आस्मां नहीं मिलता.! 
खुशकिस्मत हैं वो जो पाएं मनपसंद,
कहीं मंजिल मिले तो कहीं रहनुमां नहीं मिलता.!!

95. यहाँ रिश्तों की फेहरिस्त लम्बी है जनाब.!
च के रहिएगा कौन किस मुक़ाम दगा दे जाए.!!

96. ये दीवानों की बस्ती है,
कहने को सब अपने वक़्त ज़रूरत गैर हो जाएं.!
दिल ज़रा संभाल”सागर”,
दिल लेना जाने वादा कर बड़ी जल्दी भूल जाएं.!! \

97. मैं पटिआला की सांझ हूँ,
तू लखनऊ की सुबह.!
तेर-मेरा मिलन न सम्भंव,
इस धरती-फ्लक़ पर.!! 

98. चाँद को मालूम नहीं वो कितना खूबसूरत है,
काश”सागर“में देखता खुदको क्या एहमियत है.!
यूँ उदास न रहता फिर मुस्कुराता हरदम वो,
जानता फिर उससे किस-किस की खैरियत है.!!  

99. पाक वफ़ा का चर्चा है सिर्फ किताबों में है”सागर“.!
एक ज़माना गुज़रा लैला-मजनूं-शीरी-फरहाद हुए.!!

100. ज़िन्दगी में जो भी मिला फरेबी ही मिला.!
हम तो “सागर“यूँ चाहत को भटकते रहे.!!

“लम्हें”


95. पहचान हो उसकी जिसके काम पहचान क़ाबिल.!
कोई नेक कर कोई बदनीयती कर नाम कमाता.!!

96. बात सही मगर उनका क्या करें जो हर शै में सवाल देखते.!
खुद तो होते मतलबी”सागर“औरों को भी खुदगर्ज़ समझते.!!

97. मैंने पल-पल तेरी ख़ाहिश की थी./
बेवफा हो पहले न निकल सकी.//

98. इतना ज़ोर-ज़ोर से न हंसा करो,
कुछ पड़ोसियों की भी लिहाज़ किया करो./
बेचारे दिन-रात तरसते होंगे मान,
कलेजे ‘सागर’ पर छुरियां न चलाया करो.//

99.10% प्रतिशत का रिवाज़ चला है,
हुस्न को भी शामिल कर लो यारो./
सविंधान संशोधन झट हो जाएगा,
आँख मरुओं की कमी नहीं यारो.//

100. देर से आई चल कोई बात नहीं क्या हुआ “सागर“./
हुस्न गर जल्दी आये तो नज़ाक़त कम न हो जायेगी.//

101. तुझे दुनियां से ज़रा भी फुरसत न मिली.!
शायद वजह रही मुझ से मुहब्बत न हुई.!!

101. हो सके तो कभी तस्वीर से निकल बहार आ जाना.!
देख तड़पे है ढूंढे गली-गली शायर “सागर” दीवाना.!!

102. दिल टूटना-जुड़ना है ज़िन्दगी की रिवायत,
कुछ ऐसे भी टूटे तो टूटते गए.!
मुक़म्मिल मुहब्बत किस – किसे मिले यहाँ,
सागर“किनारे भी यहाँ टूट गए.!!

103. गर तेरा इरादा नेक मिले जल जाना भी क़बूल यारा।/
इक बार हाँ कर देख उठा लाएगा घर से ये आवारा।//

104. किसी और को लिखे प्यार के अफ़साने क़बूल नहीं इस दिल को.!
या सिर्फ और सिर्फ मेरी बन जा नहीं छोड़ दे नादान की दिल को.!!

105. संभाल अपने दिल को सूखे पत्तों-सा न बना अभी”सागर“जिन्दा।!
जब तल्क़ हैं सांसें जिस्म में तेरे साथ चलेगा बाद तो बस शर्मिंदा।!!

106. मरजावां-मिटजावां तेरी इंग्लिश ते,
कि पता क्या-क्या लिखा था.!
चल यक़ीन कर लेता हूँ फिर भी,
न कहना यक़ीं किया न था.!!

107. क्या करूँ उस चाँद  का  जो अपना न हो सके.!
सितारों माफ़िक़ दिल तुड़वाने की आदत नहीं.!!

106.मेरी आँखों की नमीं न देख,
खुद को संभाल ज़रा.!
तेरी सलामती ही”सागर“का,
आखिरी सहारा है.!!

109. हर वक़्त खुदा से मांगना “सागर“अच्छा नहीं होता.!
खुदा अपने बन्दों को बिन मांगे ही नवाज़ता रहता.!!

110. ख्वाहिशों का गुल-ए-गुलशन है ज़िन्दगी,
इक ख़त्म दूजी उमड़ आती.!
जब तलक है जान यूँ ही गुज़री “सागर”
फिर भी कोई कमी रह जाती.!!

111.चाँद नज़र आ अनजाने ही कुछ याद करा जाता.!
चोरी-चुपके से मेहबूब की मुलाक़ात करा जाता.!!

112.हज़ूर खबर दिल को भी इतना हसीं चेहरा Fake नहीं हो सकता
जिसे रोशन खुदा करे वो नूर “सागर” कभी बेनूर हो नहीं सकता

113. क्यों औरों में तलाशते ‘सागर‘ वफादारी की बातें.!
गर खुदको ही संभाल लें दुनियां सुहानी लगती है .!!

114.दर्द न समझोगे मुहब्बत क्या खाक जानोगे.!
ज़हाँ को उल्फत से झुका दें ऐसे सौदागर हैं.!!

115.रात भर जागें भी और इलज़ाम भी सर लें
ए चाँद तेरी ये आदत बेईमानी है.!
बेहतर था “सागर” सो ही जाते निर्मुहे चाँद
को तड़पाने की बात सायानी है.!!

116.कुछ ऐसे वफादार होते जो वक़्त के साथ बदल जाते.!
ये भी सकूँ की बात है वक़्त रहते ऐसे से सम्भल जाते.!!

117.तू कभी चाहे मुझे दिल की.
ख्वाहिश है यही.!
तुझे खुदा समझ अपना तेरी,
इबादत की है.!!

118.तन्हा-तन्हा न कटे दिन का क़रार.!
गर साथ तेरा मिले हो दिलको सकूँ.!!

119.मेरे शेरों को इतनी सी मुहब्बत देदे.!
💘💘💘💘💘💘
तुझे याद आऊं क़यामत के दिन भी.!!

120.यूँ बात-बेबात खुदा से दुआ करना-मांगना ठीक नहीं है.!
वो मालिक ज़हाँ का जो भी करे उस में कोई रज़ा होती.!!

121.तन्हा वो होते जिनकी
ख्वाहिशों की इंतहां नहीं होती.!
यहाँ तो शे को खुदा की रज़ा समझ
क़बूल क़बूल क़बूल किया.!!

122.दीवाना कह कर हमें कब तल्क़ दर्द-ए-दिल छुपाओगे.!
कहीं ज़िक़्क़र हो गया हमारा अश्क़ कैसे रोक पाओगे.!!

123. वक़्त चाहे कैसा भी गुज़रे यारो हर हाल में खुश रहिये.!
भलाई इसी में है  खुद  खुश रहो औरों को भी रखिये.!!

124.काश वफ़ा हमारी का एतेबार किया होता.!
वजह कोई न होती फिर इंतज़ार करने की.!!

125. कमी मुझ में  न  थी कमी तुझ में भी न थी.!
ये तो वक़्तिया हालात थे जो दूरियां हो गई.!!

126. कम्बखत दिल है के मानता नहीं
कितना समझाओ फिर भी सुनता नहीं.!
आ जाए गर किसी पर तो बेरहम
अपने दिल की कभी बात मानता नहीं.!!

127. तेरी अदाओं की ख़ता जो दिल गैर दिखाता.!
हकीकत ये है तुझे प्यार बहुत ज्यादा करता.!!

128. दर्द-ए-दिल गर यारों का महसूस न किया होता.!
तो लब पर तब्बस्सुम को हरदम बिखराया होता.!!

129. कुछ लम्हें ऐसे भी गुज़रें ज़िन्दगी में यादों का हम साया बन जाएँ.!
अपने कही धुंधली यादें न बन जाएँ कमरे में कैद करलो ज़िन्दगी.!!

129. शुक्र खुदा है का कुछ तो क़बूल तो किया.!
वरना उम्मीदों का दामन छोड़ ही चुके थे.!!

130. इस दिल से मुहब्बत की आरज़ू न कर.!
और होंगे जहाँ उल्फत के फूल खिलते.!!

131. मुद्दत से तमन्ना थी कोई तुझ सा हसीं मिले
मिले तो सही मगर तुम मिले देर से.!
वक़्त साम्भै भी संभलता नहीं यहीं रीत है
सांस जाने को है आये ज़रा देर से.!!

132. हुस्न के आगे हर कोई यारो हो जाए बेहाल.!
वक़्त आता इश्क़ का भी दिल ज़रा संभाल.!!

“लम्हें”


63. यूँ कैसे बात बढ़ेगी आगे,
खुद ही सोच ज़रा.!
तूने तो मेरी हर बात पर,
रुकावटें खड़ी की.!!

64 मौत तो आनी है’सागर‘,
इक दिन आएगी ही क्या फर्क.!
यूँ हर पल इंतज़ार क्यों,
ज़िन्दगी बनाये क्यों फिर नरक.!!

65. तेरी ख्वाहिशों की इन्तहां न थी सनम.!
जान रख दी क़दमों बता और क्या पेश करूँ.!!

66. ख्वाहिश इस दिल की यही वक़्त किताब का पन्ना पलट दे.!
“सागर” की ज़िन्दगी में कोई तुझ-सा हसीं शामिल हो सके.!!

67. हो सकता है तेरी ख़ामोशी से ही रिश्ते क़ायम हों.!
मगर मैंने भी तो हर गम छुपाने की आदत डाली है.!!

68. पहले-आप पहले-आप लखनवी नवाबी शानं को न फरमाइए.!
अब मान भी जाओ “सागर” की हज़ूर-ए-आला यूँ न शर्माइये.!!

69. वक़्त गुज़रा जब”सागर”अपनी बातों के जाल में उलझाया करते थे.!
अब गुजरे लम्हों की चन्द यादें यूँ ही शेर-ओ-शायरी में पिरो लेते हैं.!!

70. दो चाँद हैं आँखों के सामने किस आगे सज़्दा करे “सागर“.!
फलक को गर मानता ज़मीन का अदावत पर उतर आता.!!

71. यूँ गर इतरा-इतरा वफ़ाएं जतलाओगे,
नासमझ को कैसे समझाओगे.!
क्या रहा फर्क उसमें और तुझमें फिर,
खुद से अलग कैसे बताओगे.!!

72. ज़िन्दगी हौसलों से ही परवान चढ़ती है “सागर“./
जो शक़्स हार मान जाये वो जिया तो क्या जिया.//

73. सितारे भी राह तकते-तकते सो गए,
सनम हरजाई फिर भी न चेहरा दिखाया तूने.!
माना खुदा ने हुस्न तुझे दिया बेपन्हा,
महताब यूँ खुद पर इतरा गरूर दिखाया तूने.!!

74.चल “सागर” इन बेवफाओं की महफ़िल से दूर कहीं दूर चला चल.!
ये हुस्न के सौदागर इतराएँगे बेशक जान निकल जाए इनके दर पर.!!

75. क्या खूब है तेरी वफ़ा और बेवफाई की खूबसूरती.!
खुदको आबाद हमें कंगाल कर गैर सेज़ सजा गए.!!

76. यूँ बात-बेबात खुदा से दुआ करना-मांगना ठीक नहीं है.!
वो मालिक ज़हाँ का जो भी करे उस में कोई रज़ा होती.!!

77. बिन बताये जाना भी है क्या कोई लखनवी अदा,
बड़ी खूब है लखनऊ शहर की हवा.!
तहज़ीब से अलबरेज़ नवाबों का शहर है माना,
पहले तो न चलती थी यूँ बेवफा हवा.!!

78. मेरी न हुई कोई गम नहीं,
किस्मत का खेल मान लूंगा मैं.!
ऐसा कुफर न ढहना कभी,
अपने बच्चो से मामा न कहना.!!

79. तूने आजमाए होंगे अब तक अंधे-बहरे,
कभी’सागर’को भी आजमा तो देख.!
दुनियां भर की मुहब्बत बसा रखी है,
इक बार दिल में बस कर तो देख.!!

80. न बना मुझको ए दिल पहले भी बहुत तड़पा हूँ,
वो नूरानी चेहरा आज तल्क़ न बिसरे ज़ेहन से,
जो दाग-ए-दिल दे गया तह उम्र तड़पने ले लिए…

81. क्या खूब है ये लखनवी अंदाज़,
कहती हर बात दिलसे.!
बार-बार दिलसे दिलको पुकारे,
काश करे प्यार दिलसे.!!

82. ज़िन्दगी गुज़रे तेरी जुल्फों की छांव तले हसरत थी दिल की.!
मगर अफ़सोस तूने मेरी वफाओं को शक की नज़र से देखा.!!

83. बात इधर की उधर से कैसे हो निकली.!
तड़पाते भी हैं और इलज़ाम भी लगाते.!!

84.जानते हैं’सागर’हुस्न की सब अदाएं.!
तभी तो हँसते-हँसते सूली चढ़ गए.!!

85. न कर खुद को अपने होंसलों से आज़ाद यूँ’सागर‘.!
ज़िन्दगी इक बार मिलती दोबारा का किसने देखा .!!

86. इंतज़ार भी ख्वाब-सा होता है,
किसी का हकीकत और किसी का खवाब ही रहता है.!
क्यों करें उस का यूँ “सागर”‘,
जिसने सज-धज रहना मगर इक़रार कभी न करना है.!!

87. उनके बगैर पहले भी जीते थे अब भी जी ही लेंगे.!
क्यों देखें ख्वाब अब ज़िन्दगी यूँही बसर कर लेंगे.!!

88. बहुत शौक है न तुझे मुहब्बत फरमाने का,
आ इक रात मेरे संग-संग जाग कर तो देख.!
देखूं तेरी बाँहों का दम कितना गरमा रही,
एक बार अपना यक़ीन भी आजमा तो देख.!!

89. बहुत देर कर दी हज़ूर आते-आते,
निगाहें थक गयी थी इंतज़ार करते-करते.!
माना महताब का दीदार नहीं आसां,
बाहें थक गयी थी फ़रियाद करते-करते.!!

90. अपनी कमियां यूँ सर-ए-आम ना कर.!
दीवाने चाय पिला-पिला हाथ मांग लेंगे.!!

91. एतराज़ नहीं तेरी खुली किताब होने का मगर डर लगता.!
उस ज़माने का क्या करें”सागर“अंदर कुछ बहार कुछ है.!!

92. यूँ चुपके-चुपके आना कुछ कहना बिन बताये चले जाना,
मर जाएंगे यूँही इंतज़ार करते-करते तब तो इक दिन दुनियां मानेगी,
प्यार बेशुमार करते थे मगर यक़ीन करा न सके”सागर”.!!

93. ना चैन चुराओ इस दिल का,
क्या खुद भी सकूँ से रह पाओगे.!
माना गुनाहगार कम नहीं हैं,
क्या बेमौत ‘सागर’ मार जाओगे.!!

94. दीवाना आशिक़ कह बदनाम”सागर“को कर गए.!
पहले जुल्फों को आवारगी करने से तो रोक लेते.!!

“लम्हें”


32.सबूत मांग मुहब्बत की क्यों तौहीन किया करें “सागर
सांसों एहसास ही काफी राज़-ए-दिल समझने के लिए

33.रख अपनी अदाओं को अपने पास तू.!
कोई और दिल देख जिसे तड़पा सके.!!

34.रात भर करवटें बदलते किस हाल गुज़री.!
सुबह बहाने से वो असर देखने चले आये.!!

35.बिन शिक़वा-शिकायत’सागर‘कभी हुस्न बात न करे.!
चाहे कर लो कितनी भी मुहब्बत शिकायत ही करे.!!

35. इसी का नाम ज़िन्दगी है कभी ख्वाहिशें पूरी तो सकूँ दिल को.!
कोई हर हसरत मुक़म्मिल बाद भी सुबह-शान कोसे रब्ब को!!
36. टूट कर चाहने का किसी को यही नतीजा होता .!
बेवफाई खुद करते ‘सागर‘और बेवफा भी कहते .!!

37. किसने कहा तुझसे सपने अपने होते,
बंद आँखों के सपने कभी पूरे न होते
ज़िन्दगी मेल है धुप-छांव का ‘सागर‘,
यहाँ गीले-शिक़वे कभी न पूरे हैं होते

38. क्यों झूठ बोलती हो कभी दिल से हमें मनाया था.!
क्या तुम ने कभी खुदा माफिक दिल लगाया था!!

39.कुछ रहती होंगी मजबूरियां यूँही कोई बेवफा नहीं होता.!
कोई तेरी होगी कुछ मेरी जो एक-दूजे से मुंह फेर लिया.!1

40.ये तेरी ज़िद्द थी या वफ़ा इसकी खबर न’सागर‘को.!
लेकिम ये तय है तुझसे मुहब्बत बड़ी शिद्दत से की.!!

41.पल-पल की हैं दुआएं पाकर ‘सागर‘ बहुत कुछ और पाने की.!
मालिक भी कब तक दे उसे ज़रूरत सब से वादा निभाने की.!!

42. देखें हैं उल्फत का वादा करने वाले
सज़ा डोली दूजे संग विदा होने वाले

43. बेवफाई करे ये तेरा रिवाज़ नहीं
ये वकाम तो हम जैसे का है

44. यूँ तो ख़ामोशी हर मर्ज़ की दवा समझे ज़माना.!
कभी-कभी बेहरी दीवारों के लिए ज़रूरी होता.!!

45.वजह खुद को न कोस ए दिल,
अभी कहाँ गुज़र ली अभी बस शुरुवात है,
माना ज़िन्दगी दुःख भी देती यूँ तो खुशियों की बरसात है.!!

बंद करते गर आँखें तो यूँ न सोचते फिर.!
दिल की धड़कनों में आवाज़ किसीकी है.!!

45.ज़माना बेशक कैसा भी क्यों न रहा हो.!
दुनियां ने मुहब्बत पर लगाई पाबंदियां.!!

46. यूँ तो ख़ामोशी हर मर्ज़ की दवा समझे ज़माना.!
कभी-कभी बेहरी दीवारों के लिए ज़रूरी होता.!!

47. दिल से कहाँ गए हैं सनम,
दिल की धड़कन बन बैठे हैं.!
ख्वाबों में तो ढूँढ़ते रहते हो,
पहले दिल में झांक लिया करो.!!

48. यूँ साथ चलना होता तो कभी का चल देती,
मां-बाप रुस्वा तेरी खातिर नहीं कर सकती.!
गर है सच्ची मुहब्बत तो डोली ले कर आ,
बाबुल की दुआएं ज़रूरी न थोड़े मैं करती.!!

49. गर क़बूल दिल का जुबां तल्क़ ले आते.!
हालात-ए-मंज़र फिर कुछ और होता.!!

50. ये होता तो वो होता और गर वो होता तो ये होता.!
ज़िन्दगी यूँ बिन हकीकत रूबरू हो नहीं कटती.!!

51.साथी गर तेरे जैसा मिले ज़िन्दगी हसीं गुज़रे.!
वरना यहाँ हर राह बेगाने मिलें अपने बन.!!

52. यही अदा क़ातिल हसीनों की’सागर’.!
क़त्ल करें या अल्लाह बोल किनारा हो जाएं.!!

53. यूँ साज़ धज न बैठिये जनाब,कलेजा हलक बाहर आने की है.!
महताब फलक पर ही रोशन अच्छा लगता को यूँ न तड़पाइए.!!

53.ऐसा नहीं है इस ज़हन में हर कोई काफिर नहीं.!
क़द्रदानों की कमी नहीं कमी है बस अपनों की.!!

54.बहाने बनाने की हुस्न की आदत है.!
इश्क़ तो बस सितारों-सा तरसता है.!!

55.ये भी मुहब्बत का तसव्वुर “सागर” जो हर किसी को हासिल नहीं.!
लोग करते यहाँ दरखास्त इक बार सही कोई चाहने वाला तो मिले.!!

56.यूँ दुनियां को न कोस सितारों से आगे भी जहाँ है.!
हर कोई नहीं एक-सा सब बस मुक़द्दर की बात है.!!

57. तुम ने अगर दो अल्फ़ाज़ों गर थोड़ा भी सहारा दिया होता.!
मजिल बेशक काँटों भरी थी मगर आहों का मंज़र न होता.!!

58.तेरी नज़रों का वहम अब किस तरह दूर हो.!
मैंने चाहा है बस तुझे ज़िन्दगी से बद कर.!!

59. इक मासूम ने मामू-मामू कह आवाज़ लगाई
देखा पुरानी माशूका नन्हा है वो.!
यार ‘सागर’ रब्ब ने किस जन्म की यूँ मुकाई
जो पौध थी लगनी गैर ने लगाई.!!

60. न मानने की उस ज़ालिम ने जैसे कसम खाई,
न कहा कुछ डिलीट किया न वो तस्वीर वहां लगाई है.!
खुदा करे रात भर करवटें बदले तकिया बीच,
कम्बख्त टूटे बदन से जा दफ्तर हाज़री लगा आई है.!!

61. अब सुबह हो गयी है दिल क्या कहता ज़रा बता दो.!
किसके इंतज़ार में है किस पर एतबार है ये बता दो.!!

62. बहुत गुमां है हुस्न को दिल न देने पर,
करीब आये तो जाने हम भी क्या हैं.!
दूर-दूर से तो सभी इतरा लिया करते,
करीब आ देखूं बंदी में कितना दम है.!!

“लम्हें”


1. दूर रहो या पास ,
बेशक खामोश बैठो.!
क़तल करने की ये भी,
यक़ीनन कोई अदा होगी.!!

2.ये शाम उनके नाम जो कभी अपने थे 💘💘
वक़्त का तक़ाज़ा देखिये तन्हाई में गुज़रा है 💘💘

3. हुस्न को बाज़ारू समझ मोल-भाव न लगाइये.!
ये न भूलें तुमको भी किसी माँ ने पैदा किया था.!!

4. कुछ वो चुलबुली,
कुछ ये क्यूट संध्या 💘💘
अब फैसला कैसे हो
दिल उलझा और बंध गया 💘💘

5. न फंस इन की लच्छेदार बातों में 💘💘
हुस्न वाले दिल फरेबी होते हैं.!
क़तल करते इश्क़ का खुद मगर फिर 💘💘
इलज़ाम भी उसी सर लगाते हैं.!!

6. तस्वीर उनकी सिरहाने रख न सोया करो.!
खुद तो सोते हो रात भर उन्हें तड़पाया करो .!!

7. कोई गीत ऐसा लिख जो मुझ पर हो 💘
बात मेरी करे जो पसंद आये .!
तेरे दिल में कुछ -कुछ होता है💘
कह न जो मुझे रास आये.!!

8. ये शाम उनके नाम जो कभी अपने थे 💘💘
वक़्त का तक़ाज़ा देखिये तन्हाई में गुज़रा है 💘💘

9. हज़ूर ये उनका नहीं कम्बखत आके हुस्न असर है👌👌
बेचारा इश्क़ क्या करे समझे या ाको प्यार करे 💘💘

10.वादा वही करो जो निभा सको …
न निभा पाए गर चेहरा दीखाने क़ाबिल न रहोगे 

11. तुझे रास आता होगा गैरों के नक़्श-ए-कदमों चलना 💘
💚❤👍💗💚
हमनें तो तह उम्र गुज़ार दी मनचाही मंजिलों से चल 💘

12. किससे शिकायत और किस -किससे शिक़वा 💗💗उनसे जब बात नहीं होती.!
बिन बात किये रह भी तो नहीं पाते 💘💘दिल में हरारत जो रहती.!!

13. आओ इक ऐसे ज़हान को चलें जहाँ कोई अपना न हो बेगाना न हो.! 
बस चारो और खुशियों का तराना हो.!!

14. उनकी बेवफाई का कुछ ऐसा सबब है.! 
दिल 💔💔तोड़ते हैं फिर कहते मैंने क्या किया.!! 

15. देखा जो आइना तो वो शर्मा गया 💘💘
कम्बख्त ने तेरी तस्वीर आँखों में जो देख ली ❤❤

16 . इक़रार वहां होता जहाँ इज़हार होता 💘💘
जो बैठे पहले आप पहले आप सोच प्यार उनसे कहाँ होता ❤❤

17. बेवफा से वफ़ा की उम्मीद जैसे मरुस्थल में झील की ख्वाहिश 😀😀
अरे कुछ तो सोच लिया होता बर्खुदार क्यों की ऐसों से मुहब्बत और उम्मीद 😀😀

18.खुदगर्ज़ ज़माने से कैसे हो आरज़ू ‘सागर‘.!
यहाँ फुरसत कहाँ किसी को किसी वास्ते.!!

19.कुछ ऐसे वफादार होते जो वक़्त के साथ बदल जाते.!
ये भी सकूँ की बात है वक़्त रहते ऐसे से सम्भल जाते.!!

20.वो तेरी गुलाबी साडी और उस पर गदराया बदन .!
गुमाँ होता झील में खिलता कमल आवाज़ दे रहा.!!

21. ये सुबह की Good Morning नहीं पैगाम दिल का भेजा है.!
जो क़बूल हो दिल से तो जवाब ज़रूर देना.!!

22. दुनियां कैसी भी है”सागर”निभानी पड़ती.!
जब तल्क़ मिली ज़िन्दगी जीनी ही पड़ती.!!

23.बारिश से पुछा नादाँ “सागर” ने क्यों बरसती हो.!
अदा से बोली तेरे मेहबूब की अखियन बात कहती हूँ.!!

24.तन्हा-तन्हा न कटे दिन का क़रार.!
गर साथ तेरा मिले हो दिलको सकूँ.!!

25.न कोई शिक़वा है न ही कोई शिकायत तुझसे.!
बस जिये जा रहे हैं ज़हर तन्हाई सही जा रहे हैं.!!

26.धन-दौलत-शोहरत की कमी न थी.!
जब से दूर हुए”सागर”गरीब हो गए .!!

27.यही इश्क़ का असर है नामुंमकिन मुम्मक़िन लगे.!
हो जाए गर मुहब्बत”सागर“दुनियां बड़ी हसीं लगे.!!

28.यूँ आँखों के तीर दुनियां गर पर चलाओगे,
भंवरों की अंखियन फिर कैसे बच पाओगे.!
दोगो उन्हें उस गुन्हा सजा जो किया नहीं,
ऊपर से इलज़ाम उनके ही सर लगाओगे.!!

29. सुन्दर विचारों की अनुभूति ही ज़िन्दगी है…

जो रिश्ते बोझ से लगें ‘सागर‘ उन्हें तोडना ही बेहतर.!
क्या फायदा कभी मिलें नज़र मिलाना नामुंमकिन हो.!!

30. तूने भी तो किताबों से दिल लगाया था.!
हम नें वही किया जो तूने सरहाया था.!!

31.कभी सवेरे Good Morning ही कर लिया करो.!
यूँ तो बोलते नहीं इसी बहाने बात कर लिया करो.!!

“लम्हें”


1.वकील हूँ कोई क़ातिल नहीं जो तेरे अरमानों का क़त्ल कर दूँ./
इक बार अपनी दरखास्त लगा तो सही ज़माने से लड़ जाऊँगा.//

2 हंसने को तो हंसा देंगे पर क्या करें कम्बखत दिल फिर कैसे संभलेगा./ 
अकसर सुना करते बड़ों से लड़की हंसी नहीं तो फांसी बताओ क्या करें.//

3 अपनी-अपनी फितरत है,
जिसे जो करना वही करता./
आसमाँ ज़मीं को देखता,
ज़मीं फलक की परवाज़ को.//

4.बहुत देर कर दी हज़ूर आते-आते,
निगाहें थक गयी थी इंतज़ार करते-करते./
माना महताब का दीदार नहीं आसां,
बाहें थक गयी थी फ़रियाद करते-करते.//

5 कभी-कभी झूठ भी किसी की ज़िन्दगी बन जाता./
सच कहना तो चाहिए मगर उतना दिल न दुखाये.//

6 अभी देखी ही कहाँ शायरों की शायरी भरी आंधियां./ 
जो बात नज़र न सुना  पाए  शेरों  में ब्यान कर जाते./

7 मुम्मक़िन तू भूल जाए लेकिन इस दिल से तेरा नाम मिटाना मुश्किल./
जितने भी टुकड़े करले हर  हिस्सा  तेरा  नाम ले-ले कर ही धड़केगा.//

8 बिन बताये तेरा यूँ जाना बड़ा नागवार गुज़रता है./
कम से कम इत्तला पाने की गुंजाइश तो रखते हैं.//

9 निशानियां हैं ये मुहब्बत की जो किसी संग हो गई है./
वो ख़ास मुक़द्दर का शहंशा  जिसे क़ामिल हो गई है.//

10.बड़ी बतमीज़ थी कम्बखत बिन बताये गैर हो गयी./
करते रहे इंतज़ार”सागर”औरों की सेज़ सजा गयी.//

11.सवालों में ही जवाब छुपा होता है यारा./
और बात न समझने वाले न समझ जाते.// 

“लम्हें”


1.ये उन की हंसी है जैसे कहकशां की बिखरन.!
ज़िन्दगी में काश हो जाए”सागर“उनका आना.!!

2. दिल में तो न दे सके कागज़ पर तो थोड़ी जगह छोड़ देते।!
इतनी भी क्या बेरुखी “सागर” से कहता क्या की बता देते।!!

3. चांदनी चौक पर,
क्या खूब मिले थे,
बारिश के मौसम,

तेरी बाँहों में,
मेरी बाहें थी,
तन भीगे थे,
मन गीले थे,
फिर भी खामोश,
दिली धड़कन थी
चंदनी चौक की,
क्या खूब मिलन थी…

4. और जिनका चेहरा ही चाँद-सा हो उन्हें फिर फुर्सत कहाँ.!
ईद मनाने वालों की छत निचे कतारें खड़ी रहती हर दम.!!

5. ज़िन्दगी चखते इससे पहले ही जुबां का जाइका बदल गया.!
खट्टी थी या मिठ्ठी समझ पाते “सागर” दिल-ए-तार टूट गया.!!

6.ज़िन्दगी बहुत कुछ सिखा देती अभी देख आगे होता है क्या.!
कमसिन उम्र है उम्र के अगले पड़ाव तज़ुर्बा मिलता है क्या.!!

7.बेगानों की इस बस्ती में अपने कहाँ हैं अब “सागर“।!
ज़माना गुज़रा राह चलते भी हाल पूछ लिया करते थे।!

8.गर चेहरा पढ़ने का मौका दे तेरे दिल का हाल भी जान सकता हूँ.!
इतनी मुहब्बत करूँगा तुझ से तेरी सांसों से हाल जान सकता हूँ.!!

9. चाँद जब फल्क़ पे निकले दीवानों आस बढ़ आती है।!
वो भी आती होगी”सागर“यारों की चाहा बढ़ जाती है।!

10. यूँ रुक रुक मिलोगे तो कैसे उल्फत परवान चढ़ेगी.!
उफनती नदी नहीं “सागर” है कैसे संभालोगे सोचो.!!

11. गर खुद में ही इंसानियत रखें “सागर
दूजों को नसीहत की ज़रूरत न होगी

12. तुम होते तो ये होता,
तुम होती तो वो होता.!
ज़िन्दगी कश्मकश है,
जो होते कुछ न होता.!!

13. बड़ी कम्बखत हो

बिन बताये बिन सुनाये सोने को चली जाती हो तुम
कभी सोचती तो दीवाने “सागर” का हाल क्या है.!
निगाहों में हो सांसों में हो धड़कन हो दिल की तुम,
जब सब कुछ हो तुम सोचो पास बचता क्या है.!!

14. दर्द सो रहा और दवा की फिक़्क़र किसे.!
सागर“परवाने तो बस यूँ ही जला करते.!!

15. शम्याने में आ जाते तो यूँ भीगते न तुम
गर्म पिगलती सांसें न लेते फिर तुम.!
बारिश का जान-ए-जहाँ अपना ही मज़ा,
लुत्फ़-ए-मौसम फिर उठाते तुम.!!

16. क्या खूब वफाओं का अब ज़माना आया”सागर“.!
मेहबूब आते घर खुद को किरायेदार समझ.!!

17. मुहब्बत का दर्द है “सागर” इतनी जल्दी न जाएगा.!
जान निकलेगी न जब तक तब तक न रुक पायेगा.!!

18. जब तल्क है जान ख्वाहिशों का अंत न होगा.!

इधर दम निकला उधर हर ख्वाहिश हुई पूरी.!! 

19. सब जानते उल्फत की परेशानियां फिर भी./
जाने लोग मुहब्बत क्यों किया करते”सागर“.//

20. न वक़्त अपना ख़राब कर बेवफओं से कैसी शिकायत.!
मुहब्बत करने वाले हर हाल माशूक़ का साथ न छोड़ते.!! 

21. यही जीने का इखलाख”सागर“उसकी रज़ा में खुश रहो.!
जो भी दिया बहुत खूब दिया रब्ब का शुक्रिया अदा करो.!! 

 

 

 

 

 

“लम्हें”


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1) दावत-ए-इश्क़ ने तेरा तलबगार बनाया.!
यूँ और भी कई हुस्न वाले यहाँ रहते थे.!!

2) न कर ऐसी तैसी इक दिन चाय पर भुला तो देख
क्या पता तुझे भी किसी से इक़रार हो जाए.!

बहुत गुमाँ तुझे दिल न देने-लेने पर जान-ए-जिग्गर,
दुआ”सागर“की तुझे भी प्यार हो जाए यारा.!!

3) सच है मगर कितने हैं वादा-ए-वफ़ा निभाने वाले.!
अब”सागर“लोग इश्क़ करते मशहूर होने खातिर.!!

4) कौन कहता है बेवफा हैं “सागर“.!
काश दिल में झांक कर तो देखते.!! 

5) अलफ़ाज़ दिल से निकालें,
अब वो ज़माना कहाँ रहा”सागर“.!

लोग किताबों से पढ़ कर,
मुहब्बत जताने के ज़ज़्बात ढूंडते.!! 

6) ये इत्र नहीं तेरे तन की खुशबू है,
जो मिल मेरी सांसों तेरी रूह में समाई.!

सागर” अपनी-अपनी खुशनसीबी,
किसी को ज़न्नत कहीं मिली जग हंसाई.!! 

7) गर इतनी जल्दी हार मान जाओगे,
दिल की कैसे फिर बताओगे.!

अज़ी इश्क़ तो यूँ ही इतराता है,
भाव खाओ फिर न पछताओगे.!!

8) इश्क़-विश्क की बातें अब रही न ज़माने में .!
सागर“दिल लगते हैं महज़ दिखाने के लिए.!!

9) सागर” अभी देखी कहाँ मुहब्बत की कसक.!
जब दिल लग जाएगा देखना दिल की कसक .!!

10) कच्ची उम्र है अभी यूँ इश्क़ की आरज़ू न कर.!
यहाँ भँवरे कई रूह को चाहने वाला न कोई .!!

11) ये अपनी बदनसीबी नहीं तो और क्या था.!
जिसे चाहा जी भर वही दूर होता चला गया .!!

 

 

“लम्हें”


1) यक़ीन नहीं फिर भी यक़ीन करना होगा”सागर“./
बेवफा बेशक है मगर जान-ए-जिग्गर भी तो है.//

2) ये तेरी गलतफहमी है “सागर” अजनबी को दिल दे बैठी./
ज़रा दिल में झांक कर तो देखती सांसों से प्यार कर बैठी.//

3) गर छुपाना सीख जाते”सागर”इजहार-ए-उल्फत कैसे करते./
दिल में जलती शम्माँ तेज हवाओं में फिर कैसे रोशन रखते.//

4) तुझे हक़ है “सागर” वफाओं पर शक करने का./
गर दिल में हो मुहब्बत रश्क़ करना भी लाज़िम //

5) इसी का नाम ज़िन्दगी है यारो.!
जैसे भी हो बस गुज़र ही जाती.!!

6) बड़े जिग्गर वाले होते उल्फत के मतवाले.!
जान देते इश्क़ खातिर मगर उफ़ न करते.!!

7) हर ख्वाहिश गर मुकम्मिल होती “सागर“.!
फिर हसरतों का जिक्क्र ज़माने में न होता.!!

8) इसी का नाम मुहब्बत है यारा./
तभी हर शय में रब्ब दीखता है.// 

9) न पूछ मुझसे मेरे होंसलों की परवाज़./
गर सामने हो तेरे होंठ चूम लूँ मैं.// 

“लम्हें”


reading

1) तेरे मासूम से सवालों का जवाब नहीं है”सागर“।/
आँखों में है तेरी तस्वीर यही जवाब है”सागर”।//

2) ये उनकी नादानी जो अब तक,
आँखों की ज़ुबाँ न समझ सके।/
काश वक़्त रहते तस्वीर किस,
की जान लेते अश्क़ यूँ न बहाते।//

3)हमीं से इश्क़ हमीं से शिकायत कैसी मगरूरियत है
सागर” प्यार में डूबना भी तो हज़ूर बेहद ज़रूरी है

4) दिल पर किस का इखत्यार”सागर“,
चाहे भी संभले न./
मिल जाएं कहीं नज़रें नज़रों से जो,
बेकाबू है दिल फिर.//

5) गर अपने घर का पता दे जाते,
मिलना आसाँ हो जाता./
वहां तुम निराश न होते और,
दिल क़रार पा जाता.//

6) गर इंतज़ार मुकम्मिल हो गया फिर इंतज़ार कैसा./
जो दिल जल्दी से मान जाए वो दिल बेक़रार कैसा.//

7) हुसन वादा भी करे और निभाने की आदत न रखे./
फिर भी शिकायत इश्क़ से और मौका भी न चूके.//

8) अभी पंडित जी ने मुहरत नहीं निकाला,
कहते शनि में शुक्र बैठा है।/
जरा करो इंतज़ार जिम्मेदारियां निभाओ,
इन्तज़ार का फल मीठा है।//

9)यूँ शरारत न कर मेरे दिल से,
बात करते-करते बात दिल में घर जाएगी./
फिर तड़पेगी ताह उम्र तू भी,
तेरी हस्ती भी सितारों में शुमार हो जायेगी.//

10) अपने सवाल-ए-दिल संजोय कर रख./
गर मिलेंगे खामोश न रहने देंगे यारा.//

11) वो सच कहें या झूठ दिल को सब भाता”सागर“.!
हुस्न वालों की बातों में ही जीने का मज़ा आता.!!

“लम्हें”


@Aaye the aapki Mehfil mein Muhabbat ka Paigam liye.!
Na khabar thi”Sagar“Badnami ka Daag liye.!!

@Wo bewajaha Ilzaam lagate hain”Sagar“.!

Bin soche ki Gunhaagar wahi to nahin.!!

@Jo bat Zuban par aajaye use poochna behtar.!

Baat karne se hi Dil ka bhoj kam ho jaata hai.!!

@Chaar din ki Zindgee hai na lad mere Yaara.!
Sagar“kehe Zahaan mein aur bhi hai Pyaara.!!

@Gusse mein wo aur bhi haseen lagte honge.!

“Sagar”kash aaina hote to dekhte .!!

@Mujhe yaad nahin kab pahalee baar unko dekha tha.!
Sagar” jaane kab Un se nazar mili aur Pyaar ho gaya.!!

@Kar Wada Wo aksar kyun bhul jaate hain.!
“Sagar” kya Wo kisi aur ko Chaahte hain.!!

@Meri tanhai aksar mujhe mayoos karti.!

Kisi anjaan zindgee ki aur ishara karti.!!

@Tere-Mere beech itne Faasale badh gaye hain.!
Lagta”Sagar“jaise kayi Sadiyon Pahle mile the.!!

@kisi Gair se baat kare ye mujhe manjoor nahin.!

Koyi aur ho humare beech ye mujhe qabool nahin.!!

@Mere Share hi mere dil ke zazbaat hain.!
Zara Gour se padna ye tere naam hain.!!

“लम्हें”


@Guzarun jis Galee se tera Ghar nazar aata.!
“Sagar“kya kare bata ab apna Ghar nazar nahin aata.!!

@Tujh sang dosti meri Umeedon ka Imthaan hai.!
Sochta hun”Sagar“jaane kab pyaar mein badal jaaye.!!

@Hote ho jab samane har Gum bhool jaata hun.!
Sagar” kya bataaun un ko kitna chaahata hun.!!

@Ye kaisi dilagee hai”Sagar“jo Jeene nahin deti.!
Jitna bhulana chahun usko bhulne nahin deti.!!

@”Sagar” mein Kishitiyan Muhabbat kee Utarte Use dar na laga.!
Dekh zamane ki Mojein Manzil aane se Pahle hi Wo Toot gaya.!!

@Apne honthon ki Tabbssum bana lo mujh ko.!
Sagar“ko bus Kisi tarahan in labon se lagalo.!!

@Silsale pyaar ke Jahaan mein yun hi chalte raheinge.!
Hum rahein na rahein Karwan yunhi chalte raheinge.!!

Wo aur honge”Sagar” khudi ki soch Zinda rahte hain.!
Hum to Zinda hai bus ek zamaane ki khshiyon khatir.!!

@Tere chehare mein mujhe noor nazar aati hai.!

Tere samne sari duniya be-noor nazar aati hai.!!

“लम्हें”


@Tera har khwab teri Dua qabool ho Sanam.!

Hum door se tujhe khush dekh Jee leinge.!!

@Zindgee baaki rahi to ek baar tera deedar to zarur karunga.!
Tujhe milne dil beqrar teri har bat ka yqeen zarur karunga.!!

@Wo muhabbat kya jo Aansunon se Iqraar kare.!
Haal-e-dil to Sanam ki hansi byaan kardeti hai.!!

@Aap har sawal ka jawab sawal se hi dete ho.!

Yun to kabhi kuch jaan paayeinge na Hum.!!

@Aisa nahin kee pahlee baar hum-tum mile hain.!
Janm-janm ka saath Pahale bhi kayi bar mile hain.!!

@Ey Chaand zara sambhal tu niakl.!
Sitaare kayi hain teri zustzu mein.!!
@Tere liye to mahaj ek musqaan hai.!
Mere liye meri Zindgi ki aarzoo hai.!!
@Beiraada nahin thi teri nazar ki harkat.!
Kuch tha jo sharma gayi humein dekh.!!

@Raat saari guzar logi hisaabon mein.!
Subaha kya pdogi fir kitaabon mein.!!
Kahin aisa na ho chipte-chipate firo.!
Tah Zindgi guzarni pde hijabon mein.!!

 @Tere intzaar mein ek raat aur guzar di,
Hum ne Zindgee roz yunhi Sanwar li,

@Tujh ko chaahna meri Zindgee ki Zidd hai.!
Dekhta hun kab talk bach paayega mujhse.!!
@Na aa sahi waqt par koyi baat nahin.!
Wo phool paas rakhna jo diya hai tujhko.!!
@Iq bewafa se pyaar kar baithe.!
Kya khata ki Etabar kar baithe.!!
@Ye mere Share nahin Pyaar ke Nazraane hain.!
Likhe hain jaag raaton ko Dil ke Fasaane hain.!!
@Haq nahin tujh fir bhi Haq jta raha hun.!
Kyun nahin aaye Sawaal utha raha hun.!!
Ey Shamma tab tak jalunga,
@Jab tak jal na jaaun.!
Tera Parwaana hun main,
Tere bin kaise Jee sakunga.!!
@Dil hai dhadkega.!
Kisi yaad mein Tadpega.!!
Arey wo chahte hain to chahne do.!
Kabhi idhar bhi pyaar barsega.!!
@Teri yaadon ko dil se lagaye firte hain.!
Tujhe har Shayi mein dhoondate hain.!!
@gair hai teri har adaa bhi gair khatir.!
Wo din guzare Saja karte the meri khatir.!!
@My faith is u,
My trust on u,
My Love is True,
Only for u,
@Is Bazm mein gar mera Musqurana acha nahin lagta.!
Kehkar to Dekh khushi-khushi Sab chod chla jaunga.!! 
@Tujhe Guma hai apni adaaon par,humein naaz hai apni wafaon par.!
Tu sochti hai tujhse bada Qatil na koyi,humein Shok Qatal hone ka.!!
@Wo bhi tere Khawab dekhta hoga,
Tujh ko tujhi se Churane ke.!
Wo bhi koyi Raste dhoondta hoga,
Tujh ko apna banane ke.!!
@Har jawaan dil ko hai ek hi Bimaari.!
Love-Love-Love aur nahin  Dushwari.!!
@Wo umar poochte hain reh reh kar.!
Pahale Rukh se hizab uthayein to.!!
Sharat wo rakhein hain jo pyaar me.!
Hum kyun na apni baat manwaein na.!!
@Aa tujh ko dikhata hun haal-e-dil apna.!
Chuba khanjar nikal lata hun dil apna.!!
@Tujhe pyaar karna meri zindgee ki aarzoo hai.!
Meri aarzoo ho poori yahi aakhiri aarzoo hai.!!
@Kitna bechain hai”Sagar“,
Mojon ki rawani dekh samjh.!
Kishti ki utanre se Pahale,
Gehrai”Sagar“ki samjh.!!
@Humein itna pyaar na dijiye ki kal aapko yaad kar dukh ho.!
Jaante hain Hum humare darmiyan kai Fasle hain Sanam.!!
@Tujhe bhool paaun Dilber wo Dawa kahan se laaun.!
Sagar” naam hai beshaq bata kahan ja chup jaaun.!!

“लम्हें”


@Itani bebasi pahale kabhi nahin dekhi thi.!

Hum unhein chaha gaye par keh na sake.!!

@Teri hasrat  aur  muhabbat  kare  saara  zamaana.!
Jaanta hun meri nahin fir bhi teri chaht hai mujhe.!!

@Aap ke pyaar ka asar hai ki Jeete hain ab tak.!
Warna duniya ne sitam kam na kiye hum par.!!
@Kyun banate ho humein lafz nahin kuch bayan karne ko.!
Apni aankhon ko to samjha lete pahale Izhaar karne se.!!
@Teri aankhon se  pee kar nasheman ho jaate.!
Ab bhala kyun Maikade ka rukh karein hum.!!
@Meri aankhon mein na dekh apna ghar.!
Tera safar-e-hayat nahin ban sakta kabhi.!!
@Har Dua qabool nahin hoti muradon kee.!
Kuch to Khuda ke liye bhi chod do Sathi.!!
@Koyi nagma teri khatir kyun na likhun main.!
Teri har aada pe ek-ek geet likhunga ab main.!!
@Shayar hun fir bhi Tera Husn bayaan nahin kar sakta.!
Kahaan se laaun wo lafaz jo Ghazal mein likh paaun.!!
@Tere lab se do mithey bol sun jee jaaun.!
Tu hi ki Chai ka Pyaala chodti hi nahin.!!
@Husn jab benaqaab ho Sadkon pe firne laga.!
Aashiqo ka Mela Gali-Muhalle nikalne pada.!!

@Nigahaon ke teer chala bana qaatil mera Sanam.!

Ab umar bhar ki Saja qaboolni hogi tujhe Sanam.!!

@Rubb kee Ibaadat-see hai Pak Wafa.!
Pale Muhabbat to samjh jeeta zahan.!!
@Tujhe Qatil kahun apna ya Mehboob main samjhun.!
Tu Dil ke paas hai itni na Mar kar bhool na paaunga.!!   

@Har Aarzoo se behtar hai koyi Aarzoo hi na rakhun.!
Naqaam hasraton ka takaza koyi Aarzoo na rakhun.!!

@Tujhe chaha tha humne apna Humsafar maan kar.!
Tum Safar par chal pade Gair ki Rehnumaai karne.!!

@Jo zazbaat ki na qadar kare use dosti ka haq nahin.!
Aur wada kar mukar jaaye use pyaar ki tehzeeb nahin.!!

“लम्हें”


@Peene ka shouk nahin kyun peene ko jee chahata hai.!
Teri nasheeli aankhon se pee jeene ko jee chahata hai.!!

@Chaand ko maloom nahin kis-kis ko hai us se muhabbat.!
Khamosh hi Chandni bikhara Jahan ko roshan karta hai.!

@Ye meri Bebakiyan kyun mujhe jeene nahin deti.!

Kahan se laaun Farebi batein Aadat badne khatir.!!

@Kash wo yahan aa jaate Muhabbat ka Faisla bhi ho jaata.!

Karte Haan to Zahaan mil jaata Na Zindgi Jahnnum banati.!! 

 

@Bete lamhon sahahre nahin guzarti zindgi.!Baar-Baar nahin milti hai Insaani zindgi.!!@Tere yaqeen se jayda mujh khud pe yaqeen tha.!
Tu hogi na kisi gair ki mujhe poora yaqeen tha.!Dekh Sej kisi gair khatir mujhe yaqeen na tha.!
Apni duaon par aur Khuda par bda yaqeen tha.! @Kuch pal ki doti mein wo duniyan bhula baithe.!Maa-Baap ke pyaar ko dil se nikal baithe.!!@Mout ke baad to sabhi Sakun pa lete hain.!
Jeete -jee sakun pa sake Zindi wahi jeete hain.!!
@Tere waadon par jo jaate to Zustzoo kar-kar ke hi Umar guzaar jaate.!
Soucha kyun na aa teri Gali tere ghar ke samane Zindgee guzaar dein.!!
@Jinhein khud pe Yaqeen Saboot nahin mangte.!
Mehboob kee sun Faisla kar lete hain.!!@O Meri Jaan-e-Wafa Tujhko Pahale Jo PehchaaN Lete.!
Dil De-Dete to Apna Tera Dil Lete na Kabhi.!!@Tere aane se Bahaar aayi hai.!
Nahin to Jiye jaate the Ujade Gulshan ki TarahaN.!!@Bat-bebaat par Un ka Shukriya kehna Humein Deewana bana gaya.!
Warna humein to Zahaan ne kabhi Tareef ke Qaabil na Samjha tha.!!@Koyi shiqwa-shiqayat berukhi nahin.!
Jaane kyun tanhai ras aane lagi hai.!!
Guzare lamhon ko yaad kar-kar ke.!
Zindgee ab bahut sataane lagee hai.!!@Do din kee muhabbat riston pe bhaari padti.!Hojaye muhabbat to duniyan fir begani lagti.!!@Ulfat mein har shqas deewana ho jaata.!Jaaye jis aur bhi mehboob ko hi paata.!!@Kayun meri haalat par tum sab muskurate ho.!Ho jayegi jab tumko dekhenge kaise hanste ho.!!

“लम्हें”


1]Kishtee doobati unki jo bin sahil”Sagar”tairne ki himaqat karte.!
Muhabbat kaamyaab unhi ki jo Mehboob paane ki himat karte.!!

2]Ye wazood qaayam hai tere wazood se Sanam.!
Warna tere milne se pahale Anjaan hi firte the.!!

3]Wo Insaan hi kya jo kabhi koyi Galti na kare.!
Wo moti hi kya jo kachare mein na Chamke.!!

4]Namumqin ko Mumqin bhala karun kaise.!
Tujhe bhulane mein Umar guzar gayi meri.!!

5]Sazde mein aapke qayamat bhee jhuk gayi.!

Mehboob aap kee Dua har ek qabool huyi.!!

Humein bhualane mein aap qamyaab huye.!

Aur Hum yaad mein aap ki zaar-zaar huye.!!

6]Dil mein Utar gaye ho Zindgi mein bhi aa jaao.!

In wiran rahon mein nagama wafa ka gaa jaao.!!

7]Mana meri aankhon mein tera hi hai ghar basera.!

Iska matlab ye nahin Saraye samjh aajaye koyi bhi.!!

8]Besabri se hawaon ka rehta hai intzaar har pal mujhe.!

Inhi sang bahati teri khushboo se guftgoo ho jaati hai.!!

9]Kon kehata hai aap hum se badi door ho.!

Dil mein dekh lo ghar wahin hai humara.!!

10]Raha mein khadi har deewar kharab nahin hoti.!

Kabhi yahi deewarein milne ka sahara ho jaati.!!

11)Apne larjate honthon se do ghoont to pee lene do.!

Bahakati aankhon ko kuch aur madhosh hone do.!!

12)Jaan se pyaari teri kajrari aankhein,

Jahaan se nyaari hain teri aankhein.!
In aankhon mein ho jiwan ka basera,
Ho aabad jise dekhein teri aankhein.!!

13}Kyun pyaar se dekha karo har shai ko.!

Deewana banaati ho apna har shai ko.!!

14)Maine kadam-kadam par teri chahat kee.!

Tune phir bhi na mujh se muhabbat kee.!!

Main har gali chourahe intzar karta raha.!

Tune kabhi na meri hasratein poori kee.!!

15)Wakeef na the teri nazar-e-teer se hum.!

Yunhi tujhe dekha aur pyaar kar baithe.!!

16)Jo takrayein Sahil se Leron ki rawaani maloom ho.!

Jo kare na Muhabbat use Jawaani kya maloom ho.!!

17)Bahri jawani mein na mout ka intzaar kar.!

Abhi to waqt hai Lutaf utha aur pyaar kar.!!

18)Wo khusnaseeb hai jis ko tera pyaar mile.!

Kare na nafrat wo jise tere jaisa yaar mile.!!

19)Zindgi ki raha mein koyi to humsafar chahiye.!

Jo bitha le palko.n par aisa humsafar chahiye.!!

20)Sanson par bandhi zanzeerein todna hai aasaan.!

Muhabbat ko dil se bhula pana nahin hai aasaan.!!

21)Kisi ke intzaar mein jeena muqddar waalon ko naseeb hota hai.!

Nahin milti khushi milan mein zustzoo ka maza hi aur hota hai.!!

22)Mere mehboob teri galiyon mein aaj phir wo baat hogi.!

Hogi chat par aur nigahon se niagahon ki mulaqat hogi.!!

23)Yun bin bulaaye Chat par na aaya karo.!

Koyi Eid mana lega Ramzan ka Chaand samjh.!!

24)Ulfat ka diya Aandhiyon se na bhujhega.!

Jalega jab talk Mehbbob ka saath milega.!!

25)Teri nigaahon mein hum Dil chor hee sahee.!

Kya karein dekh haseen husn raha nahin gaya.!!

26)Dil un se baat  karne ko kyun karta hai.!

Kahin bimar to nahin hua unhein dekh kar.!!

27)Jo baat tujh mein hai kisi aur mein nahin.!

Ye teri muhabbat hai jo is qabil huye hum.!!

28)Qatal hua mere dil ka par kahin dard nahin mujh ko.!

Husn itna haseen tha kayi baar marne ko jee kiya.!!

29)Falaq par Chaand-Sitaare jab talk rahein Aabaad.!
Jiye tab talq aur Poori ho Aapki har Faryaad.!!

30)Jise qabool kare use aur kisi shayi ki nahin zarurat.!
Tere Phool nekardi hai poori zindgi ki sari zarurat.!!

31)Phoolon se humne ab aashiqi karni chod di.!

Dekha tujhko jab se kaliyan dekhni chod di.!!

32)Tujh sang dil laga jeena saaekh liya.!
Door huyi to yaara peena seekh liya.!!

33)Mere Honthon par hansee hai sirf dikhane ke liye.!

Dua karta hun Khud se tera har Gum mile mujhko.!!

34)Barsati baarish mein dil masos kar reh gaya.!

Hasartein bahut thi par zamaane ne rok liya.!!

35)Khuda kare koyi aisa bhi waqt aaye,

Kaid karun bahon mein muskurati rahe.!

Labon se jaam pilaa madhosh kare,

Daayare bahon ke kasein sharmati rahe.!!

36)Raha ki Dhool samjh na thukra humein.!

Bahut chahte hain dede mouka humein.!!

37)Kasam hai humein tere husn-e-adaaon kee.!

Ek din Doli mein bitha le jayeinge ghar apne.!!

38)Ek hasarat si dil mein liye baithe hain.!

Doli mein unhein apne ghar le aayeinge.!!

39)Mere Mehboob meri bahon mein sama ja.!

Main koyi gair nahin hun seene se laga ja.!!

Kahin aisa na ho waqt guzar jaaye aashiqana.!

Dil ki dil mein rahe aa jaye zindgi ka parwana.!!

40)Reshmi jhulfo.n mein zindgi basar karne ko jee chahat hai.!

Ye Umar to kya har tujhi se Ishq karne ko jee chahata hai.!!

41)Wakif hain teri wafa aur teri muhabbat se hum.!

Jaane kyun tujhi ko chahane ko jee chahata hai.!!

42)Aaj shaam tujhe tere ghar ki chat par beparda kya dekh liya.!

Ab to Subaha-Shaam teri gali se guzarne ko jee chahata hai.!!

43)Mere geeton mein hai tere hi khushboo.!

Meri Shayari hai Mohtaaj tere husn kee.!!

Teri zustzoo mein ho likhi hain gazalein.!

Bata gar tu na mili to jiyunga main kaise.!!

“लम्हें”


1]Gar Ishq kadam-kadam par Haar maan leta.!
Parwaan kahaan Shamma ke karib ho aata.!!

2]Choti choti batein hi bahut badi ho jaati hain.!
Insaani dil pe kabhi-kabhi chot kar jaati hain.!!

3]Koyi to hogi Majboori Yun koyi Bewafa nahin hota.!
Wafa karne waala Insaan hai wo Khuda nahin hota.!!

4]Wo Waqt kabhi na guzara jab tera khayaal na aaya.!
Mere Mehboob aankhon se hata na kabhi tera saya.!!

6]Nishaani muhabbat ki sambhal kar rakhna.!

Kabhi zarurat pade dekh yaad kar parkhna.!!

7]Mahakate phoolon ko sarahne se door na karna.!

Mehboob ka nazaraana samjh kareeb hi rakhna.!!

Tujh ko ho aaye jo yaad saath guzare lamhon ka.!

Takiye ko baahon mein bhar seene se laga lena.!!

8]Muhabbat Pak-Saaf ho to Har Rog ho jaaye kafoor.!

Ishq se labrej Jism ko Dawa ki zarurat na Dua ki.!!

9]Dulhan ka Joda pahan Ishq ki raftaar ko rok sakte ho.!

Doli mein saja ghar lane Ishq ko majboor kar sakte ho.!!

10]Tere yaaron ki Zubaan tere naam se pahale mera naam aaya.!
Mahfil saji bhi na tha tere jalwon se pahale mera naam aaya.!!

“लम्हें”


1]Nahin jaanana  kuch  nahin poochana kuch.!
Bus yunhi pyaar karte raho hum hain khush.!!

2]Nahin jaanana kuch nahin poochana kuch.!
Bus yunhi pyaar karte raho hum hain khush.!!

3]Pahalee Mulaqat mein hi Gar Dil khol doge apna.!

Baad mein kaise Khud ko bachaoge Ishq hone se.!!

4]Raat gay baat gayi,
Har pal hai Zindgee ka Kimati.!
Jo Guzar gaya use bhulna behtar,
Jo samane hain usmein Jina Behtar.!!

5]Muhabbat ka Asar hai dheere-dheere chadega.!

Pathar pe Pisi Hina ka rang hole-hole chadega.!!

6]Muhabbat mein zarurat nahin teekhe bolon kee.!

Ishq kee Tabeer hai Muhabbat ke Asoolon mein.!!

7]Waakif hain tujh se aur tere wadon se hum.!

Jaane kyun phir bhi Chaah karte hain hum.!!

“लम्हें”


 

1.Tere Hussan Ke Aage Mehtaab Kuch Nahin…!
Nazaro Me Sama Nahin Mumaj Kuch Nahin…!!
2.Bhout kuch ki chaah nhi muz ko jindgi,
Jane kyu satati phir bhi muz ko jindgi,
Khuda tuzse chand tare zmi asam nhi,
Ek phone number hee to maanga hai,
3.Tum milo na milo dilki lagi kam na hogi,
Jinda rahe na rahe chaht kam na hogi,
4.Ab to aaja deed karaja khade hain raho me gunahgar ki tarha,
Nabaz ruj rhi hai sans tham rhi hai jan jane ko ha chehra dikhaja,
5.Dil ki gali se guzre zanaza mout na tb koyi gum,
Kon jane jate jate mahboob se mulaqat ho jaye,
1.Dil dhadkne ka bhana dhundta hai,
Kisi pe marne ka tarana dhundta hai,
Reshmi ztlfo ki khta hai ya kuch aur,
Tuze poojne ka bhana dhundta hai,
2.Kese rang badlti duniya jane anjane,
Kadam kadam dokhe deti insani jane,
Koyi na smza koyi na janega hota hai kyo,
Dolat deti tn ka sukh mann ka hai rishto me,
Paisa zarurt hai sabkuch nhi koyi mane na mane,
3.Kaise kahe ki chot khaye huye hain,
Kisi ki bewafai ka pyaar paye huye hain,
Jinke liye sir par shehra bandhne ki sochte thy,
Wo kisi gair ki sez sajaye huye hain,
4.Maine iq phool se muhabbt ki thi mali se puche bina,
Kiske gale lagega kiske kadmo pdega ye soche bina,
5.Nashe di band botle kadi te khul jaya karo,
Aashiqan nu ji bharke pilaya karo,
6.Wo khushnaseeb hai jisko tu pyaar kare,
Jise chahe beshumar uspar eatbaar kare,
Hum hain ab kinara ab bhula dena hume
Dua Khuda se yahi tumhe kamyaab kare,
7.Pahli nazar ka pyaar hai,
Sir chad kar bolega,
Wo milne na aaye to,
Tanki pe chad kar dolega,
Izhar karne ki ada hai,
Iqrar karwa ke hi utrega,
8.Iq adda se dil lete hain hussan wale,
Qatal bhi ho aur qatil na pakda jayein,
9.Dil mera lene se pahle sharte pyaar ki rakhi,
Jaan deni na hogi tere jahan se jane ke bad,
10.Socha tha ek din eysa bhi hoga,
Mere hatho me tera hath hoga,
Falaq ke sitare rashaq karenge,
Jab Mehtaab tu mere sath hoga,
11.Kisi ek ke liye jhan chodna hai qudrat ke khilaf wada khilafi,
Mana kahna asaan hai par is jiwan pe bhoutero ka haq hai,
12.Zindgi bharka ho sath aao kasam lele,
Markar bhi na ho judda ye dua kar le,
Khuda milta nhin dhunde sabko yhaan,
Rubaru wahi wafase jo kre pak ibaadt,
13.Jo pyaar tumne muzko diya tha wo pyaar lota rha hun,
Teri majboori samz teri duniya se door mai ja rha hun,
14.Main janta hu tu gair hai magar phir bhi,
Jane kyu is dil ko tera itnzar aaj bhi hai,
Mere khwabo ki khoyi huai tasweer hai,
Meri nazar me tera deedaar aaj bhi hai,
15.Kaise ukhade ukhadese mere sarkar nazar aate hain,
Gusse me to wo aur bhi gul-o-gulzar nazar aate hain,
16.Markar Gar Zindgi Dobara Milti,
Maut Ka Kise Phir Khoff Hota,
Muhabbat Karne Wale Bewafa Hote,
Markar Bhi Muhabbat Kana Yaqin Hota
17.Choti si Zindgi hai,
Jaise taise guzar jayegi,
Sath hote to acha tha,
Ab to bus uhi katt jayegi,
18.Mere din raat mahaqe tere khayalon me sanam,
Abto aja milne ko dil betab hua jata hai sanam,
19.Dil ki gali se bach guzarana,
Aashiqo ke mele me sambhlana,
Bahut mushqil se aati hai jawani,
Dil dene lene se pahle soch lena,
Ho gyi muhabbt to phir na kahna,
“Sajan”bin kese jina kese marna,
20.Kash koyi aakar btaye unka dil-e-haal,
Sunkar slamati unki duniya se ja paye,
21.Teri raaho me khade hain har kayda kanoon todkar,
Qayamat ati hai to aaye jayenfe ab tera deedar karke,
22.Ye muraado bhari raat hai,
Aur phir mehboob sath hai,
Us par mousam bhi suhaana,
Dar staye bhool naho jaye,
Bach bach kar chalna hoga,
Beshaq Khuda bhi sath hai,
23..Aa sula tuze bachpan ki yaad kara du,
Palna bna khudko tuze lori me suna du,
Nagma-e-wafa mera dorahega zmana,
Jab jhan hoga muhabbt-e-wafa fasana,
24.Kitni pyaari hain sanam ki madmast ankhe,
Madhosh karti hain jhaan ko kajrari ankhe,
Inme dube jo paye dono jhaan ki khushiya,
Kash humdum banati hume sajan ki ankhe,
25.Is terah tume toda mera dil,
Ke jeeye to rota hi rah jaye,
Aur mare to pani na mange,
26.Door dilke kisi kone me ik chubhansi rahti hai,
Subha Suraj ki kirne jab yaad teri le aati hain,
Din to guzar jata hai kisi tarha ghumte tahlte,
Shaam hote hote koyi kasaq dilko tadpati hai,
27.Door dilke kisi kone me ik chubhansi rahti hai,
Subha Suraj ki kirne jab yaad teri le aati hain,
Din to guzar jata hai kisi tarha ghumte tahlte,
Shaam hote hote koyi kasaq dilko tadpati hai,
27.Kyu teri pooja kari
Kyu tujhe pyar kiya
Kash tujhse na dil lagaya hota
Pather mehboob banaya hota…
28.Khwaish thi dil ki gali-e-yaar dum nikle,
Maut aayi to do gaz zameen na mil saki,
Aankhe deedar-e-yaar tarsahti reh gayi,
Saanse thammi par aah bhi na nikal saki…
29.Ishq ka nasha har kisi ko hayaat-e-safar me ho jata hai,
Samane joho hussan-e-maikhana kaise bacha ja Sakta hai,
30.Ek muhabbat hi kaam nahin karne ke liye,
Sitaro se bhi aage hai jhaan jeene ke liye,
Nasha karo zindgi se pyaar karne ka,
Ek sharab hi kafi nahin peene ke liye,
31.Is teraha tume toda mera dil,
Ke jeeye to rota hi rahe jaaye,
Aur mare to pani bhi Na maange,
32.Aisa nhi k tu hi ghayal hai teer-e-ishq se,
Jo aag udhar hai wo aag is dil ko bhi lagi hai,
Tujhe chahne ki tujhe poojne ki, tujh se nibhane ki,
Tere bin sans bhi rukne ki zidd karne lagi hai,
33.Baharo ke sapne dekhte dekhte,
Jiwan ki haqeeat se rubru naho ske,
Bhool kar apna wazud-e-dum,
Pathar se muhabbt kar baithy,
34.Zami puchti hai aaj sabse unka pta,
Jo sitaro ko aksar ulzaye rahte hain,
Roshani dete to hain jahaan walo ko,
Par ankhe hum se ladaye rahte hain,
35.Tere roop ka deewana sara jahaan,
Tere aage piche ghume hai zamana,
Mana tu sare jagse haseen hai janu,
Par mere pas tere siwa btaa kon hai,
36.Khawab bn palko me smaye,
Haqiqat bn dil me utar jaao,
Tah umar tuze me dekh skun,
Jiwam me mere yun bus jaao,
37.Dil hai maanta nahin,
Tera ghar jaant nahin,
Phir bhi teri hi gali ke,
Chaqar kat ta hardum,,
Bin soche samzhe ki tu,,
Bhi ab pehchanta nahin,
38.Muqabala hum se na tum kKaro apani wafa-e-mohabbat ka,
Janam-o-janam mohabbat me jaan deneki kasam khai hai,
39.Door dilke kisi kone me ik chubhansi rahti hai,
Subha Suraj ki kirne jab yaad teri le aati hain,
Din to guzar jata hai kisi tarha ghumte tahlte,
Shaam hote hote koyi kasaq dilko tadpati hai,
40.Bahut chaha tha tuze hum ne apna samz kar,
Tum ne thukra diya hume ek pathar samz kar,

“लम्हें”


 

1.Dil dhadkne ka bhana dhundta hai,
Kisi pe marne ka tarana dhundta hai,
Reshmi zulfo ki khta hai ya kuch aur,
Tuze poojne ka bhana dhundta hai,
2.Kese rang badlti duniya jane anjane,
Kadam kadam dokhe deti insani jane,
Koyi na smza koyi na janega hota hai kyo,
Dolat deti tn ka sukh mann ka hai rishto me,
Paisa zarurt hai sabkuch nhi koyi mane na mane,
3.Kaise kahe ki chot khaye huye hain,
Kisi ki bewafai ka pyaar paye huye hain,
Jinke liye sir par shehra bandhne ki sochte thy,
Wo kisi gair ki sez sajaye huye hain,
4.Maine iq phool se muhabbt ki thi mali se puche bina,
Kiske gale lagega kiske kadmo pdega ye soche bina,
5.Nashe di band botle kadi te khul jaya karo,
Aashiqan nu ji bharke pilaya karo,
6.Wo khushnaseeb hai jisko tu pyaar kare,
Jise chahe beshumar uspar eatbaar kare,
Hum hain ab kinara ab bhula dena hume
Dua Khuda se yahi tumhe kamyaab kare,
7.Pahli nazar ka pyaar hai,
Sir chad kar bolega,
Wo milne na aaye to,
Tanki pe chad kar dolega,
Izhar karne ki ada hai,
Iqrar karwa ke hi utrega,
8.Iq adda se dil lete hain hussan wale,
Qatal bhi ho aur qatil na pakda jayein,
9.Dil mera lene se pahle sharte pyaar ki rakhi,
Jaan deni na hogi tere jahan se jane ke bad,
10.Socha tha ek din eysa bhi hoga,
Mere hatho me tera hath hoga,
Falaq ke sitare rashaq karenge,
Jab Mehtaab tu mere sath hoga,
11.Kisi ek ke liye jhan chodna hai qudrat ke khilaf wada khilafi,
Mana kahna asaan hai par is jiwan pe bhoutero ka haq hai,
12.Zindgi bharka ho sath aao kasam lele,
Markar bhi na ho judda ye dua kar le,
Khuda milta nhin dhunde sabko yhaan,
Rubaru wahi wafase jo kre pak ibaadt,
13.Jo pyaar tumne muzko diya tha wo pyaar lota rha hun,
Teri majboori samz teri duniya se door mai ja rha hun,
14.Main janta hu tu gair hai magar phir bhi,
Jane kyu is dil ko tera itnzar aaj bhi hai,
Mere khwabo ki khoyi huai tasweer hai,
Meri nazar me tera deedaar aaj bhi hai,
15.Kaise ukhade ukhadese mere sarkar nazar aate hain,
Gusse me to wo aur bhi gul-o-gulzar nazar aate hain,
16.Markar Gar Zindgi Dobara Milti,
Maut Ka Kise Phir Khoff Hota,
Muhabbat Karne Wale Bewafa Hote,
Markar Bhi Muhabbat Kana Yaqin Hota
17.Choti si Zindgi hai,
Jaise taise guzar jayegi,
Sath hote to acha tha,
Ab to bus uhi katt jayegi,
18.Mere din raat mahaqe tere khayalon me sanam,
Abto aja milne ko dil betab hua jata hai sanam,
19.Dil ki gali se bach guzarana,
Aashiqo ke mele me sambhlana,
Bahut mushqil se aati hai jawani,
Dil dene lene se pahle soch lena,
Ho gyi muhabbt to phir na kahna,
Sajan“bin kese jina kese marna,
20.Kash koyi aakar btaye unka dil-e-haal,
Sunkar slamati unki duniya se ja paye,
21.Teri raaho me khade hain har kayda kanoon todkar,
Qayamat ati hai to aaye jayenfe ab tera deedar karke,
22.Ye muraado bhari raat hai,
Aur phir mehboob sath hai,
Us par mousam bhi suhaana,
Dar staye bhool naho jaye,
Bach bach kar chalna hoga,
Beshaq Khuda bhi sath hai,
23.Tum milo na milo dilki lagi kam na hogi,
Jinda rahe na rahe chaht kam na hogi,
24.Ab to aaja deed kraja khade hain raho me gunahgar ki tarha,
Nabaz ruj rhi hai sans tham rhi hai jan jane ko ha chehra dikhaja,
25.Dil ki gali se guzre zanaza mout na tb koyi gum,
Kon jane jate jate mahboob se mulaqat ho jaye,

“लम्हें”


1.Zami poochti hai aaj sabse unka pta,

  1. Jo sitaro ko aksar ulzhaaye rahte hain,
    Roshani dete to hain jahaan waalo ko,
    Par aankh hum se ladaaye rahte hain,
    2.Muddat se teri tasweer ko sine se lgaye phirte hain,
    Is aas me ki jaane kis hayat-e-mod mulaqat ho jaye,
    3.Tanhai ke daman me khushi ki bahaar ho,
    Shayad uski aankhon me tera intzaar ho,
    Jis ko pyaar karo to us ko bta jarur dena,
    kya pta use bhi tuzse bepnaah pyaar ho,
    4.Khawab me aakar na sataaya karo,
    Karto ho pyaar to sahi waqt aaya karo,
    Raat ko bhala koyi aane ka waqat hai,
    Din me mil raat ko pas reh jaaya karo,
    Phir dekhe hussan-e-shabab ka dum,
    Pas aao to jane doorse na itraya karo,
    5.Umeed se jayda jo mil jaye to,
    Sambhalna mushqil ho jata hai,
    Jese sagar gagar me na smaye,
    Aur pani bahar chalaq jaata hai,
    6.Jee karta hai tere dar pe jaoo,
    Hal-e-dil apna sunaoo,
    Kabool ho to theek,
    Warna maut mehbooba banaoo,
    7.Rukhse zulfein dhire dhire sarkane lgi,
    Ke jaise chaandni badlo se nikalne lgi,
    Deedar ko sitare kayi phir tadpane lge,
    Rozedar Eid manaane ghar se niklne lge,
    8.Mozo ki rawani sa ye ishq hai pani sa,
    Na kinare ka dar na koyi khof ka manzar,
    Bahe to bahta jaya sath sb apne le jaye,
    Jo duba na isme wo kabhi jiwan na taira,
    9.Dil lena aur sitam karna hussan ki adawat hai,
    Dil dekar muqar jana ye hussan ki banawt hai,
    10.Rukh pe parda jo tumna girate,
    Chahne walo ke dum nikal jate,
    Hoti har jagha duhayi tum hari,
    Ashiqo ke nam warant nikl jate
    11.Meboob mere muze tanha chod tuze kya mila,
    Ki muhabbat beinth ha muzse khushi de kya mila,
    Jo tu apne kabil samzhta muze to sathle chalta,
    Is matlabi magrur jahaanke hawale kar kya mila,
    12.Tuz ko aati hai hum par hansi to aye,
    Hume is adda par bhi pyaar aata hai,
    13.Kisi raatka musafir nahi hun,
    Jo subaha ko chala jaoonga,
    Tuze chaaha hai shiddat se,
    Jaan jaye parna bhulaoonga,
    14. Dil-e-betab teri musqurane ki wajah kya hai,
    Aise tuqar tuqar kar dekhne ki wajah kya hai,
    Kya tuze bahi hua hai pyaar kisi naz neen se,
    Kuch hume bahi btaa ab humari saza kya hai,
    15.Choti choti nadiyan milkar ek bada dariya banti hain,
    Jese choti choti mulaqate pyaar ka jariya banti hain,
    16.Bus yahi aarzoo dil ki dil me hai,
    Aankh band hone se pahle tuze dekhun,
    Bewafa ho tu kaisa dikhta hai.
    Pehale sa sundar ya aur hasseen,
    17.Tere chehre ka noor benzeer hai,
    Jese asman se utari tasweer hai,
    Jo koyi dekhe deewana ban jaye,
    Na janekis muqdar ki taqdeer hai,
    18.Bulbul ke shoukh nagme,
    Chaman me gunjte hain,
    Tere aane se jan-e-jhan,
    Phool sare mahakte hain,
    Jindgi to hoti hai wahaan,
    Jis jagha tere kadam pde,
    19.Mere din raat mahakte teri khushboo se,
    Bta duze jhaan ki bhala mai sochu kaise,
    Bin tere jine ki tamana kis kafir ne ki hai,
    Khuda ki ibadat kar dua me manga tuzko,
    20.Zaruri nhin hum tumhe chahein to tum bhi hum par phanaha ho,
    Muhabbat me jo ek mitt jaye muhabbat tab bhi misal hoti hai,
    21.Bhool sakta hun kaise wo pehli mulaqat,
    Jab mahtab benqab ho chatt pe aya tha,
    Surakh lbose muze dekh musquraya tha,
    Phir jane kya soch khudse shrmaya tha,
    22.Meri chahto se na poocho tumhe chahe kis qaddar,
    Kisi Mandir ki murat se kum smz nhin pooja humne,
    23.Bde bewafa hote hain hussan wale,
    Pahle aag lagayein phir ada dikhayein,
    Dil lena aur dard dena inki hai fitrt,
    Musqura ke gum udayein ye hussan wale,
    24.Muhabbat kisi taraazo me toli nhinja sakti,
    Kisko kitana pyaar baazi lgayi nhinja sakti,
    Ye wo pak ibbadat jiski koyi manzil hi nhin,
    Khuda ke deed ke siwaa koyi chahat hi nhin,
    25.Tere kadumo me hai zanat-e-jhaan ey dil,
    Zindgi to wahi jo busar tere sath hoti hai,

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