Lamhein


तेरी गली आना अब छोड़ दिया
ये समझ ना कभी अपनी थी ना होगी…
गैरों से दोस्ती मुझे मिटाने खातिर
अनजान शहर मेरी आखिर शाम होगी…

अपनी आँखों का काजल बना कैद करलो मुझे
इससे पहले के कोई और कोर्ट आर्डर न ले आए

सुबह की लाली हो या शाम की सुरमाई
मीर की ग़ज़ल हो या खय्याम की रुबाई…
जो हो”सागर”की जान हो मगर हरजाई
इस हुस्न आगे तो चांदनी भी है शरमाई…

अपनों को हरा किसने चैन पाया”सागर”
इश्क़ करने वाले बस प्यार करना जानते

जवानी में यारो जब जब चढ़े
इश्क़-ए-ज़नून ll
पल्ट घर के कांच की खिड़कियाँ
भी देख लेना ll

न हिन्दू हूँ मैं न मुसलमान
उससे पहले इक इंसान हूँ
ईश्वर ​मेरा अल्लाह भी मेरा
सबकी मैं दिल ओ जान हूँ

इंस्टा फेसबुक या कहीं और
तुझे फॉलो कर क्या करना
अरे पागल दिल में कैद हो
फिर नेट का वेट क्यों करना

मेरे मुस्कुराने की वजह तुम हो
मेरी मुहब्बत की वफ़ा तुम हो…
जो भी हो पर बहुत खूब तुम हो
मेरे जीने की वजह ही तुम हो…
Sharbto aankhon se jo yun pilaoge,
Khuda kasam bemaut maar jaoge…

Ik ishara hi kafi “Sagar” uski majburi smjhne ke liye,
Muhabbt bhra dil to nazron ki zuban smjhta…

क्यों टूकूड टूकूड देखती हो
छूप कर मेरी प्रोफाइल को,
कहीं हज़ूर का दिल बेकाबू हो
मुझ पर तो नहीं आ रहा…

ना कर मेरी तन्हाई से मुहब्बत
कहीं खुद भी तन्हा न हो जाओ…

ए ज़िन्दगी तुझ पर
क्यूँकर यक़ीन कर लूँ,
बेवफा थी बेवफा है
और बेवफा ही रहेगी…

जब रात पहर सब सौ जाएं
तन्हाई रुक रुक तड़पाने लगे…
तुम मुझसे मिलने आ जाना
सांसों की मेरी उम्र बड़ा जाना…

चल तेरी बज़्म से चलते हैं,
याद आएं तो न रोना कभी…

मैंने चाहा है तुझको मुरादों की तरह यारा,
मगर तुझको मिल गया जो तेरा अपना था…

वो कहते हम से कभी
मेरी गली भी आया करो,
कैसे समझाए नादाँ को
उसके क़ाबिल नहीं हम…

अय्याश भी हम बदमाश भी हम,
वो तो दूध के धुले बैठे…
प्यार का दावा हमसे करें “सागर”,
मगर करीब और के बैठे…

अपनी मुहब्बत की ईमारत इतनी बुलंद कर,
के दूसरा कोई और चाहा कर भी छु ना सके…

मेरी मुहब्बत को सर ए बाजार कर
निलाम कर दिया…
चाहा तुझे मगर और ने अपना नाम
मेरे नाम कर दिया…

ए हुस्न अपनी खामोशियों से
इतना बेकरार न कर,
के जीना चाहूँ तो जी ही न पाऊं
और मर भी न सकूँ…

किसी के प्यार में मरना मुश्किल नहीं,
जो जिए प्यार खातिर वही क़ाबिल है…

थोड़ा इतराती थोड़ा बलखाती
ज्यादा बोलो तो डंडा दिखाती…
क्या खूब हैं जी हज़ूर के सितम
हर बॉल छक्का चौका लगाती…

कितनी आसानी से कह दिया तुम बड़े वो हो,
दर्द ए दिल जान लेते गर ख्यालात बदल जाते…

क्या खूब है तेरे लबों की लाली
तेरी सूरत और सीरत मतवाली…

जो देखे फिर क्यूँ न हो दीवाना
सूखे गुलशन हो जाये हरयाली…

बहुत खूब हैं ये मतवाली आँखें
शराबी आँखें कजरारी आँखें…
जिसने देखा वो डूब के रह गया
उफ़ कम्बक्ख्त मवाली आंखें…

ए हुस्न ज़रा शतमाने को
अदा तो सीख लेती,
यूँ भी तेरी नज़र ए इनायत ने
कई क़त्ल किये…

यादों में बिताये लम्हों को
संजो कर रखना…
जाने ज़िन्दगी के किस मोड़
फिर मिल जाएं…

दिल तो इक बार टुटा था,
फिर तो कोई टुकड़ा इधर गिरा कोई किधर…

भंवरा हूँ नादाँ रंगीं गलियों में
घूमने वाला मैंने माना मगर,
आवारा नहीं किसी भी शाख
बैठ कली को फूल बना दूंगा…

कितने मेन्टल हो यारो
तितलियों को कुछ भी लिखें वाह वाह कह देते हो…
कभी ये भी सोचा करो
इतना सर चढ़ा भी क्यूँ खली गिलास रह जाते हो…

ये तख़्त ओ ताज ये महलों की दूनियाँ
सब छोड़ आया हूँ,
ए खुदा अब तो बता किस गली मिलेगी
ख्वाबों की दूनियाँ…

हद है जी आज सबकी सब
बिना बताये सौ गई,
ज़रा गुड नाईट तो बोलती
जाओ मच्छर काटें…

ए रब्ब मैंने सुना बहुत कुछ तेरे बारे में
मगर कभी देखा नहीं…
माँ ने मुझे चलना आगे बढ़ना दिखाया
उसी रूप तुझे देखा है…

About Dilkash Shayari

All Copyrights Are Reserved.(Under Copyright Act) Please Do Not Copy Without My Permission.

Posted on January 30, 2022, in Shayari Khumar -e- Ishq. Bookmark the permalink. Leave a comment.

Comments / आपके विचार ही हमारे लिखने का पैमाना हैं.....ज़रूर दीजिये...

Please log in using one of these methods to post your comment:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: