Lamhein


उसे भाभी कहूं
तो वो रोकती
Ma’am बोलूं तब
भी टोकती
Gf कह नहीं सकते
पराई अमानत जो यारो…

यूँ छुप छुप तुम जो रात छत पर मिलते हो
कसम से पड़ोसियों में बहुत खटकते हो…
उनकी आँखों का निशाना बन गए हैं हम
तुम्हारे माँ बाप क्या लड़के सभी ढूंढते हैं…

मुझसे बेहतर अगर मिलता है तो
कल की जाती अभी चली जा😤
मगर सुनो !!दो बच्चों के साथ
लौट कर न आना🌹 धर्मशाला नहीं😜

ओये ईद का बहाना कर
हर किसी के करीब जा गले मिल रही…
और अपनी सखियों को
कोरोना डर दिखा हम से दूर रख रही…

दो मिनट की ख़ुशी खातिर
इक अबला का जीवन बर्बाद किया…
जैसी छाती से दूध है पिया
वैसी छाती क्यूँ नियत खराब किया…

नाक साफ करना आता नहीं
चली है इश्क़ करने…
पहले रोटी बनाना तो सीख
ज़माटो से मंगाएगी…

नाराज़ नहीं हूँ तुझसे ज़िन्दगी
बस थोड़ा सा खफा हूँ…
बहुत मुहब्बत की तुझसे मैंने
बेवफाई ज़रूर करेगी…

ओये जमेटो बेस्ड छोरियो गैस खतम था
फिर भी जंगल से लकडिया ला रोटी पकाई💕
पुलिस ने ठौर गोड़े तोड़ डाले लोकडॉन में
जैसा बना खालो क्या क्या कराओगी और😩
चाय बनी हुई है
जल्दी जल्दी आ जाओ ठंडी होने से पहले💕
ओये भुखियो
साथ में एक एक बिस्कुट पैकेट लेती आना😊

जवानी में यारो जब जब चढ़े
इश्क़-ए-ज़नून…
पल्ट घर के कांच की खिड़कियाँ
भी देख लेना…

इक तेरे सिवा ज़िन्दगी का
तस्सव्वुर नहीं,
जब दिल चाहे सीने में देख
दीदार कर लेते…

आज शाम छत पर ना आना
बड़ी खूबसूरत हो ऊपर से सजना संवरना…
ईद मुबारक ईद मुबारक कह
शोहदे दीवानें ईद मानलें तुझे चाँद समझ…

यूँ सज्ज संवर छत पर जो आई
सारा मोहल्ला कह उठा…
ईद मुबारक हो ईद मुबारक हो
लो चाँद निकल आया…

बड़ा लुत्फ़ था जब
होली और ईद पर गले मिलते थे…
बिच में कम्बक्ख्त
ये”कोरोना”करो न करता आ गया…

तुम चाय की तरह हो
सुबह उठते ही याद आती हो…
वो नरम तकिया हो
हर रात बाँहों को सहलाती हो…

सब झूठ है और झूठे हैं वादे हक़्क़ीक़त और है,
हमनें देखा मुहब्बत को गैर बाँहों में दम तोड़ते…

रिश्ते बनाना आसां होता “सागर”,
जो निभाए वही अपना हो “सागर”…

उफ़ ये कम्बख्त बारिश उसपर तेरा भीगा बदन,
नशा लब का बढ़ रहा बाहें बेताब बाँहों लेने को…

चाँद को जिस जिस ने ठुकराया है
उसने सकूँ फिर कहाँ और पाया है…
अपना अपना मुक़द्दर अपनी सोच
अक्सर लोगों ने दाग देख पाया है…

वो कहते लड़कों को फॉलो नहीं करते
क्या करें बोलो भीड़ इकट्ठा बस…
कम्बख्त फॉलो करो तो न लाइक देते
हमारी लाइन पर लाइन मारते रहते…

दिल ए हसरत निगाहों से ही क़बूल फरमाओ हज़ूर,
जानते ज़माना कभी मुहब्बत का मुस्तबिल न हुआ…

कोई ऐसी भी जवानी ना गुज़री
जिस ने जाम ए उल्फत ना पिया…
मदहोश हो लड़खड़ाई ना कभी
तस्वीर का तस्सव्वुर ही ना किया…

सब सोहनी सोचता हूँ किस किस को
क्या क्या बनाऊं…
किसी को साली किसी को आंटी और
किसे बीवी बनाऊं…

अपनी आँखों का काजल
बना कैद करलो मुझे,
इससे पहले के कोई और
कोर्ट आर्डर न ले आए..

शिद्दत से चाहा उसे और सामने
इक़रार भी किया,
उसने इक़रार भी किया फिर बोली
मजाक था यार…

तुझे इतने लाइक्स दिए के
मेरा नाम ही लिखे हो गया,
सब लाइक लाइक लिखती
किस किस को मना करूँ…

” कुछ गिला तुम्हें भी होगा
शिकायतें इधर भी कम नहीं हैं,
कोई वादा हमनें भी तोडा
हर वादा तुमनें भी ना निभाया…

फिर भी रातों जगी हो तुम
तस्वीर सीने से लगाए हमारी,
क्या बात क्या राज़ बताओ
एक हमें गुनहगार ना बनाओ…”

कह दो शोखियों से शरारत न करें,
रात का जगा ज़रा तो चैन लेने दो…

जुम्मे का वादा था
आज तो मिलने छत पर आना ज़रूर,
ईद को निकलोगे
गली में क़तारीं दीदार कहाँ करने देंगी…

उफ़ यूँ इक़रार ए मुहब्बत क्यूँ कर दिया,
भरी महफ़िल में खुदको रुस्वा कर दिया…

आँखों के काजल में सिमटने दो
बेवजह “सागर” को गुनाह करने दो…
ज़िद्दी आवारा पागल है ये दिल
दिल को प्यार “सागर ” से करने दो…

ए वक़्त ठहर ज़रा
अभी तो मेहबूब आया है,
दो पल ही बैठे और
तूने भी पहरा लगाया है…

छुप छुप क्या चेक करते हमारी प्रोफाइल को दीवानों,
गर्ल फ्रेंड पर ज़रा यक़ीन नही चले हमें आँखें दीखाने…

क्यों सब पीछे पड़ी हो
पटानी तो एक😜
अरे बाबा सबको पिज़ा
नहीं खिला सकते👋

तो आजा देरी किस बात की
जान ए जं हद से गुज़र जाएं,
मौसम भी है आशिक़ाना क्यूँ
न बिन फेरे हम तेरे हो जाएं…

किस किस को पटाऊँ
किस मिस को मैं मिस करू…
सब एक से बढ़ के एक
किस मिस को मिसेज़ बनाऊं…

इक मुसाफिर हूँ मैं भी यहाँ यारो,
जाने कब सफर खत्म हो जाएगा…

अपनी जुल्फों की छांव तले ज़िन्दगी बसर कर लेने दो,
कसम से थक गए हैं उम्र की पत्थरीली राहें चलते चलते…

फुदक फुदक यूँ न चला कर
कद्दी नाम ही मेंढकी पड़ जायें…
कहीं लोग कहने लगें मेंढकी
पे दिल आया हूर से क्या लेना..

शाम का समाँ चाय की चुसकियाँ
और उनका ख्याल,
तन्हाई का अहसास करता उनका
दिया हुआ रुमाल…

इन जुल्फों की लट गर इतनी ज़िद्दी
के गालों को छूने नहीं देती,
कसम खुदा की फिर देख इन होंठों
को चूम कर दम लेंगे अब…

आईने के आगे खड़ी हो जब
वो काजल लगती है…
लगता है मुझे नज़र लगने से
दुनियां से बचती है…

आ जाओ बन मेरी रजाई❤️
कसम से बहुत सर्दी है😩😩

वो अफसाना जो दिल को दर्द देता है,
दुनियां को अलविदा कह भूलना होगा…

न हिन्दू हूँ मैं न मुसलमान
उससे पहले इक इंसान हूँ…
ईश्वर ​मेरा अल्लाह भी मेरा
सबकी मैं दिल ओ जान हूँ…

एक तो आती नहीं
आती तो कितना पकाती हो…
कसम खुदा की
बेमौत ही मार जाती हो…

जब भी मिलती हो रुख पर
हिज़ाब तान लेती हो,
शुक्र खुदा का चाहने वाले को
पहचान तो लेती हो…

वो और होंगे जिन्हें हसीनो का गिरा रुमाल उठाने की आदत,
यहाँ तो कभी गिरा हुआ नोट न उठायें…

अभी तो दूध के दांत भी न टूटे
इश्क़ कैसे करलें,
मम्मी से दूध पीते तेरे से कॉफ़ी
भला कैसे पी लें…

तुझ से मुहब्बत कितनी तुझे एहसास करा जाएंगे,
रख Wallet में तेरा फोटो दुनियां से चले जाएंगे…

ए दिल रूठने मनाने का ज़रा वक़्त तो निकाल,
सुना है मुहब्बत में पड़ तेरे पास वक़्त ही न रहा…

शाम ए गम और तन्हा रातें जीने न देंगी,
पियें कितना भी मगर उसे भूलने न देंगी…

उफ़ यूँ इक़रार ए मुहब्बत क्यूँ कर दिया,
भरी महफ़िल में खुदको रुस्वा कर लिया…

मेरे जीते जी मेरे हो न पाए
हो जाये गर यक़ीन मुझ पर तो…
अश्क़ बहाना न बेशक मगर
मेरी मज़ार पर मिलने आ जाना…

वो सब सत युग की बातें थी,
अब वफ़ा बिस्तर पे दम तोड़ती…

अब मुझ से मिलने की ख़ाहिश ना रख,
तुझे वादा निभाना न आता मुझे तोडना…

तुम अपनी निगेहबानी मुझे देदो,
दे अपने गम मुझ से ख़ुशी लेलो…

आज फिर इक बेवफा से मुलाकात हो गई,
ज़िन्दगी फिर बेज़ार हो गई…
गरजपरस्त ज़माने में हर और मगरूरियत है,
मुहब्बत फिर बाजार हो गई…

अब के जो मिलेगी इक़रार कर दूंगा
हाँ जो कहेगी फिर हाथ थाम लूंगा…
बड़ा तंग करती है रात ख्वाबों में आ
रातों का कुछ यूँ इंतज़ाम कर लूंगा…

फल्क़ पे पत्थर से निशाना लगाने वालो
ये न भूलो तुम,
जितनी जल्दी जाने में लगी उससे तेज वो
लौट के आएगा…

देखो करते हो जो प्यार तो
किया वादा निभाया करो…
रात जगाना अच्छी बात नहीं
रोज़ रोज़ न तड़पाया करो…

मुहब्बत एक इबादत है
ये नहीं के I Love You कहा
और काम हो गया…

इश्क़ में दिल को बेक़रार किया
क्या खता थी तुझ संग प्यार किया…

न क़बूल था तो मना ही कर देती
क्यों रुस्वा मुझे सर ए बाजार किया…
उफ़ कम्बक्ख्त इतनी हसीं और खोने की बातें,
इक बार मिलो तो सही प्यार भी होगा इक़रार भी…

ना तेरा प्यार हूँ ना तेरा इक़रार हूँ,
फिर बता वफ़ा करूँ तो कैसे करूँ…

इश्क़ फसलों से ही हुआ करता है हज़ूर,
करीब रहकर तो जिस्म का मिलन होता…

इक बार नहीं सौ बार नहीं हर जन्म में प्यार तुझी से करेंगे,
जनता”सागर”तू बेवफा है फिर भी एतबार तुझे पर करेंगे…

तेरी हर दुआ अब क़ामिल हो,
बेशक मेरा नाम न शामिल हो…

रात अँधेरे में मुझसे क्या गज़ब हो गया,
देना था जो फूल उसकी माँ को दे दिया…
पता चला मेरे पापा को तो लाल हो गए,
घर में मेरे He सौतन वाले हाल हो गए…

ना पूछ मुझसे मेरी बेक़रारी का आलम,
जब देखूं आइना आँखों में तुझे पाता हूँ…

तेरी बेवफाई की बातें हैं सब
हर दूजे शक़्श को तूने चाहा है…

तेरी मुहब्बत तुझे मुबारक़ हो
मिले जिसे तूने दिल से चाहा है…

मेरी दीवानगी की हद्द पर न जा सुन ज़रा !
ये ज़िन्दगी तो क्या हर जन्म तेरे नाम किया !!

मौसम के साथ
वो भी बदल गए…
तारीफ उनकी की
वो पागल कह गए…

कोई इरादा ऐसा न करना,
जो न हो मुक़म्मिल तो जी न पाएं…
पाक वफ़ा की चाहा में फिर,
किसी बेवफा से मुलाकात हो जाए…

सोचा था वो Single है
पर वो Mingle निकली…
चल छोड़ “सागर”,
कोई और देखें…

मेरी आँखों में हैं तेरे मेरे प्यार के किस्से,
इन आँखों में ही कभी शाम ढल जाएगी…

ये Offer है या है मजाक
है क़बूल गर तो,
वक़्त बताओ कब आना
दीवाने हैं पागल ज़िद्दी भी…

गोया हम तो पागल जो इंतज़ार करते,
होटल में बैठ काफी पर काफी पीते हैं…
तुम हो की टाइम दे कर भूल जाती हो,
रात बैचैन दिन को बेकरार यूँ करते हो…

काश तू कुंआरी होती
छत पर बाल सूखा रही होती
गुज़रता तेरी गली से मैं
नज़र मैंने भी तुझपे मारी होती…

क्या खता थी ये तो बता
दिल चुरा गैर की क्यूँ हो गयी
हुस्न ओ जमाल की मूरत
काश तू हम पर दिल हारी होती…

नहीं होता तसव्वुर गैर का
आ मिल कोई रास्ता ही सुझा दे
मेरे ख्वाबों की तस्वीर तूही
ए खुदा यही तस्वीर हमारी होती…

यूँ रात भर जगाया न करो
प्यार है तो ख्वाबों में आया न करो..
करवटें बदलते रात गुज़रती
तकिया बन देखो यूँ सताया न करो…

वो और होते जिन्हें मुहब्बत में इंतज़ार पसंद,
यहाँ दिल लेने देने बाद ज़माने से लड़ना पसंद…
वो परवाना क्या जो शम्माँ को चाहे और डरे,
गर मुहब्बत करना आता तो निभाना भी आता…

यूँ जुल्फें खुली छोड़ तूने
क्या गुड नाईट कह दिया,
बाँहों में रात भर जगाया
और गुड मॉर्निंग कर दिया.

जब भी आता है तेरा हाथ मेरे हाथों में,
मेरे मुक़द्दर में और इजाफा हो जाता है…

उफ़ यूँ पलकें झुका ये क्या कुफर कर दिया,
न कहा न हाँ सारी उम्र का गुलाम कर लिया…

इन झुकी पलकों की खता है या मेरी,
जबसे देखा तुझे दिल दीवाना हो गया…

चाय की चुस्कियां हों और तेरा हाथ मेरे हाथ हो
तुम मुझे देखती रहो मैं तुम्हें और वक़्त रुक जाये…

इस दिल को भी खबर तुम्हारे दिल में क्या है,
मगर शर्म ओ हया कुछ ज़ुबाँ से कहने न देती…

आ करीब आ इस हया की चद्दर को उतार दूँ,
करीब खींच कर तुझे अपनी बाहों में सुला लूँ…

मेरे मेहबूब मुझे अपनी पन्हाओं में लेले…
ज़िन्दगी से महरूम हूँ बाँहों में लेले|

Tujhe jine ka shauk
mujhe marne ka
Isiliye teri yaadein
sath liye ja rha hun

तुम वो अधूरे ख्वाब हो
जब जब आते पूरा सा लगते

न छुप छुप देख मेरी प्रोफाइल को,
आ गया मुझ पे तेरा तो पछ्तायेगी…
तड़पेगी जागेगी रात करवटें बदल,
खुदा कसम मेरी नींद भी ले जाएगी…

तुम मानो या न मानो तुम्हारी मर्जी पर
तुम्हें प्यार किया है ज़िन्दगी से बाद कर

ये तेरी शर्बतों आँखें
डूबने को जी चाहता…
होंठों से छलकती मय
पीने को जी चाहता…
बला की खूबसूरत हो
घर लाने को जी चाहता…
दिल में बसा तुझ को
पूजने को जी चाहता…
ए चाँद उतर मेरे आंगन
देखने को जी चाहता…
शायर की ग़ज़ल सी हो
नज़्म कहने को जी चाहता…

यूँ सज धज आजकल रातों को तुम छत पर न आया करो,
बला की खूबसूरत हो कोई नादानी कर बैठेगा चाँद समझ…

About Dilkash Shayari

All Copyrights Are Reserved.(Under Copyright Act) Please Do Not Copy Without My Permission.

Posted on January 30, 2022, in Shayari Khumar -e- Ishq. Bookmark the permalink. Leave a comment.

Comments / आपके विचार ही हमारे लिखने का पैमाना हैं.....ज़रूर दीजिये...

Please log in using one of these methods to post your comment:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: