‘लम्हें’


तेरी सांसों की खुशबु से तेरा पता पहचान लेते.!
जान ए जहाँ कुछ इस तरह तेरा घर तलाश लेते.!!

इश्क़ के नज़राने हैं जो पल तेरे साथ साथ गुज़रे.
मैखाने की ज़रूरत नहीं यही काफी जीने लिए…

शम्माँ जलाये बैठे हैं तेरे दीदार को..
देखना ज़ुस्तज़ु में कही मर ही न जाएं…

मुहब्बत कर तो लें लेकिन
किस पत्थर की मूरत से..
बेवफा ज़माना है नहीं मिलती
वफ़ाएं किसी सूरत में…

बस बस रहने दो आग लगा चले जाते..
तकिया भर बाँहों में रोने को छोड़ जाते…

ज़िन्दगी को क्या बताएं बेवफा है..
कुछ लम्हों का ही तो सिलसिला है…

माना के तेरी नज़रों का नूर ए नज़र नहीं..
मगर ये सांसें तेरी खुशबु की तलबगार हैं…

बाली उम्र है माना मगर फिर भी सम्भल रहा करो..
यूँ झुल्फों की क़यामत सरे राह न बिखराया करो…

न खुद पढ़ती है न हमें पढ़ने देती..
लव यू लव यू बोल परेशान करती…

गर इश्क़ में जनून ए शिद्दत शामिल हो..
खुदा भी क़बूल कर क़ायनात झुका देता…

किसी को दीवानी की हद तक
चाहना और बात निभाना और..
हक़ीक़त से रु बरु होते जब
लोग कसमें वादे भूल जाया करते…

न कर इश्क़ पहले
वफ़ा कारण तो सीख..
बेवफा दीवानों ने
कई ज़िन्दगी बर्बाद की…

न कर इश्क़ से इश्क़ यारा..
ज़िन्दगी में कुछ और भी है…

बहुत किया इंतज़ार
बस और नहीं..
चलते हैं तेरे कूचे से
यादों को लिए…

कुछ इस तरह से मिला करो
लगे दिल को मेरी हो..
दूर दूर से नज़रें मिला भला
प्यार कहाँ हो पाता है…

जो फूल भेजे थे किताबों में
अब भी संभाल रखे..
कम्बख्त सूख गए बेशक
तेरी सांसों की खुशबु देते हैं…

जब झूठ अदा से बोला जाये तो..
सच भी शक के दायरे में आता…

सीने के जब करीब होते हो
धड़कनों क हाल समझ जाते..
कितनी मुहब्बत हमसे तुम्हें
राज़ दिल का यूँ ही बता जाते…

कुछ इस तरह तुम तसव्वुर में रहते हो..
जिस और देखूं तुम ही नज़र आते हो…

जी भर करो तौहीन फिर मासूम से हो जाओ..
खता अपनी न मानों इलज़ाम दूजे पे लगाओ…

न हो शोहदाई हमारे इश्क़ में..
इस दिल के तल्बगार हज़ारों…

ए पर्दानशीं रूठा न करो..
हम भी तो तेरे दीवाने हैं…

उनका नज़रें मिला झुकाना
जैसे इजहार ए मुहब्बत..
उस पर होली होली मुस्कुराना
क़बूल क़बूल क़बूल…

जब तेरा दिल गवारा करेगा ग़लती मान लेना
हम जहाँ थे वहीँ मिलेंगे वादा है सनम…

खता होती है इंसान से कब इंकार किया..
गल्ती कर न माने उससे बड़ा गुनहगार नहीं…

उफ्फ कम्बख्त ये कॉलेज की पढ़ाई..
मार डालेगी मुझ को तेरी जुदाई …

न आजमा मेरे Atitude को..
जो टूट गया चूम होंठों को Smile भी ले जाऊंगा…

अभी सताया ही कहाँ रात तो आने दे ज़रा..
बाँहों में भर लेंगे अभी तड़पाया ही कहाँ है…

ठोढी पर तिल मॉंग में सिंदूर और माथे की बिंदिया..
एहसास करा रही इस दिल को अब गैर अमानत है…

बेपनाह हुस्न आपकी कशिश भर आँखें..
कर रही मदहोश ज़माने को ये शरारतें..

कुछ इस तरह से बेवफाई के रिश्ते निभाए हैं..
हर तरफ गुज़रे लम्हों के मंज़र नज़र आये हैं…

एक पल की मुहब्बत कर बना लेते हैं दूरियां..
आजकल कुछ यूँ लोग निभाते वादा ए वफ़ा…

नादाँ उम्र है इश्क़ की गलियों में
चलना सम्भल सम्भल..
कोई दीवाना देखे न तेरी
रूह ए दिलकश बचना ज़रा…

हिज़्र की रात वो न आये तो
क़यामत होगी..
कटेगी पल्कों में बेशक सूरत
आँखो में होगी…

इतना Hate u Hate u न कहो तुम्हें Love हो जाये..
रुस्वा हो जाओ अपनी नज़रों में और नज़रें झुक जाएं…

कसम है तुम्हे तेरे बनाने वाले की
खुदको और अपने हुस्न को पहचान…
यहाँ कदम कदम पर क़ातिल बैठे
मासूम से दिल का क़त्ल करने वाले…

इस क़द्दर तुझसे मुहब्बत हुई.!
सारी दुनियां में तन्हा हो गए.!!

कहीं से नयन कहीं से गेसू कहीं से अदाएं लाया होगा..
तुझे बनाने में खुदा ने जाने कितना वक़्त लगाया होगा..

जब से तुझे देखा है हम अपना दिल हार गए..
जान-ए-जां तेरी आँखों में खुद को निहार गए…

अक्सर रुस्वा हुए तेरे कूचे आ कर
तेरी सखियों ने तुझे मेरे नाम से पुकारा

अरे आपस में न लड़ो दोनों को कण्ट्रोल कर लेंगे..
एक को नीचे का तो दूजी को ऊपर कोठी दे देंगे…

तुस्सी काले काले ओ
कुज साडी क़द्दर करो..
इस दिल नूं तुस्सी वडे
प्यारे प्यारे ओ…

सखियों में हंस हंस यूँ चर्चा
हमारा न किया करो..
कोई छिपा तुमसे I Love u
कह देगी तो क्या करोगे…

अब से अगर किसी को सब्ज बाग दिखाओ..
खुदा कसम दिल दुखता जब कोई दगा देता…

इक दिल है और सौ दीवाने यहाँ..
किस को करूं हां
किस Miss को करूं न…

यूँ मदहोश आँखों से देखा न करो
कोई परिंदा राह भटक परदेसी हो जायेगा..
इश्क़ की डगर बढ़ दीवाना पागल
तेरे दर अपनी सांसों की डोर तोड़ जायेगा…

जब से तुझे देखा है हम अपना दिल हार गए..
जान-ए-जां तेरी आँखों में खुद को निहार गए…

कहीं से नयन कहीं से गेसू कहीं से अदाएं लाया होगा..
तुझे बनाने में खुदा ने जाने कितना वक़्त लगाया होगा..

तेरा वज़ूद एक खूबसूरत वहम सिवा कुछ भी नहीं..
यूँ भी हमें परछाई का पीछा करने की आदत नहीं…

गुस्ताख़ नज़रों से कह दो यूँ देखा न करें..
गर इश्क़ हो गया तो इलज़ाम लगाओगे…

बारिश की बूंदों से एहसास हो रहा है..
तड़पा वो भी रात भर हमें याद कर के…

मेरी ज़िन्दगी वो खता हो
जिसे सज़ा समझ निभा गया..
शिद्दत से चाहा उसे मगर
वो सेज़ गैर संग सज़ा गया.

मीर की ग़ज़ल सी खय्याम की रुबाई हो..
फुरसत से बनाई खुदा की जैसे खुदाई हो…

चलते आजकल वो राहें बदल कर..
जो कहते थे कभी प्यार बड़ा तुमसे…

क्यों हमसे करते हो इतनी मुहब्बत..
न मिले तो साँस लेना भूल जाओगे…

सितारे भी निकल चुके
रात भी ढलने को..
सांसें हैं अटकी हुई तेरे
दीदार को सनम…

न करो मेरी नज़र को
नज़र का इशारा..
आ गया दिल तो
जान ए जाँ पछताओगे…

मेरी दुनियां है तेरी हद से
मेरे इक़रार की यही कहानी..
तेरी हंसी आँखों की शरारत
मेरे जीने की बस यही निशानी…

ओये एक Request है आज के बाद
दिल से हो प्यार तो किसी को
I love you कहन…

दर्द ए दिल किसे सुनाएं..
कोई एक हो तो बताएं…

चलते हैं तेरी बज़्म से
कोई शिक़वा नहीं..
जो भी वक़्त गुज़रा
यहां खुब गुज़रा यारा…

दो पल की ख़ुशी खातिर कुछ लोग हैवान बन जाते..
अबला पर ज़ुल्म ढा इंसानियत शर्मसार कर जाते…

तेरे वज़ूद से रोशन है मेरी दास्ताँ..
हूँ ज़िंदा तेरी सांसों की महक ले कर…

अक्सर रुस्वा हुए तेरे कूचे आ कर..
तेरी सखियों ने तुझे मेरे नाम से पुकारा…

माथे की बिंदिया
बहुत कुछ कहती..
मेरी नहीं हो अब
एहसास कराती है…

यूँ न मिला करो अब रात की तन्हाई में
तुम को मुहब्बत मुझ से सब जानते है..
तेरी रुस्वाई दिल को ज़रा भी मंज़ूर नहीं
इश्क़ छुपता न चेहरा सब पहचानते हैं…

नहीं चाहिए तेरी बिंदिया
तेरी पायल चूड़ियां..
ये सब गैर है तू अमानत
है किसी और की…

ए रक़ीब-ए-हुस्न यूँ मुंह न फुला..
मानाने की आदत नहीं यूँ न रुला…
यूँ न कर कानों में सरगोशियां..
इश्क़ छुपता ना छिपाये से भी…

क्यों करते इंतज़ार जबकि
वाक़िफ़ है तुम न आओगे..
झूठा वादा करना फितरत
अपनी रंगत तो दिखाओगे…

इश्क़ उनसे न करना जिन्हें इश्क़ की इबारतें न पता हों..
वादा करना तो आता हो मगर निभाने की वफ़ा न हो…

ऐसी वाणी न बोलिये की
दूसरे का मन आहत हो..
आपकी की कीर्ति कम और
श्राप के भागीदार हों…

सच्ची मुचि क्या तुम इतनी सुन्दर हो या..
डिपी और की लगा लड़के बिगाड़ने बैठी…

मेरी सुबह भी तेरे नाम से और शाम भी..
और बात मैं तेरी दुआओं में शामिल नहीं…

तम्मना ए इश्क़ में क्या से क्या हो गए..
ज़ुस्तज़ु में उनकी जहाँ में रुस्वा हो गए…मेरे मेहबूब मिला कर तो रोज़ मिल..
खुदा कसम हर लम्हाँ याद सताती…

कोई माने या ना माने पर यही हकीकत..
ख्वाब दिखाए मगर इंतज़ार न क़र सकी…

ये जो तेरी हल्की हल्की सी शरारतें है..
दिल का चैन चुराती घायल करती हैं…

एक दो दिनों में ही इतना करीब आ गई हो..
सोचता हूँ इतने दिनों तुम कहाँ थी…

नाम लेने की अब ज़रूरत नहीं..
लोग बेवकूफ नहीं समझ न पाएं…

तेरे लिए आसां होगा Miss u I love u कह भूल जाना..
मेरे लिए तो प्यार Is a worship of God जैसा…जीवन में Serious होना भी ज़रूरी
तभी सही फैसला लिया जा सकता…

न कर अपनी तस्वीर की
जग में यूँ नुमाइश ..
मुझे पाना तो ज़माने से
खुदको छुपाना होगा…

क़बूल तेरा
Good Bye करना..
कसम है
दिल में याद न करना…

अब तक जी थे सकूँ से
उनसे आँख क्या लड़ी..
बेगाने खुद से हुए ‘सागर’
नींद आँखों से जा उडी…

कभी रूठ जाऊँ तो मनाना नहीं
मर जाऊँ ज़नाज़े पर आना नहीं..
नहीं चाहिए दिखावे की उल्फत
जब तक हूँ ख्वाब में आना नहीं…

अपनी आँखों के पैमानों से यूँ न पिलाओ..
कोई राह भटक जायेगा मुसाफिर की तरह…

क्या खूब हैं तेरी आँखों के दो तीर मतवाले..
घायल करते है दिल चाहे घर यहीं बना लें…

Uff यार इतना न शरमाया कर .!
कसम से जान निकल जाती है.!!
गालों में डाल उँगलियाँ वो कुछ यूँ बैठे हैं,
जैसे हमारी याद में खुद को भुला बैठे हैं…

माना के तेरी नज़र में तलबगार नहीं मगर,
तेरी नज़र का धोखा है यक़ीन करके तो देख…

रिश्तों और अरमानों की ताबीर हूँ,
खुदा कसम मैं ही तेरी तक़दीर हूँ…

उफ़्फ़ कम्बख्त ये उनकी दो आँखें
क्या खूब है आंटी की बेटी की बातें,
जब खिलखिलाती कहकशां बरसे
याद आएं सब दिन साथ गुज़री रातें…

न कर इतना मजबूर की तेरे बापू को सब बता दूँ,
करके रुस्वा न अपना बनाऊं न गैर का होने दूँ…

कोठी उत्ते काँव वोल्दा
काशनी दुपटे आलिये
मैं राह तेरी तकदा…

ए हुस्न अपनी नज़ाक़त पर
इतना ना इतरा,
एक दिल है सौ नहीं हर किसी
को देता फिरूं…

आखरी पल है आखरी सांसें ढूंढ रही
तस्वीर तेरी आँखों में रह रह घूम रही हैं,
मुझसे तेरा शिक़वा माना मगर आजा
जाने से पहले सासें तेरा हाल पूछ रही हैं…

ए दिल चल तेरे कूचे से निकल जाते,
तू फिक्रमंद रहे कभी गंवारा न होगा…

बेशक रात गुज़री है करवटें बदलते मगर..
कम्बख्त फिर भी I❤️ You कह न पाई..

इतनी फुरसत कहाँ
किसी के मैं नखरे उठाऊं,
जिसे होगी मुहब्बत
खुद बखुद खींची आएगी…

अनार खाने का दिल था,
पाग़ल ने अंगूर दिखा दिए..

जो मजा तुझसे लड़ने में
दो पैग शराब पीने में कहाँ,
बहुत खूब बहुत खूब हो
बिन तेरे जीने में मजा कहाँ…

तुस्सी प्यारे न्यारे ओ
कुज ते रेहम करो
साढ़े पिंड आलेय ओ…

हमारी ज़िन्दगी की दास्ताँ है जब जब,
अच्छा बनना चाहा लोग बुरा बना गए…

अधूरी ख्वाहिशें अधूरे
फलसफां का कारवां हूँ,
ज़िन्दगी बड़ी खूबसूरत
जीना फिर भी चाहिए…

अनार खाने का दिल था,
पाग़ल ने अंगूर दिखा दिए..

न तू राधा है न मैं कृष्णा,
आज तू भी बेवफा मैं भी…

अपने इश्क़ को पाबंदियों में न रख यारा,
खुली हवा जिया कर ज़िन्दगी हसीँ लगेगी !!

इश्क़ करना तो करो तुम बातें बहुत बनाते हो,
बेवजह छत पर बुला इंतज़ार बड़ा करवाते हो.!!

मेरे ख्याबों में तू मेरी सांसों में भी./
तू नहीं तो बता जियूं कैसे तेरे बिन.//

तेरे ख्याल से रोशन मेरी ज़िंदे की राहें,
कैसे करूँ तस्सव्वुर तेरे बिन जीने का..

किस बात पर शर्माना
जब दिल से दिल मिल चुके..
सांसों का मिलना बाक़ी
कुछ रश्म ओ रिवाज़ बाक़ी…

Qayal hai ye dil apki zrra nawazi ka,
Mere mehboob mujhe roz mula kar…

उफ्फ इश्क़…कम्बख्त
कितना नादाँ है,
सर चढ़ बोलता फिर
नींदें चुरा बीरान करता…

अपनी निगाहों के पैमाने से यूँ न पिला.!
कहीं इश्क़ हो गया तो बताओ क्या करेंगे…!

Ayenge jb milne
Rukh se naqab tum hta lena.!
Deedar krna hai
Hya se chehra na chhoa lena…!

दावा था जिन्हें मुहब्बत का.!
इक हवा के झोंके से बेवफा हो गए…!

अपनी निगाहों के पैमाने से यूँ न पिला.!
कहीं इश्क़ हो गया तो बताओ क्या करेंगे…!!

खूबसूरत घटाओ मेरे मेहबूब पर कुछ तो तरस खाओ .!
बानुश्कि घर से निकला तुम हो के करीब आने न देती…!

उफ्फ पहले ही हुस्न ए क़यामत कम थी.!
जो Reply न कर और कुफर करने लगे…!

न कर बेबाक निगाहों से मेरी आरज़ू.!
इतना खुसनसीब नहीं पा सकूँ तुझे..!!
मुझे हर तरफ तुम ही तुम नज़र आते,
तेरे दिए गुलाब को सीने से लगा कुछ राहत लेता हूँ…

मुद्दत से परेशान था,
कोई चैन चुरा ले ना…

दिल से बुलाया है
आएंगे ज़रूर 20 बाद,
वादा निभाना ज़रूर
अब देखती जाओ यारा..

हमनें कब कहा के मेहमान है
गर क़बूल तो दिल औ जान हैं

Betabiya is qaddar na bdhao
Jine ki aarzoo bdh jaaye..
Tah umar tera sazda karne ki
Khwahish jiggar kr jaaye…

Na kar meri muhabbt pr naaz…
Khuda ne mushqil nzrana diya…

Is tarah zindagi me shamil…
Chah kr bhi bhula na paun…
इक शाम का धुआं हुँ जाने कब उड़ जाऊंगा,
ले कर तेरी यादें संग दुनियां छोड़ जाऊंगा…

ये इंतखाब भी कितना बेकरार करता है,
आँखों से नींद दिल का चैन चुरा लेता है…

दिल में फ़क़त इक तम्मना है
तेरे करीब आने की,
पर ये न समझना एक तुम ही
प्यार करने के लिए…

हर सितम सहेंगे मगर
खुद पर ये सितम न करेंगे,
इस ज़िन्दगी में अब
कभी किसी से प्यार न करेंगे…

Garzprst jahan se
wafa ki umid na kr
Mtalb ki Duniyan
pyaar ki chaht na kr…

उफ़्फ़्फ़ ये अदा बेबाकियाँ और मौसम सुहाना,
मार डालेगी मुझ को तुझसे ये जुदाई की सज़ा…

Gar muhabbt ho jaye chli ana Sanam,
Kl bhi the aaj bhi deedar ke deewane…

शायर की ग़ज़ल का साज़ हो
झील में उगता गुलाब हो,
देखूं जिस और नज़र आते हो
मेरी ख्वाहिश ख्वाब हो…

कोई I ❤️ U कहे और Me 2 कहें,
खुदा जाने कब ऐसा करवाएगा हमसे..!

ये हमारी बदनसीबी उनके हो न पाए,
जिसने चाहा शिद्दत से न समझ पाए…

उम्र जे इस पड़ाव पर आ बहुत उदास हूँ..
सोचता इश्क़ तुझ से कर मुझे क्या मिला…

जिससे करनी उससे बात कर,
तेरी ज़िन्दगी जिसे सुपुर्द कर..

न कर मेरे दिल पर इस तरह राज़..
दुनियां रश्क़ करे हो तुझ पर नाज़…

खास तो खास होते ;
न भूलने कीआस होते..!!

इक नई सुबह नई शुरुआत
जीवन का यही सार,
जो बीत गया उसे भूल जा
वर्तमान का स्वागत कर…

वो जो हमारी होगी सिर्फ हमारी होगी,
न किसी को Reply न ही Like देगी…

न कर इतना गरूर खुद पर
एक तू ही नहीं तक़दीर वाली,
तेरे बाद भी ज़माने में कई
एक तू ही नहीं चाहने के लिए…

कितना झूठ दिन भर तो हमसे लड़ती रहती,
झाड़ू ले पीछे भागती ख्वाब कब देख लिया…

किताब ए इश्क़ का तर्ज़ुमा
करना तो सीखी,
हम हर लफ्ज़ से तहरीर ए वफ़ा
लिख देंगे…

बहुत हुए तेरे प्यार में पागल यारा
अब गुंजाईश नहीं,
एक वो दिन था रात इंतज़ार किया
अब ख्वाहिश नहीं…
.
जिन रिश्तों में गंभीरता न हो
वो रेत के महल जैसे होते,
हवा के हल्के झोंके से बिखर जाते…

चली हम भी रायपुर हो आते हैं
हीर की गली राँझा बन आते हैं,
सब्जी बेचै गाय चुगाएं या भेड़ें
एक नया फलसफां बन आते हैं…

मुहब्बत एक पाक रिश्ता है
रब्ब की इबादत जैसा,
मगर कुछ लोग बदनाम करते
वादा ए वफ़ा न निभा पाते…

तू ही मेरा रब्ब तू दिल ओ जान
ये सोच तुझे चाहा था,
मालूम न था एक पत्थर की मूर्त
को आँखों का नूर बनाया…
फिर एक वादा और उस पर फिर से दगा,
क्या यही मुहब्बत है इंतज़ार सिर्फ इंतज़ार..

खुद को बार बार आईने में देखा न करो.!
कहीं खुद को खुदकी नज़र न लग जाये…!!

ये वफ़ा के किस्से मुहब्बत के नग्में और कसमें वादे,
सब झूठ आज एक हाथ में तो दूजे से हों कसमें वादे…
बहुत हुए तेरे प्यार में पागल यारा अब गुंजाईश नहीं,
एक वो दिन था रात इंतज़ार किया अब ख्वाहिश नहीं…

इक रूहानी सी सूरत और
उस पर शोख अदाएं,
कैसे हो लफ़्ज़ों पर यक़ीन
मेरी हो और की नहीं…

मुहब्बत यूँ न कर
के भुला ही न पाए..
देखे जो भी शय
चेहरा मेरा नज़र आए…

मुम्मक़िन है ज़िंदगानी में लौट कर न आऊं,
तेरी नज़र बेवफा थी भला कैसे भुला पाऊँ…

शौक़ नहीं था दिल लगाने का..
तेरे हुस्न की खता दीवाने हुए…
चल आ जी भर के देख लूँ तुझे..
जाने फिर मुलाक़ात हो ना हो…

इससे बेहतर भी ज़िंदगी हो सकती थी..
गर तेरी वफाओं ने साथ न छोड़ा होता…

खता सिर्फ हमारी ही क्यों बताते हो..
क्या तुमने भी वफाओं से वफ़ा करी…

क्यूँ लड़ती हो जो इतनी मुहब्बत है..
अब Strike से उठो और हमे मनाओ…

चल बैठी रह फिर फोटोशूट करवा..
जब कोई गाड़ी पीछे से ठोकेगी तब देख…

शुकर है खुदा का वक़्त रहते हकीकत से रू-बरू हो गए..
इक बेवफा आवारा का होने पहले उनसे वाक़िफ़ हो गए…

इंतज़ार करें और कितना इंतज़ार करें
कई सुबह से रात और दिन हो चले..

माना इक दिन इक़रार भी होगा ज़रूर
सोचो जवानी के दिन बेकार हो चले…

यूँ मदहोश आँखों से
देखा न करो
कोई परिंदा राह भटक
परदेसी हो जायेगा..
इश्क़ की डगर बढ़
दीवाना पागल
तेरे दर अपनी सांसों की
डोर तोड़ जायेगा…

होंठों को छिपाने से क्या होगा
आँखें हाल ए दिल बयाँ कर रही..
हो रहा है प्यार धीरे धीरे इन्हें
शर्म ओ हया से पलकें झुक रही…

दिल ए नादां ज़रा धीरे धीरे मचल
अभी तो वो आये भी नहीं..
नज़रों से नज़रें मिलेगी क्या होगा
बैठ सामने वो शर्माए भी नहीं…

तुम गल्ती भी करो और हम उफ्फ तक न करें.
इतने नहीं तुमने घी के चिराग उल्फत में जलाये…

ए हुस्न अपनी जुल्फों में कैद न कर,
बैगाने घर में घुट घुट के मर जाऊंगा…

उस हुस्न ने बस दिल ही दुखाया,
जिसे चाहा अपना खुदा जान कर…

एक बार कह तो सही तकिया बन जाऊंगा…
बाँहों में भर रखना तुं यूँही करीब रह पाउँगा…

क्यों कपड़ों की तरह वो बदलते हैं दिल
आज लोग मुहब्बत को तमाशा समझते…

तू सच में इतनी सुन्दर है या
ब्यूटी पार्लर से लिप-टिप आई है..
सच सच बता दीवानों ने तेरे
पीछे मर-मरने की कसम खाई है…

किसी के इश्क़ में जीना.!
इबादत सी बात होती है.!!

मुहब्बत यूँ न कर
के भुला ही न पाए..
देखे जो भी शय
चेहरा मेरा नज़र आए…

ये वफ़ा के किस्से मुहब्बत के नग्में और कसमें वादे,
सब झूठ आज एक हाथ में तो दूजे से हों कसमें वादे…
बहुत हुए तेरे प्यार में पागल यारा अब गुंजाईश नहीं,
एक वो दिन था रात इंतज़ार किया अब ख्वाहिश नहीं…

चले हैं वो इश्क़ करने,
जिन्हें वक़्त पर ठहरना न आता…

हुस्न हया और सदिगी में होता,
रंग रूप तो आती जाती माया…
न रात सोई न सोने दिया,
फिर ख्वाब कहाँ देख लिया…

ये हमारी बदनसीबी उनके हो न पाए,
जिसने चाहा शिद्दत से न समझ पाए…

उम्र जे इस पड़ाव पर आ बहुत उदास हूँ..
सोचता इश्क़ तुझ से कर मुझे क्या मिला…

जिससे करनी उससे बात कर,
तेरी ज़िन्दगी जिसे सुपुर्द कर..

न कर मेरे दिल पर इस तरह राज़..
दुनियां रश्क़ करे हो तुझ पर नाज़…

खास तो खास होते ;
न भूलने कीआस होते..!!

इक नई सुबह नई शुरुआत
जीवन का यही सार,
जो बीत गया उसे भूल जा
वर्तमान का स्वागत कर…

वो जो हमारी होगी सिर्फ हमारी होगी,
न किसी को Reply न ही Like देगी…

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Posted on January 14, 2022, in लम्हें. Bookmark the permalink. Leave a comment.

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