लम्हें


अब पाक-ए-वफ़ा का ज़माना न रहा l
मुहब्बत तो करते निभाना न जानते ll

आपके जिस्म में रूह
अपनी देखते हम l
आपकी आँखों से देखते
अब जहाँ हम ll

अपनी अपनी बिसातें अपनी हैं सब की कहानियां l
जीवन है सारा जाता और फिर बदलती कहानिया ll

यूँ तो इस दुनिया में
कई करते हैं यहाँ वास l
इक तेरी ही श्रद्धा दिल में
इक तेरी ही आस ll

दुनियां के मेले में
आज हम सब अकेले हैं l
कहने को रिश्त हैं
आजमाएं तो मुंहबोले हैं ll

दो पल फुरसत के निकल,
चली आना ख्यालों में /

कब रात होई कब दिन गुज़रा
तुम में हम ऐसे उलझे सुच बुध अपनी भूल गए l
हर लम्हा रहता इंतज़ार तुम्हारा
अपनों में रहते भी हम घर ही अपना भूल गए ll

जीवन अतीत से आगे भी,
निकल रौशनी तलाश में //

वो काफिर होगा जो दगा दे गया
मुहब्बत कर मुहब्बत रुस्वा कर गया l
लोग कहते हैं उन्हें पाक वफ़ा हूई
माईने जानते नही प्यार कैसे हो गया ll

ए दिल अब चल उस ज़हान को जहाँ प्यार से प्यार हो l
न जाति का बंधन न मज़हब की दीवारों बस एतेबार हो ll

इक बार जिसे दिल से निकाल दिया l
फिर घर बनाने की इज़ाज़त ना देते ll

Please Respect Innocents..!

नादाँ कली बेक़रार थी
फूल बनने को मगर l
भंवरा करीब हो भी ख्याल अपने
आंगन का कर गया ll

वो हमें कहते है तुम अभी
बच्चे हो ABC भी न जानते /
काश दिली कह पाते तुम्हीं
हमारे टीचर बन जाओ ना //

शराब में डूब कर गम भुलाये जा सकते बस कुछ पल को,
ज़िन्दगी कटती नहीं मगर भुलाये अपनों को कुछ पल को.!!

चिराग ए उल्फत यूँ न जला,
यहाँ हर शाख पर अंधेरा है /
लोग करते हैं मुहब्बत यहाँ,
मन की प्यास मिटाने लिए //

जीवन में यदि आप किसी की
इज़्ज़त करते हों और उनसे
दिल से बात करें किन्तु वो
आप से कहें…
“टाइम पास कर रहे”
कैसा लगेगा ?

मेरी तस्लश मेरी ज़ुस्तज़ु
है तेरे नाम से /
तू नहीं तो बता क्या रखा
है अब जीने में //

मम्मी अक्सर कहती
बेटा किसी लड़की का दिल न तोडना ll
अब उन्हें क्या कहें
आज कल उनके पास दिल होता कहाँ ll

कभी सोचा न ऐसा भी कभी बन जाऊंगा l
तू न मिलेगी तो जमने को आग लगाऊंगा ll

नज़र से नज़र मिला दिल चुरा ले गए /
देखा सारी दूनियाँ में मशहूर करा गए //

तुम उतनी हसीं न जितना सर चढ़ा दिया l
मान मेरा अहसान मशहूर तुझे करा दिया ll

तुम जैसी भी हो मेरे
ख्यालों की ही मूरत हो /
मेरी नज़रों से कोई
देखे कितनी खूबसूरत हो //

किताबों में मिलते आज चर्चे अब मुहब्बत के l
नए ज़माने में इबारतें पाक ए वादा बदल गई ll
ताली एक हाथ नहीं दोनों और से बजने लगी l
खुदगर्ज़ वो ही नहीं अपनी भी आदत बदलने गई ll

मेरे मुस्कुराने की वजह तुम हो l
लोग समझते बेवजह मुस्कुराता ll

अपने दिल की लिखूं तो क्या कहूं
कम्बख्त तेरा चेहरा सामने आ जाता l
जिधर देखूं तू ही तू नज़र आये अब
क्यूँ तेरा ख्याल न जीने न मरने देता ll

किसी को पैसे की,
किसी को जिस्म की,
कोई भूखा शोहरत का l
कुर्सी की चाहत है,
इंसानियत से धोखा,
क्यूँ हो गए हवस के पुजारी ll

ज़िन्दगी एक सफर जो गुज़रता जा रहा मगर /
जाने कब ज़िन्दगी की गाडी रुक जाए न खबर //

उन्हें Wait करने की आदत न थी और हमें Tine पर आने /
अब गाड़ी प्रेम की बड़े भी तो कैसे कोई रास्ता बता दो //

तेरी मुहब्बत थी तो जीने का मक़सद भी था,
तू नहीं क्या मज़ा दुनियां में l
कोई वजह ऐसी बता तेरे बिन जीने के लिए,
क्या रखा तेरे बगैर दुनिया में ll

मुसाफिर हूँ पल दो पल का
सफर जाने कब खतम हो जाए /
एक अनजान सी डगर जीवन
जाने इसे मंज़िल कब मिल जाए //

देख तुझे प्यार करना तो कर नहीं भी चलेगा
मगर please मुझे भैया न कहना /
नहीं बनना तेरे बच्चों का मामा मुझे कल को
देख please ये कुफर मत तोलना //

बेचैन कर रही हैं ज़िन्दगी में उम्मीदें /
कुछ पूरी होंगी तो कुछ अधूरी रहेंगी //

तू पट जा इक बार
तेरी मम्मी को भी पटा लेंगे l
अरे मम्मी तो क्या
तेरे पापा से भी हाँ करा लेंगे ll

यूँ छुप छुप घूर घूर
क्यों देखती
हो प्रोफाइल हमारी l
नज़र लगा दोगे तो
बिन दवा मर
जाएंगे लोकदोन में ll

ए बिसाले सनम एक बार आ चेहरा तो दिखा जा l
थक गई आँखें सांसें खुदा हाफिज कहना चाहती ll

ये मुस्कुराती कलियाँ
जीने की नई आस दे जाती हैं l
दुनियां अब भी हसीं
उम्मीदें जगा सकूँ दे जाती हैं ll

यूँ तीर ए नज़र न चलाओ
ज़माना खराब है l
हो जाए ना घायल सम्भल
वक़्त बेईमान है ll

इंतज़ार मिलने का है दिल है बेक़रार भी
मगर जब सामने होते सोचता क्या कहूं या सुनता रहूं l
ये दिल की नेताबिय बड़ी अजीब होती
जितना मिलने का इंतज़ार होता बाद इतना ही इंतज़ार ll

वो पूछते बड़ी मासूमियत से
हमें क्या उनसे प्यार है
क्या बताएं उन्हें खुदा की हर
शे से हमें मुहब्बत है…
और इस आबो हवा में उनके
तन की खुशबु भी है
क्या अब सासें लेना छोड़ दें
सांसों से मुहब्बत है…

किस्मत से मेरे पास थी
किस्मत से ही दूर है
रब्ब करे किस्मत से ही
फिर मिल जाए मुझे…
किस्मत है तो सब कुछ
बिन इसके कैसे जियें
मेहनत बड़ी चीज़ माना
न किस्मत तो न मिले…
किस्मत के खेल निराले
रंक बने राजा कभी
न किस्मत हो तो राजा
भी फ़कीर हो जाए…

जिस शाम गुज़रो हमारी गली,
मौहल्ले की सब लड़कियां रुठ जाती l
अब तुम ही बताओ क्या करें,
क्यों इसमें भी हमारी खता ढून्ढ लाती ll

I’m a mirror,
Without me,
Everyone is invaluable.
But I wish,
Smiles on everybody’s
Face…

उसे आदत है
भैया भैया कहने की l
हमें चाहत नहीं
मामा कहलाने की ll

About Dilkash Shayari

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Posted on December 4, 2020, in Shayari Khumar -e- Ishq. Bookmark the permalink. Leave a comment.

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