लम्हें


इश्क़ गैरों से जो हम करते
तेरी गली क्यूँ रोज़ गुज़रते l
तुम्हें ही चाहा तुम्हें ही पूजा
बेवजह हो क्यूँ शक करते ll

मुहब्बत भरे दिए जब जब कोई रोशन करे
दिल से आह निकले l
परेशां है दिल बेवरार है दिल उसके बिना मैं
उदास हूँ बस उदास हूँ ll

तेरे दीवाने होंगे कई
मेरे पास एक तू ही है l
तुझे न प्यार मगर मेरी
दुआओं में तू शामिल है ll

जो बिक जाएँ रवि वो रिश्ते कहाँ l
हालत तो बिगड़ते संवरते रहते हैं ll

कितना असां होता इन हुस्न वालों के लिए कहना
हमें तुमसे प्यार हो गया l
जब ज़मीं नीचे की हकीकत देखिये तो पता चलता
दिलों से खेलना आदत है ll

क्या खूब हंसी है इन लबों पर
खुदा सलामत रखे l
नसीब होगी न जाने किस को
हमारा ख्याल रखें ll

तकिया समझ न बींच बाँहों में,
कम्बख्त हमारी जान निकल जाएगी l
छाती के इतना करीब रखेगी तो,
खुद ही सोच रातों को कैसे सो पायेगी ll

इतना करीब न आईये बेपरवाह हो,
मुहब्बत रब्ब की इबादत की तरह l
कुछ रस्मों रिवाज़ों की बंदिशें होती,
पाक ए वफ़ा न करो नुमाइश तरह ll

मीर की ग़ज़ल सी तेरी आँखों की रुबाई,
छलकते जाम ए पैमाना बन मुझ में समाई l
आ करीब मेरे दूर दूर से ले क्यों अंगड़ाई,
क्या हुस्न पाया है तुझमें दिखे सारी खुदाई ll

वो भी क्या करता उसकी भी क्या खता थी /
मेहबूब की आँखों का नशा सब भुला देता है //
वो फिन और थे जब वतन परस्ती हर दिल थी l
तुम कहा हो जल्दी आओ ऐसे वीर नौजवानों ll

तुम उतनी हसीं न जितना सर चढ़ा दिया l
मान मेरा अहसान मशहूर तुझे करा दिया ll

तुम गुणा की शहज़ादी हो या मोरेना की
कोई फर्क नहीं l
हम बस ये जानते युवराज हैं ग्वालियर के
तुम पहचानते नहीं ll

कद से छोटी हो बेशक चलेगा👌👌
पर नाक से लम्बी न हो👃👃
क्युकी नाक पे गुस्से वाली सुन्दर लगती💘
फिर मर्द का जॉब पर जाना मुश्किल हो जाता💗💗

किसी न किसी की वफाओं में कमी थी l
वरना मुहब्बत यूँ कम ही मंज़िल न पहुंचे ll

ये बहकती आँखे और चाँद सा मुखड़ा
काफी हैं क़तल करने जे लिए l
इतरा कर आना मासूमियत से कहना
हम गुनहगार नहीं खुदा कसम ll

सुबह हो तो ऐसी चाय की चुस्कियां l
उनकी मुस्कान और खनकती चूड़ियां ll

हमसफ़र मिलता कोई न कोई ज़रूर l
वक़्त रहते ना पहचानते होते मगरूर ll

खामोश रहने की आदत न थी l
मुहब्बत ने मगर होंठ सिल दिए ll

जिसे होगी मुहब्बत सच्ची सच्ची l
करेगी हर बात वो अच्छी अच्छी ll
लड़कियां होती नहीं बच्ची बच्ची l
लड़के खुदही कराते कच्ची कच्ची ll

सुना था प्यार में लोग पागल हो
अंधे हो जाते देख भी लिया /
सबूत पर सबूत मिलने बाद भी
कोई आबरू लुटाने को तैयार //

सकूं भरी ज़िन्दगी मिलती
सागर किनारे l
साहिल की बाहों का सहारा
लगा दे किनारे ll

About Dilkash Shayari

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Posted on December 4, 2020, in Shayari Khumar -e- Ishq. Bookmark the permalink. Leave a comment.

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