लम्हें


1.ये अपनी कमनसीबी न थी तो और क्या है.!
जिस से भी पाक वफ़ा करनी चाही वही राह बदल गया.!!

2.ये बेवफाओं की नगरी है यहाँ मुहब्बत के मायने कुछ नहीं.!
नाप तौल कर वफ़ा होती यहाँ ज़ज़्बातों के मायने कुछ नहीं.!!

3,ना जाने कब जरुरत आ पड़े थोड़ी हंसी बचा कर रख.!
यूँ भी इस दौड़ भरी ज़िन्दगी में सकूँ कम ही मिला करे.!! 

4.वो रिश्तों में नाप-तौल ले बैठे,
मुहब्बत व्यापार बना बैठे.!
अज़ी अभी तो बस शुरुवात थी,
वो तो मुक्का लात कर बैठे.!!

5. वो बेवजह ही बिन पहचाने इलज़ाम हम पर लगाते गए.!
उनकी नादानी समझें या गरूर कोई समझाए तो सही.!!

6.दीवारों से सर टकराने से बेहतर.!
रास्ते बदल किनारा हो गुज़र लें.!!

7.मुहब्बत की राहों में कुछ तो करना ही होगा.!
दिल दिया गर तो यक़ीन भी करना ही होगा.!!

8.कुछ इस तरह से वो मुहब्बत कर गया.!
दिल दिया भी मगर लबों से न कर गया.!!

9.अकेला ही चला हूँ हायत-ए-सफर पर.!
क्या पता राह में कोई हमसफ़र बन जाए.!!

10.बात बेबात पर बहस करना कुछ न होते भी बहुत कुछ समझना.!
ऐसे हैं आजकल हुस्न वालों के नखरे फिर कहते हैं अपना समझना.!!

11.ये तेरी मुहब्बत की दिल्लगी है.!
आज भी तेरा हूँ कल भी तेरा था.!!

12.वो क्या करेंगे मुहब्बत किसी से,
जो एक पल की हकीकत न निभा सके.!
चाहते जो हर लम्हां झूठी तारीफ़,
काश समझ सकते हर कोई फ़रेबी नहीं.!!

13. वाकिफ न थे तेरी बेवफाई से हम.!
दिन-रात मांगते रहे तुझे खुदा से हम.!!

14.कभी कुछ कभी कुछ ख्याल बदल सकते मगर
कलम स्याही का लिखा न मिटे युगों-युगों तक

15.ज़िन्दगी की रील में तू यूँ Fixed हो गया है
अब तो जागते सोते तेरे ही सपने देखा किये

16.न छेड़ मुझको और मेरी दिल-ए-धड़कनों को.!
आ गया तुझ पर तो बहुत पतचायेगी फिर.!!

17.Rahein kanton ki ho guzre
hain Qamyaboyan
Bade huye wahi Zahan mein
ki Qurbaniyan

18.Phool si Hansi Teri Zahan ko Mahka Jaaye
Jab Jab Tabbssum Tere Labon pr Bikhar Jaaye

सुन्दर चितवन है उस हूर के
क्या खूब जलवे हैं उस नूर के
ए ज़िन्दगी तुझ को साथ देना ही होगा
अभी तो मैंने यौवन की फुहार देखी है
मैं रहूं या न रहूं तुम खुश रहना
ज़िन्दगी का दौर यूँ ही चलना चाहिए

इक बार ही करके तो देखो नज़रें चार
तुम भी हमारी तरह हो जाओगे बेज़ार
किस से कहूं दिल-ए-धड़कनों की सदा
उकता गया यारो सोचता दूजे जहाँ चलूँ
गर तुम अब न मिले कभी देख लेना
एक दिन ऐसे तो हम मर ही जाएंगे

गर तुम अब न मिले कभी देख लेना
एक दिन ऐसे तो हम मर ही जाएंगे

क्या करते खफा भी तो न कर सकते थे
सोचा क्यों न ज़िन्दगी ही तेरे नाम कर दूँ

उसका हसीं चेहरा जैसे फल्क़ पर चमकता महताब
वो माने या न माने हम भी हैं यारो दहकते आफताब

Zindgi badi khushkismt hai jine ka ek mauka aur pa gyi
Hum mein se kitne jinhein naseeb ya mauka phir mila

Pak wafa krne waale dil ko dekheim
Jism to bas muhabbat ka sauda hai

Chaand nikale aur Wo chatt par aa jayein Kahin aisa na ho

Deewane deedar krleinge Unka dil bhatke Kahin aisa na ho

Tu Meera bn ya ho ja Radha
Yahan Krishn nhin milne

Hr Chohraye khde Duryodhn
Yahan Bisham kai milne

चाँद छुपा है घटाओ में,
कभी तो बाहर आएगा
दुआओं का होगा असर,
कभी तो नज़र आएगा

Aur kahin Dp se Khubsurati chura baitha hai
Deewane tadpte tapdpein Husn ada dikha baitha

रहने दो मेरे रंज-ओ-गम
मेरे पास
वक़त इलाज़ है.!!
तुम खुद ही परेशां हो
मेरी दर्द-ए-दवा
क्या करोगे.!!!

Tujh pr Qurbaan Zindagi ki Hr Sans hai
Ey Dost Tu hai To Jag Mein Pehchan hai

Tu Meri Nhin Hai Kasam Se
Magar Teri Khushi Meri Hai

 

कैसे मान ले ज़िन्दगी है यारो
बेवफाई का दूजा नाम दोस्ती

न कर बेवफा से वफ़ा की उम्मीद कहे यारों से”सागर”.!
जो जितनी वफ़ा दिखाए बाद उतना बेवफा साबित हो.!!

ज़िन्दगी में आने से पहले इक बार सोच लेना फिरसे.!
मैं वो जालिम हूँ तह उम्र कभी तेरा साथ न छोड़ेगा.!!

न मांग बार बार खुदा से यूँ यार “सागर”.!
खफा हो गया वो कहाँ जाएगा ज़रा सोच.!!

Iq baar Ishq-e-ijehar farma kr to dikhiye Janab,
Zamin-Aasma Chaand-Sitare khud bakhud Sazdon mein jhuk jayeinge !

Ulfat to khud hi Nasha hai Yaaro

Chad jaaye gar hd se guzar jaata

Na kr khwahish Kabristano se zazbaton ki
Yahan aate zindagi ko manjil dikhane ke liye

Dhoonde chala jo Bekasoor yahan
Apni Aankhein hi kasurwar kr baitha

Bahut khub hain ye muhabbat bhari rasmein
Chal ab dekhunga kase nibhayegi kasmeon

Yahi Zustzu yahi Aarzu yun mil roz
Mere Shahar aaye aur bahak jaaye

Waade to hote hain Todne ke liya
Kash Bhul paate Tujhe jine ke liye

Tere Mauke ne hi maar diya
Teri gali tbhi to Dil haar diya

Har sapna yaaro muqammil nhin hota
Magar sapna bhi sbko hasil nahin hota

Tu itni khubsurat nahin ke bs mein rkh ske
Rehne de zamane mein kai sambh leinge mujhe

Zamane mein kahan Sirat ki pooch rahi
Jitne Khubsurat utne hi Mahalon mein jagaha mile

Jinke paas dil hi na ho wo kya brbad honge
Pyaar karenge kisi se tabhi to brbad homge

Kaash ye Dil humara patthar ka hota
Yun Kanch mafik toot bikhar na jaata

Tujhe muhabbat to kya humein Nafrat hai
To hi tere piche yun hi kuch Mre jaate hain

Kya khub hai teri kahani
Shamma khatir prwane ki jawani

 

लोगों पर न जा खुदको ही संभाल
गर जोश होगा फल्क़ भी झुकेगा

मैं रहूं या न रहूं तुम खुश रहना
ज़िन्दगी का दौर यूँ ही चलना चाहिए

किसी शायर की ग़ज़ल सी खूबसूरत है तू
ये और बात बज़्म में अभी पढ़ी न गयी तूं

ज़िन्दगी रहे मुकान हासिल तक दुआ करो यारो
कहीं बीच राह नज़्म अधूरी न छूट जाए

 

About Dilkash Shayari

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Posted on October 16, 2019, in Shayari Khumar -e- Ishq. Bookmark the permalink. Leave a comment.

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