लम्हें


हमने तो कोशिशें की थी बड़ी शिद्दत से “सागर”
जाने किसी की खता थी अश्क़ निकले आँखों से

सही फरमाया तूने कुछ मुझमें कुछ तुझमें है जरूर
तभी धरती पैदा कर मिलाया खुदा ने दोनों को हज़ूर

मगर एक फर्क और रहा दोनों में
हम मर गए मगर तुम मर न सके

खामोश रह रह हुस्न इश्क़ का क़त्ल कर गया”सागर”
बेचारा उफ़ क्या करता इलज़ाम क़तल का लग गया

बहुत शौक है उन्हें खुद पर और अपनी वफ़ा पर”सागर”
ज़रा नज़र से नज़र मिला तो देखें रुख साफ़ हो जायेगा

 

आँखों की नमीं तो सफर कर लेगा “सागर”
तेरे दिल पर पड़ी धुल का हिसाब कौन देगा

आज की क़यामत की होगी,
गर न आई तो देखना
वक़्त गुज़रे याद करेगा ज़माना
बस तू चूक न करना

ये बेवफाओं का शहर है,
यहाँ मुहब्बत का मौल कुछ नहीं.!
वादे-कसमें दिख्झावा हैं,
यहाँ इंसान की कीमत कोई नहीं.!!

आपका यूँ खफा होना
जान ले जायेगा.!
दिल की गहराई बसा प्यार
और बड़ा जायेगा !!

Us mein or Hum mein yahi PhRk raha
Wo Baat Baat pr Block kr deti…
Deactivate ho jaati…
Hum Chaha kr bhi Aisa kr Na Sake…

Gar keh do Inhein Bewafa,
Teer Inhein Fir Chubh jaata hai.!
Koyi Pooche Inse Zra Inko,
Waqt Pr aana kyun na aata hai.!!

Aansuon ki Dhaar Par Bah kar,
Jiwan Roopi NaiYa Na Chle.!
Aage Badhna To Himmat Se Kaam,
Le Mushkilon Ka SamNa Kro.!!

RaAt ki Sheetal Hawayein
Jo Chalein
Tum Yaad Aate Ho Bahut
Yaad Aate Ho

जाने से पहले कुछ ऐसा कर जाओ,
अपनों को कभी याद न आओ.!

तह उम्र कौस्ते रहे जी भर आपको,
ख्यालों में कभी उनके न आओ.!!

बहुत नाज़ तुझे खुद पर और अपनी वफाओं पर.!
देखना एक दिन तेरा गरूर तुझे कहीं का न छोड़ेगा.!!

वो हवा क्या करे जो तेरे बदन की खशबू से लबालब.!
मेरे दिल की धड़कनों में सांसों की राह हो समाई है.!!

हुस्न के आगे हर कोई यारो हो जाए बेहाल
वक़्त आता इश्क़ का भी दिल ज़रा संभाल

जब ज़नाज़ा निकले मेरा यार की गली।।।
रोक कर देखना तस्वीर किसकी लिए जा रहे।।।

कभी कुछ कभी कुछ ख्याल बदल सकते मगर
कलम स्याही का लिखा न मिटे युगों-युगों तक

मानते हैं हुस्न के आगे इश्क़ हमेशां लाचार रहा
मगर घायल होते ही तीर-ए-नज़र से बेज़ार रहा

सामने देखी तस्वीर निगाहों को धोखा दे सकती
मगर जो तस्सव्वुर में रहे कौन जुदा कर सकता

हुस्न के लबों ख़ामोशी अच्छी नहीं लगती
के जैसे बिन चाँद रात सुहानी नहीं लगती

अज़ी हुस्न कब खफा हो जाए कब एतबार किये इसका
ये वो शोख बहती नदी है जब चाहे मुद जाए और दिशा

चल यही क्या कम है आशिक बदल दिल-ए-धड़कन नहीं
उम्मीद पर क़ायम है दुनियां इक दिन दिल भी बदल लेगी

आँखों को कुछ राहत भी दे सनम
चल आते हैं अब तेरी गली सनम

न छेड़ मुझको और मेरी दिल-ए-धड़कनों को
आ गया गर तुझ पर तो बहुत पछ्तायेगी फिर

यूँ क़ातिल निगाहों से न देख,
शर्म आती है हमको
तू तो हो गयी है बेपर्दा सनम,
क्यों तड़पती हमको

मामू बन कर ये चैन की नींद सुलाता है
जानू बन जाए तो सुबह-शाम तड़पता है

 

About Dilkash Shayari

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Posted on August 17, 2019, in लम्हें. Bookmark the permalink. Leave a comment.

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