“लम्हें”


1.ये उन की हंसी है जैसे कहकशां की बिखरन.!
ज़िन्दगी में काश हो जाए”सागर“उनका आना.!!

2. दिल में तो न दे सके कागज़ पर तो थोड़ी जगह छोड़ देते।!
इतनी भी क्या बेरुखी “सागर” से कहता क्या की बता देते।!!

3. चांदनी चौक पर,
क्या खूब मिले थे,
बारिश के मौसम,

तेरी बाँहों में,
मेरी बाहें थी,
तन भीगे थे,
मन गीले थे,
फिर भी खामोश,
दिली धड़कन थी
चंदनी चौक की,
क्या खूब मिलन थी…

4. और जिनका चेहरा ही चाँद-सा हो उन्हें फिर फुर्सत कहाँ.!
ईद मनाने वालों की छत निचे कतारें खड़ी रहती हर दम.!!

5. ज़िन्दगी चखते इससे पहले ही जुबां का जाइका बदल गया.!
खट्टी थी या मिठ्ठी समझ पाते “सागर” दिल-ए-तार टूट गया.!!

6.ज़िन्दगी बहुत कुछ सिखा देती अभी देख आगे होता है क्या.!
कमसिन उम्र है उम्र के अगले पड़ाव तज़ुर्बा मिलता है क्या.!!

7.बेगानों की इस बस्ती में अपने कहाँ हैं अब “सागर“।!
ज़माना गुज़रा राह चलते भी हाल पूछ लिया करते थे।!

8.गर चेहरा पढ़ने का मौका दे तेरे दिल का हाल भी जान सकता हूँ.!
इतनी मुहब्बत करूँगा तुझ से तेरी सांसों से हाल जान सकता हूँ.!!

9. चाँद जब फल्क़ पे निकले दीवानों आस बढ़ आती है।!
वो भी आती होगी”सागर“यारों की चाहा बढ़ जाती है।!

10. यूँ रुक रुक मिलोगे तो कैसे उल्फत परवान चढ़ेगी.!
उफनती नदी नहीं “सागर” है कैसे संभालोगे सोचो.!!

11. गर खुद में ही इंसानियत रखें “सागर
दूजों को नसीहत की ज़रूरत न होगी

12. तुम होते तो ये होता,
तुम होती तो वो होता.!
ज़िन्दगी कश्मकश है,
जो होते कुछ न होता.!!

13. बड़ी कम्बखत हो

बिन बताये बिन सुनाये सोने को चली जाती हो तुम
कभी सोचती तो दीवाने “सागर” का हाल क्या है.!
निगाहों में हो सांसों में हो धड़कन हो दिल की तुम,
जब सब कुछ हो तुम सोचो पास बचता क्या है.!!

14. दर्द सो रहा और दवा की फिक़्क़र किसे.!
सागर“परवाने तो बस यूँ ही जला करते.!!

15. शम्याने में आ जाते तो यूँ भीगते न तुम
गर्म पिगलती सांसें न लेते फिर तुम.!
बारिश का जान-ए-जहाँ अपना ही मज़ा,
लुत्फ़-ए-मौसम फिर उठाते तुम.!!

16. क्या खूब वफाओं का अब ज़माना आया”सागर“.!
मेहबूब आते घर खुद को किरायेदार समझ.!!

17. मुहब्बत का दर्द है “सागर” इतनी जल्दी न जाएगा.!
जान निकलेगी न जब तक तब तक न रुक पायेगा.!!

18. जब तल्क है जान ख्वाहिशों का अंत न होगा.!

इधर दम निकला उधर हर ख्वाहिश हुई पूरी.!! 

19. सब जानते उल्फत की परेशानियां फिर भी./
जाने लोग मुहब्बत क्यों किया करते”सागर“.//

20. न वक़्त अपना ख़राब कर बेवफओं से कैसी शिकायत.!
मुहब्बत करने वाले हर हाल माशूक़ का साथ न छोड़ते.!! 

21. यही जीने का इखलाख”सागर“उसकी रज़ा में खुश रहो.!
जो भी दिया बहुत खूब दिया रब्ब का शुक्रिया अदा करो.!! 

 

 

 

 

 

About Dilkash Shayari

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Posted on June 7, 2019, in लम्हें. Bookmark the permalink. 1 Comment.

  1. 21 कदम हमारे बारे में सोचने में सक्षम होने के लिए। आपने एक उत्कृष्ट प्रकाशन बनाया है।

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