आवारा न बना.!!


अपनी आवारगी से हमें दीवाना न बना.!
बड़ा पछताएगी हमें आवारा न बना.!!
अपनी आवारगी से…

नहीं राह चलते किसीको छेड़ने का शौक.!
फल्क़ से भटका हुआ सितारा न बना.!!
अपनी आवारगी से…

आइना देखूं तेरी ही तस्वीर नज़र आती.!
खुदको इन आँखों का नज़ारा न बना.!!
अपनी आवारगी से…

बहुत शौक है न तुझे बर्बाद करने का.!
रूह को यादों का सहारा न बना.!!
अपनी आवारगी से…

रातों को जागना न सोना न सोने देना.!
खुदको मुहब्बत का इशारा न बना.!!
अपनी आवारगी से…

मान जा गर मुहब्बत है इक़रार कर.!
दुनियां में यारों को बेसहारा न बना //
अपनी आवारगी से…

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About Dilkash Shayari

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Posted on February 18, 2019, in Ghazals Zone, Shayari Khumar -e- Ishq. Bookmark the permalink. 2 Comments.

  1. दुनियां में यारों को बेसहारा न बना //
    अपनी आवारगी से…एक अच्छी कविता के लिए सबसे अच्छा अंत। हमें सबक सीखना होगा।

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  2. Shukriya Janab
    Aap ne padha aur apne vichaar diye…
    Thanks a lot Sir.

    Liked by 1 person

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