यलगार.!!


Instantly (Online) लिखी गई ग़ज़ल पेश है :-

 

यार का यार यार नहीं,
रकीब होता है./
ढूंढ़ता रहता है कमियां,
क्या शरीफ होता है.//

सही रास्ता न दिखा,
दोनों को करता है दूर./
वक़्त सिखाता बेशक,
कुछ पल करीब होता है.//

मन में डाल दरार रखे,
जो दूजे को दूर./
वो शक्श दिल का ही,
बड़ा गरीब होता है.//

जियो और जीने दो,
सब को साथ ले चलो./
ऐसी सोच वाला ही,
दिल के करीब होता है.//

हदें ना पार कर और,
न करने दे “सागर“./
शायर है यार तू तो,
शायर फ़कीर होता है.//

8.jpg

शायरी वो जो पढ़ने वाला उसे खुद में महसूस करे./
कहे यार-दोस्तों को देखो मुझ पर ही तो लिखा है.//

About Dilkash Shayari

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Posted on June 5, 2018, in Ghazals Zone and tagged . Bookmark the permalink. 6 Comments.

  1. शुक्रिया प्रतिमा जी

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  2. बेहतरीन नक्काशी अल्फाजो की

    Liked by 1 person

  3. तह दिल से शुक्रिया नागेश्वर जी…

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