Please Think It…


 

ये कैसी बेबसी है “सागर“,
बहुत कुछ चाहा पर कुछ नहीं कर सकता.!
कुछ दिन की बागवानी दिला,
दिखाऊं दुनियां को क्या-क्या हूँ कर सकता.!!

अर्ज है:-

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वो कहते हैं खुद को वतन के प्रहरी,
ज़रा सा वक़्त मिलता लूटने से गुरेज़ ना करते.!
ये कैसी विडम्बना है”सागर“फिर भी,
इन्हें ही बार-बार चुन अपनी संसद हैं भेजते.!!

पढ़ते-पढ़ते यारो बचपन गुज़र गया,
ईमान की खाओ तो ज़न्नत नसीब होगी ज़रूर.!
इसी चाहत ज़िन्दगी आम की गुज़रती,
इन कोहिनूरों के आगे ज़न्नत भी हुई है मजबूर.!!

मजहब-जाति से न बांटों भाइयों को,
कुर्सी खातिर फ़िज़ाओं में नफरत न फैलाओ.!
सब माफिक दुनियां से कूच करोगे,
आने वाली नस्लों को अमन पैगाम दे जाओ.!!

ऐसा हो कैसा हो सपनों का भारत,
सरहद पर लड़ने वाले वीरों से ज़रा सीखो.!
गर ज़रा भी शर्म बची है तो उठो,
बगिया मेहनत और अपने खून से सींचो.!!

About Dilkash Shayari

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Posted on February 19, 2018, in Nagama-e-Dil Shayari, Shayari-e-Dard, Thought of the Day. Bookmark the permalink. 2 Comments.

  1. Great post dear, thank you for sharing
    Kisses

    Liked by 1 person

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