मुहब्बत में हिन्दू- मुसलमान नहीं होता.!!


ना धर्म से वास्ता ना जाति का बंधन,
मुहब्बत में हिन्दू- मुसलमान नहीं होता.!
ना ईसाई ना सिख ना जैनी ना और,
मुहब्बत में रिश्ता इंसानियत का होता.!!
ना धर्म से वास्ता ना जाति का बंधन…

क्यों करते फसाद वफ़ा करने वालों पर लोग.!
मुहब्बत में ईश्वर का  बस इक नाम ही होता.!!
ना धर्म से वास्ता ना जाति का बंधन…

मिट्टी की है ईंट किन-किन हाथों हो गुज़रेगी.!
जिस धर्म स्थल लगी नया नाम है मिल जाता.!!
ना धर्म से वास्ता ना जाति का बंधन…

हाड-मांस का पुतला कोई नाम ना दो मुझको.!
जिस कर्म को करता उस नाम  पुकारा जाता.!!
ना धर्म से वास्ता ना जाति का बंधन…

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Posted on December 9, 2017, in Nagama-e-Dil Shayari. Bookmark the permalink. 4 Comments.

  1. Sadly there seem to be very few takers for these thoughts right now in our country.

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  2. Thanks for your golden words.

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  3. शानदार।।बहुत खूब लिखा है।।👌👌👌

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  4. Shukriya Madhusudan ji.

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