वो पीला सूट…


हाँ तुम्हें तंग करते हैं,
तुम्हारी तरह नहीं फिर भी.!
रात ख्वाबों चैन चुरा,
तुम्हारे तरह तंग नहीं करते.!!

फ़िरोज़ाबाद की गलियों की ख़ाक छान जो बन पड़ी वो ग़ज़ल

अर्ज़ है:-

वो पीला सूट.jpg

मुद्दत से तमन्ना है तुझ संग रूबरू हो बात करने की.!
तेरा-मेरा बेवक़्त आना-जाना कसक दिलमें छोड़ देता.!!

कभी तो वक़्त निकाल हाल-ए-दिल सुन-सुना अपना.!
कम्बखत तेरा इंतज़ार कोई और ख्याल आने नहीं देता.!!

जिक्र्र  किया  बार  किया अपनी शायरी में तेरा.!
शर्म-औ-हया है जो होंठों पर इक़रार आने नहीं देता.!!

जान कर भी अनजान क्यों हुए बैठी है जान-ए-जहाँ.!
कोई और हसीन हुस्न आँखों में आने नहीं देता.!!

कहने को बहुत कुछ है पर पास है महज़ एक तस्वीर.!

क्यों वो पीला सूट”सागर“को कोई रंग भाने नहीं देता.!!

Published
10/17/2017

About Dilkash Shayari

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Posted on October 17, 2017, in Ghazals Zone. Bookmark the permalink. 9 Comments.

  1. Thanks G. I’m happy that you enjoyed it!

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  2. bahot khub

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  3. Peele suit ki baat he alag lagti Hai Sagar ji..Jo itne acche words Peele suit pe he bne Hain. Hahaha v v nice

    Liked by 1 person

  4. Ji bilkul sahi..keep writing !!

    Liked by 1 person

  5. Phir se Shukriya.Why not…Deepti-G.

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