Be Great…(लाजवाब हो…)


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यौवन की मद-मस्ती पर यूँ ना इतरा,
खुदा ने गर दिया संभाल ज़रा.!
यहाँ भँवरे फिरते हर गली चौराहे पर,
बाद में पछताने से बच ज़रा.!!
गदराई जवानी और सावन का महीना,
बारिश जिस्म ना भिगा ज़रा.!
सरे शहर बदनाम हो जायेगी सोहनिए,
यारों के क़त्ल ना कर ज़रा.!!
इस दिल की भी बन आती समझ यारा,
उठे कोई तुझ पे नज़र ज़रा.!
कैसे समझाऊँ दुनियां को ना देखे तुझे,
सागर“नहीं तुझ बिन ज़रा.!!

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About Dilkash Shayari

"Everyone Thinks Changing The World,But No One Thinks Of Changing Himself" I'm Advocate(Lawyer) Writer&Poet BHOPAL All Copyrights Are Reserved.(Under Copyright Act) Please Do Not Copy Without My Permission.

Posted on May 24, 2017, in Ghazals Zone. Bookmark the permalink. 12 Comments.

  1. शायरी तो अच्छा है। पर शब्दों का चुनाव समझ के कीजिए नहीं तो विहारी की कविता की कटेगरी में आ जाएगी। जिसकी आलोचना भी हो सकता है।

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  2. आलोचना करना व्यक्ति का अधिकार है किन्तु इसका ये मतलब नहीं
    जो किसी को बुरा लगे या समझ न आये दूसरे के साथ भी ऐसा ही हो?
    कुछ लोग पैदा ही आलोचना करने हेतु होते हैं…?
    अपने को ही श्रेष्ठ सझते हैं किंतु वास्तव में वो ऐसे होते नहीं हैं!
    “जा की जैसी समझ वैसी ही सोच”
    गन्दा सोचेंगे तो अमृत भी गलत लगेगा…?
    चाँद पर बेशक दाग होता है किन्तु दीवाने फिर भी आज तक अपने
    मेहबूब की तुलना चाँद से करते हैं….?
    समालोचना-आलोचना से कोई फर्क नहीं पड़ता जब आप सही हैं तो सही हैं….?
    नियम-कायदे में रह कार्य करने वाले अपनी राह खुद ही चुनते हैं…?
    किसी की आलोचना से नहीं डरते?

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  3. बुरा मत मानिए यदि कुछ बुरा लगता गया है तो माफ कीजिएगा। मैं भी मानती हूं – जा की रही भावना जैसी प्रभु मूर्ति देखी तिन्ह तैसी। लेकिन यह भी किसी ने सही कहा है। निंन्दक नियरे राखिये आंगन कुटि छवाय। इस धारणा से आलोचक भी बुरे नहीं होते हैं।

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  4. आलोचक बुरे नहीं होते सही है किन्तु ज़बरदस्ती आलोचना करने वाले
    किसी भी सभ्य समाज में बधाई के पात्र भी नहीं होते…?

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  5. सभ्य समाज की बात करेगें तो कवियत्री मैं भी हूँ कुछ लिख सकती। हूँ मैं प्रशंसक में से हूं आप भी मरे ब्लॉग को फॉलो करते हैं और प्रशंसक भी इस लिए अपना समझकर सुझाव दिया है यदि फिर भी आपको बुरा लगा तो हाथ जोड़कर माफी चाहती हूँ। बडा या छोटा समझ के माफ कर दीजिएगा।

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  6. कवित्री होकर भी सोच इतनी अच्छी…?
    तारीफ़ के क़ाबिल है…?

    “क़त्ल करने के बाद लाख मिन्नतें खुदा से की,
    बच जाए बच जाए.!
    गुज़रा वक़्त’सागर’लौट आता नहीं बेशक कहें,
    माफ़ कर दिया जाए.!! “

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  7. apka blog bahut hi khubsurat rangila or dilchasp hai maza aayega bahut

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  8. आपसे बेहतर नहीं दानिश जी

    Aameen.

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  9. wow beautiful one, thank you for sharing dear
    kisses

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  10. Thank You Ma’am.Have a Nice weekend

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Comments/विचार

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