Without You…


कहते हैं इश्क़ इंसान को शायर बना देता है,
तन्हाई-तपिश और दीवानगी ही जो सर चढ़
बोलती है!
दिल का दर्द जब काग़ज़ पर लफ्ज़ बन बिखरता
है अच्छे-अच्छे घायल हो जाते हैं और अपने को
उसमें तलाशते हैं?
ज़्यादातर रचनायें / शायरी ऑनलाइन ( Instantly ) तव्रित लिखी
जा रही हैं शब्दों में ग़लती होना लाज़िम है,खेद है!

अर्ज़ है:-744e6e1ae5ed21cae9884cc5a47b88a7_we_zpsxdox8bs5

तुझसे बिछड़ कर बिखर जाऊँगा मैं.!
तेरे  बिन  बता  कैसे जी पाऊँगा मैं.!

कोई ख्वाब ऐसा नहीं शामिल ना हो.!
कैसे अपनी दुनियाँ बसा पाऊँगा मैं.!!

साथ ना छोड़ने का वादा किया था.!
वो तेरा वादा कैसे भुला पाऊँगा मैं.!!

भौर की लाली निकलती तेरे नाम से.!
शाम होते-होते तन्हा हो जाऊँगा मैं.!!

मेरी शायरी  में  तेरी महकती साँसें.!
किसी गैर पे कैसे लिख पाऊँगा मैं.!!

अपने’सागर‘से यूँ ना खफा हो सनम.!
वरना वक़्त से  पहले मर जाऊँगा मैं.!!

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About Advo. R.R.'SAGAR'

"Everyone Thinks Changing The World,But No One Thinks Of Changing Himself" I'm Advocate(Lawyer) Writer&Poet All Copyrights Are Reserved.(Under Copyright Act) Please Do Not Copy Without My Permission. @R.R'Sagar' (ADVOCATE)

Posted on September 21, 2016, in Ghazals Zone. Bookmark the permalink. Leave a comment.

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