Shatter Dreams …


एक वक़्त था जब मुहब्बत पर बड़ा यक़ीन  होता था पर आज महज़
धोखा-फरेब नज़र  आता  है जाने क्यूँ?
सब बेकार की बातें लगती हैं?उनका आना उनका जाना,सपनें वादे
सब पर से यक़ीन उठ गया है जाने क्यूँ?
जब दर्द दिल का बढ़ जाता है क़लम उठ कर लफ्ज़ बन काग़ज़ पर
बिखर जाते हैं!
अर्ज़ है:-
ssemras2

किताबों में जो लिखी है मुहब्बत हरदम वैसी नहीं होती.!
सच है यारो मुहब्बत कभी इतनी भी खूबसूरत नहीं होती.!!

कदम-दर-कदम मिलते बंधन नफ़रत ज़ुल्म-ओ-सितम.!
धड़कते दिलों की मंज़िल आसान राहों से हो नहीं गुज़रती.!!

प्यार लैला ने किया मजनू ने शीरी-फरहाद हमनें-तुमनें.!
पर आज मुहब्बत में पहले-सी वफ़ा-शराफ़त नहीं होती.!!-

मंज़िल की तलाश में परिंदे फल्क पर यहाँ-वहाँ  भटकते.!
हर पंछी  को  कभी भी यहाँ मनचाही परवाज़ नहीं मिलती.!!

इक महज़बीन हसीना से कभी प्यार किया था’सागर‘ने.!
सपनों में तो मिलती हक़ीक़त में कभी रूबरू नहीं होती.!!

 

dreams.jpg

 

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About Dilkash Shayari

"Everyone Thinks Changing The World,But No One Thinks Of Changing Himself" I'm Advocate(Lawyer) Writer&Poet All Copyrights Are Reserved.(Under Copyright Act) Please Do Not Copy Without My Permission.

Posted on August 18, 2016, in Ghazals Zone. Bookmark the permalink. 8 Comments.

  1. Beautiful Sagarji once again a lovely post ,

    Liked by 1 person

  2. kabhi kisi ko mukammil jahaan nahi milta.ummid hoti he jahaan pe vahaan nahi milta….

    Like

  3. True…जब दर्द दिल का बढ़ जाता है तब कलम बन लफ्ज़ कागज़ पर बिखर जाते हैं।

    Liked by 1 person

  4. सही लिखा आपने मीनाक्षी जी.
    सबके साथ ऐसा ही होता है!
    आपने पढ़ा विचार दिए तह दिल से शुक्रिया!

    Liked by 1 person

Comments/विचार

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