फर्श से अर्श.!!


नहीं पता कि आपकी क्या सौच है परन्तू यहाँ तो ऐसे लोगों से सखत चिढ़ है जिन्हें बात करने की तहज़ीब नहीं होती! अपने से छोटों से भी जो तू-तड़ाका कर बात करते हैं
कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो ‘सर-सर‘ कर बात करते हैं उसके बाद अपनी औकात पर आ जाते हैं?उनसे सखत नफ़रत है!

माना आपकी ज़ुबान है चाहे जैसा भी ईस्तमाल कीजिए परन्तू ये ना भूलें इंसान को ‘फर्श से अर्श‘ यही ज़ुबान और आपकी मेहनत पहुँचाती है?
अर्ज़ है:-g

आपको  इज़्ज़त  कितनी  किसी की एक जुमला ही काफ़ी      है समझने के लिए.!
मुहब्बत के फ्ल्सफान लिख-लिख क्या होगा गर ज़रा भी वफ़ा दिल में ना हो.!!

bjo

Aap  Ko  Izzat  Kinati  Kisi  Ki  Ek  Zumala  Hi  Kaafi Hai  Samjhane Ke Liye.!

Muhabbat Ke Flsfan Likh-Likh Kya Hoga Gar Zra Bhi Wafa Dil Mein Na Ho.!!

Posted on April 23, 2016, in Thought of the Day. Bookmark the permalink. 1 Comment.

  1. माया तेरे तीन नाम,
    परसु
    परसा ,
    परसुराम !!

    हैसिअत देख के इज्ज़त देती है दुनिया जनाब !

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Comments/विचार

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